(14)Destruction is approaching. What will be the signs of its arrival?

प्रश्न का मंथन:-(14)विनाश नजदीक आ रहा है। उसकी निशानियां क्या होंगी?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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भूमिका : विनाश क्यों और कैसे?

विनाश कोई अचानक होने वाली दुर्घटना नहीं है।
बाबा बताते हैं – हर बड़े परिवर्तन से पहले स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं।
जैसे सूर्योदय से पहले अंधकार धीरे-धीरे हल्का होता है, वैसे ही विनाश से पहले आत्माओं की चेतना बदलती है।


 निशानी 1 : सबको परमात्मा का परिचय मिलना

विनाश से पहले हर आत्मा को किसी न किसी रूप में बाबा का परिचय मिलेगा।
भाषा, धर्म, देश अलग हो सकते हैं, लेकिन अनुभूति एक होगी –
“कोई असाधारण शक्ति धरती पर आई है।”

उदाहरण:
जैसे परीक्षा के समय अचानक याद आता है कि पढ़ाई जरूरी है,
वैसे ही अंत समय में आत्मा को याद आएगा – “मेरा बाबा आया हुआ है।”


 निशानी 2 : नई दुनिया की स्थापना का बोध

बहुतों को यह स्पष्ट होने लगेगा कि
पुरानी दुनिया समाप्त हो रही है
नई दुनिया आने वाली है

बीके आत्माएँ इसे ज्ञान से समझेंगी,
और जो ज्ञान में नहीं हैं, वे इसे डूम्स-डे कहेंगे।


 निशानी 3 : साक्षात्कार और अंतर अनुभूति

साक्षात्कार का अर्थ सिर्फ दृश्य देखना नहीं,
बल्कि अंदर से समझ आ जाना।

प्रकृति और समय मिलकर आत्माओं को जगाएंगे –
भूकंप, बाढ़, तूफान आत्मा को झकझोर देंगे।

उदाहरण:
जैसे अंतिम परीक्षा से पहले अचानक गंभीरता आ जाती है।


 निशानी 4 : सन्यासियों, राजाओं व प्रभावशाली आत्माओं का ज्ञान की ओर आना

जो पहले ज्ञान को नहीं समझते थे,
वे स्वयं खोजते हुए आएंगे।

आज यूट्यूब, सोशल मीडिया, डिजिटल साधन –
ईश्वरीय ज्ञान का माध्यम बन रहे हैं।


 निशानी 5 : मीडिया द्वारा संदेश का फैलना

अखबार, टीवी, सोशल मीडिया –
किसी न किसी रूप में संदेश जाएगा –
“ईश्वर का कार्य चल रहा है।”


 निशानी 6 : ब्राह्मण आत्माओं का आत्म-अभिमानी बनना

यह सबसे शुद्ध और सटीक निशानी है।

  • परिवार से वैराग्य

  • एक बाप की याद

  • अतीन्द्रिय सुख

  • सहज पवित्रता

  • स्वदर्शन चक्र का निरंतर चलना


 निशानी 7 : मानव मन की शक्ति का गिरना

छोटी बातों पर क्रोध,
असहिष्णुता,
डिप्रेशन,
मानसिक असंतुलन।

अस्थिर मन = अस्थिर दुनिया


 निशानी 8 : प्रकृति का असंतुलन

जहाँ बारिश नहीं होती – वहाँ बाढ़
जहाँ होती थी – वहाँ सूखा

उदाहरण:
जैसे पानी उबलने से पहले बुलबुले उठते हैं,
वैसे ही प्रकृति विनाश से पहले संकेत देती है।


 निशानी 9 : धर्मों की नींव हिलना

लोग पूछने लगेंगे –
 सत्य क्या है?
 भगवान कहाँ है?

झूठे मत समाप्त होंगे,
सत्य का उदय होगा।


 निशानी 10 : विज्ञान अपनी चरम सीमा पर पहुँचकर असफल

AI, ड्रोन, साइबर युद्ध –
विज्ञान सुविधा भी देगा और विनाश का साधन भी बनेगा।


 निशानी 11 : युद्ध और वैश्विक तनाव

जल युद्ध, तेल युद्ध, आर्थिक युद्ध।
धन होते हुए भी उपयोग न कर पाना।


 निशानी 12 : नैतिक मूल्यों का पतन

रिश्तों में विश्वास की कमी,
लालच, वासना, क्रोध।

उदाहरण:
जैसे अंदर से खोखला पेड़ गिर जाता है।


 निशानी 13 : ब्राह्मण जीवन की विशेषता

  • योग की शक्ति में वृद्धि

  • सेवा में तीव्रता

  • कर्म बंधन कटना

  • रूहानी शांति का अनुभव


 निशानी 14 : बाबा का स्पष्ट संकेत

“बच्चे, विनाश सामने खड़ा है।”
विनाश अचानक नहीं आता,
पहले चेतावनी देता है।


 मुरली प्रमाण (Proper Dates)

  • साकार मुरली – 15 मार्च 1970
    “दुनिया बनती नहीं है, बदलती है।”

  • अव्यक्त मुरली – 18 जनवरी 1970
    “मैं रचना नहीं करता।”

  • साकार मुरली – 3 जनवरी 1965
    “शिव बाबा ब्रह्मा द्वारा नवीनीकरण करते हैं।”


 निष्कर्ष : विनाश भय नहीं, नया आरंभ है

विनाश = समाप्ति नहीं
विनाश = नई दुनिया का जन्म

जैसे कली खिलने से पहले पुराना आवरण टूटता है,
वैसे ही
कलयुग समाप्त होगा
सतयुग का शुभ आरंभ होगा

डरने का नहीं, जागने का समय है।

प्रश्न 1: विनाश क्यों और कैसे आता है?

उत्तर:
विनाश कोई अचानक होने वाली दुर्घटना नहीं है।
बाबा बताते हैं – हर बड़े परिवर्तन से पहले स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं।
जैसे सूर्योदय से पहले अंधकार धीरे-धीरे हल्का होता है, वैसे ही विनाश से पहले आत्माओं की चेतना बदलती है।


 प्रश्न 2: निशानी 1 – सबको परमात्मा का परिचय मिलना का अर्थ क्या है?

उत्तर:
विनाश से पहले हर आत्मा को किसी न किसी रूप में बाबा का परिचय मिलेगा।
भाषा, धर्म, देश अलग हो सकते हैं, लेकिन अनुभव एक होगा –
“कोई असाधारण शक्ति धरती पर आई है।”

उदाहरण:
जैसे परीक्षा से पहले याद आता है कि पढ़ाई जरूरी है, वैसे ही अंत समय में आत्मा को याद आएगा – “मेरा बाबा आया हुआ है।”


 प्रश्न 3: निशानी 2 – नई दुनिया की स्थापना का बोध क्या है?

उत्तर:
बहुतों को यह स्पष्ट होने लगेगा कि पुरानी दुनिया समाप्त हो रही है और नई दुनिया आने वाली है।
बीके आत्माएँ इसे ज्ञान से समझेंगी, और जो ज्ञान में नहीं हैं, वे इसे डूम्स-डे कहेंगे।


 प्रश्न 4: निशानी 3 – साक्षात्कार और अंतर अनुभूति क्या है?

उत्तर:
साक्षात्कार का अर्थ सिर्फ दृश्य देखना नहीं, बल्कि अंदर से समझना है।
प्रकृति और समय मिलकर आत्माओं को जगाएंगे – भूकंप, बाढ़, तूफान आत्मा को झकझोर देंगे।

उदाहरण:
जैसे अंतिम परीक्षा से पहले अचानक गंभीरता महसूस होती है।


 प्रश्न 5: निशानी 4 – सन्यासियों, राजाओं और प्रभावशाली आत्माओं का ज्ञान की ओर आना?

उत्तर:
जो पहले ज्ञान को नहीं समझते थे, वे स्वयं खोजते हुए आएंगे।
आज यूट्यूब, सोशल मीडिया और डिजिटल साधन ईश्वरीय ज्ञान का माध्यम बन रहे हैं।


 प्रश्न 6: निशानी 5 – मीडिया द्वारा संदेश फैलना कैसे होगा?

उत्तर:
अखबार, टीवी, सोशल मीडिया – सभी जगह संदेश जाएगा कि ईश्वर का कार्य चल रहा है।


 प्रश्न 7: निशानी 6 – ब्राह्मण आत्माओं का आत्म-अभिमानी बनना क्या है?

उत्तर:
यह सबसे शुद्ध और सटीक निशानी है।

  • परिवार से वैराग्य

  • एक बाप की याद

  • अतीन्द्रिय सुख

  • सहज पवित्रता

  • स्वदर्शन चक्र का निरंतर चलना


 प्रश्न 8: निशानी 7 – मानव मन की शक्ति का गिरना कैसे दिखेगा?

उत्तर:
छोटी बातों पर क्रोध, असहिष्णुता, डिप्रेशन और मानसिक असंतुलन।
अस्थिर मन = अस्थिर दुनिया।


 प्रश्न 9: निशानी 8 – प्रकृति का असंतुलन कैसे आएगा?

उत्तर:
जहाँ बारिश नहीं होती वहाँ बाढ़, जहाँ होती थी वहाँ सूखा।
उदाहरण: जैसे पानी उबलने से पहले बुलबुले उठते हैं, वैसे ही विनाश से पहले प्रकृति संकेत देती है।


 प्रश्न 10: निशानी 9 – धर्मों की नींव हिलना क्या दर्शाता है?

उत्तर:
लोग पूछने लगेंगे – सत्य क्या है? भगवान कहाँ हैं?
झूठे धर्म समाप्त होंगे, सच्चा धर्म उदित होगा।


 प्रश्न 11: निशानी 10 – विज्ञान की असफलता का अर्थ?

उत्तर:
AI, ड्रोन, साइबर युद्ध – विज्ञान सुविधा भी देगा और विनाश का साधन भी बनेगा।


 प्रश्न 12: निशानी 11 – युद्ध और वैश्विक तनाव कैसे दिखेंगे?

उत्तर:
जल युद्ध, तेल युद्ध, आर्थिक संघर्ष।
धन होते हुए भी उपयोग में न आना।


 प्रश्न 13: निशानी 12 – नैतिक मूल्यों का पतन?

उत्तर:
रिश्तों में विश्वास की कमी, लालच, वासना, क्रोध।
उदाहरण: जैसे अंदर से खोखला पेड़ गिर जाता है।


 प्रश्न 14: निशानी 13 – ब्राह्मण जीवन की विशेषता क्या होगी?

उत्तर:

  • योग की शक्ति में वृद्धि

  • सेवा में तीव्रता

  • कर्म बंधन कटना

  • रूहानी शांति का अनुभव


 प्रश्न 15: निशानी 14 – बाबा का स्पष्ट संकेत?

उत्तर:
“बच्चे, विनाश सामने खड़ा है।”
विनाश अचानक नहीं आता, पहले चेतावनी देता है।


 मुरली प्रमाण

  • साकार मुरली – 15 मार्च 1970 : “दुनिया बनती नहीं है, बदलती है।”

  • अव्यक्त मुरली – 18 जनवरी 1970 : “मैं रचना नहीं करता।”

  • साकार मुरली – 3 जनवरी 1965 : “शिव बाबा ब्रह्मा द्वारा नवीनीकरण करते हैं।”


 निष्कर्ष

विनाश भय नहीं, नया आरंभ है।
जैसे कली खिलने से पहले पुराना आवरण टूटता है, वैसे ही

  • कलयुग समाप्त होगा

  • सतयुग का शुभ आरंभ होगा

डरने का नहीं, जागने का समय है। ओम शांति।

Disclaimer (अस्वीकरण)

यह वीडियो/लेख ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुरलियों एवं आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित है।
इसका उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति, आत्म-परिवर्तन और सकारात्मक तैयारी कराना है।
यह किसी भी प्रकार की भविष्यवाणी, अफवाह या वैज्ञानिक दावा नहीं है।
सभी दर्शक इसे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझें।

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