PR:-(05)प्रकृति के असंतुलन का आध्यात्मिक कारण क्या है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
परमात्मा क्या कहते हैं?
इसका आज हम पांचवा विषय करेंगे —
प्रकृति के असंतुलन का आध्यात्मिक कारण क्या है?
यह जो प्रकृति बनी हुई है, इसके अंदर बैलेंस नहीं है। इसके बैलेंस होने का आध्यात्मिक कारण क्या है? किस आधार पर यह संसार बैलेंस होकर चलता है?
आज भारत हो या दुनिया, आम दुनिया की नजर से प्रकृति पागल हो गई है।
कहते हैं — पता नहीं बाढ़ आ रही है, भूकंप आ रहे हैं, तूफान आ रहे हैं। यह नेचर पागल हो गई है।
सब हैरान हैं — क्या हो रहा है यह? पता ही नहीं लगता कहां से क्या हो जाता है।
अब यह तूफान आया और लंका को तबाह कर दिया।
प्रकृति के बारे में लोग सोचते हैं — ‘इसको क्या हो गया?’
हम जैसे लोग बदल गए हैं, प्रकृति का भी वैसे ही हाल है।
सारे कहते हैं — प्रकृति पागल हो गई है।
जहां बाढ़ नहीं आती थी, वहां आज बरसात ही नहीं होती।
जहां बरसात नहीं होती थी, वहां बाढ़ आ जाती है।
आज भारत और दुनिया भर में आम व्यक्ति देख रहा है —
मौसम का चक्र बिगड़ गया।
जहां सर्दी होनी चाहिए वहां गर्मी।
जहां बारिश होनी चाहिए वहां सूखा।
जहां सूखा होना चाहिए वहां बाढ़।
राजस्थान में अब बाढ़ आ जाती है।
बहुत जगह जहां पहले बारिश होती थी अब बारिश नहीं होती।
क्लाइमेट चेंज हो गया है।
शहरों में गर्मी, प्रदूषण, जल संकट।
गांव में खेती की अनिश्चितता — पता नहीं बारिश होगी या नहीं, कौन सी फसल बोएं।
कई जगह टमाटर की फसल बारिश के कारण खत्म हो गई।
कभी कम बारिश, कभी बहुत ज्यादा।
बरसात अनियमित।
आपदाएं लगातार।
न्यूज़ की भाषा में — क्लाइमेट क्राइसिस, ग्लोबल वार्मिंग, जल युद्ध की आशंका।
ग्लेशियर पिघलेंगे तो समुद्र का लेवल बढ़ेगा और समुद्र किनारे वाले शहर डूब जाएंगे।
मुरली में भी कई बार बाबा ने मुंबई के डूबने का संकेत दिया है।
आज दुनिया को लगता है —
प्रकृति हमारे खिलाफ हो गई है।
धरती रहने लायक नहीं रही।
आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा?
मन में डर, गुस्सा और हताशा बढ़ती जा रही है।
कोई सरकार को दोष देता है…
कोई इंडस्ट्री को…
कोई जनता को…
लेकिन क्या प्रकृति अचानक खराब हो गई?
या मनुष्य के कर्मों और संकल्पों ने प्रकृति पर असर डाला?
आज का विषय —
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आम दुनिया प्रकृति संकट को कैसे देखती है?
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परमात्मा इसे कैसे देखते हैं?
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बी.के. ज्ञान के अनुसार सही दृष्टिकोण क्या होना चाहिए?
आम दुनिया की नजर में —
भारत और दुनिया में
• गर्मी 50 डिग्री तक पहुंच गई।
• अनियमित बारिश, बाढ़, तूफान, भूकंप।
• जल संकट — भविष्य में पानी के लिए युद्ध।
• प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।
• ग्लेशियर पिघल रहे हैं।
• खेती प्रभावित।
• लोगों में डर — आगे क्या होगा?
वैज्ञानिक कहते हैं —
क्लाइमेट चेंज, प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग।
लोग कहते हैं —
मनुष्य ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाया, इसलिए प्रकृति बदला ले रही है।
परंतु परमात्मा क्या कहते हैं?
परमात्मा इसे सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं मानते।
बल्कि मानव आत्मा और प्रकृति — इन दोनों के गहरे संबंध का परिणाम बताते हैं।
मुरली में बाबा कहते हैं —
प्रकृति पाँच तत्वों की आत्मा है, सेवा करने वाली साथी है।
“मैं आकर तुम आत्माओं को पवित्र बनने की विधि सिखाता हूँ।
तुम तपस्या करते हो, पवित्र बनते हो…
तुम्हारे पवित्र संकल्पों के आधार पर प्रकृति भी सतो-प्रधान बनती है।”
सतो-प्रधान आत्मा के संपर्क में आने से प्रकृति भी पवित्र होती है।
अशुद्ध संकल्पों से प्रकृति भी दुखी होती है।
मुरली प्रमाण:
12 जून 2023 मुरली:
“प्रकृति मनुष्य के कर्मों का दर्पण है।
मनुष्य तमो-प्रधान होगा तो प्रकृति भी तमो-प्रधान हो जाएगी।
मनुष्य सतो-प्रधान होगा तो प्रकृति भी सतो-प्रधान हो जाएगी।”
18 फरवरी मुरली:
“प्रकृति रो रही है।
क्यों?
क्योंकि मनुष्य के संकल्प भारी और अशुद्ध हो गए हैं।”
7 अगस्त 2021 मुरली:
“परिवर्तन का समय है।
पुरानी प्रकृति टूटेगी, तभी नई दुनिया बनेगी।”
परमात्मा की दृष्टि — प्रकृति नाराज़ नहीं, थकी हुई है
प्रकृति गुस्सा नहीं कर रही।
वो थक चुकी है।
मानव के विकार, हिंसा, लालच, तनाव — प्रकृति पर ऊर्जा का बोझ डालते हैं।
यह समय सृष्टि परिवर्तन का है।
पुराना समाप्त होगा, नया प्रकट होगा।
बी.के. दृष्टिकोण — प्रकृति संकट को कैसे देखें?
आत्मा + प्रकृति
शरीर पांच तत्वों से बना है —
आत्मा और प्रकृति दोनों जुड़े हुए साथी हैं।
जब आत्मा का स्वरूप बिगड़ता है —
संकल्प अशुद्ध होते हैं, कर्म अशुद्ध होते हैं —
तो प्रकृति भी असंतुलित हो जाती है।
जैसे घर में पिता बेचैन हो तो बच्चे भी बेचैन हो जाते हैं।
वैसे ही मानव आत्मा की अस्थिरता = प्रकृति का असंतुलन।
नेचर सजा नहीं देती — सिर्फ प्रतिक्रिया करती है
Nature reacts, not punishes.
प्रकृति सजा नहीं देती।
ऊर्जा का जवाब देती है।
• धुआँ दोगे → प्रदूषण मिलेगा
• क्रोध दोगे → तूफान मिलेगा
• लालच दोगे → संसाधन खत्म होंगे
• शांति दोगे → मौसम संतुलित हो जाएगा
योग से प्रकृति का पुनरुद्धार
मुरली: 24 अप्रैल 2023
“बच्चे, योग से तुम्हारी शक्तियाँ प्रकृति को सतो-प्रधान बनाती हैं।”
इसलिए ध्यान = प्रकृति की नैचुरल हीलिंग।
पवित्र संकल्प देंगे तो —
• क्लाइमेट बैलेंस होगा
• रिसोर्स रीजनरेट होंगे
• प्रकृति का संतुलन लौट आएगा
शांति का उपाय — प्रकृति के लिए योग
प्रकृति को शांति चाहिए।
आपकी पवित्रता, आपका योग, आपका संकल्प —
प्रकृति को दोबारा दिव्य बनाने की शक्ति है।

