2-1: Does the Supreme Soul also go through the cycle of birth and death like other souls?

J.D.BK ज्ञान 2-1 क्या परम आत्मा भी आत्मा की तरह जन्म मरण के चक्र में आता है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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जैन दर्शन
और ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान
दूसरा पार्ट है ये उसका पहला पार्ट

क्या परम आत्मा भी
आत्मा की तरह
जन्म मरण के चक्र में आता है

जैन भाई बहनों को
बेसिक कोर्स कराने के लिए जानकारी देने के लिए

क्या आत्मा भी परमात्मा भी आत्माओं की तरह
जन्म मरण के चक्र में आता है परमात्मा के
परिचय में हमने बताना है। डिस्क्लेमर है।
यह वीडियो ब्रह्मा कुमारीज द्वारा सिखाए
गए आध्यात्मिक ज्ञान पर आधारित जो श्रीमद्
भागवत गीता
एवं अव्यक्त साकार मुरलियों
के अध्ययन से प्रस्तुत किया गया है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म ग्रंथ या
मान्यता का खंडन करना नहीं
बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से
आत्मा
और परम आत्मा
आत्मा और परमात्मा के सत्य स्वरूप को
समझाना है।
मेन हमारा मकसद यह है।
यह ज्ञान व्यक्तिगत आत्मिक उन्नति और शांति
के लिए है।

आज का हमारा विषय बहुत मौलिक और बहुत
संवेदनशील और बहुत निर्णायक है।

क्या परमात्मा भी
आत्मा की तरह
जन्म मरण के चक्र में आता है?
क्या परम आत्मा भी आत्मा की तरह
जन्म मरण के चक्र में आता है?

क्योंकि
दुनिया में
अधिकतर लोग
यही मानते हैं।

क्या मानते हैं अधिकतर लोग?

भगवान भी जन्म लेते हैं।
परमात्मा ही जन्म लेते हैं।
भगवान किसी ना किसी देह में आते हैं।
भगवान भी कष्ट भोगते हैं।

लेकिन प्रश्न है —
अगर परमात्मा भी जन्म मरण के चक्कर में आए
फिर तो मुक्ति कौन देगा?
फिर मुक्ति देने वाला कौन?


आत्मा का सत्य स्वरूप

आत्मा का सत्य स्वरूप क्या है?
सबसे पहले समझते हैं — आत्मा कौन है?

साकार मुरली
18 जनवरी 1965 को
बाबा ने कहा —

तुम आत्मा हो।
यह शरीर तुम्हारा रथ है।

आत्मा के गुण —
आत्मा अविनाशी है।
आत्मा सूक्ष्म बिंदु स्वरूप है।
आत्मा जन्म मरण के चक्र में आती है।
आत्मा कर्म बंधन में बंधती है।

उदाहरण —
जैसे अभिनेता एक नाटक में
अलग-अलग वस्त्र पहनता है
अलग-अलग रोल करता है
वैसे ही आत्मा
एक शरीर छोड़ती है
दूसरा शरीर लेती है
यही है जन्म और मृत्यु।


परमात्मा का परिचय

अब प्रश्न उठता है —
अगर आत्मा जन्म लेती है
तो क्या परम आत्मा भी जन्म लेते हैं?

क्योंकि अक्सर कहा जाता है —
भगवान ने अवतार लिया
भगवान अवतरित हुए
परमधाम से आए
भगवान अमुक रूप में पैदा हुए

लेकिन क्या यह ज्ञान संगत है?
यह ज्ञान संगत नहीं है।

बीके ज्ञान के अनुसार —
साकार मुरली 2 अक्टूबर 1966

परमात्मा कभी जन्म मरण में नहीं आता।
जो जन्म मरण में आता है वह शिव परमात्मा नहीं।
परमात्मा सदा अकर्ता, अभोक्ता, अजन्मा है।

परमात्मा ज्ञान दाता है।
परमात्मा रास्ता दिखाने वाला है।
परमात्मा कराने वाला है, करता नहीं।


परमात्मा कौन है?

परमात्मा सुप्रीम सोल — आत्माओं का पिता
स्वयं कर्म बंधन से परे
सदैव पवित्र
पूर्ण शक्तिशाली

निवास स्थान — परमधाम, शांति धाम

निर्णायक बिंदु —
जो जन्म लेता है वह आत्मा है
जो जन्म नहीं लेता वही परमात्मा है


यदि परमात्मा भी जन्म लेता तो?

अगर परमात्मा भी जन्म लेता
तो कर्म करता
फल भोगता
बंधन में आता

और जो स्वयं बंधन में हो
वह दूसरों को मुक्त कैसे करेगा?

अव्यक्त मुरली 15 फरवरी 1973
बाप स्वयं बंधन में नहीं आता
इसलिए सबको बंधन से मुक्त करता है।


अवतार का सही अर्थ

दुनिया समझती है —
अवतार का अर्थ है देह धारण करना
गर्भ से जन्म लेना

लेकिन बीके अर्थ में —
अवतरण अर्थात परमधाम से
ज्ञान का अवतरण

साकार मुरली 30 नवंबर 1967
मैं जन्म नहीं लेता हूं।
मैं ब्रह्मा के तन में प्रवेश करता हूं।

ब्रह्मा बाबा परमात्मा का माध्यम बने
उनके तन से परमात्मा ने ज्ञान सुनाया।

जैसे बिजली घर से बिजली आती है
बल्ब माध्यम बनता है
वैसे ही शक्ति शिव से आती है
तन ब्रह्मा का माध्यम बनता है।


निष्कर्ष

आत्मा जन्म मरण में आती है
परंतु परमात्मा कभी जन्म मरण में नहीं आते

परमात्मा जन्म मरण से परे है
वही सच्चा मुक्ति दाता है
वही ज्ञान दाता है
वही पतित पावन है

साकार मुरली 18 जनवरी 1969
मैं ही आकर तुम्हें राजयोग सिखाता हूं।


समापन संदेश

अगर परमात्मा भी जन्म लेने लगे
तो दुनिया कभी मुक्त नहीं हो सकती
क्योंकि वही हमारी तरह फँस जाएगा

इसलिए —
परमात्मा अजन्मा है
और आत्मा जन्म लेने वाली है।