अव्यक्त मुरली-(08)22-01-1986 बापदादा की आशा।संपूर्ण और संपन्न बनो।
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अव्यक्त मुरली का विषय: बापदादा की आशा
(अव्यक्त मुरली – 8, 1986)
बापदादा आज बच्चों से केवल मुरली सुनाने नहीं आए हैं।
आज बापदादा आशा देखने आए हैं।
मुरली संकेत:
“संपूर्ण बनो, संपन्न बनो।”
यह केवल वाक्य नहीं,
बल्कि अंतिम लक्ष्य है।
उदाहरण:
जैसे विद्यार्थी सालों पढ़ते हैं,
लेकिन परीक्षा में परिणाम देखा जाता है —
वैसे ही बापदादा अब स्वरूप देखना चाहते हैं।
अध्याय 2
दूर देशवासी बच्चों की लगन और धैर्य
आज विशेष रूप से
दूर-देश में रहने वाले बच्चे
इतनी दूर से मिलने आए हैं।
बापदादा पूछते हैं —
इतनी दूर से किस लगन से आते हैं?
मुरली नोट:
-
दिल के मिलन की लगन
-
बाप से मिलने का धैर्य
बापदादा कहते हैं —
“मैं बच्चों की लगन को जानता हूँ।”
उदाहरण:
जैसे माँ बच्चे की प्रतीक्षा देख लेती है,
वैसे ही बापदादा
दूर बैठे बच्चों की धड़कन पहचान लेते हैं।
अध्याय 3
स्नेह और योग की शक्ति – रात-रात जागरण
बापदादा हर समय देखते हैं —
बच्चे कैसे
दृष्टि और वाइब्रेशन से
स्नेह और शक्ति कैच करते हैं।
मुरली संकेत:
-
योग में प्यार
-
योग में शक्ति
-
अनन्यपन
उदाहरण:
मोबाइल नेटवर्क दूर से भी जुड़ जाता है,
वैसे ही सच्चे योग से
आत्मा बाप से कनेक्ट हो जाती है।
अध्याय 4
अब सुनना नहीं, स्वरूप बनना
बापदादा स्पष्ट कहते हैं —
“मुरलियाँ तो बहुत सुनीं।”
अब बापदादा चाहते हैं —
-
श्रेष्ठ संकल्प
-
श्रेष्ठ बोल
-
श्रेष्ठ कर्म
-
श्रेष्ठ संबंध और संपर्क
मुरली नोट:
जो सुना है,
वही जीवन में दिखाई दे।
उदाहरण:
डिग्री लेने से डॉक्टर नहीं बनते,
इलाज करने से बनते हैं।
अध्याय 5
अमूल्य हीरों का हार – Light & Might House
सिल्वर-गोल्डन जुबली मनाई जा रही है,
लेकिन बापदादा
हीरों का हार बनाना चाहते हैं।
मुरली संकेत:
-
बेदाग आत्मा
-
बेहद की चमक
-
लाइट हाउस
-
माइट हाउस
उदाहरण:
दीपक कमरे को रोशन करता है,
लेकिन लाइट हाउस
पूरा समुद्र दिशा देता है।
अध्याय 6
हद से बेहद की यात्रा
अब तक बच्चों ने —
-
हद के संकल्प
-
हद की सेवा
-
हद के संबंध
किए।
अब बापदादा कहते हैं —
“अभी बेहद का बाप है,
बेहद की सेवा चाहिए।”
मुरली नोट:
बेहद की दृष्टि = सृष्टि परिवर्तन
अध्याय 7
बेहद की फास्ट गति और विधि
सृष्टि परिवर्तन का कार्य बड़ा है
और समय कम।
मुरली संकेत:
-
बेहद की गति
-
बेहद की विधि
उदाहरण:
आज के समय में
पुराने साधनों से
तेज़ परिणाम नहीं आते।
अध्याय 8
विश्व के मालिक – देव आत्माओं की पहचान
बापदादा चाहते हैं कि
देश-विदेश में एक आवाज गूँजे —
“बेहद के मालिक आ गए।”
“विश्व के राज्य अधिकारी आ गए।”
मुरली नोट:
देव आत्मा = सेवा + स्थिति + शक्ति
अध्याय 9
प्रैक्टिकल कोर्स और एक्स्ट्रा मार्क्स
यह वर्ष विशेष है।
मुरली संकेत:
-
प्रैक्टिकल कोर्स
-
एक्स्ट्रा मार्क्स
-
भविष्य खाता जमा
उदाहरण:
जैसे बोर्ड एग्ज़ाम में
इंटरनल मार्क्स भी जुड़ते हैं।
अध्याय 10
उड़ती कला की रेस – चारों सब्जेक्ट
बापदादा कहते हैं —
चारों सब्जेक्ट में रेस करो:
-
याद
-
सेवा
-
दिव्य गुण
-
ज्ञान स्वरूप
मुरली नोट:
नवीनता = नंबर वन
अध्याय 11
दिल और धन का रहस्य
“जहाँ दिल है,
वहाँ धन आ ही जाता है।”
बापदादा यह नहीं मानते कि
दिल हो और साधन न हों।
उदाहरण:
सच्चे दिल से निकली सेवा
कभी खाली नहीं जाती।
अध्याय 12
निष्कर्ष – बापदादा के बिल्कुल पास
बापदादा कहते हैं —
“तुम जहाँ भी हो,
मेरे बिल्कुल पास हो।”
अंतिम मुरली भावना:
दूरी स्थान की नहीं,
स्थिति की होती है।
(अव्यक्त मुरली – 8, 1986)
प्रश्न 1:
बापदादा आज बच्चों से क्या देखने आए हैं — मुरली सुनाना या कुछ और?
उत्तर:
बापदादा आज बच्चों से मुरली सुनाने नहीं, बल्कि आशा देखने आए हैं।
वे यह देखना चाहते हैं कि बच्चों ने सुने हुए ज्ञान को जीवन में कितना स्वरूप बनाया है।
प्रश्न 2:
“संपूर्ण बनो, संपन्न बनो” का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर:
यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि आत्मिक जीवन का अंतिम लक्ष्य है।
संपूर्णता का अर्थ है —
विकारों से मुक्त स्थिति
और संपन्नता का अर्थ है —
सभी दिव्य शक्तियों से भरपूर जीवन।
प्रश्न 3:
बापदादा उदाहरण में विद्यार्थी और परीक्षा की बात क्यों करते हैं?
उत्तर:
क्योंकि जैसे वर्षों पढ़ने के बाद
परीक्षा में परिणाम देखा जाता है,
वैसे ही बापदादा अब बच्चों का
प्रैक्टिकल रिज़ल्ट देखना चाहते हैं —
केवल सुनना नहीं, बनना।
प्रश्न 4:
दूर देशवासी बच्चों की कौन-सी विशेषता बापदादा को प्रिय लगती है?
उत्तर:
उनकी —
• दिल के मिलन की लगन
• बाप से मिलने का धैर्य
• दूरी के बावजूद अटूट स्नेह
बापदादा कहते हैं —
“मैं बच्चों की लगन को जानता हूँ।”
प्रश्न 5:
बापदादा बच्चों की लगन को कैसे पहचानते हैं?
उत्तर:
जैसे माँ दूर से भी
बच्चे की प्रतीक्षा पहचान लेती है,
वैसे ही बापदादा
दूर बैठे बच्चों की धड़कन पहचान लेते हैं।
प्रश्न 6:
योग में स्नेह और शक्ति का क्या महत्व है?
उत्तर:
सच्चा योग केवल अभ्यास नहीं,
बल्कि —
• योग में प्यार
• योग में शक्ति
• अनन्यपन
से आत्मा और परमात्मा के बीच
गहरा कनेक्शन बनता है।
प्रश्न 7:
मोबाइल नेटवर्क का उदाहरण क्यों दिया गया है?
उत्तर:
क्योंकि जैसे नेटवर्क दूर से भी जुड़ जाता है,
वैसे ही सच्चे योग से
आत्मा बाप से हर समय कनेक्ट रह सकती है।
प्रश्न 8:
बापदादा अब “सुनने” की बजाय क्या चाहते हैं?
उत्तर:
अब बापदादा चाहते हैं —
• श्रेष्ठ संकल्प
• श्रेष्ठ बोल
• श्रेष्ठ कर्म
• श्रेष्ठ संबंध और संपर्क
जो सुना है,
वही जीवन में दिखाई दे।
प्रश्न 9:
डिग्री और डॉक्टर का उदाहरण क्या सिखाता है?
उत्तर:
केवल डिग्री लेने से डॉक्टर नहीं बनते,
बल्कि इलाज करने से बनते हैं।
वैसे ही ज्ञान सुनने से नहीं,
प्रैक्टिकल जीवन से देव स्वरूप बनते हैं।
प्रश्न 10:
“Light House” और “Might House” का अर्थ क्या है?
उत्तर:
Light House —
जो स्वयं प्रकाशित होकर दूसरों को मार्ग दिखाए।
Might House —
जो शक्तिशाली स्थिति से
वाइब्रेशन द्वारा सेवा करे।
प्रश्न 11:
बापदादा “हीरों का हार” क्यों बनाना चाहते हैं?
उत्तर:
क्योंकि बापदादा को चाहिए —
• बेदाग आत्माएँ
• बेहद की चमक
• सदा सेवा में तत्पर देव आत्माएँ
जो सृष्टि को दिशा दें।
प्रश्न 12:
हद से बेहद की यात्रा का अर्थ क्या है?
उत्तर:
अब तक सेवा और संकल्प
सीमित (हद) थे,
अब बापदादा चाहते हैं —
बेहद की दृष्टि और बेहद की सेवा
जो सृष्टि परिवर्तन करे।
प्रश्न 13:
बेहद की सेवा में “फास्ट गति” क्यों ज़रूरी है?
उत्तर:
क्योंकि कार्य बड़ा है
और समय कम।
पुराने साधनों से
तेज़ परिणाम नहीं मिलते।
प्रश्न 14:
देव आत्मा की पहचान क्या है?
उत्तर:
देव आत्मा =
सेवा + स्थिति + शक्ति
ऐसी आत्माएँ ही
विश्व के राज्य अधिकारी कहलाती हैं।
प्रश्न 15:
“प्रैक्टिकल कोर्स” और “एक्स्ट्रा मार्क्स” क्या हैं?
उत्तर:
यह विशेष वर्ष
प्रैक्टिकल जीवन का है।
जो बच्चे
योग, सेवा और गुणों में आगे बढ़ते हैं,
वे भविष्य के खाते में
एक्स्ट्रा मार्क्स जमा करते हैं।
प्रश्न 16:
चारों सब्जेक्ट में रेस करने का क्या अर्थ है?
उत्तर:
• याद
• सेवा
• दिव्य गुण
• ज्ञान स्वरूप
इन चारों में
संतुलन और नवीनता ही
नंबर वन बनाती है।
प्रश्न 17:
“जहाँ दिल है, वहाँ धन आ ही जाता है” — इसका भाव क्या है?
उत्तर:
जहाँ सच्चा दिल और नीयत होती है,
वहाँ साधनों की कभी कमी नहीं होती।
सच्चे दिल से की गई सेवा
कभी खाली नहीं जाती।
प्रश्न 18:
बापदादा का अंतिम आश्वासन क्या है?
उत्तर:
बापदादा कहते हैं —
“तुम जहाँ भी हो,
मेरे बिल्कुल पास हो।”
अंतिम निष्कर्ष:
दूरी स्थान की नहीं,
स्थिति की होती है।
डिस्क्लेमर
यह वीडियो ब्रह्मा कुमारीज़ की अव्यक्त मुरली दिनांक: 8, 1986 पर आधारित है।
यह प्रस्तुति केवल आध्यात्मिक अध्ययन, आत्मचिंतन और राजयोग अभ्यास के उद्देश्य से बनाई गई है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, संस्था या व्यक्ति की भावना को ठेस पहुँचाना नहीं है।
सभी आध्यात्मिक अनुभव व्यक्तिगत होते हैं।
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