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S.Y.(17)यह ज्ञान निराला है। क्यों निराला है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय 1 : संगम युग – नई दुनिया की नींव

संगम युग ही नई दुनिया की नींव है।
यही वह समय है जब परमात्मा स्वयं आकर
पुरानी दुनिया को नई दुनिया में बदलने की
आत्मिक नींव रखते हैं।

यह कोई सामान्य समय नहीं है।
यह युगों का संगम है —
जहाँ पतित से पावन बनने की पढ़ाई चल रही है।


 अध्याय 2 : यह ज्ञान नया ही नहीं, निराला क्यों है?

यह ज्ञान
सिर्फ नया ही नहीं
बल्कि निराला है।

प्रश्न उठता है —
हर पढ़ाई तो नई होती है,
फिर इस ज्ञान को विशेष क्यों कहा गया?

आज का मंथन इसी प्रश्न पर है।


अध्याय 3 : हर पढ़ाई नई होती है, फिर यह ज्ञान अलग क्यों?

दुनिया की हर पढ़ाई नई होती है —

  • स्कूल की ABCD

  • कॉलेज की डिग्री

  • विज्ञान, तकनीक, रिसर्च

हर विद्यार्थी जब पहली बार पढ़ता है,
तो उसके लिए पढ़ाई नई होती है।

ड्रामा के अनुसार
हर समय, हर सीन नया होता है।
पुराना कुछ भी नहीं होता।

तो फिर संगम युग की नॉलेज को
“नई” क्यों कहा गया?


 अध्याय 4 : “नई” नॉलेज का गुप्त अर्थ (Murli Insight)

हर कल्प में सब कुछ नया होता है।
5000 वर्ष का विश्व नाटक एक चक्र में चलता है।

मुरली का रहस्य:
एक कल्प के अंदर
कोई भी सीन दोबारा रिपीट नहीं होता।

ड्रामा का नियम है —
हर सेकंड, हर सीन नया।

इस अर्थ में
दुनिया की पढ़ाई भी नई है —
इसमें कोई विशेषता नहीं।


 अध्याय 5 : उदाहरण से समझें – नई और विशेष में अंतरउदाहरण
एक बच्चा पहली बार स्कूल जाता है —
उसके लिए ABCD नई है।

लेकिन वही ABCD
दूसरे बच्चे के लिए पुरानी है
क्योंकि वह पहले पढ़ चुका है।

लेकिन…

संगम युग की नॉलेज
हर कल्प में भी पहली बार मिलती है।
कोई आत्मा इसे पहले से पढ़ी हुई नहीं होती।

यही इसका विशेष अंतर है।


 अध्याय 6 : संगम युग की नॉलेज हर कल्प में भी नई क्यों?

क्योंकि —

  • यह हर युग में नहीं मिलती

  • हर जन्म में नहीं मिलती

  • हर आत्मा को हर कल्प में सिर्फ एक बार मिलती है

इसलिए इसे कहा गया —
“नई नॉलेज”


 अध्याय 7 : फिर इसे “निराली” क्यों कहा गया?

अब मुरली की गहराई शुरू होती है।

 मुरली — 24 जनवरी 2003

“यह पढ़ाई निराली है, जो सिवाय बाप के कोई पढ़ा नहीं सकता।”

स्कूल टीचर पढ़ा सकता है।
प्रोफेसर पढ़ा सकता है।
संत-महात्मा भी ज्ञान दे सकते हैं।

लेकिन यह पढ़ाई —
कोई देहधारी नहीं पढ़ा सकता।


 अध्याय 8 : पतित से पावन बनाने की पढ़ाई

यह पढ़ाई आत्मा को
पतित से पावन बनाने की है।

बाकी सभी पढ़ाइयाँ —
आत्माओं द्वारा आत्माओं को हैं।
लेकिन उनसे आत्मा का उद्धार नहीं होता

उदाहरण
डूबता हुआ व्यक्ति
दूसरे डूबते हुए को नहीं बचा सकता।

उद्धार वही करेगा
जो स्वयं डूबा हुआ न हो।


 अध्याय 9 : परमात्मा ही क्यों पढ़ा सकते हैं?

परमात्मा —

  • देह में नहीं रहते

  • जन्म-मरण से परे हैं

  • पतित नहीं होते

इसलिए
वही पावन बना सकते हैं।

यह पढ़ाई देह के लिए नहीं
आत्मा के लिए है।


 मुरली — 5 मई 2004

“आत्मा चाहे कितनी भी पढ़ाई पढ़ ले, पतन से बच नहीं सकती।
चढ़ती कला सिवाय परमपिता परमात्मा के कोई करा नहीं सकता।”


 अध्याय 10 : उदाहरण – बीमारी और इलाज

कोई व्यक्ति —

  • भाषाएँ सीख ले

  • किताबें पढ़ ले

  • डिग्रियाँ ले ले

क्या इससे बीमारी ठीक हो जाएगी?
 नहीं।

इलाज चाहिए।

संगम युग की नॉलेज आत्मा का इलाज है।
यह आत्मा की बीमारियाँ निकालती है —
काम, क्रोध, अहंकार, मोह।


 अध्याय 11 : राजयोग – इस निराली नॉलेज का नाम

इस निराली नॉलेज का नाम है —
राजयोग

 मुरली — 18 जनवरी 1969

“अंत समय की स्थिति से ही भविष्य की राजधानी मिलती है।”

राज का अर्थ —
सिर्फ राजा बनना नहीं
बल्कि —

  • मन का राजा

  • बुद्धि का मालिक

  • संस्कारों का स्वामी बनना


अध्याय 12 : परमात्मा का पार्ट भी निराला

 मुरली — 15 अगस्त 2001

“परमात्मा का पार्ट निराला है।”

हम — एक्टर हैं।
परमात्मा — डायरेक्टर हैं।

डायरेक्टर
खुद एक्ट में फँसता नहीं,
इसलिए सही मार्गदर्शन देता है।


 अध्याय 13 : निराली नॉलेज का लक्ष्य – देह से न्यारा बनना

 अव्यक्त मुरली — 12 जनवरी 1996

“देहभान छोड़ना ही संगम युग की सबसे बड़ी पढ़ाई है।”

 व्यवहारिक पहचान:

  • प्रतिक्रिया कम

  • स्मृति ज्यादा

  • मोह कम

  • हल्कापन ज्यादा

यही निराली नॉलेज की पहचान है।


 समापन – एक वाक्य में सार

संगम युग की नॉलेज
नई इसलिए है क्योंकि
यह हर कल्प में पहली बार आती है।

और
निराली इसलिए है क्योंकि
इसे केवल परमात्मा पढ़ाते हैं
और यह आत्मा को पतित से पावन बनाती है।

“संगम युग की नई और निराली नॉलेज – प्रश्नों के माध्यम से मंथन”


 प्रश्न 1 : संगम युग को नई दुनिया की नींव क्यों कहा जाता है?

उत्तर :
संगम युग वह विशेष समय है जब परमात्मा स्वयं आकर
पुरानी, पतित दुनिया को नई, पावन दुनिया में बदलने की
आत्मिक नींव रखते हैं।
यह कोई सामान्य युग नहीं, बल्कि युगों का संगम है,
जहाँ आत्माओं को पतित से पावन बनने की पढ़ाई मिलती है।


 प्रश्न 2 : संगम युग को सामान्य समय क्यों नहीं कहा जा सकता?

उत्तर :
क्योंकि इस समय —

  • परमात्मा स्वयं शिक्षा देते हैं

  • आत्मा की शुद्धि की पढ़ाई चलती है

  • भविष्य की नई दुनिया का निर्माण होता है

इसलिए यह समय साधारण नहीं, अलौकिक है।


 प्रश्न 3 : इस ज्ञान को “नया ही नहीं, निराला” क्यों कहा गया है?

उत्तर :
क्योंकि यह ज्ञान —

  • सिर्फ जानकारी नहीं देता

  • आत्मा का रूपांतरण करता है

  • और परमात्मा द्वारा स्वयं सिखाया जाता है

यही कारण है कि यह ज्ञान नया भी है और निराला भी


 प्रश्न 4 : जब हर पढ़ाई नई होती है, तो यह ज्ञान अलग क्यों है?

उत्तर :
दुनिया की हर पढ़ाई —

  • स्कूल की ABCD

  • कॉलेज की डिग्री

  • विज्ञान और तकनीक

सब पढ़ाइयाँ नई होती हैं,
लेकिन वे आत्मा को ऊँचा नहीं उठातीं
संगम युग की नॉलेज आत्मा के स्तर को बदलती है,
इसलिए यह अलग है।


 प्रश्न 5 : ड्रामा के अनुसार सब कुछ नया है, फिर इस नॉलेज को “नई” क्यों कहा?

उत्तर :
ड्रामा के नियम अनुसार —
हर सेकंड, हर सीन नया होता है।
इस अर्थ में दुनिया की पढ़ाई भी नई है।

लेकिन संगम युग की नॉलेज —
हर कल्प में भी पहली बार मिलती है
 कोई आत्मा इसे पहले से पढ़ी हुई नहीं होती

यही इसका विशेष अर्थ है।


 प्रश्न 6 : “नई” और “विशेष” नॉलेज में क्या अंतर है?

उत्तर :
 उदाहरण :
एक बच्चा पहली बार स्कूल जाता है,
उसके लिए ABCD नई है।

लेकिन वही ABCD
दूसरे बच्चे के लिए पुरानी हो जाती है।

संगम युग की नॉलेज
हर कल्प में भी नई रहती है,
क्योंकि यह हर आत्मा को सिर्फ एक बार मिलती है।


 प्रश्न 7 : संगम युग की नॉलेज हर कल्प में भी नई क्यों होती है?

उत्तर :
क्योंकि यह —

  • हर युग में नहीं मिलती

  • हर जन्म में नहीं मिलती

  • हर आत्मा को हर कल्प में सिर्फ एक बार मिलती है

इसलिए इसे कहा गया — नई नॉलेज


 प्रश्न 8 : फिर इस नॉलेज को “निराली” क्यों कहा गया?

उत्तर :
क्योंकि यह पढ़ाई —
कोई भी देहधारी नहीं पढ़ा सकता।

मुरली – 24 जनवरी 2003
“यह पढ़ाई निराली है, जो सिवाय बाप के कोई पढ़ा नहीं सकता।”


 प्रश्न 9 : क्या यह पढ़ाई कोई गुरु, संत या प्रोफेसर नहीं पढ़ा सकता?

उत्तर :
नहीं।
स्कूल टीचर, प्रोफेसर, संत–महात्मा
ज्ञान दे सकते हैं,
लेकिन पतित से पावन बनाने की पढ़ाई नहीं

यह पढ़ाई केवल परमात्मा ही दे सकते हैं।


 प्रश्न 10 : पतित से पावन बनाने की पढ़ाई केवल परमात्मा ही क्यों दे सकते हैं?

उत्तर :
 उदाहरण :
डूबता हुआ व्यक्ति
दूसरे डूबते हुए को नहीं बचा सकता।

उद्धार वही करेगा
जो स्वयं डूबा हुआ न हो।

परमात्मा —

  • देह में नहीं रहते

  • जन्म–मरण से परे हैं

  • पतित नहीं होते

इसलिए वही पावन बना सकते हैं।


 प्रश्न 11 : यह पढ़ाई देह के लिए है या आत्मा के लिए?

उत्तर :
यह पढ़ाई आत्मा के लिए है।
दुनिया की पढ़ाई —
नौकरी, सुविधा, सम्मान के लिए होती है।

लेकिन संगम युग की नॉलेज —
आत्मा को पतन से बचाकर
उसे ऊँची स्थिति में ले जाती है।

मुरली – 5 मई 2004
“आत्मा चाहे कितनी भी पढ़ाई पढ़ ले, पतन से बच नहीं सकती।”


 प्रश्न 12 : संगम युग की नॉलेज को आत्मा का इलाज क्यों कहा गया?

उत्तर :
जैसे —
किताबें पढ़ने से बीमारी ठीक नहीं होती,
इलाज चाहिए।

वैसे ही —
संगम युग की नॉलेज
आत्मा की बीमारियाँ निकालती है —
काम, क्रोध, अहंकार, मोह।


 प्रश्न 13 : इस निराली नॉलेज का नाम राजयोग क्यों है?

उत्तर :
क्योंकि यह योग —
मन, बुद्धि और संस्कारों पर
राज करना सिखाता है।

मुरली – 18 जनवरी 1969
“अंत समय की स्थिति से ही भविष्य की राजधानी मिलती है।”

राज का अर्थ —
सिर्फ राजा बनना नहीं,
बल्कि स्व-राज्य प्राप्त करना।


 प्रश्न 14 : परमात्मा का पार्ट निराला कैसे है?

उत्तर :
मुरली – 15 अगस्त 2001
“परमात्मा का पार्ट निराला है।”

हम इस नाटक में एक्टर हैं,
परमात्मा डायरेक्टर हैं।

डायरेक्टर
खुद एक्ट में फँसता नहीं,
इसलिए सही मार्गदर्शन देता है।


 प्रश्न 15 : निराली नॉलेज का अंतिम लक्ष्य क्या है?

उत्तर :
अव्यक्त मुरली – 12 जनवरी 1996
“देहभान छोड़ना ही संगम युग की सबसे बड़ी पढ़ाई है।”

 व्यवहारिक पहचान:

  • प्रतिक्रिया कम

  • स्मृति ज्यादा

  • मोह कम

  • हल्कापन ज्यादा


 अंतिम प्रश्न : एक वाक्य में इस पूरे ज्ञान का सार क्या है?

उत्तर :
संगम युग की नॉलेज
नई इसलिए है क्योंकि यह हर कल्प में पहली बार आती है,
और
निराली इसलिए है क्योंकि इसे केवल परमात्मा पढ़ाते हैं
और यह आत्मा को पतित से पावन बनाती है।

डिस्क्लेमर:
यह वीडियो ब्रह्मा कुमारीज़ की साकार एवं अव्यक्त मुरलियों पर आधारित आत्मिक अध्ययन है।
इसका उद्देश्य किसी धर्म, व्यक्ति या संस्था की आलोचना करना नहीं,
बल्कि आत्मा की जागृति और ईश्वरीय शिक्षा को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
दर्शकों से निवेदन है कि आधिकारिक मुरलियों का स्वयं अध्ययन अवश्य करें।

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