AV-(21)16-03-1986 “रुहानी ड्रिल”
बापदादा सभी बच्चों की स्वीट साइलेन्स की स्थिति को देख रहे हैं। एक सेकेण्ड में साइलेन्स की स्थिति में स्थित हो जाना यह प्रैक्टिस कहाँ तक की है? इस स्थिति में जब चाहें तब स्थित हो सकते हैं वा समय लगता है? क्योंकि अनादि स्वरूप स्वीट साइलेन्स है। आदि स्वरूप आवाज में आने का है। लेकिन अनादि अविनाशी संस्कार साइलेन्स है। तो अपने अनादि संस्कार, अनादि स्वरूप को, अनादि स्वभाव को जानते हुए जब चाहो तब उस स्वरूप में स्थित हो सकते हो? 84 जन्म आवाज में आने के हैं इसलिए सदा अभ्यास आवाज में आने का है। लेकिन अनादि स्वरूप और फिर इस समय चक्र पूरा होने के कारण वापिस साइलेन्स होम में जाना है। अब घर जाने का समय समीप है। अब आदि मध्य अन्त तीनों ही काल का पार्ट समाप्त कर अपने अनादि स्वरूप, अनादि स्थिति में स्थित होने का समय है। इसलिए इस समय यही अभ्यास ज्यादा आवश्यक है। अपने आपको चेक करो कि कर्मेन्द्रिय-जीत बने हैं? आवाज में नहीं आने चाहें तो यह मुख का आवाज अपनी तरफ खींचता तो नहीं है। इसी को ही रूहानी ड्रिल कहा जाता है।
जैसे वर्तमान समय के प्रमाण शरीर के लिए सर्व बीमारियों का इलाज एक्सरसाइज सिखाते हैं, तो इस समय आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए यह रूहानी एक्सरसाइज का अभ्यास चाहिए। चारों ओर कैसा भी वातावरण हो, हलचल हो लेकिन आवाज में रहते आवाज से परे स्थिति का अभ्यास अभी बहुतकाल का चाहिए। शान्त वातावरण में शान्ति की स्थिति बनाना यह कोई बड़ी बात नहीं है। अशान्ति के बीच आप शान्त रहो यही अभ्यास चाहिए। ऐसा अभ्यास जानते हो? चाहे अपनी कमजोरियों की हलचल हो, संस्कारों के व्यर्थ संकल्पों की हलचल हो। ऐसी हलचल के समय स्वयं को अचल बना सकते हो वा टाइम लग जाता है? क्योंकि टाइम लगना यह कभी भी धोखा दे सकता है। समाप्ति के समय में ज्यादा समय नहीं मिलना है। फाइनल रिजल्ट का पेपर कुछ सेकेण्ड और मिनटों का ही होना है। लेकिन चारों ओर की हलचल के वातावरण में अचल रहने पर ही नम्बर मिलना है। अगर बहुतकाल हलचल की स्थिति से अचल बनने में समय लगने का अभ्यास होगा तो समाप्ति के समय क्या रिजल्ट होगी? इसलिए यह रूहानी एक्सरसाइज का अभ्यास करो। मन को जहाँ और जितना समय स्थित करने चाहें उतना समय वहाँ स्थित कर सको। फाइनल पेपर है बहुत ही सहज। और पहले से ही बता देते हैं कि यह पेपर आना है। लेकिन नम्बर बहुत थोड़े समय में मिलना है। स्टेज भी पावरफुल हो।
देह, देह के सम्बन्ध, देह संस्कार, व्यक्ति या वैभव, वायब्रेशन, वायुमण्डल सब होते हुए भी आकर्षित न करे – इसी को ही कहते हैं नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप। तो ऐसी प्रैक्टिस है? लोग चिल्लाते रहें और आप अचल रहो। प्रकृति भी, माया भी सब लास्ट दाँव लगाने लिए अपने तरफ कितना भी खींचे लेकिन आप न्यारे और बाप के प्यारे बनने की स्थिति में लवलीन रहो, इसको कहा जाता – देखते हुए न देखो, सुनते हुए न सुनो… ऐसा अभ्यास हो। इसी को ही स्वीट साइलेन्स स्वरूप की स्थिति कहा जाता है। फिर भी बापदादा समय दे रहा है। अगर कोई भी कमी है तो अब भी भर सकते हो क्योंकि बहुतकाल का हिसाब सुनाया। तो अभी थोड़ा चांस है, इसलिए इस प्रैक्टिस की तरफ फुल अटेन्शन रखो। पास विद ऑनर बनना या पास होना यह आधार इसी अभ्यास पर है। ऐसा अभ्यास है? समय की घण्टी बजे तो तैयार होंगे या अभी सोचते हो तैयार होना है? इसी अभ्यास के कारण अष्ट रत्नों की माला विशेष छोटी बनी है। बहुत थोड़े टाइम की है। जैसे आप लोग कहते हो ना सेकेण्ड में मुक्ति वा जीवनमुक्ति का वर्सा लेना सभी का अधिकार है। तो समाप्ति के समय भी नम्बर मिलना थोड़े समय की बात है। लेकिन जरा भी हलचल न हो। बस बिन्दी कहा और बिन्दी में टिक जायें। बिन्दी हिले नहीं। ऐसे नहीं कि उस समय अभ्यास करना शुरू करो – मैं आत्मा हूँ… मैं आत्मा हूँ… यह नहीं चलेगा क्योंकि सुनाया, वार भी चारों ओर का होगा। लास्ट ट्रायल सब करेंगे। प्रकृति में भी जितनी शक्ति होगी, माया में भी जितनी शक्ति होगी, ट्रायल करेगी। उनकी भी लास्ट ट्रायल और आपकी लास्ट कर्मातीत, कर्मबन्धन मुक्त स्थिति होगी। दोनों तरफ की बहुत पॉवरफुल सीन होगी। वह भी फुल फोर्स, यह भी फुलफोर्स। लेकिन सेकेण्ड की विजय, विजय के नगाड़े बजायेगी। समझा लास्ट पेपर क्या है। सब शुभ संकल्प तो यही रखते भी हैं और रखना भी है कि नम्बरवन आना ही है। तो जब चारों ओर की बातों में विन होंगे तभी वन आयेंगे। अगर एक बात में जरा भी व्यर्थ संकल्प, व्यर्थ समय लग गया तो नम्बर पीछे हो जायेगा। इसलिए सब चेक करो। चारों ही तरफ चेक करो। डबल विदेशी सबमें तीव्र जाने चाहते हैं ना। इसलिए तीव्र पुरूषार्थ वा फुल अटेन्शन इस अभ्यास में अभी से देते रहो। समझा! क्वेश्चन को भी जानते हो और टाइम को भी जानते हो। फिर तो सब पास होने चाहिए। अगर पहले से क्वेश्चन का पता होता है तो तैयारी कर लेते हैं। फिर पास हो जाते हैं। आप सभी तो पास होने वाले हो ना! अच्छा।
यह सीजन बापदादा ने हरेक से मिलने का खुला भण्डारा खोला है। आगे क्या होना है, वह फिर बतायेंगे। अभी खुले भण्डार से जो भी लेने आये हैं वह तो ले ही लेंगे। ड्रामा का दृश्य सदा बदलता ही है लेकिन इस सीजन में चाहे भारतवासियों को, चाहे डबल विदेशियों को, सभी को विशेष वरदान तो मिला ही है। बापदादा ने जो वायदा किया है वह तो निभायेंगे। इस सीजन का फल खाओ। फल है मिलन, वरदान। सभी सीजन का फल खाने आये हो ना। बापदादा को भी बच्चों को देख खुशी होती है। फिर भी साकारी सृष्टि में तो सब देखना होता है। अभी तो मौज मना लो। फिर सीजन की लास्ट में सुनायेंगे।
सेवा के स्थान भले अलग-अलग हैं लेकिन सेवा का लक्ष्य तो एक ही है। उमंग-उल्हास एक ही है इसलिए बापदादा सभी स्थानों को विशेष महत्व देते हैं। ऐसे नहीं एक स्थान महत्व वाला है, दूसरा कम है। नहीं। जिस भी धरनी पर बच्चे पहुँचे हैं उससे कोई न कोई विशेष रिजल्ट अवश्य निकलनी है। फिर चाहे कोई की जल्दी दिखाई देती, कोई की समय पर दिखाई देगी। लेकिन विशेषता सब तरफ की है। कितने अच्छे-अच्छे रत्न निकले हैं। ऐसे नहीं समझना कि हम तो साधारण हैं। सब विशेष हो। अगर कोई विशेष न होता तो बाप के पास नहीं पहुँचता। विशेषता है लेकिन कोई विशेषता को सेवा में लगाते हैं, कोई सेवा में लगाने के लिए अभी तैयार हो रहे हैं, बाकी हैं सब विशेष आत्मायें। सब महारथी, महावीर हो। एक-एक की महिमा शुरू करें तो लम्बी-चौड़ी माला बन जायेगी। शक्तियों को देखो तो हर एक शक्ति महान आत्मा, विश्व कल्याणकारी आत्मा दिखाई देगी। ऐसे हो ना या सिर्फ अपने-अपने स्थान के कल्याणकारी हो?
अध्याय: “रुहानी ड्रिल” – स्वीट साइलेन्स की अंतिम तैयारी
(संदर्भ: अव्यक्त बापदादा, 30.01.2003)
स्वीट साइलेन्स – मेरा अनादि स्वरूप
मुरली बिंदु (30.01.2003):
“अनादि स्वरूप स्वीट साइलेन्स है… जब चाहो तब उस स्वरूप में स्थित हो सकते हो?”
समझ
हमारा अनादि संस्कार शांति है।
आदि और मध्य में हम आवाज (पार्ट) में आये, लेकिन अब चक्र पूरा होने पर साइलेन्स होम लौटने का समय समीप है।
आत्म-चेक
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क्या मैं एक सेकेण्ड में मन को स्थिर कर सकता/सकती हूँ?
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या मुझे समय लगता है?
उदाहरण
जैसे मोबाइल की स्क्रीन पर अनेक ऐप खुले हों, लेकिन आप एक क्लिक से सब बंद कर सकते हैं।
वैसे ही — “मैं आत्मा” स्मृति आते ही मन शांत हो जाए — यही है अभ्यास।
2️⃣ रूहानी ड्रिल क्या है?
मुरली बिंदु (30.01.2003):
“आवाज में रहते आवाज से परे स्थिति का अभ्यास… इसी को ही रूहानी ड्रिल कहा जाता है।”
अर्थ
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए एक्सरसाइज जरूरी है।
वैसे ही आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए रूहानी एक्सरसाइज जरूरी है।
अभ्यास
-
शांति के वातावरण में शांत रहना सरल है।
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अशांति में शांत रहना — यही असली ड्रिल है।
उदाहरण
घर में कोई ऊँची आवाज में बोल रहा है।
आपके भीतर प्रतिक्रिया उठती है।
अगर उसी क्षण आप “बिन्दी” में टिक जाएँ — यही रूहानी ड्रिल है।
3️⃣ लास्ट पेपर – कुछ सेकेण्ड की परीक्षा
मुरली बिंदु (30.01.2003):
“फाइनल रिजल्ट का पेपर कुछ सेकेण्ड और मिनटों का ही होना है।”
विशेष बात
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समय कम होगा
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वातावरण शक्तिशाली होगा
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प्रकृति और माया दोनों “फुल फोर्स” में होंगी
दोनों तरफ की सीन
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माया की लास्ट ट्रायल
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आपकी कर्मातीत स्थिति
विजय कैसे?
“बस बिन्दी कहा और बिन्दी में टिक जायें। बिन्दी हिले नहीं।”
उदाहरण
अगर कोई कहे — “तुम गलत हो!”
मन में हलचल न हो।
तुरंत स्मृति — मैं आत्मा, शांति स्वरूप
यही सेकेण्ड की विजय है।
4️⃣ नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप
मुरली बिंदु (30.01.2003):
“देह, देह के सम्बन्ध… होते हुए भी आकर्षित न करे — इसी को कहते हैं नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप।”
इसका अर्थ
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देखते हुए न देखो
-
सुनते हुए न सुनो
-
आकर्षण होते हुए भी न्यारे रहो
उदाहरण
सोशल मीडिया पर प्रशंसा या आलोचना —
दोनों में मन समान रहे।
न खुशी में उड़ना, न आलोचना में गिरना।
5️⃣ पास विद ऑनर – अष्ट रत्न क्यों थोड़े?
मुरली बिंदु (30.01.2003):
“इसी अभ्यास के कारण अष्ट रत्नों की माला विशेष छोटी बनी है।”
कारण
-
सेकेण्ड की स्थिरता
-
जरा भी व्यर्थ संकल्प नहीं
-
कोई हलचल नहीं
अगर एक भी संकल्प व्यर्थ चला — नम्बर पीछे।
6️⃣ अभी भी चांस है
बापदादा कहते हैं —
अभी समय है।
कमी हो तो भर लो।
यह सीजन खुला भण्डारा है — वरदान और मिलन का।
विशेष वरदान
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भारतवासी
-
डबल विदेशी
-
सभी को समान वरदान
ड्रामा बदलता है — लेकिन वायदा निभाया जाता है।
7️⃣ सेवा का लक्ष्य – एक
सेवा के स्थान अलग हो सकते हैं।
लेकिन लक्ष्य एक है — विश्व कल्याण।
“ऐसे नहीं समझना कि हम साधारण हैं… सब विशेष आत्मायें हैं।”
हर आत्मा महारथी है।
किसी की विशेषता अभी सेवा में लगी है, किसी की तैयारी में है।
आत्म-चेकलिस्ट (Daily Drill)
☐ क्या मैं एक सेकेण्ड में बिन्दी में टिक सकता हूँ?
☐ क्या हलचल में अचल हूँ?
☐ क्या व्यर्थ संकल्प तुरंत समाप्त कर सकता हूँ?
☐ क्या आकर्षण में न्यारा-प्यारा हूँ?
☐ क्या मेरी स्टेज पावरफुल है?
निष्कर्ष
रुहानी ड्रिल कोई साधारण अभ्यास नहीं —
यह लास्ट पेपर की तैयारी है।
-
प्रश्न पता है
-
समय पता है
-
अभ्यास बताया गया है
अब केवल एक बात —
फुल अटेन्शन।
जब चारों ओर विन होंगे —
तभी आप वन बनेंगे।
1️⃣ स्वीट साइलेन्स – मेरा अनादि स्वरूप
प्रश्न 1: स्वीट साइलेन्स को अनादि स्वरूप क्यों कहा गया है?
उत्तर:
क्योंकि आत्मा का मूल, अनादि संस्कार शांति है। हम आदि और मध्य में पार्ट बजाने के लिए आवाज में आते हैं, लेकिन हमारा सच्चा स्वरूप मौन, स्थिर और शांति से भरपूर है। चक्र पूर्ण होने पर फिर उसी साइलेन्स होम में लौटना है।
प्रश्न 2: “एक सेकेण्ड में स्थित होना” क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
समाप्ति के समय ज्यादा अवसर नहीं मिलेगा। अगर मन को स्थिर करने में समय लगेगा तो धोखा हो सकता है। इसलिए अभ्यास ऐसा हो कि “मैं आत्मा” स्मृति आते ही मन शांत हो जाए।
प्रश्न 3: इसे व्यवहार में कैसे चेक करें?
उत्तर:
यदि कोई परिस्थिति अचानक बदल जाए — क्या मैं तुरंत शांत हो सकता/सकती हूँ?
या मन में विचारों की लहरें चलती रहती हैं?
यही आत्म-चेक है।
2️⃣ रूहानी ड्रिल क्या है?
प्रश्न 4: रूहानी ड्रिल का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर:
आवाज में रहते हुए भी आवाज से परे रहना — यही रूहानी ड्रिल है। अर्थात कर्म करते हुए भी मन भीतर से अचल और शांति स्वरूप रहे।
प्रश्न 5: शांति के वातावरण और अशांति के वातावरण में क्या अंतर है?
उत्तर:
शांत वातावरण में शांत रहना सहज है।
लेकिन अशांति, आलोचना, तनाव या संस्कारों की टकराहट के बीच शांत रहना — यही असली रूहानी एक्सरसाइज है।
प्रश्न 6: इसका दैनिक जीवन में उदाहरण क्या है?
उत्तर:
यदि कोई ऊँची आवाज में बोलता है और उसी क्षण आप प्रतिक्रिया देने के बजाय “बिन्दी” में टिक जाते हैं — यही रूहानी ड्रिल है।
3️⃣ लास्ट पेपर – कुछ सेकेण्ड की परीक्षा
प्रश्न 7: लास्ट पेपर को “कुछ सेकेण्ड की परीक्षा” क्यों कहा गया है?
उत्तर:
क्योंकि फाइनल परीक्षा बहुत थोड़े समय की होगी, लेकिन उसी में परिणाम तय होगा। उस समय चारों ओर हलचल होगी — प्रकृति और माया दोनों फुल फोर्स में होंगी।
प्रश्न 8: उस समय विजय का मंत्र क्या होगा?
उत्तर:
“बस बिन्दी कहा और बिन्दी में टिक जायें। बिन्दी हिले नहीं।”
अर्थात आत्म-स्मृति में पूर्ण स्थिरता।
प्रश्न 9: यदि कोई हमें गलत ठहराए तो क्या करें?
उत्तर:
मन में हलचल न हो। तुरंत स्मृति — “मैं आत्मा, शांति स्वरूप।”
यही सेकेण्ड की विजय है।
4️⃣ नष्टोमोहा समर्थ स्वरूप
प्रश्न 10: नष्टोमोहा का क्या अर्थ है?
उत्तर:
देह, देह के संबंध, व्यक्ति, वैभव या परिस्थितियाँ — इनमें रहते हुए भी उनसे आकर्षित न होना। न्यारा और प्यारा बनना।
प्रश्न 11: “देखते हुए न देखो, सुनते हुए न सुनो” का व्यावहारिक अर्थ क्या है?
उत्तर:
बाहरी दृश्य और शब्द मन को प्रभावित न करें। मन भीतर स्थिर और साक्षी रहे।
प्रश्न 12: आधुनिक उदाहरण क्या है?
उत्तर:
सोशल मीडिया पर प्रशंसा मिले या आलोचना — दोनों में मन समान रहे। न खुशी में उड़ना, न आलोचना में गिरना।
5️⃣ पास विद ऑनर – अष्ट रत्न क्यों थोड़े?
प्रश्न 13: अष्ट रत्नों की माला छोटी क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि सेकेण्ड की स्थिरता और पूर्ण निश्चलता बहुत ऊँची अवस्था है। जरा भी व्यर्थ संकल्प आया तो नम्बर पीछे हो सकता है।
प्रश्न 14: पास और पास विद ऑनर में क्या अंतर है?
उत्तर:
पास होना — परीक्षा पार करना।
पास विद ऑनर — पूर्ण स्थिरता और शक्तिशाली अवस्था के साथ विजय पाना।
6️⃣ अभी भी चांस है
प्रश्न 15: क्या अभी भी सुधार का अवसर है?
उत्तर:
हाँ। बापदादा समय दे रहे हैं। कमी हो तो अभी भर सकते हैं। यह समय वरदान और मिलन का विशेष सीजन है।
प्रश्न 16: सभी को समान वरदान कैसे?
उत्तर:
चाहे भारतवासी हों या डबल विदेशी — बापदादा का वायदा सबके लिए समान है। ड्रामा बदलता है, लेकिन वायदा निभाया जाता है।
7️⃣ सेवा का लक्ष्य – एक
प्रश्न 17: सेवा के स्थान अलग होने पर भी लक्ष्य एक क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि सभी का उद्देश्य विश्व कल्याण है। स्थान अलग हो सकते हैं, लेकिन भावना और लक्ष्य एक ही है।
प्रश्न 18: क्या कोई आत्मा साधारण है?
उत्तर:
नहीं। हर आत्मा विशेष है। यदि विशेषता न होती तो बाप के पास पहुँचती ही नहीं। कोई अपनी विशेषता सेवा में लगा चुका है, कोई अभी तैयारी में है।
डिस्क्लेमर
यह प्रस्तुति ब्रह्माकुमारीज़ की अव्यक्त मुरली (30 जनवरी 2003) पर आधारित आध्यात्मिक अध्ययन एवं चिंतन है। इसका उद्देश्य राजयोग साधना के अभ्यास को गहरा करना है। यह किसी मत, पंथ या धर्म की आलोचना हेतु नहीं है। सभी आत्माओं के प्रति शुभभावना सहित प्रस्तुत।
रुहानी ड्रिल, स्वीट साइलेन्स, अव्यक्त बापदादा, Avyakt Murli 30-01-2003, ब्रह्माकुमारी मुरली, BK Hindi Murli, Rajyoga Meditation, सेकण्ड में बिन्दी, लास्ट पेपर तैयारी, कर्मातीत अवस्था, नष्टोमोहा स्वरूप, आत्म स्मृति अभ्यास, रूहानी एक्सरसाइज, पास विद ऑनर, अष्ट रत्न माला, संगमयुग साधना, स्वीट साइलेंस प्रैक्टिस, मन नियंत्रण शक्ति, आत्मचिंतन, विश्व कल्याण सेवा, Om Shanti,Spiritual Drill, Sweet Silence, Avyakt BapDada, Avyakt Murli 30-01-2003, Brahma Kumari Murli, BK Hindi Murli, Rajyoga Meditation, Bindi in Second, Last Paper Preparation, Karmateet State, Nashtomoha Form, Self Smriti Practice, Spiritual Exercise, Pass with Honour, Ashta Ratna Mala, Confluence Age Sadhana, Sweet Silence Practice, Mind Control Power, Self-reflection, World Welfare Service, Om Shanti,

