यहाँ आपका टेक्स्ट टाइमलाइन नंबर हटाकर साफ़ रूप में दिया गया है:
हां जी रिकॉर्डिंग हुआ क्या
शांति
योग करना
वर्सेस योगी जीवन बनना
दोनों में से क्या करें
हमारा जो राज योग में
स्वमान
स्वमान के बिना राजयोग नहीं।
राज योग का आधार ही स्वमान है।
क्योंकि आप जानते हैं
राज योग करना किसको है?
आत्मा को करना,
आत्म स्थिति को याद करना
या आत्म स्थिति में रहना
याद करना जो आज हम देखते हैं मैक्सिमम
भाई-बने उसके अंदर मैं भी यही अभ्यास करता
रहा कि स्वमान को याद करो।
दीदी पूछेगी आज का स्वमान क्या रखा है?
क्या है आज का स्वमान उसको सुनाना है।
इसलिए बार-बार उसे याद करना है।
यहां हम भाई बहनों के द्वारा कहा गया कि
आप 21 बार स्वमान को सवेरे उठकर याद करें।
108 बार स्वमान को लिखें।
एक भाई मेरे पास रोज आना
कई बार स्वमान लिख के भेजता
और कुछ नहीं लिखता और कुछ नहीं पूछता
और कुछ मेरे ख्याल से करता भी होगा या
नहीं पता।
परंतु अब बाबा हमें जो समझा रहे हैं जो आज
हम चर्चा करने जा रहे हैं कि स्वमान को
याद नहीं करना।
उस स्वमान को स्वरूप बनना है। उस स्वमान
को स्वरूप में लाना है।
उसको धारण करना है। उस स्वमान की स्मृति
में रहना है।
योग करना या स्वमान को याद करना
समय विशेष में
आसन प्राणायाम तक सीमित
कोई आसन कर ले कोई प्राणायाम कर ले गुरु
जी ने नाम दिया था वह मंत्र दिया था वह
मंत्र लिखा हुआ है गुरु जी के पास उसको
कॉपी करके ले आए
वेस्टेज ऑफ टाइम
एंड वेस्टेज ऑफ एनर्जी
रहने में क्या है? 24/7
सहज स्मृति में रहना।
24 घंटे सातों दिन
हर कर्म में योग
इसको हम ऐसे कहेंगे बाबा की श्रीमत अनुसार
हर कर्म करना
हर स्वास में
बाबा के
याद की
हर स्वास
हर स्वास हमें बाबा की याद रहे
मन स्थिर
दृढ़ पर प्रकाशित
मतलब मन जो है एकदम स्थिर हो और बुद्धि जो
है
वह भी क्या हो प्रकाशित
इसके लिए पांच स्टेप हम ध्यान से देखेंगे
जो आज के इस मुरली के अंदर आएंगे। प्रश्न
के अंदर आएंगे। एक है वैज्ञानिक रहस्य
स्मृति और चेतना का न्यूरो साइंस से
प्रमाण।
दूसरा है स्मृति विज्ञान। स्मृति का
विज्ञान
न्यूरोप्लास्टिसिटी
और
चेतना का उच्च स्तर
आध्यात्मिक रहस्य आत्मा की स्मृति से
परम शांति की प्राप्ति
सहज स्मृति के लाभ तनाव
और मुक्त जीवन तनाव मुक्त जीवन
सहज स्मृति के लाभ तनाव मुक्त जीवन
स्वस्थ शरीर
तेज बुद्धि
सहज स्मृति के लाभ और योगी जीवन का लक्ष्य
क्या है?
योगी जीवन का लक्ष्य क्या है?
स्वरूप में स्थिरता,
सेवा और श्रेष्ठ कर्म करना।
स्वरूप में स्थित रहना
और सेवा और श्रेष्ठ कर्म करना।
डिस्क्लेमर है
यह स्पीच ब्रह्मा कुमारी की मुरलियों के
आधार पर आध्यात्मिक ज्ञान को सरल और सहज
समझने में प्रस्तुत करने का प्रयास है।
इसमें दिए गए
उदाहरण केवल समझ को आसान बनाने के लिए हैं।
कुछ बिंदुओं में व्याख्या और इंटरप्रिटेशन भी सम्मिलित
है। श्रोता स्वयं मुरलियों का अध्ययन करते
हुए
और अपने विवेक से सत्य को समझें।
योग करना या योगी जीवन बनना दो बातें हैं।
योग करने वाले कहते हैं आओ चलो थोड़ी देर
बाबा को याद करें।
विशेष प्रोग्राम बनाते हैं कि आज
मुझे बाबा को याद करना है।
योग करना या योगी जीवन बनना
सहज स्मृति का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक
रहस्य
अध्याय का मूल प्रश्न
इस अध्याय का मुख्य प्रश्न क्या है?
क्या मेरा योग
कभी-कभी का प्रयास हो गया है?
या
मेरा जीवन ही योगी जीवन बन गया है।
आज योग कठिन क्यों लगता है?
बहुत सी आत्माएं कहती हैं योग लगता नहीं।
मन भटकता है।
कुछ समय याद रहती है फिर भूल जाता है।
इसका कारण
क्या है?
क्योंकि
योग को कर्म समझ लिया गया है।
योग को कर्म समझ लिया गया।
जबकि योग वास्तव में स्थिति है।
नोट करना इसको।
योग जो है वह स्थिति है, स्टेट है।
बाप दादा का स्पष्ट संकेत
बाप दादा कहते हैं।
अव्यक्त मुरली 30 जनवरी 2010:
हम योग लगाने वाले नहीं,
योगी जीवन वाले हैं।
योग लगाना
और योगी जीवन में अंतर।
योग लगाना समय विशेष।
निरंतर स्थिति।
योग लगाने वाला क्या करेगा?
वह समय विशेष देखेगा
और समय विशेष पर याद करेगा।
मुझे सवेरे याद करना है,
दोपहर को याद करना है,
शाम को याद करना है।
लेकिन योगी जीवन में
निरंतर हम बाबा की याद में रहेंगे।
वह है योगी जीवन।
योग करने वाले प्रयास करते हैं।
चलो थोड़ी देर बाबा को याद करने की कोशिश करें।
क्योंकि याद होता नहीं।
याद रहता नहीं।
और योगी जीवन में
यह स्वाभाविक हो जाता है।
वह चलेगा, देखेगा, उठेगा, खाएगा, पिएगा
बाबा की याद में रहेगा।
अब उसे स्वमान याद है कि
मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं।
वह उसी स्वमान में रहेगा।
स्वमान में रहेगा तो योग रहेगा।
स्वमान में ही नहीं होगा तो योग नहीं रहेगा।
योगी जीवन नहीं हो सकता।
योगी जीवन का आधार ही है स्वमान।
स्वमान का अभ्यास ही यही है कि
हमारा योगी जीवन बने।
बैठना वह बैठेगा
बाबा को याद करने के लिए बैठेगा
परंतु
यहां तो जीना ही योगी जीवन में है।
जीवन ही तभी है जब
बाबा के साथ मेरा कनेक्शन जुड़ा हुआ है।
मैं स्वमान में हूं
तो कनेक्शन बाबा के साथ जुड़ेगा।
जैसे ही मैं स्वमान को भूला
तो मेरा कनेक्शन भी बाबा से अलग हो जाएगा।
अब उसमें याद करना
और यहां है याद में रहना।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक न्यूरो साइंस कहती है
जो कार्य बार-बार
अवेयरनेस के साथ किया जाता है।
वे धीरे-धीरे
ऑटोमेटिक बिहेवियर बन जाता है।
इसे संस्कार कहते हैं।
जो हमारी आदत होती है, संस्कार होता है,
वह हम अपने आप करते जाते हैं।
उसके लिए कुछ सोचना नहीं पड़ता।
इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहते हैं।
यह हमारे ब्रेन पर एक निशान बना देती है।
परंतु हमारी आध्यात्मिक पढ़ाई के अनुसार
यह संस्कार आत्मा में होते हैं।
रिपीटेड अवेयरनेस
परमानेंट पैटर्न बन सकती है।
जिसको हम बार-बार करेंगे
वह हमारा परमानेंट पैटर्न बन जाएगा।
देहभान ऑटोमेटिक क्यों है?
क्योंकि वर्षों से वही आइडेंटिटी दोहराई गई।
मैं शरीर हूं —
यह डिफॉल्ट प्रोग्राम बन गया।
योगी जीवन कैसे बनेगा?
जब आत्मा अवेयरनेस को बार-बार एक्टिवेट करती है।
काम करते हुए भी स्मृति बनाए रखती है।
परिस्थिति में भी कनेक्शन नहीं टूटता।
तब योग केवल प्रैक्टिस नहीं रहता,
लिविंग एक्सपीरियंस बन जाता है।
बाप दादा का गहरा संकेत
अव्यक्त मुरली 30 जनवरी 2010:
जीवन दो-चार घंटे की नहीं होती,
जीवन सदा काल के लिए होती है।
यदि योग केवल अमृतवेले तक सीमित है
और दिन भर देहभान चलता है
तो योग जीवन नहीं बना।
कर्म योगी स्थिति क्या है?
कर्म भी चल रहा है
और भीतर कनेक्शन भी चल रहा है।
हम परमात्म स्मृति में कर्म करते हैं
तब हम कर्म योगी हैं।
सामान्य स्थिति:
काम करते हुए तनाव।
कर्म योगी स्थिति:
काम करते हुए शांति।
तब मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं।
फिर मैं कर्म योगी हूं।
क्या चलते-फिरते योग संभव है?
हां।
बाप दादा कहते हैं
अव्यक्त मुरली 30 जनवरी 2010:
चलते-फिरते कर्म करते
योगी हैं।
फिर कठिनाई क्यों आती है?
क्योंकि योग को अलग एक्टिविटी बना दिया है।
जबकि वास्तविक राजयोग
ब्रीदिंग की तरह नेचुरल होना चाहिए।
जैसे सांस लेना नेचुरल है
ऐसे योगी जीवन भी नेचुरल होना चाहिए।
हैबिट साइंस क्या कहती है?
रिसर्च बताती है
छोटे-छोटे repeated pauses
deep identity change ला सकते हैं।
इसलिए हर एक घंटे में 10 सेकंड pause।
मैं आत्मा।
मैं शांत स्वरूप आत्मा।
अनुभव करें।
धीरे-धीरे subconscious बदलने लगता है।
योगी जीवन के संकेत
यदि योगी जीवन बन रहा है तो:
रिएक्शन कम होगा।
स्थिरता बढ़ेगी।
व्यर्थ विचार कम होंगे।
भीतर हल्कापन रहेगा।
परिस्थिति हिला नहीं सकेगी।
स्वयं को चेक करें।
क्या मेरा योग केवल बैठने तक सीमित है?
क्या काम करते हुए बाबा से कनेक्शन टूट जाता है?
क्या परिस्थिति आते ही देहभान एक्टिवेट हो जाता है?
क्या स्मृति सहज चलती रहती है?
सहज अभ्यास विधि
मॉर्निंग:
दिन का स्वमान लें।
आज मैं इस स्वमान का सारा दिन अभ्यास करूंगा।
ड्यूरिंग द डे:
बार-बार छोटी awareness breaks लें।
अपने आप को याद दिलाएं।
मैं आत्मा हूं।
मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं।
नाइट:
चेक करके सोएं।
कितनी देर स्मृति रही?
कहां टूट गई?
स्मृति स्वरूप का वास्तविक अर्थ क्या है?
बाप दादा कहते हैं
30 जनवरी 2010:
स्मृति करने वाले नहीं,
स्मृति स्वरूप बनो।
याद करने में effort है।
स्मृति स्वरूप में being है।
राजयोग केवल meditation session नहीं।
यह जीवन की स्थिति है।
निरंतर awareness है।
कर्म योग
कर्म करते हुए conscious connection।
आज का अभ्यास
आज पूरे दिन चेक करें:
क्या मैं योग कर रहा हूं?
या वास्तव में योगी जीवन जी रहा हूं?
योग तब पूर्ण होता है
जब वह समय विशेष नहीं
स्वभाव बन जाता है।
