Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below
| 05-07-26 |
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
|
रिवाइज: 15-12-10 मधुबन |
मेरे को तेरे में परिवर्तन कर बेफिक्र बादशाह बनो, सेकण्ड में व्यर्थ को बिन्दी लगाने के अभ्यासी बन हर संकल्प और समय को सफल करो
आज चारों ओर के अपने बेफिक्र बादशाह बच्चों को देख रहे हैं। ऐसी बेफिक्र बादशाहों की सभा अभी ही दिखाई देती है क्योंकि अभी ही बाप फिक्र लेके बेफिक्र बादशाह बनाते हैं इसलिए यह सभा इस समय ही आपकी दिखाई देती है। आप सभी सवेरे से उठते तो बेफिक्र स्थिति में स्थित होते हो, खाते पीते, कर्म करते कोई फिक्र नहीं। सोते हैं तो भी बेफिक्र, ऐसे बादशाह और बेफिक्र, उठो सोओ, बेफिक्र, ऐसे अनुभव करते हो? क्योंकि आप सबने बाप को फिक्र देके फखुर ले लिया इसलिए बेफिक्र बादशाह बन गये। अगर चलते हुए कोई फिक्र आ जाता है तो फिक्र क्या बना देता है? फखुर है तो आपके मस्तक में लाइट की चमक चमकती है। अगर फिक्र आ जाता है तो बोझ की टोकरी आ जाती है। बताओ, आपको लाइट की चमक अच्छी लगती है वा बोझ की टोकरी? बेफिकर बादशाह स्वयं को भी प्रिय लगते और जो ऐसी स्थिति में उड़ते हैं, तो उनकी चमकती हुई लाइट देख दूसरों को कितना प्यार आता है इसलिए बापदादा सदा बच्चों को बेफिक्र बादशाह की स्थिति में, इसी स्मृति स्वरूप में टिकाते रहते हैं, इसलिए आप लोगों का चित्र भी भक्त लोग डबल ताजधारी दिखाते हैं। एक लाइट का ताज और दूसरा विकारों को जीतने का बादशाहपन का ताज, डबल ताज दिखाते हैं इसलिए बापदादा सदा हर बच्चे को यही शिक्षा देते हैं, सदा मौज में रहना बहुत सहज है, क्यों सहज है? सिर्फ हद का मेरापन बाप को दे दो। मेरे से तेरा किया तो बेफिक्र बादशाह बन गये। एक ही शब्द का अन्तर है, तेरा मेरा। ते और मे, इस शब्द के अन्तर में बेफिक्र बादशाह बन जाते। सहज है ना! बने हो ना बेफिक्र बादशाह? कि अभी फिक्र रहता है? अगर कभी भी फखुर के बजाए फिक्र आता है तो अन्तर सिर्फ तेरे के बजाए मेरा मानने से फिक्र आता है। तो सभी की प्रैक्टिकल रिजल्ट क्या है? फिक्र दे दिया या बीच-बीच में फखुर छोड़के फिक्र में आ जाते हो? फिक्र आता है कि बेफिक्र ही रहते हो? जो सदा बेफिक्र बादशाह रहता है वह हाथ उठाओ। बेफिक्र बादशाह, पक्का कि कभी-कभी! बेफिक्र बादशाह, हाथ ऊंचा उठाओ। कभी-कभी वाले भी हैं। सेवा का फिक्र वह अलग बात है। लेकिन वह फिक्र औरों को भी बेफिक्र बनाने का साधन है। अपने संस्कार से अगर फिक्र आता है तो उसको उसी समय ही मेरे के बजाए तेरे में चेंज कर दो। बाप को फिक्र दे दो और फखुर ले लो क्योंकि बाप आया ही है बच्चों का फिक्र लेके फखुर देने। तो चेक करो मेरे में कभी-कभी बहुत समय का संस्कार इमर्ज तो नहीं होता है? क्योंकि बापदादा कुछ समय से बच्चों को यह बता रहे हैं कि वर्तमान समय के प्रमाण कभी भी कुछ भी हो सकता है और कभी भी हो सकता है इसलिए हर एक बच्चे को अपने को यह अटेन्शन देना है कि एक सेकण्ड में बिन्दी लगाने चाहो तो लगा सकते हो? मानो कोई भी व्यर्थ संकल्प आ जाता तो बिन्दी द्वारा एक सेकण्ड में व्यर्थ को समाप्त कर सकते हो? इतना अभ्यास है? कि उस समय, समय के सरकमस्टांश प्रमाण पुरुषार्थ करके व्यर्थ को मिटाने की आवश्यकता पड़ेगी! लगाओ बिन्दी और लग जाए क्वेश्चन मार्क, क्यों, क्या, कैसे… उस समय यह सोचते रहे तो आने वाले समय में जो लक्ष्य है बाप के साथ चलेंगे, बाप तो सेकण्ड में चला जायेगा, क्योंकि बिन्दू है और सेकण्ड भी बिन्दू है और फुलस्टॉप भी बिन्दू ही है। तो आपका भी इतना अभ्यास है? इसके लिए अब से इस अभ्यास के अभ्यासी होंगे तो बाप समान श्रीमत का हाथ में हाथ देते हुए अपने घर पहुंच जायेंगे इसलिए बापदादा ने पहले भी सुनाया कि दो बातों का अटेन्शन अण्डरलाइन करो। दो बातें कौन सी?
एक संकल्प का खजाना और दूसरा समय का खज़ाना, खजाने तो बहुत मिले हैं, ज्ञान का खजाना, शक्तियों का खजाना, योग द्वारा जो भी मुख्य सम्पन्न बनने की युक्तियां हैं, सब प्राप्त कराई हैं क्योंकि यह संगम का समय सारे कल्प में अमूल्य विशेष समय है, इस समय ही जितनी प्राप्ति करने चाहो उतनी कर सकते हो क्योंकि यह एक जन्म महान जन्म है। एक जन्म में अनेक जन्मों की प्रालब्ध बनाने का है। संगमयुग का समय एक सेकण्ड भी गंवाना नहीं है। एक सेकेण्ड का कनेक्शन अनेक जन्मों के साथ है। जमा करने का एक वर्ष अनेक वर्षों की प्राप्ति का है इसलिए इस समय की वैल्यू सेकण्ड या मिनट नहीं, एक घण्टा भी महान है, एक सेकण्ड भी महान है। और संकल्प इस संगम के जन्म का विशेष आधार है। देखो, जो योग लगाते हो तो मनमनाभव कहते हो और यह आधार है फाउण्डेशन का। मन का काम ही है संकल्प करना, संकल्प द्वारा ही याद के यात्रा की अनुभूति करते हो। एक दो में भी खास भिन्न-भिन्न संकल्प देके अभ्यास कराते हो ना! तो सब चेक करो – समय की रफ्तार सारे दिन में चलते फिरते कर्म करते, सम्बन्ध में आते अमूल्य रूप से रही? क्योंकि समय अमूल्य है। संकल्प सर्वशक्तिवान बनाता है।
तो बापदादा बार-बार कहते हैं हे बापदादा के लाडले, दिल में बसने वाले बच्चे अब व्यर्थ खाते को समाप्त करो। सफल करो। सफल करना ही सफलता है। एक सेकण्ड गया, यह नहीं सोचो। हर सेकण्ड, हर संकल्प सफल हुआ, इतना अटेन्शन अपने ऊपर रखना ही है। इतना फुलस्टॉप लगाने की चेकिंग करो। अलबेले नहीं बनना। बापदादा ने कहा था लेकिन हमने समझा नहीं, समय को सोचा नहीं, इतना समय फास्ट जा रहा है, जायेगा। अभी अलबेलापन बापदादा हर एक से लेने चाहते हैं। यह नहीं सुनने चाहते कि मैंने समझा नहीं, सोचा नहीं। अभी वर्ष भी नया आने वाला है, तो नया वर्ष शुरू होने के पहले ब्राह्मण संसार से अलबेलापन साथ में आलस्य, आलस्य भी भिन्न-भिन्न प्रकार का है, इसका अभी जो वर्ष पूरा होने में समय पड़ा है, इसमें अभ्यास शुरू करो और जब नया वर्ष शुरू हो तब हिम्मत रख संकल्प करना और इसको विदाई देना। वर्ष के साथ इसको भी विदाई दे देना। दे सकते हो! दे सकते हो? जो दे सकता है वह हाथ उठाओ। (सभी ने हाथ उठाया) वाह! बच्चे वाह! हाथ उठाने में तो बापदादा को खुश बहुत करते हो। बापदादा ने देखा है कि बहुत बच्चों को हाथ उठाने का रिटर्न करना याद रहता है। और कोई याद रखने में भी अलबेले हो जाते हैं। बापदादा से रूहरिहान बहुत अच्छी करते हैं। हो जायेगा, बाबा आप देखना अभी होगा, अभी होगा…। बापदादा भी ऐसे अलबेले बच्चों का सुनके मुस्करा देता है और क्या करे! अच्छा है, सोचते हैं करना है, करना है, करना है… यह बहुत सोचते हैं, लेकिन कर रहे हैं या नहीं कर रहे हैं उसमें चेकिंग में फिर क्या कहेंगे! अलबेले हो जाते हैं।
तो आज चारों ओर के बच्चों को, बापदादा ने सुना तो जो अपने देश में, अपने स्थानों में देखते रहते हैं, वहाँ भी अच्छा दिखाई देता है, सुनाई भी देता है। तो बापदादा सम्मुख आने वाले बच्चों को और अपने स्थानों पर सुनने वाले, देखने वाले बच्चों को यही कहते अभी पुरुषार्थ को, संकल्प को और संगम के समय को अण्डरलाइन लगाओ। सभी बच्चे प्यार में तो मैजारिटी पास हैं। प्यार के आधार पर अपनी अच्छी प्रोग्रेस कर रहे हैं। प्यार के कारण, बाप के प्यार का रेसपान्ड मिलने के कारण आगे बढ़ भी रहे हैं लेकिन बाप समझते हैं, जैसे प्यार में अनुभवी बन आगे बढ़ रहे हो ऐसे ही याद की सब्जेक्ट में अनेक जन्मों के विकर्म विनाश करने में और अटेन्शन दो। क्यों? विकर्म विनाश होंगे तो साथ-साथ चलेंगे, नहीं तो पीछे-पीछे आयेंगे और बाप समझता है कि प्यार का रेसपान्ड यह है जो प्यार वाली आत्मा कहे वह करना ही है। बाप चाहता है जब बच्चों का प्यार बाप से है तो साथ रहें। राजधानी में भी ब्रह्मा बाबा के साथ राजधानी में आयें। राजधानी में आना अर्थात् रॉयल फैमली में आये। तख्त पर नहीं बैठें लेकिन रॉयल फैमिली के साथी तो बनें। बापदादा ने पहले भी कहा है इसकी परख कैसे करो! जबसे आप आये हो, जितनी आयु आपकी है ज्ञान की, उतने समय में अगर आप बापदादा के दिलतख्तनशीन रहे हैं तो जो ज्यादा समय दिलतख्त पर रहे हैं, मिट्टी में पांव नहीं रखा है वह उस अनुसार रॉयल फैमिली में नजदीक सम्बन्ध में रहेंगे। रॉयल फैमिली वाले रहेंगे। तो प्यार है, तो प्यार वाले साथ निभाने में पीछे नहीं रहते। जो दिलतख्तनशीन हैं वह द्वापर कलियुग के भी संबंध में रहेंगे। नजदीक रहेंगे इसलिए प्यार निभाने वाले सदा दिलतख्तनशीन रहो और जन्म-जन्म का हक लो, इसलिए बापदादा हर बच्चे को प्यार करते हैं। बाबा ने सर्टीफिकेट दिया कि प्यार की सब्जेक्ट में मैजारिटी पास हैं। अब सब सब्जेक्ट में पास होना ही है। पास होना है, पास रहना है।
पहले बारी जो बच्चे आये हैं वह उठो। पहले बारी आये! आधा क्लास तो नया है। आये हैं, बापदादा आने वालों का स्वागत कर रहे हैं। मुबारक हो। पहली बार आने की मुबारक हो। भले लेट आये हो लेकिन फिर भी टूलेट के पहले आये हो। अभी यह अटेन्शन रखना कि थोड़े समय में तीव्र पुरुषार्थी बन अपना भविष्य जितना बढ़ाने चाहो तीव्र पुरुषार्थ द्वारा आगे बढ़ सकते हो क्योंकि फिर भी अभी भी पुरुषार्थ करने की मार्जिन है। जितना आगे बढ़ने चाहो उतना आगे बढ़ सकते हो। बापदादा और यह दैवी परिवार आपको साथ-साथ आगे बढ़ने का वायब्रेशन देंगे इसलिए आगे बढ़ो, हिम्मत रखो। हिम्मत आपकी और मदद बापदादा और परिवार की, आगे बढ़ो। ठीक है ना! हाँ करो, आगे बढ़ो। अच्छा।
मधुबन निवासियों से:- मधुबन वाले तो लकी हैं, थोड़ा बहुत संगठन को पक्का करके साथी बनाओ और कोई में साथी नहीं बनाना, इसमें एक दो को साथी बनाके पहला नम्बर मधुबन को लेना चाहिए। लेंगे! बीती सो बीती, जो भी हुआ, सबने देखा, सुना और मधुबन वालों को तो बहुत गोल्डन चांस है। मधुबन में सब आ गये। तो मधुबन वाले अगर मिलके, यह नहीं पाण्डव भवन अलग है या कोई और स्थान अलग है, नहीं, मधुबन माना सब एक हैं। तो मधुबन वाले समझते हैं करेंगे! हाथ उठाओ जो करेंगे। सभी ने उठाया, जो समझते हैं करना क्या बड़ी बात है, बापदादा है, दादियां हैं, तो बड़ी बात तो है नहीं। दादियां क्या समझती हैं! मधुबन वाले तो नम्बरवन। अच्छा है, बाबा ने यह करके दिखाने का सबको कहा हुआ है लेकिन मधुबन, मधुबन तो मधुबन है। आप सब वायब्रेशन देना, हो जायेगा, कोई बड़ी बात नहीं है। विघ्न का नाम निशान नहीं। चलो बात हुई कोई, लेनदेन किया, खत्म। कुछ समय पहले जब दादी थी तो एक बारी सभी ने पाठ पक्का किया था हाँ जी का। ना शब्द नहीं, हाँ जी, बहुत अच्छा। तो मधुबन पहला नम्बर जायेगा। बापदादा को मधुबन का फखुर है ना! हर एक ज़ोन का फखुर है, अभी मधुबन सामने आया है लेकिन बापदादा सभी ज़ोन को कहते हैं, हाँ जी, मीठी आत्मा, यह सबका पाठ पक्का है। पक्का है ना? इनाम तो मधुबन को लेना चाहिए। एक सेकण्ड में बीती को बीती कर सकते हो! चलो पुरुषार्थी हैं, हो भी गया लेकिन बीती को बीती कर उड़ो। उड़ने वाले पीछे को छोड़ देते हैं तभी उड़ते हैं। तो बहुत अच्छा।
अभी गुजरात कोई नवीनता करे। बापदादा ने दिल्ली वालों को भी कहा नवीनता करो अभी। बापदादा को समाचार मिला तो अभी यूथ ने विदेश और देश मिलके जो आरम्भ किया है, उसमें अच्छी रिजल्ट हो सकती है। अभी तो इन्वेन्शन शुरू की है, लेकिन भारत या विदेश दोनों ही मिलकर और भी कमाल कर सकते हैं। अभी तो आरम्भ किया है लेकिन दिल्ली वालों ने हिम्मत अच्छी रखी। शुरू किया है अभी विश्व में यह फैल जाए तो विदेश और देश मिलकर एक ब्राह्मण परिवार बना है और विश्व के आगे विश्व को भी एक बनायेंगे। शुरू तो हो गया है, अभी मुस्लिम लोग भी आगे तो बढ़ रहे हैं। लेकिन अब ऐसा बड़ा प्रोग्राम बनाओ जिसमें मुख्य देशों से आयें और विश्व में यह प्रसिद्ध हो तो सब एक पिता के बच्चे आपस में भाई बहन हैं, ब्रदरहुड, सिस्टरहुड यह आवाज फैलता रहे। एक ही स्टेज पर सब तरफ के लोगों का विशेष अनुभव हो। प्लैन तो बना रहे हैं सभी। अभी बेहद में जा ही रहे हैं। सबको मालूम हो तो यह एक गॉड फैमिली है, यह प्रसिद्ध हो। बाकी तो सभी जो भी आते हो, सेवा भी कर रहे हो, स्व पुरुषार्थ भी कर रहे हो और गॉडली कार्य है, यह भी दुनिया के लिए प्रसिद्ध हो जायेगा। एक फैमिली है। अच्छा।
चारों ओर के बच्चों को बापदादा अभी मुबारक दे रहे हैं। हर दिन हर घण्टे आगे बढ़ने की मुबारक हो। समय आपका इन्तजार कर रहा है, आप समय का इन्तजार नहीं करना। आप समय को जितना समीप लाने चाहो समाप्ति को, उतना समाप्ति को समीप ला सकते हो। समय आने पर तैयार होना यह आप ब्राह्मणों का संकल्प नहीं हो, आप समय को समीप लाओ। समय बाप को कहता, अभी ब्राह्मण आत्मायें मुझ समय को समीप लायें। प्रकृति भी बाप को कहती अभी समाप्ति को समीप लाओ। तो बापदादा क्या जवाब दे? क्या जवाब दे? समय आया कि आया, यह कहें! आपकी तरफ से यह जवाब दें? क्या जवाब दें? बोलो। क्या जवाब दें? अभी समाप्ति को समीप लाना अर्थात् स्वयं को सम्पन्न सम्पूर्ण बनाना क्योंकि बापदादा अकेले नहीं जायेगा, बच्चों सहित जायेगा। तो डेट फिक्स करना। कब तक? काम तो दिया है, अब आपस में राय करना। बापदादा जवाब क्या दे, प्रकृति को? प्रकृति बहुत परेशान है। दु:खी आत्मायें बहुत मन में चिल्ला रही हैं। मन्सा सेवा अभी ज्यादा बढ़ाओ। करते हैं मन्सा सेवा लेकिन लगातार बढ़ती रहे, वह और बढ़ाओ क्योंकि प्रकृति और दु:खी आत्मायें बाप के पास आती हैं, चिल्लाती हैं। तो आप उन्हों को कुछ शान्ति या सुख की अनुभूति कराओ। वह एक सेकण्ड की शान्ति भी चाहते हैं, थोड़ी शान्ति दे दो। जैसे भूखा होता है, तो समझता है कि कुछ भी मिल जाए, थोड़ा भी मिल जाए, तो अभी मन्सा सेवा को भी बढ़ाओ। वाचा की तो चल रही है, बापदादा खुश है। अच्छा, बापदादा ने जो होमवर्क दिया वह याद रखना और रखवाना। अच्छा।
बापदादा के दिलतख्तनशीन बच्चों को, विश्व कल्याण के कर्तव्य में सदा आगे बढ़ने वालों को बापदादा दृष्टि देते हुए दिल का प्यार और मुबारक, मुबारक हो.. दे रहे हैं। हर एक बच्चा दूर बैठे भी सम्मुख अनुभव कर रहे हैं और बापदादा सभी बच्चों को दिल में समाते हुए सभी बच्चों से नमस्ते नमस्ते कर रहे हैं।
| वरदान:- | स्नेह और शक्ति रूप के बैलेन्स द्वारा सेवा करने वाले सफलतामूर्त भव जैसे एक आंख में बाप का स्नेह और दूसरी आंख में बाप द्वारा मिला हुआ कर्तव्य (सेवा) सदा स्मृति में रहता है। ऐसे स्नेही-मूर्त के साथ-साथ अभी शक्ति रूप भी बनो। स्नेह के साथ-साथ शब्दों में ऐसा जौहर हो जो किसी का भी हृदय विदीरण कर दे। जैसे माँ बच्चों को कैसे भी शब्दों में शिक्षा देती है तो माँ के स्नेह कारण वह शब्द तेज वा कडुवे महसूस नहीं होते। ऐसे ही ज्ञान की जो भी सत्य बातें हैं उन्हें स्पष्ट शब्दों में दो – लेकिन शब्दों में स्नेह समाया हुआ हो तो सफलतामूर्त बन जायेंगे। |
| स्लोगन:- | सर्वशक्तिमान् बाप को साथी बना लो तो पश्चाताप से छूट जायेंगे। |
ये अव्यक्त इशारे – ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
जैसे सूर्य की किरणें फैलती हैं, वैसे ही मास्टर सर्वशक्तिवान् की स्टेज पर शक्तियों व विशेषताओं रूपी किरणें चारों ओर फैलती अनुभव करें, इसके लिए “मैं मास्टर सर्वशक्तिवान, विघ्न-विनाशक आत्मा हूँ”, इस ऊंचे स्वमान के स्मृति की सीट पर स्थित हो योग को ज्वाला रूप बनाओ तो कोई विघ्न सामने तक भी नहीं आ सकता।
प्रश्न–उत्तर
प्रश्न 1.
बापदादा आज किन बच्चों को देख रहे थे?
उत्तर:
बापदादा चारों ओर के अपने बेफिक्र बादशाह बच्चों को देख रहे थे, जिन्होंने अपनी सभी चिंताएँ बाप को सौंप दी हैं और फखुर (आत्मिक गौरव) का जीवन जी रहे हैं।
प्रश्न 2.
बेफिक्र बादशाह बनने का सबसे सहज उपाय क्या है?
उत्तर:
अपने “मेरेपन” को समाप्त करके हर बात को “तेरा” समझना। जब हम सब कुछ परमात्मा को समर्पित कर देते हैं, तब चिंता समाप्त होकर आत्मा बेफिक्र बादशाह बन जाती है।
प्रश्न 3.
फिक्र आने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
जब आत्मा किसी वस्तु, व्यक्ति, संबंध या परिस्थिति को “मेरा” मान लेती है, तब फिक्र उत्पन्न होती है। “मेरा” ही चिंता का मूल कारण है।
प्रश्न 4.
बापदादा बच्चों को कौन-सा अभ्यास विशेष रूप से करने के लिए कहते हैं?
उत्तर:
एक सेकण्ड में व्यर्थ संकल्प पर “बिन्दी” लगाने का अभ्यास। अर्थात व्यर्थ विचार आते ही उन्हें तुरंत समाप्त कर देना।
प्रश्न 5.
बापदादा ने किन दो खजानों को विशेष रूप से संभालने की शिक्षा दी?
उत्तर:
पहला—संकल्पों का खजाना।
दूसरा—समय का खजाना।
इन दोनों का सफल उपयोग ही श्रेष्ठ पुरुषार्थ है।
प्रश्न 6.
संगमयुग का प्रत्येक सेकण्ड अमूल्य क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि इसी एक जन्म में अनेक जन्मों की श्रेष्ठ प्रालब्ध बनाई जाती है। प्रत्येक सेकण्ड भविष्य के अनेक जन्मों का आधार बनता है।
प्रश्न 7.
व्यर्थ संकल्पों का सही उपयोग क्या है?
उत्तर:
उन्हें समाप्त करके प्रत्येक संकल्प और प्रत्येक क्षण को सेवा, योग, ज्ञान तथा शुभ कार्यों में सफल बनाना।
प्रश्न 8.
बापदादा किस आलस्य को समाप्त करना चाहते हैं?
उत्तर:
अलबेलापन, टालमटोल और “बाद में करेंगे” जैसी प्रवृत्ति को समाप्त करके तुरंत पुरुषार्थ करने की आदत विकसित करना।
प्रश्न 9.
बापदादा के अनुसार प्यार की सच्ची पहचान क्या है?
उत्तर:
यदि बाप से सच्चा प्यार है, तो उसकी श्रीमत पर चलना, साथ निभाना और सम्पूर्ण बनने का पुरुषार्थ करना ही सच्चा प्यार है।
प्रश्न 10.
दिलतख्तनशीन आत्मा किसे कहा गया है?
उत्तर:
जो निरंतर बाप की याद में स्थित रहती है, व्यर्थ से मुक्त रहती है और अपने जीवन में श्रीमत को धारण करती है, वही दिलतख्तनशीन आत्मा है।
प्रश्न 11.
बापदादा ने मधुबन निवासियों को कौन-सी विशेष शिक्षा दी?
उत्तर:
संगठन की शक्ति बढ़ाने, एकता बनाए रखने तथा “हाँ जी” की भावना से मिलकर पहला नम्बर लेने की प्रेरणा दी।
प्रश्न 12.
विश्व सेवा के लिए बापदादा ने कौन-सी नवीनता का संकेत दिया?
उत्तर:
विश्व के विभिन्न देशों और धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर “एक परमपिता–एक परिवार” का संदेश पूरे विश्व में फैलाने की प्रेरणा दी।
प्रश्न 13.
आज के समय में मन्सा सेवा बढ़ाने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि संसार की दुखी आत्माएँ और प्रकृति शांति एवं शक्ति की पुकार कर रही हैं। इसलिए शक्तिशाली शुभ संकल्पों द्वारा विश्व को शांति का अनुभव कराना आवश्यक है।
प्रश्न 14.
सफल सेवाधारी बनने का रहस्य क्या है?
उत्तर:
स्नेह और शक्ति का संतुलन। ज्ञान सत्य हो, लेकिन शब्दों में प्रेम, करुणा और अपनापन भी समाया हो।
प्रश्न 15.
आज की मुरली का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर:
“मेरे” को “तेरे” में बदलो, हर व्यर्थ संकल्प पर तुरंत पूर्णविराम लगाओ, समय और संकल्प के खजाने को सफल बनाओ तथा बेफिक्र बादशाह बनकर विश्व कल्याण की सेवा में निरंतर आगे बढ़ो।
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