AW.D.S.-02/“अमृतवेले – प्राप्त दिव्य सन्देश :- अटल और अखण्ड – यह सौगात बुद्धि रूपी तिजोरी में सम्भालकर रखना”
“अमृतवेले – प्राप्त दिव्य सन्देश :- अटल और अखण्ड – यह सौगात बुद्धि रूपी तिजोरी में सम्भालकर रखना”
आज जब वतन में गई तो सभी बच्चों की ओर से बाबा को यादप्यार दी और अर्जी डाली। ब्रह्मा बाबा को भी अर्जी डाली। तो ब्रह्मा बाबा यही बोले कि मेरा हाथ तो शिवबाबा के पास है। जो करायेंगे हम वही करेंगे। हमने शिवबाबा से बोला – बाबा, इतने सभी आपके बच्चे हैं, आप सभी आशायें पूर्ण करने वाले हो। बाबा एक आश हमारी पूर्ण कर दो। तो बाबा ने फौरन एक डाल दिखाई जिसके बीच में लिखा हुआ था – भावी टाले नाहिं टले। तो हमने बाबा को कहा अगर यही भावी है तो सभी बच्चे जो इकट्ठे हुए हैं वे शिवबाबा और ब्रह्मा बाबा दोनों से मिलना चाहते हैं। बापदादा ने कहा जैसे हमेशा बापदादा बच्चों से मिलते हैं वैसे आज भी बच्चों से मिलेंगे। फिर शिवबाबा ने ब्रह्मा बाबा से कहा कि आपकी क्या राय है। शिवबाबा ने कहा कि जब बच्चा बड़ा होता है तो बाप और बच्चा समान होता है। तो मैं भी मुरब्बी बच्चे की राय बिना कुछ नहीं कर सकता हूँ। पहले बाप फिर बच्चा, अभी है पहले बच्चा फिर बाप। तो यही वतन में देखा। दोनों ही एक समान और एक दो के बहुत स्नेह और प्रेम में थे। जैसे दो मित्र मिलते हैं, ऐसे ही बाप-दादा दोनों की आपस में रूहरूहान की सीन दिखाई दे रही थी। ब्रह्मा बाबा कहे जो आज्ञा और शिवबाबा कहे जो बच्चे की राय। दोनों ही मुस्करा रहे थे। हमने कहा एक सेकेण्ड के लिए बच्चों से मुलाकात करके आइये। उस समय दोनों की तरफ देखा तो आंखों से ऐसा लगा कि जो शिवबाबा ने कहा वह ब्रह्मा बाबा को मंजूर था।
(तत्पश्चात बापदादा गुलजार सन्देशी के तन में पधारे – और महावाक्य उच्चारण किये)
“आपको आकारी बनाने बापदादा अभी भी कायम है और कायम रहेगा। अभी बापदादा आप रूहानी रत्नों से मिल विदाई लेते हैं फिर मिलेंगे। जो होता है उसमें कल्याण हैं। बापदादा और कल्याण। और कोई शब्द नहीं।”
(सन्देशी के वापस आने पर वतन का सन्देश)
बाबा ने कहा – प्यार और याद। जैसे इस समय हर एक के अन्दर बाबा देखकर आये हैं। ऐसे ही याद और प्यार हमेशा कायम रखेंगे। यह याद और प्यार जैसे कि एक रस्सी है। उस रस्सी को कायम रखना है। इस रस्सी के जरिये बीच में मिलते रहेंगे। बाबा ने कहा स्थापना का कार्य जो और जैसे आदि से चला है अन्त तक ऐसे ही चलेगा। अन्तर नहीं। जिन बच्चों को बाबा निमित्त रखते हैं उन्हों द्वारा बापदादा सभी बच्चों को डायरेक्शन देते रहेंगे। और बच्चे अनुभव करते रहेंगे कि कैसे बापदादा की इकट्ठी डायरेक्शन होगी। संगमयुग पर बापदादा दोनों को अलग नहीं होना है। बाबा ने कहा सभी को दो शब्द कहना – अटल और अखण्ड। यह बापदादा दोनों की सौगात है। जैसे कोई बड़े लोग कहाँ जाते हैं तो सौगात देते हैं। ऐसे बापदादा दोनों ही दो शब्दों की सौगात देते हैं अटल और अखण्ड। इसे बुद्धि रूपी तिजोरी में ऐसा रखें जो कितना भी कोई चुराने की कोशिश करे तो भी सौगात साथ रहे। फिर बाबा ने कहा, अब थोडे समय के लिए विदाई लेता हूँ। फिर जैसे-जैसे कार्य होगा डायरेक्शन देता रहूँगा।
अध्याय — 1
वतन में बापदादा से रूह-रूहान
अमृतवेले जब वतन में जाने का अनुभव हुआ, तो सभी बच्चों की ओर से बाबा को याद-प्यार दिया गया और बच्चों की आशाओं को बाबा के सामने रखा गया।
ब्रह्मा बाबा से भी अर्जी की गई। ब्रह्मा बाबा ने बहुत सुंदर भाव व्यक्त किया—
“मेरा हाथ तो शिवबाबा के पास है। जो करायेंगे, हम वही करेंगे।”
इसमें सम्पूर्ण समर्पण और आज्ञाकारिता की भावना दिखाई देती है।
मुख्य सीख
जब बुद्धि परमात्मा के हाथ में समर्पित होती है, तब परिस्थितियों में भी चिंता कम होती है और विश्वास बढ़ता है।
उदाहरण
जैसे कोई बच्चा अपने पिता का हाथ पकड़कर चलता है। उसे रास्ते की पूरी जानकारी नहीं होती, लेकिन विश्वास होता है कि पिता सही दिशा में ले जा रहे हैं।
वैसे ही श्रेष्ठ स्थिति है—
“बाबा जो करायेंगे, वही कल्याणकारी होगा।”
अध्याय — 2
“भावी टाले नाहिं टले” — जो होना है, वह होकर रहता है
जब बाबा के सामने बच्चों की आशा रखी गई तो एक डाल दिखाई गई, जिसके बीच में लिखा था—
“भावी टाले नाहिं टले।”
अर्थात जो भावी निश्चित है, उसे टाला नहीं जा सकता।
लेकिन इसका अर्थ पुरुषार्थ छोड़ देना नहीं है।
बल्कि इसका अर्थ है—
परिस्थिति चाहे जैसी हो, हमें अपनी स्थिति को श्रेष्ठ बनाकर रखना है।
उदाहरण
यदि किसी परिस्थिति को हम तुरंत बदल नहीं सकते, तो कम-से-कम अपनी दृष्टि, वृत्ति, विचार और स्थिति को तो बदल सकते हैं।
परिस्थिति हमारी परीक्षा हो सकती है, लेकिन हमारी प्रतिक्रिया हमारा पुरुषार्थ है।
अध्याय — 3
शिवबाबा और ब्रह्मा बाबा — समानता और स्नेह की रूहानी झलक
वतन में बापदादा की जो झलक दिखाई गई, उसमें दोनों के बीच अत्यंत गहरा स्नेह और प्रेम अनुभव हुआ।
शिवबाबा ने ब्रह्मा बाबा की राय को महत्व दिया।
भाव यह था कि—
पहले बाप, फिर बच्चा; लेकिन अब बच्चा बड़ा हो गया है तो पहले बच्चा, फिर बाप।
यह दृश्य केवल अधिकार का नहीं, बल्कि स्नेह, सम्मान, समानता और रूहानी सहयोग का संदेश देता है।
मुख्य सीख
सच्चा संबंध वह है जहाँ—
- प्रेम हो
- सम्मान हो
- विश्वास हो
- एक-दूसरे की राय का मूल्य हो
- अहंकार न हो
अध्याय — 4
“जो होता है उसमें कल्याण है”
बापदादा ने महावाक्य में कहा—
“जो होता है उसमें कल्याण है।”
यह संगमयुग की बहुत शक्तिशाली स्मृति है।
हर परिस्थिति में यह सोच विकसित करनी है—
“इसमें मेरा कल्याण छिपा हुआ है।”
इससे शिकायत की जगह शक्ति आती है।
उदाहरण
“मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?”
की जगह—
“इस परिस्थिति से मुझे कौन-सी शक्ति और सीख प्राप्त करनी है?”
यही दृष्टिकोण साधारण परिस्थिति को पुरुषार्थ की सीढ़ी बना देता है।
अध्याय — 5
प्यार और याद — एक रूहानी रस्सी
वतन के संदेश में बाबा ने कहा कि जैसे इस समय हर एक बच्चे को बाबा देखकर आए हैं, वैसे ही—
“याद और प्यार हमेशा कायम रखेंगे।”
इस याद और प्यार को एक रस्सी के समान बताया गया।
यह रस्सी हमें बाबा से जोड़े रखती है।
रूहानी Connection
याद → संबंध → शक्ति → अनुभव → सफलता
जब याद कमजोर होती है, तो मन बाहरी परिस्थितियों में उलझने लगता है।
जब याद पक्की होती है, तो परिस्थितियों के बीच भी अंदर से शक्ति अनुभव होती है।
अभ्यास
दिन में कई बार स्वयं से पूछें—
“क्या मेरा Connection बाबा से जुड़ा हुआ है?”
कुछ सेकण्ड रुकें।
स्वयं को चेतन स्वरूप में अनुभव करें।
और बाबा की याद में स्थित हो जाएँ।
अध्याय — 6
स्थापना का कार्य — जैसा आदि, वैसा अन्त तक
बाबा ने स्पष्ट किया कि स्थापना का कार्य—
“जो और जैसे आदि से चला है, अन्त तक ऐसे ही चलेगा।”
अर्थात कार्य में निरंतरता रहेगी।
जिन बच्चों को बाबा निमित्त बनाते हैं, उनके द्वारा भी बापदादा की डायरेक्शन बच्चों तक पहुँचती रहेगी।
मुख्य शिक्षा
व्यक्ति बदल सकते हैं, परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन—
ईश्वरीय कार्य और श्रेष्ठ उद्देश्य की दिशा बनी रहती है।
इसलिए हमें व्यक्ति विशेष पर निर्भर होने के बजाय ईश्वरीय कार्य और बाबा की श्रीमत से अपना संबंध मजबूत रखना है।
अध्याय — 7
बापदादा की दो शब्दों की सौगात
अब आता है इस पूरे संदेश का सबसे महत्वपूर्ण भाग।
बापदादा ने सभी बच्चों को दो शब्दों की सौगात दी—
अटल और अखण्ड
अटल
अटल अर्थात — अपने श्रेष्ठ संकल्प, विश्वास और स्थिति में दृढ़।
परिस्थितियाँ बदलें, लोग बदलें, वातावरण बदले—
लेकिन हमारी स्थिति न बदले।
उदाहरण
यदि किसी ने संकल्प किया—
“मुझे हर परिस्थिति में शांत रहना है।”
तो किसी के क्रोध करने पर हमारा मन भी क्रोध में न आ जाए।
यही है—
अटल स्थिति।
अखण्ड
अखण्ड अर्थात — निरंतर, बिना टूटे हुए।
याद का संबंध बीच-बीच में टूटता न रहे।
ज्ञान, योग, पवित्रता और श्रेष्ठ संस्कारों की धारा निरंतर चलती रहे।
उदाहरण
केवल सुबह योग करना और बाकी दिन देह-अभिमान में रहना पर्याप्त नहीं।
श्रेष्ठ पुरुषार्थ यह है कि—
अमृतवेले से लेकर दिन के अंत तक बाबा की याद का संबंध बना रहे।
अध्याय — 8
बुद्धि रूपी तिजोरी में सम्भालकर रखना
बाबा ने इन दो शब्दों को ऐसी सौगात बताया जिसे—
“बुद्धि रूपी तिजोरी में ऐसा रखें जो कितना भी कोई चुराने की कोशिश करे तो भी सौगात साथ रहे।”
कितनी सुंदर उपमा है!
हम बाहरी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए लॉकर रखते हैं।
लेकिन बाबा हमें कहते हैं—
सबसे मूल्यवान खजाना बुद्धि की तिजोरी में रखो।
उस खजाने के दो हीरे हैं—
अटल
अखण्ड
स्वयं से प्रश्न
- क्या मेरा विश्वास अटल है?
- क्या मेरी याद अखण्ड है?
- क्या परिस्थिति आने पर मेरी स्थिति बदल जाती है?
- क्या दूसरों के संस्कार मेरी स्थिति को प्रभावित कर देते हैं?
- क्या मेरा बाबा से Connection निरंतर बना रहता है?
अध्याय — 9
“संगमयुग पर बापदादा दोनों को अलग नहीं होना है”
इस संदेश की एक बहुत गहरी भावना है—
बापदादा का संबंध और सहयोग बना रहेगा।
इसलिए बच्चों को भी यह अनुभव करना है कि—
बाबा से हमारा संबंध कभी टूटे नहीं।
शरीर की दूरी संबंध की दूरी नहीं है।
सच्ची याद में—
रूहानी मिलन का अनुभव होता है।
अमृतवेले का विशेष अभ्यास
सुबह शांत होकर बैठें।
धीरे-धीरे अपने विचारों को स्थिर करें और अनुभव करें—
“मैं चेतन स्वरूप हूँ।”
फिर बाबा को याद करें।
मन में दृढ़ संकल्प करें—
“मेरी स्थिति अटल है।”
“मेरी याद अखण्ड है।”
“जो होता है उसमें कल्याण है।”
“बाबा के साथ मेरा संबंध सदा कायम है।”
कुछ समय इसी अनुभव में स्थित रहें।
आज की मुख्य सीख
चार Powerful Points
जो होता है उसमें कल्याण है।
याद और प्यार की रस्सी कायम रखनी है।
बाबा की डायरेक्शन पर विश्वास रखना है।
“अटल और अखण्ड” को बुद्धि रूपी तिजोरी में सुरक्षित रखना है।
Murli / Divine Message Notes
दिनांक: 09-09-2026
विषय: अमृतवेले प्राप्त दिव्य संदेश
मुख्य विषय: अटल और अखण्ड
मुख्य स्मृति-वाक्य
“अटल और अखण्ड — यह बापदादा दोनों की सौगात है।”
विशेष अभ्यास
याद और प्यार की रूहानी रस्सी को कायम रखना।
विशेष धारणा
“जो होता है उसमें कल्याण है।”
बुद्धि की तिजोरी
अटल + अखण्ड = स्थिरता + निरंतरता
आज का संकल्प
“मैं हर परिस्थिति में अटल रहूँगा/रहूँगी और बाबा की याद में अखण्ड रहूँगा/रहूँगी।”
अटल रहो।
अखण्ड रहो।
बाबा से जुड़े रहो।
और हर परिस्थिति में कल्याण देखो।
Disclaimer
यह वीडियो आध्यात्मिक चिंतन, आत्मिक उन्नति और राजयोग अभ्यास के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें दिए गए विचार 09-09-2026 के प्रस्तुत दिव्य संदेश/मुरली कंटेंट पर आधारित व्याख्या एवं प्रस्तुति हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था, धर्म या परंपरा की आलोचना करना नहीं है। दर्शक इन शिक्षाओं को अपने आध्यात्मिक अभ्यास और व्यक्तिगत समझ के अनुसार ग्रहण करें।
“अटल और अखण्ड — बापदादा की अमूल्य सौगात” | 09-09-2026
1. बापदादा ने बच्चों को कौन-सी दो शब्दों की सौगात दी?
उत्तर: अटल और अखण्ड।
2. “अटल” का क्या अर्थ है?
उत्तर: परिस्थिति कैसी भी हो, अपनी श्रेष्ठ स्थिति, विश्वास और संकल्प में दृढ़ रहना।
3. “अखण्ड” का क्या अर्थ है?
उत्तर: निरंतर और बिना टूटे हुए बाबा की याद तथा श्रेष्ठ स्थिति में रहना।
4. “अटल और अखण्ड” की सौगात को कहाँ सम्भालकर रखना है?
उत्तर: बुद्धि रूपी तिजोरी में।
5. ब्रह्मा बाबा ने क्या कहा कि उनका हाथ किसके पास है?
उत्तर: शिवबाबा के पास।
6. ब्रह्मा बाबा ने कहा कि वे क्या करेंगे?
उत्तर: जो शिवबाबा करायेंगे, वही करेंगे।
7. बाबा ने भावी के विषय में कौन-सा संदेश दिया?
उत्तर: “भावी टाले नाहिं टले।”
8. बापदादा ने बच्चों को कौन-सा विश्वास दिलाया?
उत्तर: जो होता है उसमें कल्याण है।
9. बापदादा ने याद और प्यार को किसके समान बताया?
उत्तर: एक रस्सी के समान।
10. उस रूहानी रस्सी को क्या करना है?
उत्तर: हमेशा कायम रखना है।
11. इस रस्सी के द्वारा बच्चे किससे जुड़े रहेंगे?
उत्तर: बाबा से रूहानी संबंध और मिलन का अनुभव करते रहेंगे।
12. स्थापना का कार्य आदि से अन्त तक कैसा चलेगा?
उत्तर: जैसे आदि से चला है, वैसे ही अन्त तक चलेगा—अन्तर नहीं होगा।
13. बाबा बच्चों को डायरेक्शन किनके द्वारा देते रहेंगे?
उत्तर: जिन्हें बाबा निमित्त बनाते हैं, उनके द्वारा।
14. संगमयुग पर बापदादा के बारे में क्या कहा गया?
उत्तर: बापदादा दोनों को अलग नहीं होना है।
15. बापदादा की सौगात को कोई चुराने की कोशिश करे तो क्या करना है?
उत्तर: उसे बुद्धि रूपी तिजोरी में इतना सुरक्षित रखना है कि वह हमारे साथ ही रहे।
16. “जो होता है उसमें कल्याण है” यह स्मृति हमें क्या सिखाती है?
उत्तर: हर परिस्थिति में चिंता और शिकायत के बजाय कल्याण और सीख को देखने की दृष्टि रखनी है।
17. बाबा ने बच्चों को हमेशा क्या कायम रखने की प्रेरणा दी?
उत्तर: प्यार और याद।
18. अटल और अखण्ड बनने के लिए मुख्य आधार क्या है?
उत्तर: बाबा की याद, विश्वास और श्रेष्ठ स्थिति में निरंतरता।
19. अमृतवेले का मुख्य संकल्प क्या होना चाहिए?
उत्तर: “मैं हर परिस्थिति में अटल रहूँगा/रहूँगी और बाबा की याद में अखण्ड रहूँगा/रहूँगी।”
20. 09-09-2026 के दिव्य संदेश की सबसे मुख्य शिक्षा क्या है?
उत्तर: “अटल रहो, अखण्ड रहो, बाबा से जुड़े रहो और हर परिस्थिति में कल्याण देखो।”
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