28-07-2025/Read today’s Murli in big letters, listen and contemplate

28-07-2025/आज की मुरली बड़े-बड़े अक्षरों में पढ़े सुनें और मंथन करे

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( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

“विश्व में शान्ति कहाँ और कब थी? | लक्ष्मी-नारायण का राज और ब्राह्मण आत्माओं की भूमिका |


 सब विश्व में शान्ति चाहते हैं, पर नहीं जानते कि कब थी

आज विश्व में हर जगह एक ही आवाज़ सुनाई देती है – “विश्व में शान्ति चाहिए।”
देशों की बैठकें, यज्ञ, रैली – सबका उद्देश्य शान्ति प्राप्त करना है।
परन्तु प्रश्न यह है: क्या कभी विश्व में शान्ति थी?
कब थी? कहाँ थी? और किसने स्थापन की थी?
इसका सच्चा उत्तर किसी के पास नहीं।
परन्तु तुम मीठे ब्राह्मण बच्चे जानते हो – विश्व में शान्ति थी जब लक्ष्मी-नारायण का राज्य था।


 1. सत्य युग में शान्ति: लक्ष्मी-नारायण का स्वर्णिम राज्य

  • भारत में जब आदि सनातन देवी-देवता धर्म था, एक ही धर्म था – शान्ति, सुख और समृद्धि का धर्म।

  • लक्ष्मी-नारायण का वह राज्य था जब विश्व एक था।

  • वह समय 5000 वर्ष पहले का था – जब स्वर्ग था।

  • आज भी उनके मन्दिर बनते हैं, परन्तु उस यथार्थ शान्ति की स्मृति को कोई नहीं जानता।
    📖 Murli Reference: “विश्व में शान्ति तब थी जब लक्ष्मी-नारायण का राज्य था।”


2. अब शान्ति की स्थापना कैसे हो रही है?

  • आज की दुनिया में युद्ध की आशंका है, इसलिए यज्ञ रचाए जाते हैं।

  • लेकिन सत्य शान्ति की स्थापना होती है केवल रूद्र ज्ञान यज्ञ द्वारा – जो रूद्र शिव बाबा ने रचा है।

  • यह यज्ञ है ज्ञान और योग का, जिसमें आत्मा की पवित्रता से ही विश्व परिवर्तन होगा।

  • सतयुग फिर से आ रहा है – नई दुनिया, नया भारत बन रहा है।


3. ब्राह्मण आत्माएँ ही विश्व परिवर्तन की निमित्त

  • तुम ब्राह्मण आत्माएँ प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा रची गई शिव की संतान हो।

  • तुम्हारी बुद्धि में अविनाशी ज्ञान रत्न भरे हुए हैं।

  • तुम्हारा कार्य है शान्ति की स्थापना – इसलिए तुम्हारा स्वभाव भी शान्त और मीठा होना चाहिए।

  • व्यवहार, बोल-चाल, और सेवा – सब में रॉयल्टी होनी चाहिए।
    📖 Murli: “शान्ति स्थापन करने वाले बच्चों को पहले स्वयं में बहुत शान्ति चाहिए।”


 4. पुरुषार्थ ही भविष्य का आधार

  • बाबा ने कहा – जितना पुरुषार्थ, उतना ऊंच पद।

  • जो ज्यादा याद में रहेंगे, ज्यादा सेवा करेंगे, वही बनेंगे राजा।

  • याद नहीं करेंगे, तो विकर्म विनाश नहीं होंगे, और सज़ा खानी पड़ेगी।

  • चार्ट रखना, बाबा को याद करना, और श्रेष्ठ संकल्प रखना – यही आत्मिक कमाई है।


 5. याद की शक्ति ही विजय का आधार

  • माया के तूफान तब आते हैं जब याद नहीं होती।

  • याद में न रहने से ही आत्मा अशान्त रहती है।

  • बाप बार-बार कहते हैं – “बच्चे, सवेरे स्नान करके एकान्त में बैठो और याद की कमाई करो।”

  • यही शक्ति अन्त समय में रक्षा करेगी।
    📖 Murli: “याद में रहकर ही आत्मा सतोप्रधान और शान्त बनती है।”


 6. विश्व की वास्तविक इतिहास और तुम्हारा रोल

  • तुम जानते हो 84 जन्मों का चक्र।

  • भारत पहले था पारसपुरी, फिर बना पत्थरपुरी

  • श्रीकृष्ण और राधे ही लक्ष्मी-नारायण बनते हैं।

  • वही विश्व का पहला प्रिन्स था – जब विश्व में पूर्ण शान्ति थी।
    📖 Murli: “श्रीकृष्ण भगवान नहीं, विश्व का प्रिन्स था।”


 7. पवित्रता का महत्व: शिवशक्ति सेना की भूमिका

  • ब्राह्मण भाई-बहन पवित्र रहते हैं, इसलिए उनका मान-सम्मान होता है।

  • कन्याओं का आदर इसलिए होता है क्योंकि वे शिवशक्ति हैं।

  • यही शिवशक्ति पाण्डव सेना है जो विश्व में शान्ति ला रही है।

  • पवित्रता की शक्ति से ही स्वराज्य की स्थापना होगी।


 8. बाबा की विशेष शिक्षा: समय का मूल्य और चार्ट

  • बाबा कहते हैं: “तुम्हारा हर सेकण्ड बहुत मूल्यवान है।”

  • अगर आप समय व्यर्थ करेंगे, तो यह घाटा जन्मों-जन्मान्तर का हो सकता है।

  • सेवा करते जाओ – लिटरेचर बाँटो, ट्रेन में समझाओ, कार्ड छपवाओ।

  • “जब लक्ष्मी-नारायण का राज्य था, तब विश्व में शान्ति थी – अब वही स्थापना हो रही है।”


 धारणा के लिए मुख्य सार:

  1. हम विश्व में शान्ति स्थापन करने के निमित्त ब्राह्मण हैं, हमें बहुत-बहुत शान्तचित रहना है, बातचीत बहुत आहिस्ते वा रॉयल्टी से करनी है।

  2. अलबेलापन छोड़ याद की मेहनत करनी है। कभी भी होपलेस नहीं बनना है।


 वरदान:

“पेपर में घबराने के बजाए फुल स्टॉप देकर फुल पास होने वाले सफलतामूर्त भव।”
 फुलस्टॉप देने वाला, फुल पास होगा।
 बिन्दी की स्टेज का अनुभव कर सफलता के सितारे बनो।


 स्लोगन:

“स्वउन्नति करनी है तो क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन का त्याग कर अपना कनेक्शन ठीक रखो।”


 अव्यक्त इशारा:

“संकल्पों की शक्ति जमा कर श्रेष्ठ सेवा के निमित्त बनो।”
 अन्त समय में मनसा शक्ति ही सेफ्टी बनेगी।


 आज तुम बच्चे जानते हो:

“विश्व में शान्ति थी, है और फिर से होगी – परन्तु स्थापना होगी शिवबाबा के ज्ञान और तुम्हारी योग-शक्ति से।”

तो अब संकल्प लो — स्वयं को शान्त बनाकर, विश्व में शान्ति की स्थापना के कार्य में लग जाएं।
यही है सच्ची सेवा, यही है आत्म उत्थान का मार्ग।

प्रश्न 1:
आज की दुनिया में हर कोई शान्ति चाहता है, लेकिन क्या वे जानते हैं कि विश्व में शान्ति कब और कहाँ थी?
उत्तर:
नहीं, कोई नहीं जानता कि वास्तव में विश्व में शान्ति कब और कहाँ थी। लेकिन ब्राह्मण आत्माएँ जानती हैं कि विश्व में शान्ति तब थी जब सत्य युग में लक्ष्मी-नारायण का राज्य था।


 1. सत्य युग में शान्ति

प्रश्न 2:सत्य युग में किसका राज्य था और उस समय समाज की क्या विशेषता थी?
उत्तर:सत्य युग में लक्ष्मी-नारायण का राज्य था। उस समय केवल एक ही धर्म था – आदि सनातन देवी-देवता धर्म। समाज में शान्ति, सुख और समृद्धि थी।

प्रश्न 3:लक्ष्मी-नारायण का राज्य कब था?
उत्तर:लगभग 5000 वर्ष पहले, सत्य युग में, जब यह धरती स्वर्ग थी।


 2. अब शान्ति की स्थापना कैसे हो रही है?

प्रश्न 4:आज की दुनिया में शान्ति की स्थापना के लिए कौन-सा विशेष यज्ञ चल रहा है?
उत्तर:आज रूद्र ज्ञान यज्ञ चल रहा है, जिसे रचने वाले हैं रूद्र शिव बाबा। इस यज्ञ द्वारा ही आत्मिक शुद्धि और विश्व परिवर्तन हो रहा है।

प्रश्न 5:इस यज्ञ की विशेषता क्या है?
उत्तर:यह यज्ञ ज्ञान और योग का है, जिसमें आत्मा की पवित्रता के द्वारा सत्य युग की पुनः स्थापना होती है।


 3. ब्राह्मण आत्माओं की भूमिका

प्रश्न 6:ब्राह्मण आत्माओं की विशेषता क्या है?
उत्तर:ब्राह्मण आत्माएँ शिव बाबा की संतान हैं, जिनकी बुद्धि में अविनाशी ज्ञान भरा है। वे विश्व में शान्ति स्थापन के निमित्त हैं। उनका स्वभाव शान्त, मीठा और रॉयल होना चाहिए।

प्रश्न 7:बाबा ने शान्ति स्थापन के लिए कौन-सी सलाह दी है?
उत्तर:बाबा ने कहा है – “शान्ति स्थापन करने वाले बच्चों को पहले स्वयं में बहुत शान्ति चाहिए।”


 4. पुरुषार्थ और याद की शक्ति

प्रश्न 8:बाबा के अनुसार ऊँच पद पाने के लिए क्या करना आवश्यक है?
उत्तर:जितना ज्यादा पुरूषार्थ और बाबा की याद में रहेंगे, उतना ऊँच पद मिलेगा। याद से विकर्म विनाश होते हैं।

प्रश्न 9:माया के तूफान क्यों आते हैं और उनसे बचने का उपाय क्या है?
उत्तर:जब आत्मा याद में नहीं रहती, तब माया के तूफान आते हैं। याद की शक्ति से ही आत्मा सतोप्रधान और विजयशील बनती है।


 6. विश्व का इतिहास और श्रीकृष्ण

प्रश्न 10:भारत पहले क्या था और अब क्या बन गया है?
उत्तर:भारत पहले था पारसपुरी (स्वर्ग), और अब बन गया है पत्थरपुरी (नरक)।

प्रश्न 11:श्रीकृष्ण का वास्तविक परिचय क्या है?
उत्तर:श्रीकृष्ण भगवान नहीं, बल्कि सत्य युग का पहला प्रिन्स था, जो बाद में लक्ष्मी-नारायण बना।


 7. पवित्रता और शिवशक्ति सेना

प्रश्न 12:शिवशक्ति सेना का कार्य क्या है?
उत्तर:शिवशक्ति सेना – अर्थात ब्राह्मण बहनें – पवित्रता के बल से विश्व में शान्ति ला रही हैं। यह पाण्डव सेना विश्व परिवर्तन में निमित्त है।


 8. समय का मूल्य और सेवा

प्रश्न 13:बाबा समय के बारे में क्या कहते हैं?
उत्तर:बाबा कहते हैं – “तुम्हारा हर सेकण्ड बहुत मूल्यवान है। अगर समय व्यर्थ गया, तो घाटा जन्मों-जन्मान्तर का होगा।”

प्रश्न 14:आज कौन-सी सेवा आवश्यक है?
उत्तर:आज की सबसे बड़ी सेवा है – बाबा का सन्देश फैलाना, लिटरेचर बाँटना, ज्ञान का प्रचार करना और मनसा सेवा करना।


 धारणा (Personal Practice)

प्रश्न 15:बाबा ने किस प्रकार के व्यवहार की सलाह दी है?
उत्तर:बाबा ने कहा – ब्राह्मणों का स्वभाव बहुत शान्त और रॉयल होना चाहिए। बातचीत, सेवा और संकल्पों में श्रेष्ठता होनी चाहिए।

प्रश्न 16:याद में नहीं रहना, समय गँवाना — इसका परिणाम क्या होता है?
उत्तर:ऐसे आत्माओं को अन्त में सज़ा खानी पड़ती है और ऊँच पद नहीं मिलता।


 वरदान और  स्लोगन

प्रश्न 17:बाबा ने पेपर से पास होने के लिए क्या वरदान दिया है?
उत्तर:“फुलस्टॉप देने वाला, फुल पास होगा।” अर्थात घबराने की बजाय बिन्दी बनकर स्थित रहना ही सफलता का मार्ग है।

प्रश्न 18:आत्म उन्नति के लिए कौन-से तीन ‘त्याग’ आवश्यक हैं?
उत्तर:क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन का त्याग करके, अपने कनेक्शन को ठीक करना आवश्यक है।

DISCLAIMER:
यह वीडियो Brahma Kumaris संस्था के आध्यात्मिक ज्ञान और Murli teachings पर आधारित है। इसका उद्देश्य शान्ति, पवित्रता और आत्मिक जागृति के मूल्यों को प्रचारित करना है। यह किसी भी धर्म, मत या सम्प्रदाय के विरोध में नहीं है। कृपया इसे एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें और आत्म-चिंतन करें।

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