(28)Who are the divine parents?

S-B:-(28)कौन है ईश्वरीय मांबाप?

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28वाँ विषय: कौन है ईश्वरीय मांबाप?

ब्रह्मा बाबा और जगदंबा मम्मा — ईश्वरीय परिवार की दिव्य नींव**


 अध्याय 1: दिव्य परिवार का आरंभ — “कौन हैं ईश्वरीय मांबाप?”

ओम शांति।
दुनिया पूछती है—
“ईश्वर का परिवार कौन है? दिव्य मांबाप कौन हैं?”

धर्मग्रंथों में माता–पिता के चित्र तो मिलते हैं, परंतु सच्चा आध्यात्मिक अर्थ सिर्फ संगमयुग की मुरलियों में स्पष्ट होता है।

ब्रह्मा बाबा हमारे पिता
जगत अंबा मम्मा हमारी माता।
इन्हीं के द्वारा ईश्वरीय ब्राह्मण कुल की स्थापनाएं होती हैं।

यही है Father–Mother of the Divine Family


 अध्याय 2: ब्रह्मा बाबा — ईश्वरीय पिता क्यों?

परमात्मा शिव, ब्रह्मा बाबा के तन का उपयोग करते हैं और ब्राह्मण सृष्टि रचते हैं।
इसलिए उन्हें कहा गया:

Divine Father… Spiritual Father… ज्ञान का जन्म देने वाले।

🕉 Murli Note (Sakar Murli – 6 March 1968)

“शिव बाबा ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण रचते हैं।
जन्म देने वाला पिता प्यारा, पर ज्ञान देने वाला उससे भी महान।”

ब्रह्मा बाबा हमें देते हैं—

  • दिव्य समझ

  • मर्यादाएँ

  • पवित्रता का आधार

  • जीवन का नया जन्म

उदाहरण:

जैसे एक अनुभवी पिता अपने बच्चों को जीवन की दिशा देता है,
वैसे ही ब्रह्मा बाबा ने हमें देवत्व की दिशा दी —
“मनुष्य से देवता बनने की दिशा।”


अध्याय 3: Jagdamba Mamma — ईश्वरीय माता क्यों?

मातेश्वरी ओम राधे को कहा गया—
जगत अंबा, सरस्वती, ईश्वरीय माता

क्यों?
क्योंकि नई आध्यात्मिक सृष्टि की पहली माता वही बनीं।

🕉 Murli Note (Sakar Murli – 25 May 1969)

“जगदंबा सब माताओं की मुखिया है।
वह बच्चों का पालन करती है।”

मम्मा की विशेषताएँ—

  • ममता

  • तपस्या

  • मर्यादा

  • शिक्षण

  • सत्यता

  • शक्ति

उदाहरण:

जैसे माता बच्चों को संस्कार देती है —
मम्मा ने ब्राह्मण परिवार को
स्थिरता, शक्ति और संस्कारों की शिक्षा दी।


 अध्याय 4: पिता–माता का संयुक्त रूप — “नई दुनिया की नींव”

ईश्वरीय परिवार में दोनों की भूमिकाएँ जरूरी हैं।

🕉 Murli Note (Sakar Murli – 30 August 1968)

“स्थापना मांबाप द्वारा होती है।”

भूमिकाएँ—

ब्रह्मा बाबा (पिता):

  • मर्यादा

  • नियम

  • ज्ञान

  • स्थापना

  • सूर्य समान तेज

जगत अंबा मम्मा (माता):

  • ममता

  • पालन

  • शक्ति

  • संस्कार

  • चंद्रमा समान शीतलता

उदाहरण:

जैसे घर में पिता नियम स्थापित करता है और माता बच्चों को संस्कारित करती है —
वैसे ही ब्रह्मा और मम्मा मिलकर ब्रह्मा-कुमारों की नई दुनिया तैयार करते हैं।


 अध्याय 5: हम ब्रह्मा कुमार–कुमारियाँ क्यों?

क्योंकि हमारा जन्म देह से नहीं—
ज्ञान से हुआ है।

परमपिता शिव ने
ब्रह्मा द्वारा हमें जन्म दिया।

इसलिए हम कहलाए—
Brahma Kumars and Brahma Kumaris
यानी ईश्वरीय परिवार के देवत्व-धारी बच्चे।


 अध्याय 6: पिता–माता संबंध का आध्यात्मिक संदेश

यह दिव्य संबंध हमें सिखाता है—

  • हम ईश्वर द्वारा रचा हुआ आध्यात्मिक परिवार हैं।

  • देह का परिवार अस्थाई,
    पर आत्मा–आत्मा का परिवार जन्म-जन्मांतर तक चलता है।

  • पिता ज्ञान देता है, माता संस्कार देती है।

  • दोनों मिलकर हमें महानता की ऊँचाइयों तक पहुँचाते हैं।

ज्ञान से बदलाव आता है,
माता की ममता से स्थिरता आती है,
और पिता की मर्यादा से जीवन सुरक्षित बनता है।


 सार: ईश्वरीय परिवार — शिव, ब्रह्मा, सरस्वती

  • शिव — परमपिता

  • ब्रह्मा — ईश्वरीय पिता

  • जगदंबा — ईश्वरीय माता

  • और हम — उनके ईश्वरीय बच्चे

इसी त्रिमूर्ति के द्वारा नई दुनिया की स्थापना होती है।


दिव्य परिवार का आरंभ — “कौन हैं ईश्वरीय मांबाप?” (प्रश्न–उत्तर रूप में)


 प्रश्न 1: ईश्वर का परिवार कौन है? दिव्य मांबाप कौन हैं?

✔️ उत्तर:
धर्मग्रंथों में माता-पिता के चित्र मिलते हैं, लेकिन उनका वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ सिर्फ संगमयुग की मुरलियों में स्पष्ट होता है।
ब्रह्मा बाबा हमारे ईश्वरीय पिता और
जगत अंबा मम्मा हमारी ईश्वरीय माता हैं।
इन्हीं के द्वारा ईश्वरीय ब्राह्मण कुल की स्थापना होती है।
इसीलिए इन्हें Father–Mother of the Divine Family कहा जाता है।


अध्याय 2: ब्रह्मा बाबा — ईश्वरीय पिता क्यों?

प्रश्न 2: ब्रह्मा बाबा को ‘ईश्वरीय पिता’ क्यों कहा जाता है?

✔️ उत्तर:
क्योंकि परमात्मा शिव उनके तन का उपयोग करके ब्राह्मण सृष्टि रचते हैं।
इसलिए ब्रह्मा बाबा कहलाते हैं —
Divine Father, Spiritual Father, और ज्ञान का जन्म देने वाले पिता


प्रश्न 3: साकार मुरली ब्रह्मा बाबा के बारे में क्या प्रमाण देती है?

✔️ उत्तर (साकार मुरली – 6 मार्च 1968):
“शिव बाबा ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण रचते हैं।
जन्म देने वाला पिता प्यारा,
पर ज्ञान देने वाला उससे भी महान।”


प्रश्न 4: ब्रह्मा बाबा हमें क्या प्रदान करते हैं?

✔️ उत्तर:
ब्रह्मा बाबा हमें देते हैं—
• दिव्य समझ
• मर्यादाएं
• पवित्रता का आधार
• जीवन का नया जन्म


प्रश्न 5: ब्रह्मा बाबा की भूमिका को कैसे समझें?

✔️ उत्तर (उदाहरण):
जैसे अनुभवी पिता बच्चों को दिशा देता है,
वैसे ही ब्रह्मा बाबा ने हमें
मनुष्य से देवता बनने की दिशा दी।


अध्याय 3: जगदंबा मम्मा — ईश्वरीय माता क्यों?

प्रश्न 6: जगदंबा मम्मा को ‘ईश्वरीय माता’ क्यों कहा जाता है?

✔️ उत्तर:
क्योंकि मातेश्वरी ओम राधे नई आध्यात्मिक सृष्टि की पहली माता बनीं और उन्होंने पूरे ब्राह्मण परिवार को शक्ति, संस्कार और स्थिरता दी।


प्रश्न 7: मुरली जगदंबा मम्मा की क्या विशेषता बताती है?

✔️ उत्तर (साकार मुरली – 25 मई 1969):
“जगदंबा सब माताओं की मुखिया है।
वह बच्चों का पालन करती है।”


प्रश्न 8: मम्मा की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

✔️ उत्तर:
ममता, तपस्या, मर्यादा, शिक्षण, सत्यता और शक्ति।


प्रश्न 9: मम्मा की भूमिका का उदाहरण क्या है?

✔️ उत्तर:
जैसे माता बच्चों को संस्कार देती है,
वैसे ही मम्मा ने ब्राह्मण परिवार को
स्थिरता, शक्ति और संस्कारों की शिक्षा
दी।


अध्याय 4: पिता–माता का संयुक्त रूप — “नई दुनिया की नींव”

प्रश्न 10: ईश्वरीय परिवार में पिता–माता दोनों की भूमिका क्यों आवश्यक है?

✔️ उत्तर:
क्योंकि नई दुनिया की स्थापना
दोनों की संयुक्त शक्ति से होती है।
शिव, ब्रह्मा और सरस्वती त्रिमूर्ति के रूप में स्थापना कार्य पूरा करते हैं।


प्रश्न 11: मुरली इस भूमिका को कैसे समझाती है?

✔️ उत्तर (साकार मुरली – 30 अगस्त 1968):
“स्थापना मांबाप द्वारा होती है।”


प्रश्न 12: ब्रह्मा बाबा और मम्मा की भूमिकाएँ क्या हैं?

✔️ उत्तर:

ब्रह्मा बाबा (पिता):

• मर्यादा
• नियम
• ज्ञान
• स्थापना
• सूर्य समान तेज

जगत अंबा मम्मा (माता):

• ममता
• पालन
• शक्ति
• संस्कार
• चंद्रमा समान शीतलता


प्रश्न 13: उनके संयुक्त कार्य का उदाहरण क्या है?

✔️ उत्तर:
जिस प्रकार घर में पिता नियम व मर्यादा स्थापित करता है
और माता बच्चों के संस्कार बनाती है,
ठीक उसी प्रकार ब्रह्मा और मम्मा मिलकर
ब्रह्मा-कुमारों की नई दुनिया तैयार करते हैं।


अध्याय 5: हम ब्रह्मा कुमार–कुमारियाँ क्यों?

प्रश्न 14: हमें ‘ब्रह्मा कुमार–कुमारी’ क्यों कहा जाता है?

✔️ उत्तर:
क्योंकि हमारा जन्म देह से नहीं,
ज्ञान से हुआ है।
शिवबाबा ने ब्रह्मा द्वारा हमें आध्यात्मिक रूप से जन्म दिया,
इसीलिए हम कहलाते हैं —
Brahma Kumars and Kumaris


अध्याय 6: पिता–माता संबंध का आध्यात्मिक संदेश

प्रश्न 15: पिता–माता के इस दिव्य संबंध का आध्यात्मिक संदेश क्या है?

✔️ उत्तर:
यह संबंध हमें सिखाता है—
• हम ईश्वर द्वारा रचा हुआ आध्यात्मिक परिवार हैं।
• देह के संबंध अस्थाई हैं, आत्मा–आत्मा के संबंध स्थायी।
• पिता ज्ञान देता है, माता संस्कार देती है।
• दोनों मिलकर हमें महानता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं।


सार (Quick Summary Q&A Style)

प्रश्न 16: ईश्वरीय परिवार की त्रिमूर्ति कौन है?

 उत्तर:
शिव — परमपिता
ब्रह्मा — ईश्वरीय पिता
जगदंबा — ईश्वरीय माता
और हम — उनके ईश्वरीय बच्चे

इन्हीं के द्वारा नई दुनिया की दिव्य स्थापना होती है।

Disclaimer:
यह वीडियो ब्रह्माकुमारियों की आध्यात्मिक मुरलियों, अव्यक्त संदेशों और व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है।
इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक शिक्षा, प्रेरणा और स्व-उन्नति है।
किसी भी धर्म, संप्रदाय, व्यक्ति या विचार का विरोध या तुलना करना इसका उद्देश्य नहीं है।

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