(34)Do stars really form? Scientists are also dissatisfied with this question.

विश्व नाटक -(34)क्या तारे सच में बनते हैं? वैज्ञानिक भी इस बात से असंतुष्ट हैं।

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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विश्व नाटक

इसका हम 34वाँ विषय कर रहे हैं।

क्या तारे सच में बनते हैं?

कल हमने इससे पहले वाला विषय किया था कि तारे बादलों और गैस से बनते हैं।
परंतु आज का विषय है — क्या तारे सच में बनते हैं?

वैज्ञानिक भी इस बात से असंतुष्ट हैं।
उनको भी पूरा यकीन नहीं है।

आज हम अन्य वैज्ञानिकों के द्वारा इस विषय को देखेंगे।

विज्ञान बनाम परमात्मा का ज्ञान

आज का नियम है —
एक तरफ विज्ञान है और दूसरी तरफ परमात्मा का ज्ञान।
ब्रह्मा कुमारीज़ मुरली किस प्रकार से अद्भुत तरीके से इसका समाधान करती है।

आज हम एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न को समझने जा रहे हैं।

एक ऐसा प्रश्न जिसके उत्तर पर पूरा आधुनिक विज्ञान टिका हुआ है,
पर जिसे स्वयं वैज्ञानिक भी ठीक से नहीं समझ पाए।

क्या गैस बादल से तारे बन सकते हैं?

क्या यह सिद्धांत वास्तव में काम करता है?
या सिर्फ एक सुंदर कल्पना है?

आम दुनिया इस बात को बिना सोचे मान लेती है।
क्योंकि वैज्ञानिक कह रहे हैं, तो सही होगा।

लेकिन जब आप उनकी खुद की किताबें, शोध और रिपोर्ट पढ़ते हैं,
तो पता चलता है कि वैज्ञानिक खुद भी इस सिद्धांत से संतुष्ट नहीं हैं।

गैस का स्वभाव क्या है?

गैसों का स्वभाव फैलना है, सिकुड़ना नहीं।

जैसे एलपीजी गैस सिलेंडर से बाहर निकलती है तो फैलती है।
उसे खुले वातावरण में कंप्रेस नहीं किया जा सकता।

गैस हमेशा फैलती है, रुकती नहीं।

इसलिए गैस बादल तारा बनने की दिशा में चल ही नहीं सकता।

वैज्ञानिकों की स्वीकारोक्ति

जिन वैज्ञानिकों ने तारा निर्माण का सिद्धांत दिया,
वो खुद भी इससे संतुष्ट नहीं हैं।

विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्पिरजर लिखते हैं —
यह मॉडल अस्थाई है, असंतोषजनक है और समस्याग्रस्त है।

ब्रिज बर्बिज कहते हैं —
तारा निर्माण इतना असंभाव्य लगता है कि यदि तारे होते ही न होते,
तो यह सिद्ध करना आसान होता कि वे बन ही नहीं सकते।

एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका भी कहती है —
तारा निर्माण और गैलेक्सी निर्माण का प्रश्न ब्रह्मांडीय विचारधारा के लिए एक बड़ी चुनौती है।

विज्ञान स्वीकार करता है

विज्ञान स्वयं स्वीकार करता है —
हम तारा निर्माण को सिद्ध नहीं कर सकते।

जहाँ विज्ञान रुक जाता है,
वहाँ परमात्मा का ज्ञान पूर्ण उत्तर देता है।


सृष्टि का सत्य

साकार मुरली 12 फरवरी 1969:

यह सृष्टि अनादि और अनंत है।
इसे किसने बनाया — यह प्रश्न ही नहीं उठता।

सृष्टि हमेशा थी, है और रहेगी।
परिवर्तन होता है, निर्माण नहीं।

जैसे दिन और रात का चक्र चलता रहता है,
वैसे ही सृष्टि का चक्र चलता रहता है।

सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग —
ये चारों युग अनादि काल से चलते आ रहे हैं
और अनंत काल तक चलते रहेंगे।

5000 वर्ष का विश्व नाटक

आप 5000 वर्ष पहले भी इसी स्थान पर थे,
और 5000 वर्ष बाद फिर होंगे।

हर 5000 वर्ष बाद यह सृष्टि हूबहू रिपीट होती है।

कोई भी परमाणु अपने स्थान से इधर-उधर नहीं हो सकता।

तत्वों का सत्य

प्रकृति के पांच तत्व
और विज्ञान के अनुसार 118 तत्व
हमेशा थे, हैं और रहेंगे।

न कोई उन्हें बना सकता है
न कोई नष्ट कर सकता है।

आत्मा, प्रकृति और समय —
इन तीनों से मिलकर यह विश्व नाटक चलता है।


परमात्मा का कार्य

साकार मुरली 15 मार्च 1970
दुनिया बनती नहीं, सिर्फ नई से पुरानी होती है।
फिर परमात्मा आकर पुरानी से नई बना देते हैं।

अव्यक्त मुरली 18 जनवरी 1971
मैं रचना नहीं करता,
सृष्टि को नया रूप देता हूँ।

परमात्मा भौतिक सृजन नहीं करते,
आध्यात्मिक पुनर्निर्माण करते हैं।


निष्कर्ष

✔ तारे उत्पन्न नहीं होते, अवस्था बदलते हैं
✔ ब्रह्मांड बनाया नहीं गया, वह अनादि है
✔ सृष्टि का चक्र 5000 वर्ष का है
✔ परमात्मा सृष्टि को बनाते नहीं, बदलते हैं
✔ विज्ञान असंतुष्ट है, परमात्मा का ज्ञान पूर्ण है