S-B:-(38)मनुष्य शिव बाबा को बुलाते हैं। परंतु ब्रह्मा, विष्णु, शंकर क्यों नहीं बुलाते?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय 38 — शिव बाबा और ब्रह्मा बाबा का रहस्य
मनुष्य शिव बाबा को बुलाते हैं, पर ब्रह्मा-विष्णु-शंकर क्यों नहीं?
भूमिका — एक सूक्ष्म और गूढ़ प्रश्न
पूरी दुनिया एक पुकार लगाती है —
हे शिव बाबा आओ,
हे पतित पावन आओ,
हे दुख हर्ता, सुख कर्ता आओ।
लेकिन एक अद्भुत रहस्य है —
मनुष्य शिव बाबा को बुलाते हैं,
परंतु ब्रह्मा, विष्णु, शंकर कभी नहीं बुलाते।
क्यों?
क्या उन्हें शिव बाबा की आवश्यकता नहीं?
क्या शिव बाबा उनके पिता नहीं?
क्या उन्हें अपने बाप की ज़रूरत नहीं पड़ती?
आज हम इसी गूढ़ रहस्य पर मंथन करेंगे।
मुख्य प्रश्न — आखिर ब्रह्मा, विष्णु, शंकर शिव बाबा को क्यों नहीं बुलाते?
भक्ति मार्ग में इन तीनों की पूजा होती है,
कभी जगदम्बा की आरती करते हुए दिखाए जाते हैं,
पर ज्ञान मार्ग में स्पष्ट होता है —
ये शिव बाबा को बुलाते ही नहीं।
क्योंकि ये बुलाने वाले हैं ही नहीं।
पहली स्पष्टता — ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आत्मा नहीं हैं
मुरली प्रमाण — 09.08.1998 (अव्यक्त मुरली)
“ब्रह्मा, विष्णु, शंकर कोई देहधारी आत्माएँ नहीं हैं।
ये परमात्मा के कार्य की शक्तियाँ हैं।”
ये तीनों आत्माएँ नहीं हैं,
ये शरीर धारण नहीं करते,
ये जन्म-मरण में नहीं आते,
ये कर्म-बंधन में नहीं आते।
जब आत्मा ही नहीं हैं
तो बुलाने का प्रश्न ही नहीं उठता।
बुलाती तो आत्मा ही है।
आत्मा ही क्यों बुलाती है?
हम आत्माएँ —
-
शरीर धारण करती हैं
-
कर्म करती हैं
-
कर्मफल भोगती हैं
-
पतित बनती हैं
-
दुख में जाती हैं
इसलिए पुकारती हैं —
हे परमात्मा आओ, मुझे बदलो।
उदाहरण — बिजली और बल्ब
क्या बल्ब बिजली को बुलाता है?
नहीं।
बिजली आती है तो बल्ब जलता है।
वैसे ही —
ब्रह्मा, विष्णु, शंकर
शिव बाबा की संकल्प शक्ति की अभिव्यक्ति हैं।
वे स्रोत को नहीं बुलाते,
वे स्रोत से प्रकट होते हैं।
ब्रह्मा-विष्णु-शंकर कौन हैं?
ये तीनों कोई व्यक्ति नहीं हैं,
ये तीनों शिव बाबा के कार्य विभाग हैं।
तीन महान कर्तव्य
| शक्ति | कार्य |
|---|---|
| ब्रह्मा | स्थापना की शक्ति |
| विष्णु | पालना की शक्ति |
| शंकर | संहार की शक्ति |
मुरली दृष्टि
ब्रह्मा कोई शरीर नहीं — स्थापना की शक्ति है।
विष्णु कोई व्यक्ति नहीं — संपूर्णता की स्थिति है।
शंकर कोई शरीर नहीं — संहार का संकल्प है।
Murli Notes (प्रमाण सहित)
मुरली प्रमाण — 09.08.1998
“ब्रह्मा, विष्णु, शंकर कोई देहधारी आत्माएँ नहीं हैं।
ये परमात्मा के कार्य की शक्तियाँ हैं।” मुरली प्रमाण — 03.10.1999
“पतित आत्माएँ ही पतित-पावन को पुकारती हैं।
जहाँ कमजोरी है, वहीं पुकार है।”
मुरली प्रमाण — 12.01.1971
“पुकार समाप्त होना ज्ञान की निशानी है।”
मनुष्य शिव बाबा को क्यों बुलाता है?
क्योंकि मनुष्य —
-
आत्मा है
-
कर्म बंधन में है
-
पतित अवस्था में है
-
दुखी है
-
परिवर्तन चाहता है
इसलिए पुकारता है।
ब्रह्मा-विष्णु-शंकर क्यों नहीं पुकारते?
क्योंकि वे —
-
अज्ञान में नहीं हैं
-
दुख में नहीं हैं
-
निर्बल नहीं हैं
-
कर्मबंधन में नहीं हैं
इसलिए उन्हें पुकारने की आवश्यकता नहीं।
अंतिम निष्कर्ष
शिव बाबा एकमात्र आत्मा हैं
ब्रह्मा, विष्णु, शंकर उनकी संकल्प शक्तियाँ हैं
संकल्प अपने स्रोत को नहीं बुलाते
मनुष्य बुलाता है क्योंकि वह परिवर्तन चाहता है
अंतिम संकल्प
मैं पुकार से ऊपर उठकर
शिव बाबा के संकल्प का उपकरण बनूँ।
जैसे ब्रह्मा बाबा की अवस्था बनी,
वैसी ही मेरी अवस्था बने।
समापन संदेश
जहाँ पुकार है वहाँ कमजोरी है,
जहाँ ज्ञान है वहाँ शक्ति है।
अब पुकार नहीं —
अब साकार परिवर्तन।
मनुष्य शिव बाबा को बुलाते हैं, पर ब्रह्मा-विष्णु-शंकर क्यों नहीं?
(एक गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य पर प्रश्न–उत्तर शैली में मंथन)
प्रश्न 1: पूरी दुनिया शिव बाबा को क्यों बुलाती है?
उत्तर:
क्योंकि मनुष्य आत्मा है, जो कर्मबंधन में है, पतित अवस्था में है, दुखी है और परिवर्तन चाहता है।
इसलिए वह पुकारती है —
“हे पतित-पावन आओ, हे दुखहर्ता-सुखकर्ता आओ।”
प्रश्न 2: अगर शिव बाबा सर्वशक्तिमान हैं, तो ब्रह्मा, विष्णु, शंकर उन्हें क्यों नहीं बुलाते?
उत्तर:
क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु, शंकर बुलाने वाले हैं ही नहीं।
वे आत्माएँ नहीं हैं, बल्कि शिव बाबा की संकल्प शक्तियाँ हैं।
प्रश्न 3: क्या ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आत्माएँ नहीं हैं?
उत्तर:
नहीं।
मुरली प्रमाण (09.08.1998):
“ब्रह्मा, विष्णु, शंकर कोई देहधारी आत्माएँ नहीं हैं।
ये परमात्मा के कार्य की शक्तियाँ हैं।”
वे शरीर धारण नहीं करते, जन्म-मरण में नहीं आते और कर्मबंधन में नहीं आते।
प्रश्न 4: फिर पुकार कौन करता है?
उत्तर:
पुकार आत्मा करती है।
जो आत्मा दुखी है, पतित है, निर्बल है और परिवर्तन चाहती है — वही पुकारती है।
प्रश्न 5: ब्रह्मा-विष्णु-शंकर किस रूप में हैं?
उत्तर:
वे तीनों शिव बाबा के कार्य विभाग हैं —
| शक्ति | कार्य |
|---|---|
| ब्रह्मा | स्थापना की शक्ति |
| विष्णु | पालना की शक्ति |
| शंकर | संहार की शक्ति |
ये कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि कार्यकारी दिव्य शक्तियाँ हैं।
प्रश्न 6: क्या कोई उदाहरण देकर समझा सकते हैं?
उत्तर:
हाँ।
क्या बल्ब बिजली को बुलाता है?
नहीं।
बिजली आती है तो बल्ब स्वयं जल उठता है।
वैसे ही —
ब्रह्मा, विष्णु, शंकर शिव बाबा की संकल्प शक्ति से प्रकट होते हैं।
वे स्रोत को नहीं बुलाते।
प्रश्न 7: मुरली क्या कहती है पुकार के बारे में?
उत्तर:
मुरली 03.10.1999:
“पतित आत्माएँ ही पतित-पावन को पुकारती हैं।”
मुरली 12.01.1971:
“पुकार समाप्त होना ज्ञान की निशानी है।”
जहाँ कमजोरी है, वहीं पुकार है।
जहाँ ज्ञान है, वहाँ शक्ति है।
प्रश्न 8: ब्रह्मा-विष्णु-शंकर क्यों नहीं पुकारते?
उत्तर:
क्योंकि वे —
-
अज्ञान में नहीं हैं
-
दुख में नहीं हैं
-
निर्बल नहीं हैं
-
कर्मबंधन में नहीं हैं
इसलिए उन्हें पुकारने की आवश्यकता नहीं।
प्रश्न 9: अंतिम सत्य क्या है?
उत्तर:
शिव बाबा एकमात्र परम आत्मा हैं
ब्रह्मा, विष्णु, शंकर उनकी संकल्प शक्तियाँ हैं
संकल्प अपने ही स्रोत को नहीं बुलाते
मनुष्य बुलाता है क्योंकि वह परिवर्तन चाहता है
अंतिम संकल्प
मैं पुकार से ऊपर उठकर शिव बाबा के संकल्प का उपकरण बनूँ।
जैसे ब्रह्मा बाबा की अवस्था बनी, वैसी ही मेरी अवस्था बने।
समापन संदेश
जहाँ पुकार है वहाँ कमजोरी है,
जहाँ ज्ञान है वहाँ शक्ति है।
अब पुकार नहीं —
अब साकार परिवर्तन।
Disclaimer (डिस्क्लेमर):
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय ज्ञान, साकार मुरली और आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना नहीं है, बल्कि सृष्टि के सूक्ष्म रहस्य को आत्मिक दृष्टि से समझाना है।
यह वीडियो केवल आत्मिक जागृति और सत्य चिंतन के लिए है।
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