4-1 Has this world always existed, or is it a 5000-year cycle?

J.D.BK ज्ञान 4-1 क्या यह संसार सदा से है या 5000 वर्ष का चक्र है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारी ज्ञान

चौथा दिन – पहला पाठ

विषय : क्या यह संसार सदा से है या 5000 वर्ष का चक्र है?


 भूमिका : यह प्रश्न क्यों महत्वपूर्ण है?

आज का विषय कोई साधारण प्रश्न नहीं है।
यह प्रश्न मनुष्य के अस्तित्व, आत्मा की यात्रा और सृष्टि के रहस्य से जुड़ा हुआ है।

हर जैन साधक, हर आध्यात्मिक विचारक के मन में यह प्रश्न उठता है —

  • क्या यह संसार अनादि है?

  • क्या यह हमेशा ऐसा ही रहा है?

  • या इसका भी कोई निश्चित चक्र है?

यही प्रश्न हमें आत्मा और विश्व ड्रामा के रहस्य तक ले जाता है।


 जैन दर्शन क्या कहता है?

जैन दर्शन का मूल सिद्धांत है —

लोक अनादि है। संसार अनादि है।

लेकिन साथ ही जैन दर्शन यह भी कहता है —

पर्याय बदलती रहती है।

पर्याय का अर्थ

पर्याय का अर्थ है —

  • अवस्था

  • रूप

  • स्थिति

  • परिवर्तन

अर्थात् द्रव्य (तत्व) स्थायी है, लेकिन उसकी अवस्था बदलती रहती है।

उदाहरण

जैसे —

  • सोना हमेशा सोना ही रहेगा

  • लेकिन आभूषण बनते-बिगड़ते रहेंगे

इसी प्रकार आत्मा सदा आत्मा है,
लेकिन उसकी अवस्थाएँ बदलती रहती हैं।


 परिवर्तन — प्रकृति का शाश्वत नियम

अंग्रेज़ी में कहा गया है —
Change is the unchangeable law of nature.

परिवर्तन ही प्रकृति का अटल नियम है।

हर पल परिवर्तन हो रहा है —

  • प्रकृति में

  • शरीर में

  • मन में

  • संसार में

गति है, और जहाँ गति है वहाँ परिवर्तन निश्चित है।


 ब्रह्मा कुमारी ज्ञान क्या कहता है?

ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय ज्ञान इस रहस्य को और अधिक स्पष्ट करता है।

 साकार मुरली — 18 जुलाई 2024

“यह विश्व नाटक अनादि है। इसका न आरंभ है न अंत।
पर यह चढ़ती-उतरती कला के चक्र में चलता रहता है।”

अर्थात् —
संसार सदा से है,
लेकिन उसकी अवस्था बदलती रहती है।


 संसार रेखा नहीं, चक्र है

यह संसार सीधी रेखा की तरह नहीं चलता,
यह घड़ी की तरह चक्र में चलता है।

 साकार मुरली — 11 जून 2024

“यह विश्व चक्र बिल्कुल घड़ी की तरह चलता है।
एक सेकंड भी आगे पीछे नहीं हो सकता।”


 द्रव्य स्थायी है, पर्याय बदलती है

जैन दर्शन कहता है —

द्रव्य स्थायी है
 पर्याय बदलती है

उदाहरण

  • कार्बन हमेशा कार्बन रहेगा

  • लोहा हमेशा लोहा रहेगा

  • जल हमेशा जल रहेगा

लेकिन उनका रूप बदलता रहेगा।

इसी प्रकार —
पाँच तत्वों से बना यह शरीर असत्य है,
पर तत्व सत्य हैं।


 संसार आत्माओं की अवस्था से बदलता है

ब्रह्मा कुमारी ज्ञान कहता है —
संसार नहीं बदलता, आत्माएँ बदलती हैं।

 साकार मुरली — 5 जुलाई 2024

“संसार नहीं बदलता, आत्माएँ बदलती हैं।
आत्माओं की गिरावट से दुनिया बदल जाती है।”


 5000 वर्ष का निश्चित विश्व चक्र

ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के अनुसार —
यह विश्व 5000 वर्ष के निश्चित चक्र में चलता है।

चार युग —

  1. सतयुग — 16 कला सम्पूर्ण, पूर्ण पवित्रता

  2. त्रेता युग — 14 कला

  3. द्वापर युग — 8 कला, भक्ति की शुरुआत

  4. कलियुग — तमोप्रधान अवस्था

और इनके बीच —
संगम युग — परिवर्तन का काल


संगम युग — सबसे महत्वपूर्ण समय

संगम युग वह समय है —
जब स्वयं परमात्मा आकर आत्माओं को पढ़ाते हैं।

यही भविष्य निर्माण का समय है।


 विनाश का सही अर्थ

विनाश का अर्थ संहार नहीं,
विनाश का अर्थ है —

 पुरानी अवस्था का अंत
नई अवस्था का आरंभ

 साकार मुरली — 30 मई 2024

“विनाश का अर्थ है तमोप्रधान दुनिया का अंत
और सतोप्रधान दुनिया का आरंभ।”


 इस ज्ञान का जीवन में लाभ

इस विश्व ड्रामा को जानने से —

  • मृत्यु का भय समाप्त होता है

  • दुख हल्के लगते हैं

  • ड्रामा को स्वीकार करने की शक्ति आती है

  • अहिंसा और क्षमा स्वाभाविक बनती है

 साकार मुरली — 22 सितंबर 2024

“ड्रामा को जानने वाला सदा हल्का और निश्चिंत रहता है।”


 निष्कर्ष

✔ संसार अनादि है
✔ लेकिन उसकी अवस्थाएँ बदलती रहती हैं
✔ संसार एक चक्र में चलता है
✔ 5000 वर्ष का निश्चित विश्व ड्रामा है

जो इस ड्रामा को समझ लेता है —
वह परिस्थितियों का गुलाम नहीं बनता
बल्कि ड्रामा का मास्टर बन जाता है।

प्रश्न 1: यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है कि संसार सदा से है या 5000 वर्ष का चक्र है?

उत्तर:
यह विषय साधारण नहीं है क्योंकि यह मनुष्य के अस्तित्व, आत्मा की यात्रा और सृष्टि के रहस्य से जुड़ा हुआ है।
हर साधक के मन में यह प्रश्न उठता है कि —
क्या यह संसार अनादि है या इसका भी कोई निश्चित चक्र है?
यही प्रश्न हमें आत्मा और विश्व ड्रामा के गूढ़ रहस्य तक ले जाता है।


प्रश्न 2: जैन दर्शन संसार के विषय में क्या कहता है?

उत्तर:
जैन दर्शन का मूल सिद्धांत है —
लोक अनादि है। संसार अनादि है।

लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है —
पर्याय बदलती रहती है।

अर्थात् द्रव्य (तत्व) स्थायी है, पर उसकी अवस्था, रूप और स्थिति बदलती रहती है।


प्रश्न 3: पर्याय का क्या अर्थ है?

उत्तर:
पर्याय का अर्थ है —

  • अवस्था

  • रूप

  • स्थिति

  • परिवर्तन

मतलब यह कि कोई भी वस्तु या आत्मा अपने मूल स्वरूप में स्थायी रहती है, लेकिन उसकी स्थिति बदलती रहती है।


प्रश्न 4: क्या कोई उदाहरण देकर पर्याय को समझा सकते हैं?

उत्तर:
हाँ।
जैसे —
सोना हमेशा सोना ही रहेगा,
लेकिन उससे बने आभूषण बदलते रहते हैं।

इसी प्रकार आत्मा सदा आत्मा है,
लेकिन उसकी अवस्थाएँ बदलती रहती हैं।


प्रश्न 5: क्या परिवर्तन प्रकृति का नियम है?

उत्तर:
हाँ। परिवर्तन प्रकृति का अटल नियम है।

अंग्रेज़ी में कहा गया है —
Change is the unchangeable law of nature.

हर पल परिवर्तन हो रहा है —
प्रकृति में, शरीर में, मन में और संसार में।
जहाँ गति है, वहाँ परिवर्तन निश्चित है।


प्रश्न 6: ब्रह्मा कुमारी ज्ञान संसार के विषय में क्या कहता है?

उत्तर:
ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार संसार अनादि है, पर उसकी अवस्था बदलती रहती है।

साकार मुरली — 18 जुलाई 2024
“यह विश्व नाटक अनादि है। इसका न आरंभ है न अंत।
पर यह चढ़ती-उतरती कला के चक्र में चलता रहता है।”


प्रश्न 7: क्या संसार सीधी रेखा की तरह चलता है?

उत्तर:
नहीं। संसार सीधी रेखा की तरह नहीं, बल्कि चक्र में चलता है — जैसे घड़ी।

साकार मुरली — 11 जून 2024
“यह विश्व चक्र बिल्कुल घड़ी की तरह चलता है।
एक सेकंड भी आगे पीछे नहीं हो सकता।”


प्रश्न 8: द्रव्य और पर्याय में क्या अंतर है?

उत्तर:
जैन दर्शन कहता है —
 द्रव्य स्थायी है
 पर्याय बदलती है

उदाहरण —
कार्बन हमेशा कार्बन रहेगा,
लोहा हमेशा लोहा रहेगा,
जल हमेशा जल रहेगा —
पर उनका रूप बदलता रहेगा।


प्रश्न 9: संसार क्यों बदलता दिखाई देता है?

उत्तर:
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान के अनुसार संसार नहीं बदलता, आत्माएँ बदलती हैं।

साकार मुरली — 5 जुलाई 2024
“संसार नहीं बदलता, आत्माएँ बदलती हैं।
आत्माओं की गिरावट से दुनिया बदल जाती है।”


प्रश्न 10: 5000 वर्ष के चक्र का क्या अर्थ है?

उत्तर:
यह विश्व 5000 वर्ष के निश्चित चक्र में चलता है, जिसमें चार युग होते हैं —

  1. सतयुग — 16 कला सम्पूर्ण, पूर्ण पवित्रता

  2. त्रेता युग — 14 कला

  3. द्वापर युग — 8 कला, भक्ति की शुरुआत

  4. कलियुग — तमोप्रधान अवस्था

इनके बीच आता है —
संगम युग — परिवर्तन का काल


प्रश्न 11: संगम युग को सबसे महत्वपूर्ण क्यों कहा गया है?

उत्तर:
संगम युग वह समय है जब स्वयं परमात्मा आकर आत्माओं को पढ़ाते हैं।
यही भविष्य निर्माण का समय है।


प्रश्न 12: विनाश का सही अर्थ क्या है?

उत्तर:
विनाश का अर्थ संहार नहीं है।
विनाश का अर्थ है —
 पुरानी अवस्था का अंत
नई अवस्था का आरंभ

साकार मुरली — 30 मई 2024
“विनाश का अर्थ है तमोप्रधान दुनिया का अंत
और सतोप्रधान दुनिया का आरंभ।”


प्रश्न 13: इस विश्व ड्रामा के ज्ञान से जीवन में क्या लाभ होता है?

उत्तर:
इस ज्ञान से —

  • मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है

  • दुख हल्के लगते हैं

  • ड्रामा को स्वीकार करने की शक्ति आती है

  • अहिंसा और क्षमा स्वाभाविक बनती है

साकार मुरली — 22 सितंबर 2024
“ड्रामा को जानने वाला सदा हल्का और निश्चिंत रहता है।”


 निष्कर्ष

✔ संसार अनादि है
✔ लेकिन उसकी अवस्थाएँ बदलती रहती हैं
✔ संसार एक निश्चित चक्र में चलता है
✔ 5000 वर्ष का विश्व ड्रामा है

जो इस ड्रामा को समझ लेता है —
वह परिस्थितियों का गुलाम नहीं बनता,
बल्कि ड्रामा का मास्टर बन जाता है।

डिस्क्लेमर

यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं एवं जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, दर्शन, मत या वैज्ञानिक विचारधारा की आलोचना करना नहीं है।
यह प्रस्तुति केवल आत्म-चिंतन, आध्यात्मिक अध्ययन एवं जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने के उद्देश्य से है।
दर्शक इसे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण करें।

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