(95)क्या गीता का ज्ञान श्रीकृष्ण ने दिया या परमात्मा शिव ने?
स्मृति स्वरूप बनो और पास विद ऑनर हासिल करो |
प्रस्तावना
ओम् शान्ति।
आज हम बापदादा की अव्यक्त वाणी से यह गहन शिक्षा सुनते हैं – “स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो।”
यह वाक्य हमें जीवन का सार समझाता है – कि अन्तिम समय पर सफलता उन्हीं आत्माओं को मिलेगी, जो स्मृति और अनुभव की शक्ति से सम्पन्न होंगी।
1. स्मृति स्वरूप बनना क्यों आवश्यक है?
बाबा कहते हैं – भूल ही पतन का कारण बनी है और स्मृति ही उद्धार का कारण है।
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आत्मा को अपने स्वरूप की स्मृति हो – “मैं शान्ति स्वरूप, ज्ञान स्वरूप, शक्ति स्वरूप आत्मा हूँ।”
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साथ ही, परमात्मा की स्मृति हो – “शिव बाबा मेरे सत्यम शिवम सुन्दरम पिता हैं।”
यही स्मृति हमारी स्थिति को हल्का, निर्भय और निश्चिन्त बना देती है।
2. अनुभवी मूर्त कैसे बनें?
सिर्फ सुनना और बोलना काफी नहीं है।
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जब ज्ञान जीवन में अनुभव बन जाए, तभी आत्मा की स्थिति अडोल होती है।
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जैसे – अगर कोई कहे “मैं आत्मा हूँ” तो वह सिर्फ शब्द है, लेकिन जब ध्यान में बैठकर आत्मा का अनुभव होता है, तो वही शक्ति बन जाती है।
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अनुभवी आत्मा की विशेषता है कि परिस्थिति कितनी भी बड़ी हो, वह हिलती नहीं।
3. सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन
बाबा कहते हैं – अब समय बहुत तीव्र गति से बदल रहा है।
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आज अवसर है तो कल नहीं भी हो सकता।
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इसलिए पुराना संस्कार, कमजोरी या व्यर्थ सोच बदलने के लिए कल पर भरोसा नहीं, बल्कि सेकण्ड में परिवर्तन करो।
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“अभी से” की शक्ति ही हमें पास विद ऑनर बनाती है।
4. पास विद ऑनर का रहस्य
सिर्फ परीक्षा पास होना काफी नहीं, बाबा चाहते हैं हम “पास विद ऑनर” बनें।
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पास होना मतलब किसी तरह से पार निकल जाना।
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पास विद ऑनर का मतलब – चेहरे पर खुशी, आत्मविश्वास और जीत का तेज लेकर सफलता पाना।
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इसके लिए चाहिए – स्मृति, अनुभूति और समय पर तीव्र गति का परिवर्तन।
निष्कर्ष
प्यारे भाई-बहनों,
स्मृति स्वरूप और अनुभवी मूर्त बनने का अभ्यास जितना बढ़ेगा, परिवर्तन उतना सहज होगा।
बाबा हमें बार-बार यही कह रहे हैं – अभी से अपनी स्थिति इतनी अडोल बनाओ कि अन्तिम समय पर सेकण्ड में उड़ान भर सको और पास विद ऑनर बनो।
आपके लिए आज की मुरली विषय पर प्रश्नोत्तर तैयार करता हूँ।
शीर्षक: स्मृति स्वरूप बन पास विद ऑनर कैसे बनें?
प्रश्नोत्तर (Q&A)
प्रश्न 1: स्मृति स्वरूप बनना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: स्मृति स्वरूप बनने से आत्मा को अपनी सत्य पहचान याद रहती है – मैं शुद्ध, ज्योति स्वरूप आत्मा हूँ। जब आत्मा अपनी दिव्यता को स्मरण करती है, तो माया की शक्तियाँ उसके पास टिक नहीं सकतीं। यही स्मृति आत्मा को पास विद ऑनर बनाती है।
प्रश्न 2: अनुभवी मूर्त बनने का अर्थ क्या है?
उत्तर: अनुभवी मूर्त बनने का अर्थ है कि ज्ञान केवल सुनना या पढ़ना नहीं, बल्कि उसे जीवन में अनुभव करना। जो आत्मा अनुभव करती है, वही उसका अंश दूसरों तक सहज ही प्रकट होता है। अनुभव से ही सच्चा बल और स्थिरता प्राप्त होती है।
प्रश्न 3: सेकण्ड की तीव्र गति से परिवर्तन कैसे संभव है?
उत्तर: जब आत्मा हर क्षण शिवबाबा की स्मृति में रहती है, तो उसके संस्कार सहज बदलने लगते हैं। व्यर्थ और नकारात्मक संकल्प तुरंत रुक जाते हैं और उच्च संकल्प कार्य करने लगते हैं। यही सेकण्ड में परिवर्तन कहलाता है।
प्रश्न 4: ‘पास विद ऑनर’ बनने की सबसे बड़ी शर्त क्या है?
उत्तर: पास विद ऑनर बनने की सबसे बड़ी शर्त है – संपूर्ण पवित्रता और याद की निरंतरता। जब आत्मा हर स्थिति में बाप को याद करती है और कोई भी परिस्थिति उसकी स्थिति को नहीं गिराती, तभी वह परीक्षा में पास विद ऑनर कहलाती है।
प्रश्न 5: वर्तमान समय में ब्राह्मण आत्माओं का मुख्य कर्तव्य क्या है?
उत्तर: वर्तमान समय ब्राह्मण आत्माओं का मुख्य कर्तव्य है – स्वयं को स्मृति स्वरूप बनाना और दूसरों को भी इस दिव्य स्मृति में टिकाना। यही सेवा विश्व परिवर्तन का आधार है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ की मुरली, आध्यात्मिक शिक्षाओं और व्यक्तिगत अध्ययन पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मिक उत्थान है। इसमें व्यक्त किए गए विचार किसी भी धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक मत से संबंधित नहीं हैं। कृपया इसे आत्मिक अध्ययन और मन की शांति के लिए ही ग्रहण करें।
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