अव्यक्त मुरली-(52)25-12-1983 “संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”
23-12-1983 “डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त”
आज दूर देश में रहने वाले बापदादा दूरदेशी बच्चों से मिलने के लिए आये हैं। आप सब भी दूरदेश से आये हो तो बापदादा भी दूरदेश से आये हैं। सबसे दूर से दूर और नज़दीक से नज़दीक बापदादा का देश है। दूर इतना है जो इस साकार दुनिया की बाउन्ड्री से बहुत दूर है। लोक ही दूसरा है। आप सभी साकार लोक से आये हैं और बापदादा साकार लोक से भी परे परलोक से वाया सूक्ष्मवतन ब्रह्मा बाप को साथ लाये हैं। और नज़दीक भी इतना है जो सेकण्ड में पहुँच सकते हो ना। आप लोगों को आने में कितने घण्टे लगते हैं और कितना मेहनत का कमाया हुआ धन देना पड़ा। कितना समय लगा इकट्ठा करने में। और बाप के वतन से आने और जाने में खर्चा भी नहीं लगता है। सिर्फ स्नेह की पूँजी, इसके द्वारा सेकण्ड में पहुँच जाते हो। कोई मेहनत तो नहीं लगती है ना। बापदादा जानते हैं कि राज्य-भाग्य गँवाने के बाद बच्चे अनेक जन्म भिन्न-भिन्न प्रकार की तन की, मन की, धन की मेहनत ही करते रहे हैं। कहाँ विश्व के मालिक ताज, तख्तधारी, सर्व प्राप्तियों के भण्डार के मालिक! प्रकृति भी दासी! ऐसे राज्य अधिकारी, राज्य भाग्य करने वाले, अब अधीन बनने से क्या कर रहे हैं! नौकरी कर रहे हैं! तो मेहनत हुई ना। कहाँ राजे और कहाँ कमाई करके खाने वाले गवर्मेन्ट के सर्वेन्ट हो गये। कितने जन्म शरीर को चलाने के लिए, शरीर निर्वाह का कर्म, मन को बाप से लगाने के लिए भिन्न-भिन्न साधनायें, अनेक प्रकार की भक्ति और धन को इकट्ठा करने के लिए कितने प्रकार के भिन्न-भिन्न जन्मों में भिन्न-भिन्न कार्य किये। ऐसे ताज-तख्तधारी सुख-चैन से पलने वाले को क्या-क्या करना पड़ा! तो बच्चों की मेहनत को देख बापदादा ने मेहनत से छुड़ाए सहज योगी बना दिया है। सेकण्ड में स्वराज्य-अधिकारी बनाया ना। मेहनत से छुड़ाया ना। यह सब सोचते हैं कि नौकरी से तो नहीं छुड़ाया। लेकिन अभी कुछ भी करते हो अपने लिए नहीं करते हो। ईश्वरीय सेवा के प्रति करते हो। अभी मेरा काम समझकर कर नहीं करते हो। ट्रस्टी बन करके करते हो। इसलिए मेहनत मुहब्बत में बदल गई। बाप की मुहब्बत में सेवा की मुहब्बत में, मिलन मनाने की मुहब्बत में मेहनत नहीं लगती।
दूसरी बात, करावनहार बाप है। निमित्त करने वाले आप हो। सर्वशक्तिवान बाप की शक्ति से अर्थात् स्मृति के कनेक्शन से अभी निमित्त मात्र कार्य करने वाले हो। जैसे लाइट के कनेक्शन से बड़ी-बड़ी मशीनरी चलती है। तो आधार है लाइट। आप सभी हर कर्म करते कनेक्शन के आधार से स्वयं भी डबल लाइट बन चलते रहते हो ना। जहाँ डबल लाइट की स्थिति है वहाँ मेहनत और मुश्किल शब्द समाप्त हो जाता है। नौकरी से नहीं छुड़ाया लेकिन मेहनत से छुड़ाया ना। भावना और भाव बदल गया ना। ट्रस्टीपन का भाव और ईश्वरीय सेवा की भावना, तो बदल गयी ना। अभी अपना-पन है? तीन पैर पृथ्वी जो मिली है, वह भी बाबा का घर कहते हो ना। मेरा घर तो नहीं कहते हो ना। अपने घर में नहीं रहते। बाप के घर में रहते हो। बाप के डायरेक्शन से कार्य करते हो। अपनी इच्छा से, अपनी आवश्यकताओं के कारण नहीं करते। जो डायरेक्शन बाप का, उसमें निश्चिंत और न्यारे होकर करते। जो मिला बाप का है वा सेवा अर्थ है। भले शरीर प्रति भी लगाते हो लेकिन शरीर भी अपना नहीं है। वह भी बाप को दे दिया ना। तन-मन-धन सब बाप को दे दिया है ना वह कुछ रखा है किनारे करके। ऐसे तो नहीं हो ना। तो बापदादा ने बच्चों की जन्म-जन्म की मेहनत देख अब से अनेक जन्मों तक मेहनत से छुड़ा दिया। यही निशानी है बाप और बच्चों के मुहब्बत की।
जैसे आप सब स्पेशल मिलने आये हो, बापदादा भी स्पेशल मिलने आये हैं। ब्रह्मा बाप को भी वतन से ले के आये हैं। ब्रह्मा बाप का ज्यादा स्नेह है। बाप का तो है ही लेकिन ब्रह्मा बाप का ज्यादा स्नेह है। डबल विदेशियों से विशेष स्नेह क्यों है? ब्रह्मा बोले – विदेशी बच्चों का बहुत समय से आह्वान किया। कितने वर्षों से पहले बच्चों को आह्वान किया। उसी आह्वान से विदेश से बाप के पास पहुँचे। तो बहुत समय जिसका आह्वन किया जाए और बहुत समय के आह्वन के बाद वह बच्चे पहुँचे तो जरुर विशेष प्यार होगा ना। तो ब्रह्मा बाप ने बहुत स्नेह से साकार रुप में वारिस बनने का, आप सबको आह्वन किया। समझा। सुनते रहते हो ना कि कितने वर्ष पहले आपको जनम दिया। गर्भ में तो आ गये थे, पैदा पीछे हुए हो साकार रुप में। इसलिए ब्रह्मा बाप को विशेष स्नेह है और भविष्य की तकदीर जानते हुए स्नेह है।
जानकी दादी को देख:- अभी डबल विदेशी जैसे बाप को देख करके खुश होते हैं। वैसे आपको भी देख करके खुश होते हैं क्योंकि बाप से ली हुई पालना का प्रत्यक्ष रुप साकार में आप निमित्त बच्चों से सीखते हैं। इसलिए विशेष आप से भी सभी का प्यार है। दादी वा दीदी जो भी निमित्त आत्माए हैं उन्हों की विशेषता यही दिखाई देती जो उनमें बाप को देखेंगे। यही बाप की पालना का विशेष अनुभव करते। जब भी दीदी दादी से मिलते हो तो क्या देखते हो! बाप साकार आधार से मिल रहे हैं। ऐसे अनुभव होता है ना। यही विशेष आत्माओं की पालना है, जो आप गुम हो जायेंगे और बाप दिखाई देंगे क्योंकि उन्हों के हर संकल्प, हर बोल में सदा बाबा, बाबा ही रहता है। तो औरों को भी वो ही बाबा शब्द सुनाई वा दिखाई देता है। आज दीदी भी याद आ रही है। गुप्त गंगा हो गई ना। वैसे भी 3 नदियों में एक नदी गुप्त ही दिखाते हैं। अभी दीदी तो दादी में समाई हुई है ना। सूक्ष्म रुप में वह भी अपनी भासना दे रही है क्योंकि कर्मबन्धनी आत्मा नहीं है। सेवा के सम्बन्ध से पार्ट बजाने गई है। कर्मबन्धनी आत्माएं जहाँ हैं वहाँ ही कार्य कर सकती हैं और कर्मातीत आत्माएं एक ही समय पर चारों ओर अपना सेवा का पार्ट बजा सकती हैं क्योंकि कर्मातीत हैं। इसलिए दीदी भी आप सबके साथ है। कर्मातीत आत्मा को डबल पार्ट बजाने में कोई मुश्किल नहीं। स्पीड बहुत तीव्र होती है। सेकण्ड में जहाँ चाहे वहाँ पहुँच सकती हैं। विशेष आत्मायें अपना विशेष पार्ट सदा बजाती हैं। इसलिए ही हवा के मुआफिक चली गई ना। जैसे अनादि अविनाशी प्रोग्राम बना हुआ ही था। यह भी विचित्र पार्ट था। शुरु से लेकर दीदी का विचित्र ट्रांस का पार्ट रहा। अन्त में भी विचित्र रुप के ट्रांस में ही ट्रान्सफर हो गई। अच्छा।
सभी देश-विदेश के चात्रक बच्चों को, कल्प के सिकीलधे बच्चों को, सदा बाप के स्नेह में लवलीन रहने वाले लवलीन आत्माओं को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।
पर्सनल मुलाकात:- कहाँ-कहाँ से बापदादा ने चुनकर अपने अल्लाह के बगीचे में लगा लिया। यह खुशी रहती है ना! अभी सभी रुहानी गुलाब बन गये। सदा औरों को भी रुहानी खुशबू देने वाले रुहे गुलाब हो। कोई भी आप सबके समीप आता है, सम्पर्क में आता है तो आप सभी से क्या महसूस करता है? समझते हैं कि यह रुहानी हैं, अलौकिक हैं। लौकिकता समाप्त हो गयी। जो भी आपकी तरफ देखेंगे उनको फरिश्ता रुप ही दिखाई दे। फरिश्ते बन गये ना। सदा डबल लाइट स्थिति में स्थित रहने वाले फरिश्ता दिखाई देंगे। फरिश्ते सदा ऊंचे रहते हैं। फरिश्तों को चित्र रुप में भी दिखायेंगे तो पंख दिखायेंगे। किसलिए? उड़ते पंछी हैं ना। तो पंछी सदा ऊपर उड़ जाते। तो बाप मिला, ऊंचा स्थान मिला, ऊंची स्थिति मिली और क्या चाहिए।
(विदेशी बच्चों के पत्रों के रिटर्न में) सबकी दिल के प्यार भरे याद-प्यार पत्र तथा याद मिली। बच्चे मीठी-मीठी रुहरिहान भी करते तो कभी-कभी मीठे-मीठे उल्हनें भी देते हैं। कब बुलायेंगे, क्यों नहीं हमको मदद करते जो हम पहुँच जाते। ऐसे उल्हनें भी बाप को प्रिय लगते हैं क्योंकि बाप को नहीं कहेंगे तो किसको कहेंगे! इसलिए बापादादा को बच्चों का लाड-प्यार अच्छा लगता है। इसलिए बाप के प्यारे हैं और सदा बाप के प्यारे होने के कारण रिटर्न में बाप द्वारा स्नेह और सहयोग मिलता है। अच्छा, ओम् शान्ति
अध्याय: डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त
मुरली तिथि: 23 दिसंबर 1983
प्रस्तावना: बापदादा का दूरदेशी स्नेह
आज बापदादा दूरदेश में रहने वाले बच्चों से मिलने आए हैं।
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दूर-दराज से आने में कितने घंटे और मेहनत लगती थी।
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पर बापदादा के पास पहुँचना सिर्फ स्नेह की पूँजी से सेकंड में संभव है।
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मेहनत से मुक्त होना, सेकंड में स्वराज्य-अधिकारी बनना – यही डबल लाइट की शक्ति है।
उदाहरण: जैसे किसी बड़ी मशीनरी को लाइट के कनेक्शन से चलाया जाता है, वैसे ही बच्चे भी बाप से जुड़े कनेक्शन (स्मृति और प्रेम) से डबल लाइट बन जाते हैं और मेहनत स्वतः समाप्त हो जाती है।
डबल लाइट: सहज योगी बनने का रहस्य
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डबल लाइट की स्थिति में “मेहनत” और “मुश्किल” शब्द समाप्त हो जाते हैं।
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ट्रस्टीपन और ईश्वरीय सेवा की भावना में बदलाव आता है।
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तन-मन-धन सब बाप को समर्पित हो जाते हैं।
उदाहरण: बच्चे बाप के घर में रहते हैं, बाप के डायरेक्शन से काम करते हैं। अपनी इच्छाओं से नहीं। यही डबल लाइट की स्थिति है।
विशेष स्नेह और भविष्य की तकदीर
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ब्रह्मा बाप का विशेष स्नेह विदेशियों पर है क्योंकि उनका आह्वान बहुत समय से किया गया।
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भविष्य की तकदीर जानते हुए स्नेह दिया जाता है।
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बापदादा और ब्रह्मा बाप दोनों की स्नेही दृष्टि बच्चों पर रहती है।
उदाहरण: विदेशी बच्चों को विशेष स्नेह इसलिए मिलता है क्योंकि उन्हें लंबा आह्वान मिलने के बाद बापदादा के पास पहुँचना पड़ा।
रुहानी अनुभव: फरिश्ता और डबल लाइट
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चुने हुए बच्चों को रुहानी गुलाब बनकर सभी को खुशबू देते हुए अनुभव करना चाहिए।
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डबल लाइट स्थिति में बच्चे फरिश्ता स्वरूप दिखाई देते हैं।
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फरिश्तों को चित्र रूप में भी पंख दिखते हैं, जैसे ऊंचाई प्राप्त होती है।
उदाहरण: जो भी आपके पास आता है, उसे फरिश्ता या रुहानी अनुभव होता है।
पर्सनल मुलाकात और स्नेह
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विदेशी बच्चों के पत्रों और रिटर्न में मिठास और स्नेह महसूस होता है।
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बापदादा को बच्चों का लाड-प्यार प्रिय है।
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सदा बाप के प्यारे होने के कारण बच्चों को स्नेह और सहयोग प्राप्त होता है।
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डबल लाइट की स्थिति से मेहनत समाप्त
मुरली तिथि: 23 दिसंबर 1983
प्रस्तावना: बापदादा का दूरदेशी स्नेह
प्रश्न 1: बापदादा दूरदेश से क्यों बच्चों से मिलने आए?
उत्तर: बापदादा दूरदेश में रहने वाले बच्चों से मिलने आए हैं ताकि उनका स्नेह व्यक्त कर सकें और बच्चों को सहज योगी बनाने में मदद करें।प्रश्न 2: दूर-दराज से आने में क्या मेहनत लगती थी?
उत्तर: पहले बच्चों को दूर देश से आने में कई घंटे लगते थे, समय और धन खर्च होता था।प्रश्न 3: अब बापदादा के पास पहुँचना कैसे संभव है?
उत्तर: अब सिर्फ स्नेह की पूँजी के आधार पर सेकंड में पहुँच सकते हैं।प्रश्न 4: डबल लाइट की स्थिति क्या लाभ देती है?
उत्तर: मेहनत से मुक्ति मिलती है और सेकंड में स्वराज्य-अधिकारी बनने की शक्ति मिलती है।उदाहरण: जैसे किसी बड़ी मशीनरी को लाइट के कनेक्शन से चलाया जाता है, वैसे ही बच्चे बाप से जुड़े कनेक्शन (स्मृति और प्रेम) से डबल लाइट बन जाते हैं और मेहनत स्वतः समाप्त हो जाती है।
डबल लाइट: सहज योगी बनने का रहस्य
प्रश्न 5: डबल लाइट की स्थिति में क्या परिवर्तन आता है?
उत्तर: “मेहनत” और “मुश्किल” शब्द समाप्त हो जाते हैं। ट्रस्टीपन और ईश्वरीय सेवा की भावना बदल जाती है।प्रश्न 6: तन-मन-धन का क्या होता है?
उत्तर: तन-मन-धन सब बाप को समर्पित हो जाते हैं।उदाहरण: बच्चे बाप के घर में रहते हैं और बाप के डायरेक्शन से काम करते हैं, अपनी इच्छाओं से नहीं।
विशेष स्नेह और भविष्य की तकदीर
प्रश्न 7: ब्रह्मा बाप का विशेष स्नेह किन पर होता है?
उत्तर: विदेशियों पर, क्योंकि उनका आह्वान लंबे समय से किया गया था।प्रश्न 8: क्यों विशेष स्नेह मिलता है?
उत्तर: भविष्य की तकदीर जानते हुए स्नेह दिया जाता है।उदाहरण: विदेशी बच्चों को विशेष स्नेह इसलिए मिलता है क्योंकि उन्हें लंबा आह्वान मिलने के बाद बापदादा के पास पहुँचना पड़ा।
रुहानी अनुभव: फरिश्ता और डबल लाइट
प्रश्न 9: चुने हुए बच्चों को क्या अनुभव करना चाहिए?
उत्तर: रुहानी गुलाब बनकर सभी को खुशबू देना और डबल लाइट स्थिति में रहना।प्रश्न 10: डबल लाइट स्थिति में बच्चे कैसे दिखाई देते हैं?
उत्तर: फरिश्ता स्वरूप दिखाई देते हैं, चित्र रूप में पंख भी दिखते हैं।उदाहरण: जो भी आपके पास आता है, उसे फरिश्ता या रुहानी अनुभव होता है।
पर्सनल मुलाकात और स्नेह
प्रश्न 11: बच्चों के पत्रों और रिटर्न से क्या महसूस होता है?
उत्तर: मिठास और स्नेह महसूस होता है।प्रश्न 12: बापदादा को बच्चों का लाड-प्यार क्यों प्रिय है?
उत्तर: क्योंकि बच्चे सदा बाप के प्यारे रहते हैं और उनकी सेवा में तत्पर रहते हैं।प्रश्न 13: सदा बाप के प्यारे होने का क्या लाभ है?
उत्तर: बच्चों को स्नेह और सहयोग प्राप्त होता है और वे सहज योगी बनते हैं। -
डिस्क्लेमर
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक शिक्षाओं पर आधारित है। इसमें बताए गए आध्यात्मिक दृष्टांत और उदाहरण केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिए हैं। यह वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नहीं हैं।
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