(05)15-01-1986 “Bargains and a budget for savings”

अव्यक्त मुरली-(05)15-01-1986 “सस्ता सौदा और बचत का बजट”

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(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

15-01-1986 “सस्ता सौदा और बचत का बजट”

रत्नागर बाप अपने बड़े ते बड़े सौदा करने वाले सौदागर बच्चों को देख मुस्करा रहे हैं। सौदा कितना बड़ा और करने वाले सौदागर दुनिया के अन्तर में कितने साधारण, भोले-भाले हैं। भगवान से सौदा करने वाली कौन आत्मायें भाग्यवान बनीं। यह देख मुस्करा रहे हैं। इतना बड़ा सौदा एक जन्म का जो 21 जन्म सदा मालामाल हो जाते। देना क्या और लेना क्या है। अनगिनत पदमों की कमाई वा पदमों का सौदा कितना सहज करते हो। सौदा करने में समय भी वास्तव में एक सेकेण्ड लगता है। और कितना सस्ता सौदा किया? एक सेकेण्ड में और एक बोल में सौदा कर लिया – दिल से माना मेरा बाबा। इस एक बोल से इतना बड़ा अनगिनत खजाने का सौदा कर लेते हो। सस्ता सौदा है ना। न मेहनत है, न मंहगा है। न समय देना पड़ता है। और कोई भी हद के सौदे करते तो कितना समय देना पड़ता। मेहनत भी करनी पड़ती और मंहगा भी दिन-प्रतिदिन होता ही जाता है। और चलेगा कहाँ तक? एक जन्म की भी गारन्टी नहीं। तो अब श्रेष्ठ सौदा कर लिया है वा अभी सोच रहे हो कि करना है? पक्का सौदा कर लिया है ना? बापदादा अपने सौदागर बच्चों को देख रहे थे। सौदागरों की लिस्ट में कौन-कौन नामीग्रामी हैं। दुनिया वाले भी नामीग्रामी लोगों की लिस्ट बनाते हैं ना। विशेष डायरेक्टरी भी बनाते हैं। बाप की डायरेक्टरी में किन्हों के नाम हैं? जिनमें दुनिया वालों की आंख नहीं जाती उन्होंने ही बाप से सौदा किया। और परमात्म नयनों के सितारे बन गये, नूरे रत्न बन गये। ना उम्मींद आत्माओं को विशेष आत्मा बना दिया। ऐसा नशा सदा रहता है? परमात्म डायरेक्टरी के विशेष वी.आई.पी. हम हैं। इसलिए ही गायन है भोलों का भगवान। है चतुर-सुजान लेकिन पसन्द भोले ही आते हैं। दुनिया की बाहरमुखी चतुराई बाप को पसन्द नहीं। उन्हों का कलियुग में राज्य हैं, जहाँ अभी-अभी लखपति अभी-अभी कखपति हैं। लेकिन आप सभी सदा के लिए पदमापदमति बन जाते हो। भय का राज्य नहीं। निर्भय हैं।

आज की दुनिया में धन भी है और भय भी हैं। जितना धन उतना भय में ही खाते, भय में ही सोते। और आप बेफिकर बादशाह बन जाते। निर्भय बन जाते हो। भय को भी भूत कहा जाता है। आप उस भूत से भी छूट जाते हो। छूट गये हो ना? कोई भय है? जहाँ मेरापन होगा वहाँ भय जरूर होगा। “मेरा बाबा”। सिर्फ एक ही शिवबाबा है जो निर्भय बनाता है। उनके सिवाए कोई भी सोना हिरण भी अगर मेरा है तो भी भय है। तो चेक करो मेरा मेरा का संस्कार ब्राह्मण जीवन में भी किसी भी सूक्ष्म रूप में रह तो नहीं गया है? सिल्वर जुबली, गोल्डन जुबली मना रहे हो ना। चांदी वा सोना, रीयल तभी बनता है जब आग में गलाकर जो कुछ मिक्स होता है उसको समाप्त कर देते हैं। रीयल सिल्वर जुबली, रीयल गोल्डन जुबली है ना। तो जुबली मनाने के लिए रीयल सिल्वर, रीयल गोल्ड बनना ही पड़ेगा। ऐसे नहीं जो सिल्वर जुबली वाले हैं वह सिल्वर ही हैं। यह तो वर्षों के हिसाब से सिल्वर जुबली कहते हैं। लेकिन हो सभी गोल्डन एज के अधिकारी, गोल्डन एज वाले। तो चेक करो रीयल गोल्ड कहाँ तक बने हैं? सौदा तो किया लेकिन आया और खाया। ऐसे तो नहीं? इतना जमा किया जो 21 पीढ़ी सदा सम्पन्न रहें? आपकी वंशावली भी मालामाल रहे। न सिर्फ 21 जन्म लेकिन द्वापर में भी भक्त आत्मा होने के कारण कोई कमी नहीं होगी। इतना धन द्वापर में भी रहता है जो दान-पुण्य अच्छी तरह से कर सकते हो। कलियुग के अन्त में भी देखो, अन्तिम जन्म में भी भिखारी तो नहीं बने हो ना! दाल-रोटी खाने वाले बने ना। काला धन तो नहीं है लेकिन दाल-रोटी तो है ना। इस समय की कमाई वा सौदा पूरा ही कल्प भिखारी नहीं बनायेगा, इतना इकट्ठा किया है जो अन्तिम जन्म में भी दाल-रोटी खाते हो, इतना बचत का हिसाब रखते हो? बजट बनाना आता है? जमा करने में होशियार हो ना! नहीं तो 21 जन्म क्या करेंगे? कमाई करने वाले बनेंगे या राज्य अधिकारी बन राज्य करेंगे? रॉयल फैमिली को कमाने की जरूरत नहीं होती। प्रजा को कमाना पड़ेगा। उसमें भी नम्बर हैं। साहूकार प्रजा और साधारण प्रजा। गरीब तो होता ही नहीं है। लेकिन रॉयल फैमिली पुरुषार्थ की प्रारब्ध राज्य प्राप्त करती है। जन्म-जन्म रॉयल फैमिली के अधिकारी बनते हैं। राज्य तख्त के अधिकारी हर जन्म में नहीं बनते लेकिन रायल फैमिली का अधिकार जन्म-जन्म प्राप्त करते हैं। तो क्या बनेंगे? अब बजट बनाओ। बचत की स्कीम बनाओ।

आजकल के जमाने में वेस्ट से बेस्ट बनाते हैं। वेस्ट को ही बचाते हैं। तो आप सब भी बचत का खाता सदा स्मृति में रखो। बजट बनाओ। संकल्प शक्ति, वाणी की शक्ति, कर्म की शक्ति, समय की शक्ति कैसे और कहाँ कार्य में लगानी है। ऐसे न हो यह सब शक्तियाँ व्यर्थ चली जाएं। संकल्प भी अगर साधारण हैं, व्यर्थ हैं तो व्यर्थ और साधारण दोनों बचत नहीं हुई। लेकिन गँवाया। सारे दिन में अपना चार्ट बनाओ। इन शक्तियों को कार्य में लगाकर कितना बढ़ाया! क्योंकि जितना कार्य में लगायेंगे उतना शक्ति बढ़ेगी। जानते सभी हो कि संकल्प शक्ति है लेकिन कार्य में लगाने का अभ्यास, इसमें नम्बरवार हैं। कोई फिर, न तो कार्य में लगाते, न पाप कर्म में गँवाते। लेकिन साधारण दिनचर्या में न कमाया न गँवाया। जमा तो नहीं हुआ ना। साधारण सेवा की दिनचर्या वा साधारण प्रवृत्ति की दिनचर्या इसको बजट का खाता जमा होना नहीं कहेंगे। सिर्फ यह नहीं चेक करो कि यथाशक्ति सेवा भी की, पढाई भी की। किसको दु:ख नहीं दिया। कोई उल्टा कर्म नहीं किया। लेकिन दु:ख नहीं दिया तो सुख दिया? जितनी और जैसी शक्तिशाली सेवा करनी चाहिए उतनी की? जैसे बापदादा सदा डायरेक्शन देते हैं कि मैं-पन का, मेरेपन का त्याग ही सच्ची सेवा है, ऐसे सेवा की? उल्टा बोल नहीं बोला, लेकिन ऐसा बोल बोला जो किसी ना-उम्मींद को उम्मींदवार बना दिया। हिम्मतहीन को हिम्मतवान बनाया? खुशी के उमंग, उत्साह में किसको लाया? यह है जमा करना, बचत करना। ऐसे ही दो घण्टा, 4 घण्टा बीत गया, वह बचत नहीं हुई। सब शक्तियां बचत कर जमा करो। ऐसा बजट बनाओ। यह साल बजट बनाकर कार्य करो। हर शक्ति को कार्य में कैसे लगावें, यह प्लैन बनाओ। ईश्वरीय बजट ऐसा बनाओ जो विश्व की हर आत्मा कुछ न कुछ प्राप्त करके ही आपके गुणगान करे। सभी को कुछ न कुछ देना ही है। चाहे मुक्ति दो, चाहे जीवनमुक्ति दो। मनुष्य आत्मायें तो क्या प्रकृति को भी पावन बनाने की सेवा कर रहे हो। ईश्वरीय बजट अर्थात् सर्व आत्मायें प्रकृति सहित सुखी वा शान्त बन जावें। वह गवर्मेन्ट बजट बनाती है इतना पानी देंगे, इतने मकान देंगे, इतनी बिजली देंगे। आप क्या बजट बनाते हो? सभी को अनेक जन्मों तक मुक्ति और जीवनमुक्ति देवें। भिखारीपन से, दु:ख अशान्ति से मुक्त करें। आधाकल्प तो आराम से रहेंगे। उन्हों की आश तो पूर्ण हो ही जायेगी। वह लोग तो मुक्ति ही चाहते हैं ना। जानते नहीं हैं लेकिन मांगते तो हैं ना। तो स्वयं के प्रति और विश्व के प्रति ईश्वरीय बजट बनाओ। समझा क्या करना है! सिल्वर और गोल्डन जुबली दोनों इसी वर्ष में कर रहे हो ना। तो यह महत्व का वर्ष है। अच्छा।

सदा श्रेष्ठ सौदा स्मृति में रखने वाले, सदा जमा का खाता बढ़ाने वाले, सदा हर शक्तियों को कार्य में लगाए वृद्धि करने वाले, सदा समय के महत्व को जान महान बनने और बनाने वाले, ऐसे श्रेष्ठ धनवान, श्रेष्ठ समझदार बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

पार्टियों से:-

कुमारों से:- कुमार जीवन भी लकी जीवन है क्योंकि उल्टी सीढ़ी चढ़ने से बच गये। कभी संकल्प तो नहीं आता है उल्टी सीढ़ी चढ़ने का! चढ़ने वाले भी उतर रहे हैं। सभी प्रवृत्ति वाले भी अपने को कुमार कुमारी कहलाते हैं ना। तो सीढ़ी उतरे ना! तो सदा अपने इस श्रेष्ठ भाग्य को स्मृति में रखो। कुमार जीवन अर्थात् बन्धनों से बचने की जीवन। नहीं तो देखो कितने बन्धनों में होते हैं। तो बन्धनों में खिंचने से बच गये। मन से भी स्वतन्‍त्र, सम्बन्ध से भी स्वतन्‍त्र। कुमार जीवन है ही स्वतन्‍त्र। कभी स्वप्न में भी ख्याल तो नहीं आता – थोड़ा कोई सहयोगी मिल जाए! कोई साथी मिल जाए! बीमारी में मदद हो जाए, ऐसे कभी सोचते हो! बिल्कुल ख्याल नहीं आता? कुमार जीवन अर्थात् सदा उड़ते पंछी बंधन में फंसे हुए नहीं। कभी भी कोई संकल्प न आवे। सदा निर्बन्धन हो तीव्रगति से आगे बढ़ते चलो।

कुमारियों से:- कुमारियों को सेवा में आगे बढ़ने की लिफ्ट मिली हुई है। यह लिफ्ट ही श्रेष्ठ गिफ्ट है। इस गिफ्ट को यूज करना आता है ना! जितना स्वयं को शक्तिशाली बनायेंगी उतना सेवा भी शक्तिशाली करेंगी। अगर स्वयं ही किसी बात में कमजोर होंगी तो सेवा भी कमजोर होगी। इसलिए शक्तिशाली बन शक्तिशाली सेवाधारी बन जाओ। ऐसी तैयारी करती चलो। जो समय आने पर सफलता-पूर्वक सेवा में लग जाओ और नम्बर आगे ले लो। अभी तो पढ़ाई में टाइम देना पड़ता है फिर तो एक ही काम होगा। इसलिए जहाँ भी हो ट्रेनिंग करती रहो। निमित्त बनी हुई आत्माओं के संग से तैयारी करती रहो। तो योग्य सेवाधारी बन जायेंगी। जितना आगे बढ़ेगी उतना अपना ही फायदा है।

सेवाधारी – टीचर्स बहनों से:-

1. सेवाधारी अर्थात् सदा निमित्त। निमित्त भाव, सेवा में स्वत: ही सफलता दिलाता है। निमित्त भाव नहीं तो सफलता नहीं। सदा बाप के थे, बाप के हैं और बाप के ही रहेंगे – ऐसी प्रतिज्ञा कर ली है ना। सेवाधारी अर्थात् हर कदम बाप के कदम पर रखने वाले। इसको कहते हैं फॉलो फादर करने वाले। हर कदम श्रेष्ठ मत पर श्रेष्ठ बनाने वाले सेवाधारी हो ना। सेवा में सफलता प्राप्त करना, यही सेवाधारी का श्रेष्ठ लक्ष्य है। तो सभी श्रेष्ठ लक्ष्य रखने वाले हो ना। जितना सेवा में वा स्व में व्यर्थ समाप्त हो जाता है उतना ही स्व और सेवा समर्थ बनती है। तो व्यर्थ को खत्म करना, सदा समर्थ बनना। यही सेवाधारियों की विशेषता है। जितना स्वयं निमित्त बनी हुई आत्मायें शक्तिशाली होंगी उतना सेवा भी शक्तिशाली होगी। सेवाधारी का अर्थ ही है सेवा में सदा उमंग-उत्साह लाना। स्वयं उमंग-उत्साह में रहने वाले औरों को उमंग उत्साह दिला सकते हैं। तो सदा प्रत्यक्ष रूप में उमंग उत्साह दिखाई दे। ऐसे नहीं कि मैं अन्दर में तो रहती हूँ लेकिन बाहर नहीं दिखाई देता। गुप्त पुरुषार्थ और चीज है लेकिन उमंग-उत्साह छिप नहीं सकता है। चेहरे पर सदा उमंग-उत्साह की झलक स्वत: दिखाई देगी। बोले, न बोले लेकिन चेहरा ही बोलेगा, झलक बोलेगी। ऐसे सेवाधारी हो?

सेवा का गोल्डन चांस यह भी श्रेष्ठ भाग्य की निशानी है। सेवाधारी बनने का भाग्य तो प्राप्त हो गया अभी सेवाधारी नम्बरवन हैं या नम्बर टू हैं, यह भी भाग्य बनाना और देखना है। सिर्फ एक भाग्य नहीं लेकिन भाग्य पर भाग्य की प्राप्ति। जितने भाग्य प्राप्त करते जाते उतना नम्बर स्वत: ही आगे बढ़ता जाता है। इसको कहते हैं पदमापदम भाग्यवान। एक सब्जेक्ट में नहीं सब सब्जेक्ट में सफलता स्वरूप। अच्छा।

2- सबसे ज्यादा खुशी किसको है, बाप को है या आपको? क्यों नहीं कहते हो कि मेरे को है! द्वापर से भक्ति में पुकारा और अब प्राप्त कर लिया तो कितनी खुशी होगी! 63 जन्म प्राप्त करने की इच्छा रखी और 63 जन्मों की इच्छा पूर्ण हो गई तो कितनी खुशी होगी! किसी भी चीज़ की इच्छा पूर्ण होती है तो खुशी होती है ना। यह खुशी ही विश्व को खुशी दिलाने वाली है। आप खुश होते हो तो सारी विश्व खुश हो जाती है। ऐसी खुशी मिली है ना। जब आप बदलते हो तो दुनिया भी बदल जाती है। और ऐसी बदलती है जिसमें दु:ख और अशान्ति का नाम निशान नहीं। तो सदा खुशी में नाचते रहो। सदा अपने श्रेष्ठ कर्मों का खाता जमा करते चलो। सभी को खुशी का खजाना बांटो। आज के संसार में खुशी नहीं है। सब खुशी के भिखारी हैं उन्हें खुशी से भरपूर बनाओ। सदा इसी सेवा से आगे बढ़ते रहो। जो आत्मायें दिलशिकस्त बन गई हैं उन्हों में उमंग-उत्साह लाते रहो। कुछ कर सकते नहीं, हो नहीं सकता… ऐसे दिलशिकस्त हैं और आप विजयी बन विजयी बनाने का उमंग-उत्साह बढ़ाने वाले हो। सदा विजय की स्मृति का तिलक लगा रहे। तिलकधारी भी हैं और स्वराज्य अधिकारी भी हैं – इसी स्मृति में सदा रहो। अच्छा।

प्रश्न:- जो समीप सितारे हैं उनके लक्षण क्या होंगे?

उत्तर:- उनमें समानता दिखाई देगी। समीप सितारों में बापदादा के गुण और कर्तव्य प्रत्यक्ष दिखाई देंगे। जितनी समीपता उतनी समानता होगी। उनका मुखड़ा बापदादा का साक्षात्कार कराने वाला दर्पण होगा। उनको देखते ही बापदादा का परिचय प्राप्त होगा। भले देखेंगे आपको लेकिन आकर्षण बापदादा की तरफ होगी। इसको कहा जाता है सन शोज़ फादर। स्नेही के हर कदम में, जिससे स्नेह है उसकी छाप देखने में आती है। जितना हर्षितमूर्त उतना आकर्षण मूर्त बन जाते हैं।

सस्ता सौदा और बचत का बजट

(अव्यक्त मुरली – 15 जनवरी 1986)


 भूमिका : सबसे बड़ा सौदा – भगवान से सौदा

रत्नागर बाप अपने बच्चों को देख मुस्करा रहे हैं।
क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े सौदागर — साधारण, भोले-भाले ब्राह्मण बच्चे हैं।

 ऐसा सौदा जो

  • एक जन्म में किया

  • और 21 जन्मों तक मालामाल बना दिया

सिर्फ एक सेकंड में
सिर्फ एक बोल में
“मेरा बाबा”

इतना सस्ता सौदा दुनिया में कहीं नहीं।


 सस्ता सौदा क्या है?

दुनिया में सौदा करने के लिए:

  • समय लगता है

  • मेहनत लगती है

  • पैसा लगता है

  • और कोई गारंटी नहीं

लेकिन ईश्वर से सौदा:

  • न मेहनत

  • न पैसा

  • न समय

  • और 21 जन्मों की गारंटी

एक सेकंड में दिल से स्वीकार – मेरा बाबा।
और बन गये अनगिनत खजानों के मालिक।


 परमात्म डायरेक्टरी के VIP सितारे

दुनिया की डायरेक्टरी में नामी-ग्रामी लोग होते हैं।
लेकिन बाप की डायरेक्टरी में:

  • भोली आत्मायें

  • अनजानी आत्मायें

  • ना-उम्मीद आत्मायें

वही परमात्म नयनों के सितारे बनती हैं
 वही नूरे-रत्न बनती हैं

यही कारण है –
“भोलों का भगवान”


 निर्भय बनो – बेफिक्र बादशाह बनो

आज की दुनिया:

  • धन है

  • लेकिन भय भी है

  • जितना धन उतना डर

ईश्वर के बच्चे:

  • बेफिक्र बादशाह

  • निर्भय आत्मायें

 जहाँ मेरापन होगा, वहाँ भय होगा
“मेरा बाबा” — निर्भय बनाने वाला एक ही है


सिल्वर जुबली और गोल्डन जुबली का रहस्य

सिल्वर और गोल्ड आग में तपकर ही असली बनते हैं।
ऐसे ही आत्मा भी:

  • संस्कारों की मिलावट जलाकर

  • व्यर्थ समाप्त कर

  • शुद्ध सोना बनती है

सच्ची सिल्वर जुबली और गोल्डन जुबली = आत्मा का शुद्ध स्वरूप


 21 जन्मों की बचत योजना

यह सौदा:

  • अंतिम जन्म तक भिखारी नहीं बनाता

  • द्वापर में भी सम्पन्न बनाता है

  • कलियुग अंत में भी दाल-रोटी वाला बनाता है

 रॉयल फैमिली को कमाना नहीं पड़ता
 प्रजा को कमाना पड़ता है

तो तय करो —
प्रजा बनना है या राज्याधिकारी?


 ईश्वरीय बजट कैसे बनायें?

आज सरकार बजट बनाती है —

  • पानी देंगे

  • बिजली देंगे

  • मकान देंगे

आप बनाते हो ईश्वरीय बजट —

  • मुक्ति देंगे

  • जीवनमुक्ति देंगे

  • सुख देंगे

  • शांति देंगे


 बचत किन शक्तियों की करनी है?

  1. संकल्प शक्ति

  2. वाणी शक्ति

  3. कर्म शक्ति

  4. समय शक्ति

 व्यर्थ संकल्प = नुकसान
 साधारण दिनचर्या = कोई जमा नहीं

✔ किसी को उम्मीद देना = जमा
✔ हिम्मत दिलाना = जमा
✔ दुखी को सुख देना = जमा


 असली कमाई क्या है?

सिर्फ यह नहीं कि —

  • किसी को दुख नहीं दिया

  • कोई गलत कर्म नहीं किया

बल्कि यह भी देखो —

  • किसे सुख दिया?

  • किसे उमंग दिया?

  • किसे शक्ति दी?

यही असली बचत है।
यही 21 जन्मों की कमाई है।


 विश्व कल्याण का ईश्वरीय बजट

आपका लक्ष्य:

  • आत्मायें भी सुखी

  • प्रकृति भी पावन

  • संसार भी शांत

 भिखारीपन से मुक्ति
 दुख-अशांति से मुक्ति

यही है ईश्वरीय बजट।


विशेष वर्गों के लिए बापदादा के संदेश


 कुमारों के लिए

कुमार जीवन = लकी जीवन

  • बंधनों से मुक्त

  • मन से स्वतंत्र

  • सम्बन्ध से स्वतंत्र

 उल्टी सीढ़ी से बच गये
 उड़ते पंछी बन गये


 कुमारियों के लिए

कुमारियों को सेवा की लिफ्ट मिली है
यह लिफ्ट = श्रेष्ठ गिफ्ट

 स्वयं शक्तिशाली बनो
 सेवा को शक्तिशाली बनाओ
 नम्बर आगे लो


 सेवाधारी टीचर्स के लिए

सेवाधारी = निमित्त आत्मा

  • बाप के कदम पर कदम

  • हर कर्म श्रेष्ठ

  • हर बोल प्रेरणादायक

सेवाधारी की पहचान:

  • चेहरे पर उमंग

  • जीवन में उत्साह

  • सेवा में सफलता


 समीप सितारों के लक्षण

  • बापदादा जैसी समानता

  • मुखड़ा दर्पण बन जाता है

  • देखते ही बाप की याद आये

Sun shows Father
स्नेह में समानता स्वतः आ जाती है।


 समापन संदेश

सदा श्रेष्ठ सौदा याद रखने वाले
सदा जमा का खाता बढ़ाने वाले
सदा हर शक्ति को कार्य में लगाने वाले
ऐसे श्रेष्ठ धनवान बच्चों को
बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

प्रश्न 1: बापदादा अपने बच्चों को देखकर क्यों मुस्करा रहे हैं?
उत्तर:
क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े सौदागर — साधारण, भोले-भाले ब्राह्मण बच्चे हैं, जिन्होंने भगवान से ऐसा सौदा किया है जो एक जन्म में करके 21 जन्मों तक मालामाल बना देता है।


प्रश्न 2: वह कौन-सा सौदा है जो सबसे सस्ता और सबसे बड़ा है?
उत्तर:
सिर्फ एक सेकंड में, एक बोल में — “मेरा बाबा” कहना।
इस एक बोल से अनगिनत खजानों का सौदा हो जाता है।


 सस्ता सौदा क्या है?

प्रश्न 3: दुनिया का सौदा और ईश्वर से सौदे में क्या अंतर है?
उत्तर:
दुनिया का सौदा:

  • समय लगता है

  • मेहनत लगती है

  • पैसा लगता है

  • कोई गारंटी नहीं

ईश्वर से सौदा:

  • न समय

  • न मेहनत

  • न पैसा

  • और 21 जन्मों की गारंटी


प्रश्न 4: ईश्वर से सौदा कैसे किया जाता है?
उत्तर:
दिल से स्वीकार करके — “मेरा बाबा”
और आत्मा अनगिनत खजानों की मालिक बन जाती है।


 परमात्म डायरेक्टरी के VIP सितारे

प्रश्न 5: परमात्म डायरेक्टरी में कौन-सी आत्मायें VIP बनती हैं?
उत्तर:

  • भोली आत्मायें

  • अनजानी आत्मायें

  • ना-उम्मीद आत्मायें

यही आत्मायें परमात्म नयनों के सितारे और नूरे-रत्न बनती हैं।


प्रश्न 6: भगवान को भोली आत्मायें ही क्यों प्रिय लगती हैं?
उत्तर:
क्योंकि भगवान चतुर-सुजान हैं, लेकिन उन्हें बाहरमुखी चतुराई नहीं, दिल की सच्चाई पसंद है। इसलिए कहा जाता है —
“भोलों का भगवान”


 निर्भय बनो – बेफिक्र बादशाह बनो

प्रश्न 7: आज की दुनिया में धन के साथ कौन-सी समस्या जुड़ी है?
उत्तर:
आज की दुनिया में धन है लेकिन भय भी है।
जितना धन, उतना डर।


प्रश्न 8: ईश्वर के बच्चे कैसे बन जाते हैं?
उत्तर:
ईश्वर के बच्चे बन जाते हैं —

  • बेफिक्र बादशाह

  • निर्भय आत्मायें

जहाँ “मेरा बाबा” है, वहाँ भय का नाम-निशान नहीं।


 सिल्वर जुबली और गोल्डन जुबली का रहस्य

प्रश्न 9: असली सिल्वर और गोल्ड कैसे बनते हैं?
उत्तर:
सिल्वर और गोल्ड आग में तपकर शुद्ध बनते हैं।
ऐसे ही आत्मा भी संस्कारों की मिलावट जलाकर और व्यर्थ समाप्त करके शुद्ध स्वरूप बनती है।


प्रश्न 10: सच्ची सिल्वर और गोल्डन जुबली क्या है?
उत्तर:
सच्ची जुबली = आत्मा का शुद्ध स्वरूप
जहाँ आत्मा असली सोना बन जाती है।


 21 जन्मों की बचत योजना

प्रश्न 11: यह ईश्वरीय सौदा आत्मा को क्या बनाता है?
उत्तर:

  • अंतिम जन्म में भिखारी नहीं बनाता

  • द्वापर में सम्पन्न बनाता है

  • कलियुग के अंत में भी दाल-रोटी वाला बनाता है


प्रश्न 12: रॉयल फैमिली और प्रजा में क्या अंतर है?
उत्तर:

  • रॉयल फैमिली को कमाना नहीं पड़ता

  • प्रजा को कमाना पड़ता है

इसलिए निर्णय करो —
प्रजा बनना है या राज्याधिकारी?


 ईश्वरीय बजट कैसे बनायें?

प्रश्न 13: सरकार का बजट और ईश्वरीय बजट में क्या अंतर है?
उत्तर:
सरकार का बजट देता है —
पानी, बिजली, मकान

ईश्वरीय बजट देता है —
मुक्ति, जीवनमुक्ति, सुख और शांति


 बचत किन शक्तियों की करनी है?

प्रश्न 14: आत्मा को किन शक्तियों की बचत करनी चाहिए?
उत्तर:

  • संकल्प शक्ति

  • वाणी शक्ति

  • कर्म शक्ति

  • समय शक्ति


प्रश्न 15: कौन-सी बातें नुकसान कहलाती हैं?
उत्तर:

  • व्यर्थ संकल्प

  • साधारण दिनचर्या

ये जमा नहीं, नुकसान हैं।


प्रश्न 16: असली जमा क्या है?
उत्तर:

  • किसी को उम्मीद देना

  • हिम्मत दिलाना

  • दुखी को सुख देना

यही असली बचत है।


 असली कमाई क्या है?

प्रश्न 17: क्या सिर्फ गलत कर्म न करना ही काफी है?
उत्तर:
नहीं।
सिर्फ यह देखना काफी नहीं कि किसी को दुख नहीं दिया,
बल्कि यह देखना जरूरी है कि किसे सुख दिया, किसे शक्ति दी, किसे उमंग दिया।


प्रश्न 18: असली कमाई किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो आत्मा औरों को शक्तिशाली बनाती है, वही 21 जन्मों की सच्ची कमाई करती है।


 विश्व कल्याण का ईश्वरीय बजट

प्रश्न 19: ईश्वरीय बजट का लक्ष्य क्या है?
उत्तर:

  • आत्मायें सुखी हों

  • प्रकृति पावन बने

  • संसार शांत बने

और सब भिखारीपन व दुख-अशांति से मुक्त हों।


 कुमारों के लिए

प्रश्न 20: कुमार जीवन को लकी जीवन क्यों कहा गया है?
उत्तर:
क्योंकि कुमार जीवन:

  • बंधनों से मुक्त

  • मन से स्वतंत्र

  • सम्बन्ध से स्वतंत्र

यह जीवन उल्टी सीढ़ी से बचा हुआ जीवन है।


 कुमारियों के लिए

प्रश्न 21: कुमारियों को कौन-सी विशेष लिफ्ट मिली है?
उत्तर:
सेवा में आगे बढ़ने की लिफ्ट।
यह लिफ्ट ही श्रेष्ठ गिफ्ट है।


 सेवाधारी टीचर्स के लिए

प्रश्न 22: सेवाधारी की पहचान क्या है?
उत्तर:

  • चेहरे पर उमंग

  • जीवन में उत्साह

  • सेवा में सफलता

  • हर कर्म श्रेष्ठ

  • हर बोल प्रेरणादायक


 समीप सितारों के लक्षण

प्रश्न 23: समीप सितारों की विशेषता क्या होती है?
उत्तर:
उनमें बापदादा जैसी समानता दिखाई देती है।
उनका मुखड़ा बाप का दर्पण बन जाता है।

Sun shows Father
स्नेह में समानता स्वतः आ जाती है।


 समापन प्रश्न

प्रश्न 24: श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए?
उत्तर:
सदा श्रेष्ठ सौदा याद रखना,
सदा जमा का खाता बढ़ाना,
सदा हर शक्ति को कार्य में लगाना
और स्वयं को व विश्व को श्रेष्ठ बनाना।

डिस्क्लेमर:
यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ की अव्यक्त मुरली (दिनांक 15-01-1986) पर आधारित आध्यात्मिक अध्ययन एवं आत्मिक उन्नति हेतु प्रस्तुत किया गया है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति की आलोचना करना नहीं, बल्कि ईश्वरीय ज्ञान के माध्यम से आत्म-कल्याण की प्रेरणा देना है।
सभी दर्शकों से अनुरोध है कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से ग्रहण करें।

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