J.D.BK 6-2 क्या शांति केवल परमधाम में है या नहीं?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
क्या शांति केवल परमधाम में है?
(जैन दर्शन और ब्रह्माकुमारी ज्ञान के आलोक में)
भूमिका (Introduction)
आज हम अपने अध्ययन के छठे दिन का दूसरा पाठ कर रहे हैं।
आज का मूल प्रश्न बहुत गहरा है —
क्या शांति केवल परमधाम में ही है?
या क्या इस धरती पर भी आत्मा शांति और स्वर्ग का अनुभव कर सकती है?
अक्सर लोग मानते हैं —
-
शांति ऊपर है
-
स्वर्ग कहीं और है
-
इस संसार में तो केवल संघर्ष है
लेकिन जैन दर्शन और ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक ज्ञान इस विषय पर क्या कहता है?
आज हम उसी सत्य को समझने का प्रयास करेंगे।
दो अलग-अलग प्रश्न (Clear Distinction)
यहाँ दो प्रश्नों को अलग-अलग समझना बहुत ज़रूरी है —
1️⃣ क्या शांति केवल परमधाम में है?
2️⃣ क्या धरती पर स्वर्ग का अनुभव संभव है?
🔹 पहला प्रश्न आत्मा की अवस्था से जुड़ा है
🔹 दूसरा प्रश्न जीवन के अनुभव से
क्योंकि आम सोच यह है —
“शांति ऊपर है, स्वर्ग ऊपर है”
इसी भ्रम को आज हम स्पष्ट करेंगे।
नंबर 1 – शांति की खोज कहाँ हो रही है?
आज मनुष्य के पास —
-
धन है
-
सुविधाएँ हैं
-
तकनीक है
-
वैभव है
लेकिन क्या नहीं है?
शांति
जीवन का उदाहरण
-
बचपन में जीवन सरल था, मन शांत था
-
जैसे-जैसे बड़े हुए —
-
जिम्मेदारियाँ बढ़ीं
-
भागदौड़ बढ़ी
-
टॉलरेंस कम हुआ
-
आज तो —
-
बच्चे भी थके हुए
-
माता-पिता भी थके हुए
-
स्कूल, ट्यूशन, काम — सब कुछ दौड़
तो प्रश्न उठता है —
क्या इस संसार में शांति संभव ही नहीं?
क्या आत्मा को शांति पाने के लिए संसार छोड़ना ही पड़ेगा?
मुरली संदर्भ (Proper Date)
मुरली – 7 अगस्त 2024
बाबा स्पष्ट कहते हैं —
“शांति बाहर नहीं है।
शांति आत्मा के मूल स्वरूप में है।”
➡ आत्मा का स्वधर्म = शांति
➡ जब आत्मा आत्म-स्मृति में होती है,
➡ तब शांति का अनुभव स्वाभाविक होता है।
बाबा यह भी कहते हैं —
यह अनुभव संगम युग पर संभव है,
जब स्वयं परमात्मा आकर आत्मा को उसकी पहचान कराते हैं।
नंबर 2 – परमधाम क्या है?
जैन दर्शन के अनुसार
परम अवस्था = सिद्धशिला
-
जब आत्मा अपने सभी कर्मों का हिसाब पूरा कर लेती है
-
तब वह सिद्धशिला को प्राप्त करती है
सिद्धशिला का अर्थ —
-
पूर्णता
-
स्थिरता
-
शुद्धता
-
कर्मातीत अवस्था
🔹 ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार
परमधाम = शांति धाम
-
आत्माओं का मूल निवास
-
न शरीर
-
न कर्म
-
न विकार
केवल —
निर्विकार, स्थिर, मौन शांति
लेकिन एक गहरा सत्य
परमधाम में शांति है
पर वहाँ अनुभव की शांति नहीं है
क्यों?
क्योंकि —
-
अनुभव के लिए शरीर चाहिए
-
अनुभव के लिए कर्म क्षेत्र चाहिए
और वह केवल इस धरती पर संभव है।
नंबर 3 – क्या परमधाम की शांति ही अंतिम लक्ष्य है?
यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है —
यदि आत्मा को केवल शांति ही चाहिए,
तो वह बार-बार संसार में क्यों आती है?
🔹 जैन दर्शन कहता है
-
मोक्ष के बाद आत्मा लौटकर नहीं आती
🔹 ब्रह्माकुमारी ज्ञान कहता है
-
आत्मा केवल शांत-स्वरूप नहीं
-
आत्मा सुख-स्वरूप भी है
आत्मा के 7 मूल गुण —
-
शांति
-
सुख
-
आनंद
-
प्रेम
-
शक्ति
-
ज्ञान
-
पवित्रता
➡ परमधाम = विश्राम की अवस्था
➡ धरती = अनुभव की भूमि
स्वर्ग क्या है?
स्वर्ग —
कोई स्थान नहीं
आकाश में बना कोई लोक नहीं
✔ स्वर्ग आत्मा की अवस्था है
जहाँ —
-
दुख नहीं
-
विकार नहीं
-
पवित्रता है
-
सतोप्रधान स्थिति है
वही स्वर्ग है।
जैसे-जैसे आत्मा की शक्ति घटती है —
➡ स्वर्ग से नर्क की यात्रा शुरू होती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
✔ परमधाम – शांति का विश्राम
✔ धरती – सुख और अनुभव का क्षेत्र
आत्मा —
-
केवल शांत-स्वरूप नहीं
-
संपूर्ण गुणों का स्वरूप है
और परमात्मा —
संगम युग पर आकर
हमें फिर से ऊपर चढ़ना सिखाते हैं
क्योंकि गिरावट तो स्वाभाविक है।क्या शांति केवल परमधाम में ही है?
उत्तर:
परमधाम में शांति अवश्य है, लेकिन यह कहना कि शांति केवल वहीं है, पूर्ण सत्य नहीं है।
परमधाम में आत्मा की मूल अवस्था की शांति है, जिसे ब्रह्माकुमारी ज्ञान में Sweet Silence कहा जाता है।
लेकिन शांति का अनुभव केवल परमधाम तक सीमित नहीं है।
प्रश्न 2️⃣
परमधाम को “Sweet Silence” क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
परमधाम में —
कोई देह नहीं
कोई कर्म नहीं
कोई शब्द नहीं
कोई विकार नहीं
इसलिए वहाँ मीठी, स्थिर, मौन शांति है।
यह शांति आत्मा के स्वभाव की है, न कि किसी अनुभव या क्रिया की।
प्रश्न 3️⃣
क्या सतयुग में भी शांति होती है?
उत्तर:
हाँ, सतयुग में शांति भी होती है और शरीर भी होता है।
लेकिन वहाँ रहने वाली आत्माओं को यह पता ही नहीं होता कि वे शांति में हैं,
क्योंकि वहाँ —
दुख का कोई अनुभव नहीं
तुलना का कोई आधार नहीं
इसलिए शांति स्वाभाविक होती है, जानी हुई नहीं।
प्रश्न 4️⃣
क्या इस संसार में रहते हुए शांति संभव है?
उत्तर:
हाँ, संभव है।
ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार —
जो आत्माएँ पुरुषार्थ करती हैं
जो आत्म-स्मृति में रहती हैं
वे इस संसार में रहते हुए भी शांति का अनुभव कर सकती हैं।
और सतयुग में तो बिना पुरुषार्थ के भी शांति होती है।
प्रश्न 5️⃣
बिना पुरुषार्थ के शांति कहाँ संभव है?
उत्तर:
बिना पुरुषार्थ के शांति —
सतयुग में संभव है
क्योंकि वहाँ आत्मा की स्थिति सतोप्रधान होती है।लेकिन —
कलियुग या संगम युग में
शांति के लिए पुरुषार्थ आवश्यक है।
प्रश्न 6️⃣
पहला मूल प्रश्न क्या है?
उत्तर:
पहला मूल प्रश्न है —क्या शांति केवल परमधाम में है,
या धरती पर भी स्वर्ग का अनुभव संभव है?यहाँ दो बातें स्पष्ट करनी आवश्यक हैं —
एक प्रश्न शांति का है
दूसरा प्रश्न स्वर्ग के अनुभव का
प्रश्न 7️⃣
आम दुनिया शांति और स्वर्ग को ऊपर क्यों मानती है?
उत्तर:
क्योंकि सामान्य मान्यता है —
स्वर्ग ऊपर है
शांति ऊपर है
धरती दुखों की जगह है
इसी धारणा के कारण यह प्रश्न उठता है —
क्या धरती पर स्वर्ग का अनुभव संभव है?
प्रश्न 8️⃣
शांति की खोज आज कहाँ हो रही है?
उत्तर:
आज मनुष्य शांति की खोज कर रहा है —
धन में
सुविधाओं में
तकनीक में
भोग-विलास में
लेकिन शांति वहाँ नहीं मिल रही।
प्रश्न 9️⃣
आज जीवन में शांति क्यों कम होती जा रही है?
उत्तर:
क्योंकि —
जीवन की गति तेज हो गई है
भागदौड़ बढ़ गई है
सहनशक्ति (Tolerance) कम हो गई है
आज तो —
बच्चे थके हुए
माता-पिता थके हुए
पूरा परिवार मानसिक थकान में है
प्रश्न 🔟
क्या शांति पाने के लिए संसार छोड़ना ज़रूरी है?
उत्तर:
नहीं।
यह भ्रम है कि शांति के लिए संसार छोड़ना पड़ेगा।
शांति स्थान बदलने से नहीं,
स्थिति बदलने से आती है।
मुरली संदर्भ – प्रश्न 11
मुरली में बाबा शांति के बारे में क्या कहते हैं?
उत्तर:
7 अगस्त 2024 की मुरली में बाबा कहते हैं —“शांति बाहर नहीं है।
शांति आत्मा के मूल स्वरूप में है।”➡ आत्मा का स्वधर्म = शांति
➡ आत्म-स्मृति में रहने से शांति का अनुभव होता हैयह अनुभव संगम युग पर ही संभव है।
प्रश्न 12️⃣
जैन दर्शन के अनुसार परमधाम क्या है?
उत्तर:
जैन दर्शन के अनुसार —
परम अवस्था = सिद्धशिला
जब आत्मा —
सभी कर्मों का हिसाब पूरा कर लेती है
तो वह सिद्धशिला को प्राप्त करती है।सिद्धशिला का अर्थ —
पूर्णता
स्थिरता
शुद्धता
प्रश्न 13️⃣
ब्रह्मा कुमारी ज्ञान में परमधाम क्या है?
उत्तर:
ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार —
परमधाम = शांति धाम
आत्माओं का मूल निवास
वहाँ —
कोई देह नहीं
कोई कर्म नहीं
केवल निर्विकार, स्थिर शांति है।
प्रश्न 14️⃣
क्या परमधाम में अनुभव की शांति होती है?
उत्तर:
नहीं।
परमधाम में स्थिति की शांति है,
लेकिन अनुभव की शांति नहीं।अनुभव के लिए चाहिए —
शरीर
कर्म
संबंध
जो केवल इस संसार में संभव है।
प्रश्न 15️⃣
यदि आत्मा को केवल शांति चाहिए, तो वह संसार में क्यों आती है?
उत्तर:
क्योंकि आत्मा —
केवल शांत-स्वरूप नहीं
सुख-स्वरूप भी है
आत्मा में 7 मूल गुण हैं —
शांति
सुख
आनंद
प्रेम
शक्ति
ज्ञान
पवित्रता
प्रश्न 16️⃣
परमधाम और धरती में मूल अंतर क्या है?
उत्तर:
परमधाम → विश्राम की अवस्था
धरती → अनुभव की भूमि
एक जगह आत्मा विश्राम करती है,
दूसरी जगह आत्मा गुणों का अनुभव करती है।
प्रश्न 17️⃣
स्वर्ग क्या है?
उत्तर:
स्वर्ग —
कोई भौगोलिक स्थान नहीं
कोई आकाश में बना लोक नहीं
स्वर्ग —
आत्मा की अवस्था है।जहाँ —
दुख नहीं
पवित्रता है
सतोप्रधान स्थिति है
वही स्वर्ग है।
प्रश्न 18️⃣
स्वर्ग से नर्क की यात्रा कैसे होती है?
उत्तर:
जैसे-जैसे —
आत्मा की शक्ति घटती है
गुण कम होते जाते हैं
वैसे-वैसे —
➡ स्वर्ग से नर्क की ओर यात्रा शुरू होती है।
🔚 निष्कर्ष – अंतिम प्रश्न
अंतिम सत्य क्या है?
उत्तर:
परमधाम = शांति का विश्राम
धरती = सुख और अनुभव का क्षेत्र
आत्मा —
केवल शांत नहीं
संपूर्ण गुणों का स्वरूप है
और परमात्मा —
संगम युग पर आकर
हमें फिर से ऊपर चढ़ना सिखाते हैं,
क्योंकि गिरावट तो स्वाभाविक है।
Disclaimer
डिस्क्लेमर:
यह वीडियो/अध्याय ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक ज्ञान, जैन दर्शन, और मुरली संदर्भों पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, मत या मान्यता का विरोध नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समझ को स्पष्ट करना है।
यह सामग्री आत्मिक जागरूकता और आत्म-अनुभव के लिए है।
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