J.D.BK 6-3 परमात्मा क्या केवल दर्शक है?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
अध्याय : परमात्मा क्या केवल दर्शक है?
(जैन दर्शन एवं ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान के आधार पर)
छठा पाठ – तीसरा हिस्सा
छठे दिन का तीसरा पाठ
1️⃣ भूमिका: संसार का दर्द और परमात्मा पर प्रश्न
कोई मर रहा है,
कोई दुख में है,
सारी दुनिया में अशांति और आग लगी हुई है।
तब मन में स्वाभाविक प्रश्न उठता है—
परमात्मा कुछ करता क्यों नहीं?
क्या वह केवल देखता रहता है?
क्या परमात्मा सिर्फ़ एक दर्शक है?
यही प्रश्न आज हर साधक के मन में है।
2️⃣ “परमात्मा दर्शक है” – यह धारणा कितनी सही?
अक्सर कहा जाता है—
“परमात्मा तो सब कुछ जानता है, इसलिए वह दर्शक है।”
लेकिन सोचिए—
🔹 जो सब कुछ जानता हो,
🔹 जिसे ड्रामा समझ में हो,
🔹 जिसे देखने कहीं जाना न पड़े—
वह दर्शक कैसे हो सकता है?
दर्शक वह होता है जिसे पता नहीं होता,
जो देखने जाता है।
परमात्मा तो साक्षी है—
वह जानकर, समझकर और उद्देश्य के साथ देखता है।
3️⃣ सबसे मौलिक प्रश्न: मुक्ति में परमात्मा की भूमिका क्या है?
हर साधक के मन में यह प्रश्न अवश्य उठता है—
-
यदि आत्मा स्वयं कर्म करती है,
-
यदि आत्मा ही बंधन में है,
तो मुक्ति में परमात्मा की क्या भूमिका है?
क्या आत्मा स्वयं ही मुक्त होती है?
या परमात्मा भी कुछ करते हैं?
4️⃣ जैन दर्शन और बीके ज्ञान – समानता और अंतर
दोनों दर्शन यह स्वीकार करते हैं कि—
✔ आत्मा कर्म की कर्ता है
✔ आत्मा ही बंधन और मुक्ति की जिम्मेदार है
लेकिन परमात्मा की भूमिका को दोनों अलग ढंग से स्पष्ट करते हैं।
मुरली – 12 अगस्त 2024
“बच्चे, मुक्ति तुम्हारा अधिकार है,
पर मार्ग बताने वाला मैं हूँ।”
5️⃣ जैन दर्शन में परमात्मा की भूमिका
जैन दर्शन के अनुसार—
-
आत्मा स्वयं अपने कर्मों की कर्ता है
-
आत्मा स्वयं पुरुषार्थ से मुक्त होती है
-
कर्म भी स्वयं करती है और फल भी स्वयं भोगती है
परमात्मा को—
-
कर्म काटने वाला नहीं माना जाता
-
एक आदर्श सिद्ध अवस्था माना जाता है
-
जहाँ कोई कर्म, कोई भूमिका नहीं
आत्मा स्वयं जिम्मेदार है—
बंधन के लिए भी और मुक्ति के लिए भी।
उदाहरण
जैसे शिक्षक रास्ता बता सकता है,
लेकिन परीक्षा विद्यार्थी को स्वयं देनी होती है।
6️⃣ जैन दर्शन के भीतर उठने वाला गहरा प्रश्न
यदि—
-
आत्मा ही कर्म करती है
-
आत्मा ही बंधन में है
-
आत्मा ही कमजोर और पतित हो चुकी है
तो फिर प्रश्न उठता है—
कमजोर आत्मा स्वयं को पूरी तरह मुक्त कैसे करेगी?
यहीं से बीके ज्ञान की स्पष्टता शुरू होती है।
7️⃣ ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान की स्पष्ट दृष्टि
मुरली – 25 मई 2024
“कमजोर आत्मा को शक्ति की आवश्यकता होती है।”
बीके ज्ञान के अनुसार—
परमात्मा भी आत्मा के समान ज्योति बिंदु स्वरूप है,
पर वह—
✔ सदा शुद्ध
✔ सदा मुक्त
✔ कर्मबंधन से परे
परमात्मा क्या करते हैं?
-
जन्म नहीं लेते
-
कर्म नहीं भोगते
-
ज्ञान देते हैं
-
शक्ति देते हैं
-
मुक्ति का मार्ग बताते हैं
मुरली – 6 जून 2024
“मैं स्वयं सदा मुक्त हूँ,
इसलिए दूसरों को मुक्ति का मार्ग दिखाता हूँ।”
8️⃣ परमात्मा क्या नहीं करते?
परमात्मा—
आत्मा के कर्म अपने हाथ से नहीं काटते
कर्मों का फल आत्मा के स्थान पर नहीं भोगते
मुरली – 28 जुलाई 2024
“मैं तुम्हारे कर्म नहीं काटता,
मैं तुम्हें शक्ति देता हूँ कि तुम स्वयं काट सको।”
इससे आत्मा की स्वतंत्रता और न्याय बना रहता है।
9️⃣ परमात्मा शक्ति कैसे देते हैं?
🔹 ज्ञान से
🔹 क्योंकि ज्ञान ही शक्ति है
जब आत्मा को सही तरीका पता चल जाता है,
तो वह स्वयं आगे बढ़ सकती है।
मुरली – 18 जुलाई 2024
“अज्ञान ही बंधन है और ज्ञान ही मुक्ति।”
🔟 राजयोग: आत्मा को शक्तिशाली बनाने की विधि
राजयोग द्वारा आत्मा परमात्मा से जुड़ती है—
✔ विकारों की जड़ कमजोर होती है
✔ पुराने कर्म जलते हैं
✔ आत्मा शक्तिशाली बनती है
मुरली – 14 जुलाई 2024
“योग से आत्मा शक्तिशाली बनती है।”
1️⃣1️⃣ सही मार्गदर्शन की भूमिका
परमात्मा बताते हैं—
-
क्या करना है
-
क्या छोड़ना है
-
कब रुकना है
मुरली – 30 जून 2024
“मैं रास्ता दिखाता हूँ, चलना तुम्हें है।”
1️⃣2️⃣ परमात्मा और आत्मा का संबंध
-
परमात्मा → शिक्षक / सद्गुरु
-
आत्मा → विद्यार्थी / साधक
उदाहरण
जैसे बिजली विभाग कनेक्शन देता है,
पर उपकरण चलाना उपभोक्ता पर निर्भर है।
परमात्मा शक्ति का स्रोत है,
आत्मा उसका उपयोग करती है।
1️⃣3️⃣ परमात्मा के बिना मुक्ति कठिन क्यों?
क्योंकि—
-
आत्मा स्वयं पतित है
-
शक्ति सीमित है
-
दृष्टि धुंधली है
मुरली – 9 जून 2024
“पावन बनने के लिए पावन की याद चाहिए।”
1️⃣4️⃣ संगम युग में परमात्मा की विशेष भूमिका
संगम युग में परमात्मा—
✔ स्वयं ज्ञान देते हैं
✔ राजयोग सिखाते हैं
✔ मुक्ति और जीवन-मुक्ति का अधिकार देते हैं
मुरली – 14 सितंबर 2024
“मैं आया हूँ तुम्हें मुक्त और जीवन-मुक्त बनाने।”
1️⃣5️⃣ जैन दर्शन और बीके ज्ञान का संतुलन
-
जैन दर्शन → आत्म प्रयास पर बल
-
बीके ज्ञान → आत्म प्रयास + परमात्मा की शक्ति
निष्कर्ष
✔ मुक्ति आत्मा का कर्म है
✔ शक्ति परमात्मा से मिलती है
जब आत्मा—
-
ज्ञान से जागृत
-
योग से शक्तिशाली
-
और पुरुषार्थ में दृढ़ बनती है
तभी वह सच्ची मुक्ति और जीवन-मुक्ति का अनुभव करती है।
मुरली – 22 सितंबर 2024
“मैं मददगार हूँ,
पर निर्णय और पुरुषार्थ तुम्हारा है।
प्रश्न 1: परमात्मा क्या वास्तव में केवल दर्शक है?
उत्तर:
परमात्मा को केवल “दर्शक” कहना पूर्ण सत्य नहीं है।
दर्शक वह होता है जिसे ड्रामा देखने जाना पड़े, जिसे पहले से पता न हो।
परमात्मा तो सब कुछ जानने वाला और साक्षी है।
वह अज्ञानवश नहीं, बल्कि ड्रामा को जानकर और समझकर देखता है।
प्रश्न 2: जब दुनिया में इतना दुख है, तो परमात्मा कुछ करता क्यों नहीं?
उत्तर:
परमात्मा आत्मा की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करते।
यदि वह सीधे कर्म काट दें, तो कर्म का नियम और न्याय समाप्त हो जाएगा।
परमात्मा दुख हरने नहीं, बल्कि दुख से सदा-सदा मुक्त करने का मार्ग बताने आते हैं।
प्रश्न 3: यदि आत्मा स्वयं कर्म करती है, तो मुक्ति में परमात्मा की क्या भूमिका है?
उत्तर:
जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान—
दोनों यह मानते हैं कि आत्मा कर्म की कर्ता है।
परंतु बीके ज्ञान स्पष्ट करता है कि—
आत्मा को ज्ञान और शक्ति की आवश्यकता होती है,
जो परमात्मा देते हैं।
मुरली – 12 अगस्त 2024
“बच्चे, मुक्ति तुम्हारा अधिकार है,
पर मार्ग बताने वाला मैं हूँ।”
प्रश्न 4: जैन दर्शन के अनुसार परमात्मा की भूमिका क्या है?
उत्तर:
जैन दर्शन के अनुसार—
-
आत्मा स्वयं कर्म करती है
-
आत्मा स्वयं पुरुषार्थ से मुक्त होती है
-
परमात्मा को कर्म काटने वाला नहीं माना जाता
परमात्मा को एक आदर्श सिद्ध अवस्था माना गया है,
जहाँ कोई कर्म और कोई भूमिका नहीं।
उदाहरण:
जैसे शिक्षक रास्ता बता सकता है,
लेकिन परीक्षा विद्यार्थी को स्वयं देनी होती है।
प्रश्न 5: जैन दर्शन में उठने वाला गहरा प्रश्न क्या है?
उत्तर:
यदि आत्मा ही—
-
कर्म करती है
-
बंधन में है
-
कमजोर और पतित हो चुकी है
तो प्रश्न उठता है—
कमजोर आत्मा स्वयं को पूरी तरह मुक्त कैसे करेगी?
यहीं से बीके ज्ञान की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
प्रश्न 6: ब्रह्मा कुमारीज़ ज्ञान क्या स्पष्ट करता है?
उत्तर:
बीके ज्ञान कहता है कि—
कमजोर आत्मा को शक्ति चाहिए।
मुरली – 25 मई 2024
“कमजोर आत्मा को शक्ति की आवश्यकता होती है।”
परमात्मा स्वयं—
-
सदा शुद्ध
-
सदा मुक्त
-
कर्मबंधन से परे
ज्योति बिंदु स्वरूप आत्मा हैं।
प्रश्न 7: परमात्मा क्या करते हैं?
उत्तर:
परमात्मा—
-
जन्म नहीं लेते
-
कर्म नहीं भोगते
-
ज्ञान देते हैं
-
शक्ति देते हैं
-
मुक्ति का मार्ग बताते हैं
मुरली – 6 जून 2024
“मैं स्वयं सदा मुक्त हूँ,
इसलिए दूसरों को मुक्ति का मार्ग दिखाता हूँ।”
प्रश्न 8: परमात्मा क्या नहीं करते?
उत्तर:
परमात्मा आत्मा के कर्म अपने हाथ से नहीं काटते।
कर्मों का फल आत्मा को ही भोगना होता है।
मुरली – 28 जुलाई 2024
“मैं तुम्हारे कर्म नहीं काटता,
मैं तुम्हें शक्ति देता हूँ कि तुम स्वयं काट सको।”
इससे आत्मा की स्वतंत्रता और न्याय बना रहता है।
प्रश्न 9: परमात्मा आत्मा को शक्ति कैसे देते हैं?
उत्तर:
परमात्मा ज्ञान के माध्यम से शक्ति देते हैं।
क्योंकि ज्ञान ही अज्ञान को समाप्त करता है।
मुरली – 18 जुलाई 2024
“अज्ञान ही बंधन है और ज्ञान ही मुक्ति।”
प्रश्न 10: राजयोग की भूमिका क्या है?
उत्तर:
राजयोग द्वारा आत्मा परमात्मा से जुड़ती है।
इससे—
-
विकार कमजोर होते हैं
-
पुराने कर्म जलते हैं
-
आत्मा शक्तिशाली बनती है
मुरली – 14 जुलाई 2024
“योग से आत्मा शक्तिशाली बनती है।”
प्रश्न 11: परमात्मा सही मार्गदर्शन कैसे देते हैं?
उत्तर:
परमात्मा बताते हैं—
क्या करना है,
क्या छोड़ना है,
और कब रुकना है।
मुरली – 30 जून 2024
“मैं रास्ता दिखाता हूँ, चलना तुम्हें है।”
प्रश्न 12: परमात्मा और आत्मा का आपसी संबंध क्या है?
उत्तर:
-
परमात्मा → शिक्षक / सद्गुरु
-
आत्मा → विद्यार्थी / साधक
उदाहरण:
जैसे बिजली विभाग कनेक्शन देता है,
उपकरण चलाना उपभोक्ता पर निर्भर है।
प्रश्न 13: परमात्मा के बिना मुक्ति कठिन क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि आत्मा—
-
पतित हो चुकी है
-
शक्ति सीमित है
-
दृष्टि धुंधली है
मुरली – 9 जून 2024
“पावन बनने के लिए पावन की याद चाहिए।”
प्रश्न 14: संगम युग में परमात्मा की विशेष भूमिका क्या है?
उत्तर:
संगम युग में परमात्मा स्वयं—
-
ज्ञान देते हैं
-
राजयोग सिखाते हैं
-
मुक्ति और जीवन-मुक्ति का अधिकार देते हैं
मुरली – 14 सितंबर 2024
“मैं आया हूँ तुम्हें मुक्त और जीवन-मुक्त बनाने।”
प्रश्न 15: जैन दर्शन और बीके ज्ञान का संतुलन क्या है?
उत्तर:
-
जैन दर्शन → आत्म प्रयास पर बल
-
बीके ज्ञान → आत्म प्रयास + परमात्मा की शक्ति
अंतिम प्रश्न: सच्ची मुक्ति कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर:
जब आत्मा—
-
ज्ञान से जागृत होती है
-
योग से शक्तिशाली बनती है
-
और पुरुषार्थ में दृढ़ रहती है
तभी वह सच्ची मुक्ति और जीवन-मुक्ति का अनुभव करती है।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
यह अध्याय/वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं तथा जैन दर्शन के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, दर्शन, संप्रदाय या मान्यता की आलोचना, विरोध या अपमान करना नहीं है।
यह प्रस्तुति केवल आत्मिक अध्ययन, आत्म-मंथन और आध्यात्मिक समझ के लिए है।
दर्शक इसे कृपया आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण करें।
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