यहाँ आपका टेक्स्ट टाइमलाइन नंबर हटाकर साफ़ रूप में दिया गया है:

क्या ज्ञान
योग

धारणा
और सेवा

चारों सब्जेक्ट में

अनुभवी स्वरूप हूं।
क्या मैं

चारों सब्जेक्ट में
अनुभवी स्वरूप हूं?

जो स्वमान का अनुभवी बनेगा
वही अनुभवी स्वरूप होगा।

जो स्वमान में अनुभवी नहीं बनेगा वह कैसे
होगा?

चार सब्जेक्टों में आज हमने अनुभवी स्वरूप
बनना है।

योग
अब चारों सब्जेक्ट को हम ध्यान से

देखेंगे। ज्ञान क्या है? सत्य को समझने
वाला ज्ञानी स्वरूप। जो सच को समझता है,

वह ज्ञान स्वरूप आत्मा है।

इसमें हमें अच्छी तरह से मालूम है। एक
होता है ज्ञान को सुनना, एक होता है ज्ञान

को जानना, एक होता है ज्ञान को मानना।
एक होता है समझना।

जो ज्ञान को समझ लेता है, वह अपने जीवन
में लाता है। समझना है ज्ञान। उसके बाद

स्वयं से जुड़ा आत्मा से परमात्मा तक योग
युक्त स्वरूप।

जब स्वयं से जुड़ा और फिर आत्मा से
परमात्मा तक योग युक्त स्वरूप वह है योगी

आत्मा।
योग युक्त स्वरूप वह है योगी आत्मा।

सेवा
यह चित्र दुनिया वालों के हिसाब से दिखाया

है। निस्वार्थ सेवा निस्वार्थ सेवा केवल
वही आत्मा कर सकती है जो स्वमान में स्थित

होती है। जो स्वमान में स्थित नहीं है। वह
निस्वार्थ सेवा नहीं कर सकती।

आत्मा ही केवल निस्वार्थ सेवा करती है।
कोई आत्मा निस्वार्थ सेवा नहीं कर कोई

शरीर धारी निस्वार्थ सेवा नहीं कर सकता।

धारणा
जब हम उन उस ज्ञान को उस स्वमान को अपने

जीवन में धारण करते हैं तब वह है धारणा।

ज्ञान से

क्या बनेंगे हम?
देखने वाला।

योग से स्थित प्रज
धारणा से शक्तिशाली

सेवा से निमित्त
कराने वाला करा रहा है। मैं निमित्त कर

रहा हूं। चारों का अनुभव पूर्णता का
स्वरूप

पूर्णता का स्वरूप

डिस्क्लेमर
महत्वपूर्ण यह स्पीच ब्रह्मा कुमारीज की

मुरलियों के आधार पर आध्यात्मिक ज्ञान को
सरल और सहज समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत

करने का प्रयास है। इसमें दिए गए उदाहरण
केवल

केवल
समझ को आसान बनाने के लिए कुछ बिंदुओं में

व्याख्या इंटरप्रिटेशन भी सम्मिलित है।
श्रोता स्वयं मुरलियों के अध्ययन करें और

अपने विवेक से सत्य को जाने।
अपने विवेक से सत्य को समझे।

अध्याय का मूल प्रश्न
क्या मैं ज्ञान, योग, धारणा, सेवा चारों

सब्जेक्ट में अनुभवी स्वरूप हूं?
नंबर एक आध्यात्मिक जीवन अधूरा क्यों रह

जाता है?
आध्यात्मिक जीवन अधूरा क्यों रह जाता है?

बहुत सी आत्माएं ज्ञान में अच्छी है लेकिन
योग में कमजोर है। बहुत सी आत्माएं ज्ञान

में अच्छी है लेकिन योग में कमजोर

कुछ योग में अच्छा करती है लेकिन धारणा
में कमजोर है।

कुछ सेवा तो बहुत करती है लेकिन अंदर
स्टेबिलिटी नहीं स्थिरता नहीं है।

हर एक आत्मा चारों सब्जेक्ट में एक्सपर्ट
हो ऐसा सबके साथ नहीं होता।

उनका कोई ना कोई सब्जेक्ट कमजोर होगा।
बाबा कहते चारों सब्जेक्ट 100% चाहिए।

कोई किस सब्जेक्ट में ज्यादा, कोई किस
सब्जेक्ट में कम।

क्यों? क्योंकि चारों सब्जेक्ट बैलेंस्ड
नहीं है।

चारों सब्जेक्ट में बाबा की तरफ से
बैलेंस्ड आत्मा वो है 100% हो। चारों ही

सब्जेक्ट

बाप दादा का स्पष्ट संकेत
बाप दादा 30 जनवरी

2010 की मुरली में अव्यक्त मुरली है यह 30
जनवरी 2010 की ज्ञान

योग धारणा और सेवा
चारों सब्जेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनो।

अनुभवी स्वरूप बनो।

चारों सब्जेक्ट क्यों आवश्यक है?

चारों सब्जेक्ट क्यों आवश्यक हैं?

राज योग एक कंप्लीट स्पिरिचुअल सिस्टम है।
राज योग एक कंप्लीट स्पिरिचुअल सिस्टम है।

यदि एक भी पक्ष कमजोर हो
बैलेंस डिस्टर्ब होने लगता है।

पहला सब्जेक्ट ज्ञान
ज्ञान क्या है?

आत्मा की पहचान
परमात्मा का परिचय

कर्म और ड्रामा की समझ। कर्म और ड्रामा की
समझ।

लेकिन केवल इंफॉर्मेशन
पर्याप्त नहीं।

केवल इंफॉर्मेशन
पर्याप्त नहीं।

ज्ञान का लक्ष्य लाइक और माइट बनना। ज्ञान
का लक्ष्य क्या है? लाइक और माइट बनना।

जितना ज्ञान हमारे अंदर आता जाएगा
ऑटोमेटिक

शक्ति मिलती जाती है। जिसके लिए आप
एग्जांपल ले सकते हैं।

कोई अनपढ़ बच्चा हो और कोई दसवीं पास
बच्चा हो। अनपढ़ के आगे तो पांचवी पास भी

अपने आप को शक्तिशाली समझता है। वो बेचारा
कुछ भी नहीं पढ़ सकता।

काला अक्षर भैंस बराबर है। परंतु पांचवी
वाला बच्चा भी उसके आगे अपने आप को

होशियार समझेगा। शक्तिशाली समझेगा। परंतु
पांचवी पास के आगे दसवीं वाला उसके आगे

बीए वाला उसके आगे एमए वाला नेचुरल वो भी
महसूस करेंगे कि यह हमसे होशियार है। यह

हमसे ज्यादा पढ़ा लिखा है।

तो जितना ज्ञान ज्यादा धारण होता जाता है,
समझता जाता है तो उतना उसमें शक्ति बढ़ती

जाती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

ब्रेन को क्लेरिटी देता है। जितना ज्ञान
होता है हमारी बुद्धि यह ब्रेन कहेगा

क्योंकि विज्ञान वाले बुद्धि को नहीं
जानते। वो बुद्धि की जगह क्या बोलेंगे?

ब्रेन बोलेंगे। ब्रेन जब कहा जाएगा वो तो
खोपड़ी हो गई। वो तो हार्ड मास के उसको

बोलेगा। परंतु वैज्ञानिक जो भी बोलता है
हम समझ सकते हैं। वह कहते हैं ब्रेन में

क्लेरिटी देता है। हमारे मस्तिष्क में बात
स्पष्ट होती है और हम अपने ज्ञान के हिसाब

से उसको समझेंगे कि बुद्धि के अंदर हर बात
स्पष्ट होती जाती है। बुद्धि में होती है

पर तुम्हारी डिक्शनरी बुद्धि और ब्रेन में
अंतर नहीं कर सकती।

कंफ्यूजन कम करता है। डिसीजन
मेकिंग इंप्रूव करता है। हमारे अंदर

कंफ्यूजन जो है ना कम हो जाता है। जितना
ज्ञान कांसेप्ट क्लियर होंगे उतना हमें

कंफ्यूजन नहीं होगा। कंफ्यूजन कब होता है?
जब कोई ज्ञान की बात हमें स्पष्ट ना हो।

डिसीजन मेकिंग इंप्रूव होती है। हमारी
निर्णय करने की शक्ति बढ़ जाती है।

निर्णय करने की शक्ति हमारी क्या होती है?
बढ़ जाती है। दूसरा सब्जेक्ट योग। दूसरा

सब्जेक्ट क्या है? योग। योग का अर्थ
कनेक्शन। रिमेंबेंस। इनर अवेयरनेस।

योग क्यों आवश्यक है? क्योंकि ज्ञान
डायरेक्शन देता है। ज्ञान से हमें

डायरेक्शन मिल जाता है बस। परंतु जब हम
योग करते हैं तो क्या हो जाता है? योग

शक्ति देता है।

ज्ञान की डायरेक्शन को जब हम अप्लाई करते
हैं तब उससे हमें शक्ति मिलती है।

अप्लाई करना प्रयोग करेंगे तो वह धारणा
में चला जाएगा। अप्लाई करना माना अपनी

बुद्धि के अंदर उसको बार-बार देखना। अब
जैसे हमें एक सवाल करना समझा दिया है।

हमने दूसरा किया, तीसरा किया, चौथा किया।
मतलब थोड़ा थोड़ा परिवर्तन सवाल में आता

जाता है। पूरी प्रश्नावली में सारे सवाल
एक जैसे नहीं होते। उनमें हर अंतर के सवाल

दिए जाते हैं। तो धीरे-धीरे वह अंतर भी
हमें समझ में आता जाता है

और हम उसी अनुसार फिर आगे बढ़ते जाते हैं।
हमें शक्ति मिलती जाती है।

यह तो होता है थ्योरिकल कहो। उसको अपने
बुद्धि के अंदर मंथन कहो। योग में मंथन

आता है। मन मना भव आता है। जितना ज्ञान का
हम अपने बुद्धि में मंथन करते हैं, अपने

आप को समझाते हैं, वह बुद्धि में धारण
होता है। परंतु दुनिया वाले साइंस वाले

कहेंगे वह ब्रेन में होता है।

योग के बिना क्या होता है? योग नहीं होगा
तो क्या होगा? नॉलेज ड्राई हो जाती है।

मन वीक हो जाता है। ज्ञान सूखा हो जाता है
और मन हमारा क्या हो जाता है? कमजोर हो

जाता है। वो कुछ कर नहीं सकता।

और परिस्थिति
उसे डिस्टर्ब कर देती है। क्योंकि मन

निर्णय नहीं दे सकता। मन कुछ करे तो क्या
करें? ऊपर से कोई मैसेज आए। अब ऊपर से

मैसेज कोई भी नहीं आ रहा तो मन कुछ भी
नहीं कर सकता।

तीसरा सब्जेक्ट धारणा का।
धारणा का अर्थ है जो समझा है उसे जीवन में

लाना।
जो हमने समझ लिया है

उसको जीवन में लाना।
उदाहरण

शांति
सुनना

ज्ञान
शांति अनुभव करना योग

परिस्थिति में शांत रहना यह धारणा

अंतर समझ में आया

मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं। यह मेरा
स्वमान है। अब ज्ञान में क्या है? मैंने

सुना कि मैं आत्मा शांत स्वरूप हूं। जान
लिया।

अब उसे हमने
अपने आप को अनुभव कराया कि वास्तव में मैं

यह पांच तत्व का शरीर नहीं हूं। मैं इसको
चलाने वाली अजर अमर अविनाशी आत्मा।

अब परिस्थिति कैसी भी आई परंतु मेरा मन
शांत रहा। इसका मतलब मैंने शांत धारणा कर

लिया है। मैंने अपने आप को शांत बना लिया
है।

साइकोलॉजी क्या कहती है?
रियल ट्रांसफॉर्मेशन तब होता है जब

अंडरस्टैंडिंग बिहेवियर बनता है। व्यवहार
बन जाता है। यही धारणा है। चौथा सब्जेक्ट
सेवा। चौथा सब्जेक्ट क्या है? सेवा।

सेवा केवल बोलना नहीं।
सच्ची सेवा। सेवा सिर्फ बोलना नहीं। सच्ची

सेवा।
वाइब्रेशन से, स्थिति से, शुभ भावना से,

प्रेजेंस से होती है। सेवा कैसे होती है?
सच्ची सेवा कैसे होती है? वाइब्रेशन से,

संकल्पों से,
स्थिति से, जो मेरी अवस्था होगी, वह सेवा

करेगी। मेरी शुभ भावना से, मेरी प्रेजेंस
से मैं उपस्थित हूं।

बाप दादा सेवा को कैसे देखते हैं? बाप
दादा सेवा को कैसे देखते हैं?

यदि आत्मा डिस्टर्ब है,
अनस्टेबल है,

देह भान में है,
तो शब्दों की सेवा लिमिटेड हो जाती है।

लिमिटेड हो जाती है।

लेकिन यदि स्थिति शक्तिशाली है,
वाइब्रेशन प्योर है,

तो मौन भी सेवा बन जाता है।

चारों सब्जेक्ट का संबंध

सब्जेक्ट कार्य
चारों सब्जेक्ट का संबंध हम देखेंगे। ऊपर

सब्जेक्ट और नीचे कार्य आएगा।
ज्ञान हमें दिशा देता है। बहुत अच्छी तरह

से समझना है। ज्ञान क्या करता है? हमें
दिशा देता है।

योग हमें शक्ति देता है।
धारणा परिवर्तन लाती है।

सेवा विस्तार करती है।

इमबैलेंस क्यों आता है?

यदि केवल नॉलेज कलेक्ट किया लेकिन योग
नहीं किया।

केवल नॉलेज कलेक्ट किया लेकिन योग नहीं
किया।

ड्राईनेस आएगी।
क्या आएगी? ड्राईनेस आएगी।

यदि योग किया
लेकिन धारणा नहीं लाई

स्टेबिलिटी नहीं बनेगी।

यदि आप धारणा नहीं करेंगे तो स्टेबिलिटी
नहीं बनेगी।

यदि सेवा की
लेकिन अवेयरनेस नहीं रखी

एग्जॉशन हो सकता है। सावधान नहीं रखा अपने
आपको। सावधान नहीं बनाया तो थक जाएंगे।

एग्जॉशन हो सकती है। थकावट आ सकती है।

अनुभवी स्वरूप कौन है?

अनुभवी आत्मा
ज्ञान को जीती है।

योग को अनुभव करती है।
ज्ञान को जीती है।

योग को महसूस करती है। अनुभव करती है।
धारणा को व्यवहार में लाती है। सेवा में

सेवा वाइब्रेशन से करती है।

चारों सब्जेक्ट की परीक्षा
कहां होती है?

क्लासेस में नहीं,
परिस्थितियों में।

जब क्रिटिसिज्म हो,
डिले हो,

प्रेशर हो,
रिलेशनशिप चैलेंज करें।

तब चेक करें।

क्या चारों सब्जेक्ट बैलेंस में है?

सहज अभ्यास विधि

मॉर्निंग: ज्ञान लें।

ड्यूरिंग द डे: योग करें।

परिस्थितियां आएं तो ज्ञान को अप्लाई करें।
धारणा को जीवन में लाएं।

दूसरों के साथ शुभ भावना से सेवा करें।

न्यूरो साइंस क्या कहती है?

बैलेंस डेवलपमेंट। हमारा विकास संतुलित
होता है।

इमोशनल इंटेलिजेंस बढ़ता है।

रेजिलियंस बढ़ता है।

इनर स्टेबिलिटी मजबूत होती है।

ये चारों सब्जेक्ट का प्रैक्टिकल साइंस
है।

स्वयं को चेक करें।

क्या मेरा ज्ञान व्यवहार में आता है?

क्या योग मुझे शक्ति दे रहा है?

क्या धारणा परिस्थिति में दिखाई देती है?

क्या मेरी सेवा वाइब्रेशन से भी हो रही
है?

क्या मैं संकल्प से भी सेवा कर रहा
हूं?

आज का अभ्यास

आज पूरे दिन हर कर्म में चेक करें।
अभी कौन सा सब्जेक्ट कमजोर हो रहा है?

अध्याय निष्कर्ष

संपूर्ण राजयोग जीवन

ज्ञान से प्रकाशित
योग से शक्तिशाली

धारणा से परिवर्तित
सेवा से विस्तारित

मेरा जीवन तब संपूर्ण बनता है जब चारों
सब्जेक्ट मेरे जीवन में दिखाई दें।

ज्ञान से प्रकाशित जीवन बनेगा।
योग से शक्तिशाली जीवन बनेगा।
धारणा से परिवर्तित जीवन बनेगा।
सेवा से विस्तारित जीवन बनेगा।

अध्याय सूत्र

जब चारों सब्जेक्ट बैलेंस में आते हैं
तब आत्मा अनुभवी स्वरूप बनती है।

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