MURLI 14-06-2026 |BRAHMA KUMARIS

Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below

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14-06-26
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
रिवाइज: 24-10-10 मधुबन

समय की रफ्तार प्रमाण अभी विशेष स्वभाव-संस्कार परिवर्तन करने में तीव्रता लाओ, मन्सा द्वारा आत्माओं को भिन्न-भिन्न किरणें दो

आज चारों ओर के परमात्म तख्तनशीन, भृकुटी तख्तनशीन और विश्व के तख्तनशीन बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। यह परमात्म दिलतख्त सिर्फ आप ब्राह्मणों के लिए ही है। भृकुटी का तख्त तो सबके पास है लेकिन परमात्म तख्त सिर्फ ब्राह्मण आत्माओं के ही भाग्य में है। यह परमात्म तख्त विश्व का तख्त दिलाता है। तो तीनों तख्त के अधिकारी आत्मायें आप ब्राह्मण ही हो। यह परमात्म तख्त कितना श्रेष्ठ है और कोई युग में परमात्म तख्त प्राप्त नहीं होता। यह परमात्म तख्त गाया भी जाता है, परमात्म तख्त के अधिकारी भक्ति मार्ग में भी माला के मणकों के रूप में गाये और पूजे जाते हैं। कोटों में कोई के रूप में गाये जाते हैं। बड़ी भावना से एक-एक मणके को कितनी ऊंची दृष्टि से देखते रहते हैं। तो आप सबको फखुर है ना! है फखुर कि हमारे सिवाए कोई भी इस तख्त का अनुभव नहीं कर सकते हैं? लेकिन आप सब ब्राह्मणों का तो जन्म सिद्ध अधिकार है। आपके लिए यह तख्त गले का हार है। तो इतना नशा रहता है कि भगवान के दिलतख्त के अधिकारी हैं! यह नशा और खुशी सबको सदा स्मृति में रहती है? हम कौन हैं! इसका निश्चय और नशा रहता है?

बापदादा तो ऐसे तीन तख्त के अधिकारी बच्चों को देख खुश होते हैं वाह मेरे श्रेष्ठ अधिकारी बच्चे वाह! बच्चे कहते वाह बाबा वाह! और बाप कहते वाह बच्चे वाह! स्वयं बाप भी ऐसे बच्चों की महिमा गाते हैं। तो नशा है हम कौन हैं? जितना निश्चय होगा उतना ही नशा होगा। और निश्चय का नशा आपके चेहरे और चलन से दिखाई देगा। जिसको निश्चय है उसको नशा जरूर होता है। बापदादा भी अभी हर बच्चे के चेहरे और चलन द्वारा आत्माओं को अनुभव कराने चाहते हैं। वाणी द्वारा तो अनुभव करने लगे हैं, अभी अनुभव करने का कार्य शुरू हो गया है। पहले सुनते थे, सोचते थे अभी आप ब्राह्मण आत्माओं की स्थिति का प्रभाव, अनुभव करने लगे हैं। तो अपने आपको चेक करो कि मैं सारे दिन में कितना समय परमात्म दिलतख्त पर रहता हूँ? क्योंकि यह दिलतख्त विश्व का राज्य प्राप्त कराने का आधार है। तो इस दिलतख्त के आधार से जितना समय आप दिलतख्त के अधिकारी रहते हो उतना ज्यादा समय भविष्य में राज्य घराने में अधिकारी बनते हो। तो चेक करना कि जबसे मैं ब्राह्मण बना हूँ कितना समय दिलतख्तनशीन बना? तख्त पर तो नम्बरवार बैठेंगे लेकिन इसके आधार से सदा राज्य फैमिली में, घराने में अधिकारी बनेंगे। चेक किया है कभी? दिलतख्त से उतर तो नहीं जाते हो? अपना हिसाब निकालना क्योंकि इसके आधार से आप सदा राज्य घराने में आयेंगे। चेक करना कि तख्त को छोड़ कभी मिट्टी में पांव तो नहीं रखते! 63 जन्म के संस्कार अनुसार देहभान रूपी मिट्टी में पांव रखा। एक है देहभान और दूसरा है देह-अभिमान। देह-अभिमान की मिट्टी गहरी है लेकिन देहभान यह भी मिट्टी है। लोग भी कहते हैं जब मनुष्य चला जाता है और जलाते हैं तो यही कहते हैं मिट्टी मिट्टी में मिल गई। तो चेक करो मिट्टी में पांव तो नहीं जाता! देहभान में आना अर्थात् मिट्टी में पांव रखना।

बापदादा ने आप श्रेष्ठ आत्माओं के लिए तीन तख्त दिये हैं क्योंकि लाडले हो ना। सिकीलधे भी हो, लाडले भी हो। तो जो लाडला बच्चा होता है उसको झूले में या गोदी में रखते हैं। मिट्टी में पांव रखने नहीं देते। तो जो तीन तख्त के अधिकारी हैं उन्हों के लिए बापदादा ने कितने भिन्न-भिन्न झूले दिये हैं। कभी शान्ति के झूले में झूलो, कभी सुख के झूले में झूलो, कभी प्रेम के झूले में झूलो। तख्त और झूले इसी में ही पांव रखना है। कई बच्चे पूछते हैं हम भविष्य में कहाँ आयेंगे? क्या बनेंगे? तो बाप कहते हैं जितना समय से आये हो उतने समय में चेक करो कि मेरा पांव जितना समय हुआ है उतना ही समय झूलों में या तख्त पर रहा है? उतना ही भविष्य में रॉयल घराने में रहेंगे। रॉयल प्रजा में भी नहीं आयेंगे, रॉयल घराने में ही आयेंगे। तो यह हिसाब हर एक अपने आप अपना निकालो। दूसरे को नहीं देखना, अपना हिसाब निकालना। हर एक चाहता क्या है? रॉयल घराने, राज्य घराने में ही रहें। तो अब भी जितना समय मिलता है क्योंकि समाप्ति तो अचानक होनी है। तो जब तक समाप्ति हो तब तक अब भी चेक करेंगे तो जितना समय ज्यादा बाप की गोदी में, तख्त पर, झूले में रहेंगे उतना समय रॉयल फैमिली में रॉयल घराने में भाग्य प्राप्त करेंगे।

बापदादा तो हर बच्चे को सारा समय 21 जन्म ही रॉयल घराने में, चाहे सूर्यवंशी चाहे चन्द्रवंशी दोनों युग में रॉयल फैमिली में रहने का अधिकार दे रहा है। लेकिन अधिकार लेना यह हर बच्चे के ऊपर है। ब्रह्मा बाप से प्यार है तो ब्रह्मा बाप का भी आप बच्चों से प्यार है। ब्रह्मा बाप आप बच्चों को साथ-साथ रॉयल घराने में देखने चाहता है। आप क्या समझते हो – ब्रह्मा बाप के आसपास रॉयल घरानों में रहने वाले हो या थोड़ा समय रहेंगे? फिर दूर तो नहीं जाने चाहते ना! सुनाया – आधार है संगमयुग का। बापदादा का बच्चों से इतना प्यार है जो आप सभी कहते हो कि साथ रहेंगे, साथ चलेंगे… अभी ब्रह्मा बाप और ब्राह्मण साथ हैं, चाहे अव्यक्त रूप में हैं लेकिन साथ हैं।

अभी बापदादा ने देखा कि बच्चों को माया भी अब तक छोड़ती नहीं है, उनका भी प्यार है। और आजकल दो रूपों में विशेष माया भी चांस लेती है। दो रूप में आती है – एक व्यर्थ संकल्प और दूसरा कहीं-कहीं कभी-कभी यह भी लहर है जो मैंने किया वा सोचा मैं ही राइट हूँ, मैं कम नहीं हूँ। यह लहर फैली हुई है – मैं ही राइट हूँ, लेकिन जो कनेक्शन में आते हैं या निमित्त बने हुए हैं वह भी आपके विचार को साथ देते हैं? दूसरों की भी वेरीफिकेशन मिलनी चाहिए। यह व्यर्थ संकल्प टाइम वेस्ट करते हैं इसलिए बापदादा रोज़ की मुरली मनन करने के लिए, सेवा करने के लिए होमवर्क में रोज़ देते हैं। अगर मनन करो या मनन करते-करते मगन हो जाओ तो यह रोज़ का होमवर्क मन को बिजी करने का साधन है। सुनना और मनन करना या मगन हो जाना, यह बापदादा रोज़ का होमवर्क इसीलिए देता है। जैसे बच्चों को होमवर्क इतना ज्यादा दे देते हैं जो उनकी बुद्धि करने में बिजी रहे। ऐसे रोज़ की मुरली उसमें चार ही सब्जेक्ट का होमवर्क है। मन्सा का भी है, वाणी का भी है, कर्म का भी अटेन्शन और दिव्यता का इशारा होमवर्क है। तो होमवर्क में बिजी रहेंगे तो व्यर्थ संकल्प के आने की मार्जिन नहीं रहेगी। इस विधि को अपनाते रहेंगे तो व्यर्थ संकल्प स्वत: ही आपसे विदाई ले जायेंगे क्योंकि बापदादा ने देखा, याद की यात्रा पर सभी का नम्बरवार अटेन्शन है, वाचा सेवा में भी अटेन्शन है। लेकिन अभी अपने संस्कार या दूसरों के संस्कार को परिवर्तन करना, यह स्वभाव संस्कार जिसको रॉयल रूप में आप कहते हो नेचर, मेरी नेचर है, भाव नहीं है नेचर है, यह धारणा की सब्जेक्ट अभी भी रॉयल रूप में आती रहती है। तो बापदादा आजकल यही इशारा देते हैं कि जो भी धारणाओं में कमी होती है उसको अभी विशेष अटेन्शन दो।

बापदादा ने पहले भी कहा है कि अभी धारणा में यह मुख्य धारणा का अटेन्शन दो, कोई भी बात हो गई तो चेक करो सेकण्ड में फुलस्टॉप दे सकते हो! कि चाहते फुलस्टॉप हैं लेकिन हो जाता है क्वेश्चनमार्क? फुलस्टॉप नहीं, आधा फुलस्टॉप लगता है और मात्रा बन जाता है। आगे चलकर ऐसे सरकमस्टांश आयेंगे जो आपको सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाना पड़ेगा। उस समय क्वेश्चन मार्क, आश्चर्य मार्क को ठीक करने लगो, इतना समय नहीं मिलेगा। सेकण्ड में फुलस्टॉप की आवश्यकता होगी, इसका अभ्यास काफी समय पहले का चाहिए तब समय पर विजयी बन सकेंगे। तो हलचल के समय जब संस्कार, स्वभाव का पेपर हो, उसके लिए अभी से ऐसे समय में अभ्यास करो तो बहुत समय का अभ्यास आगे चल आपका बहुत सहयोगी बनेगा।

तो बापदादा अमृतवेले चक्कर लगाते हैं तो हर एक के पुरुषार्थ को चेक करते हैं। क्या चार ही सब्जेक्ट में पुरुषार्थ तीव्र है वा साधारण है? तो क्या देखा? समय की रफ्तार प्रमाण अभी पुरुषार्थ में सदा तीव्र पुरुषार्थ की आवश्यकता है। तो बापदादा इशारा दे रहा है समय तीव्रगति से समीपता के नजदीक आ रहा है। उस हिसाब से अभी विशेष स्वभाव और संस्कार के परिवर्तन में तीव्रगति चाहिए।

अभी बापदादा सभी बच्चों को समान बनाने चाहते हैं। आपका लक्ष्य भी है बाप समान बनना ही है। इसके लिए सबसे सहज साधन है ब्रह्मा बाप को फॉलो करो। टैली करो, जो भी कर्म करो पहले टैली करो, मिलान करो। ब्रह्मा बाप का यह कर्म या बोल या संकल्प है? कहा भी जाता है पहले सोचो फिर करो। बोलने के पहले तोलो फिर बोलो। तो सुना बापदादा अभी क्या चाहते हैं? आप भी चाहते तो हो, जब रूहरिहान करते हो ना तो बापदादा बहुत मीठी-मीठी बातें सुनते हैं। उमंग की बातें भी बहुत अच्छी करते हो, यह करके दिखायेंगे, यह करना ही है, यह होना ही है! संकल्प बहुत उमंग के होते हैं, लेकिन कर्म तक आने में कुछ बदल जाते हैं, कुछ होते हैं। बाकी बापदादा भिन्न-भिन्न प्रकार की सेवा के प्लैन जो बनाते हो वह सब पसन्द करते हैं। प्रोग्राम्स भी जहाँ तहाँ अच्छे चल रहे हैं लेकिन अभी जितना वाचा द्वारा या भिन्न-भिन्न विधियों द्वारा कर रहे हो, सफलता भी है, बापदादा खुश भी है, सिर्फ अभी मन्सा द्वारा अनेक आत्माओं को सुख की किरण, शान्ति की किरण, खुशी की किरण, प्रेम की किरण पहुंचाना, यह सेवा भी साथ-साथ करो। अपने ही संस्कार परिवर्तन या दूसरों के संस्कार को सहयोग देना, इसमें टाइम कईयों का ज्यादा जाता है। तो मन्सा सेवा द्वारा भिन्न-भिन्न किरणें आत्माओं को देना, इसका अटेन्शन, आगे चलके बहुत आवश्यकता पड़ेगी, उसके ऊपर भी ध्यान देते रहो। जो बच्चे समझते हैं कि यह सेवा मैं करता रहता हूँ, वह हाथ उठाओ। अच्छा, कर रहे हैं, उन्हों को मुबारक है और जो नहीं कर रहे हैं, उनको करना चाहिए क्योंकि आगे चलके सरकमस्टांश ऐसे बनेंगे जो सुनने वाले और सुनाने वाले, दोनों का मेल मुश्किल हो जायेगा इसलिए दोनों सेवा अभी से जितना हो सके उतनी आदत डालो। मन बिजी भी रहेगा तो मनमनाभव होना सहज हो जायेगा। मन बिजी होने से संस्कार स्वभाव को सहज परिवर्तन करने में मदद मिलेगी।

आज खास डबल फारेनर्स के मिलन का दिन है, बापदादा को खुशी है वाह डबल फारेनर्स वाह! बापदादा को खुशी है कि विश्व के कोने-कोने में जो बाप के कल्प पहले वाले बच्चे छिपे हुए हैं तो विश्व की सेवा में डबल फारेनर्स निमित्त बने हैं और बापदादा ने सुना कि हर एक अपनी-अपनी एरिया में, गांव-गांव या शहरों में जो रहे हुए हैं वहाँ तक पहुंचने का प्लैन बनाते रहते हैं, इसकी मुबारक हो, मुबारक हो। नहीं तो जब समाप्ति होनी होगी, हालतें बदलेंगी तो आप सबको चाहे भारत, चाहे विदेश बहुत-बहुत-बहुत उल्हनें मिलेंगे कि हमारा बाप आया और आपने हमें बताया भी नहीं। सन्देश तो देते, बहुत उल्हनें मिलेंगे इसलिए अभी कर रहे हैं और ज्यादा कोई कोना रह नहीं जाये इसका प्रयत्न करना। बाकी बापदादा डबल फारेनर्स या देश वाले दोनों बच्चे जो चारों ओर अपना पुरुषार्थ कर रहे हैं उन्हों को देख खुश है, बहुत बहुत खुश है। क्यों? क्यों खुश है? अभी देश में विदेश में यह प्लैन बना रहे हैं, बापदादा को पसन्द है, किसी भी साधन से सन्देश पहुंचना चाहिए। यह साइंस वास्तव में आप लोगों के लिए समय पर बहुत मददगार है। साधन दिनप्रतिदिन नये नये निकलते रहते हैं, उसको कार्य में निर्विघ्न बन लगाते जाओ। आप जहाँ भी मीटिंग करते हो, सर्विस बढ़ाने की, बापदादा वह सुनते हैं और खुश होते हैं कि बच्चों की बुद्धि अभी आलराउण्ड जा रही है, साधनों को सेवा में लगाने के लिए। इसीलिए जो भी आप प्लैन बनाते हो वह बापदादा सुनते हैं, चक्कर लगाते हैं ना! आप कहाँ भी मीटिंग करो चाहे दिल्ली में करो, देश में, किसी भी शहर में करो, चाहे विदेश में कहाँ भी करो, बापदादा सब सुनते रहते हैं। बापदादा के पास भी साधन है। इसके लिए बापदादा फारेन के एक-एक देश से जो भी आये हैं, हर एक को क्या देते हैं? बहुत-बहुत प्यार दे रहे हैं। सिर्फ अभी थोड़ी तीव्रता लाओ। प्लैन को प्रैक्टिकल में नई नई बातें लाते रहो। देखो आपका यह यज्ञ आरम्भ होने के थोड़े वर्ष पहले यह सब इन्वेन्शन शुरू हुई हैं। साइन्स भी आपकी सेवा की मददगार है। खूब लाभ उठाओ, आपके लिए ही निकली है। दिनप्रतिदिन देखो कितनी नई-नई बातें अभी अभी निकल रही हैं। यह ड्रामा आपको सहयोग दे रहा है। साधन आपको सहयोग दे रहा है। अच्छा।

सभी सदा खुश तो हो ना! सदा खुश हैं? जो सदा खुश रहता है वह हाथ उठाओ, सदा खुश। कोई बात हो जाए तो भी खुश? बातें आती हैं ना, तो भी खुश रहते हो? रहते हो? बड़ा हाथ उठाओ। वेलकम करते हो ना! घबराते नहीं हो, वेलकम करते हो। अनुभवी बनाते हैं। यह विघ्न अनुभव की अथॉरिटी को बढ़ाते हैं। माया आ गई, माया आ गई, यह नहीं कहो, यह पेपर है, माया-माया कहते माया को आगे बढ़ाते हो। पेपर है। माया को तो आप जान गये हो, कितने वर्षों से जान गये हो। माया क्या है? इसलिए माया से घबराओ नहीं, पेपर समझके खुशी-खुशी से पेपर दो और अनुभव की क्लास में आगे बढ़ो। यह क्लास बढ़ाना है, मूंझना नहीं है क्या करूं, कैसे करूं, क्या क्यों, यह ब्राह्मणों का सोचने का काम नहीं है। त्रिकालदर्शी हो, क्या, क्यों, कैसे, यह उठ ही नहीं सकता। पेपर आया अनुभव की क्लास में आगे बढ़े। खुश हो। अभी तो अनुभवी बन गये हो और बनते रहेंगे। अच्छा।

जो भी पत्र, फोन, जिन्हों के भी याद प्यार या सन्देश बापदादा के प्रति आये हैं, उन सभी बच्चों को बापदादा अपने नयनों में समाते हुए यादप्यार या सर्विस समाचार या मन का पुरुषार्थ का समाचार दिया है, उन सबको बापदादा मन्सा द्वारा इमर्ज कर सुख की, शान्ति की, खुशी की किरणें दे रहे हैं। चाहे कोई ने यहाँ नहीं भेजा है लेकिन दिल में भी संकल्प किया, वह संकल्प भी बाप के पास पहुंच गया है।

चारों ओर के हिम्मते बच्चे मददे बाप, मीठे-मीठे बच्चों को बापदादा यादप्यार दे रहे हैं। और इस वर्ष कोई न कोई अपने प्रति या सेवाकेन्द्र प्रति या विश्व की आत्माओं प्रति कोई न कोई ऐसा प्लैन बनाना जो सेवा का बल और फल सर्व आत्माओं को प्राप्त हो जाए। चारों ओर के बच्चों को बापदादा का विशेष दिल का याद और प्यार स्वीकार हो। ओम् शान्ति।

वरदान:- साधारणता द्वारा महानता को प्रसिद्ध करने वाले सिम्पल और सैम्पुल भव
जैसे कोई सिम्पल चीज़ अगर स्वच्छ होती है तो अपने तरफ आकर्षित जरूर करती है। ऐसे मन्सा के संकल्पों में, सम्बन्ध में, व्यवहार में, रहन सहन में जो सिम्पल और स्वच्छ रहते हैं वह सैम्पल बन सर्व को अपनी तरफ स्वत: आकर्षित करते हैं। सिम्पल अर्थात् साधारण। साधारणता से ही महानता प्रसिद्ध होती है। जो साधारण अर्थात् सिम्पल नहीं वह प्राब्लम रूप बन जाते हैं।
स्लोगन:- दिल से कहो मेरा बाबा तो माया की बेहोशी से बंद आंखे खुल जायेंगी।

ये अव्यक्त इशारे – सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

अभी-अभी आवाज में, अभी-अभी आवाज़ से परे, जितना यह अभ्यास सरल और सहज हो जायेगा उतना सम्पूर्णता समीप दिखाई देगी। सम्पूर्ण स्टेज की निशानी है – उनका पुरुषार्थ सरल होगा। याद की यात्रा, सर्विस दोनों ही सहज पुरुषार्थ में आ जाते हैं। जब दोनों में सरल, सहज अनुभव हो तब समझो सम्पूर्णता की अवस्था प्राप्त होने वाली है।

समय की रफ्तार प्रमाण स्वभाव-संस्कार परिवर्तन में तीव्रता लाओ और मन्सा द्वारा आत्माओं को किरणें दो

प्रश्न 1: परमात्म दिलतख्त का अधिकारी कौन है?

उत्तर: परमात्म दिलतख्त का अधिकारी केवल ब्राह्मण आत्माएँ हैं। भृकुटी का तख्त तो सभी आत्माओं के पास है, लेकिन परमात्म तख्त केवल ब्राह्मणों के भाग्य में है। यही तख्त विश्व के राज्य का अधिकारी बनाता है।

प्रश्न 2: परमात्म दिलतख्त का नशा किन बातों से आता है?

उत्तर: जब आत्मा को यह निश्चय हो जाता है कि मैं भगवान के दिलतख्त का अधिकारी हूँ, तब स्वाभाविक रूप से नशा और खुशी आती है। यह नशा चेहरे और चलन से दिखाई देता है।

प्रश्न 3: दिलतख्त पर रहने की जाँच कैसे करें?

उत्तर: स्वयं से पूछें कि पूरे दिन में कितना समय मैं आत्म-अभिमान में और परमात्म स्मृति में रहता हूँ तथा कितना समय देहभान में चला जाता हूँ। जितना अधिक समय दिलतख्त पर रहेंगे, उतना अधिक भविष्य के राज्य घराने के अधिकारी बनेंगे।

प्रश्न 4: देहभान में आना किसके समान है?

उत्तर: देहभान में आना अर्थात् मिट्टी में पाँव रखना। बापदादा ने चेतावनी दी है कि देहभान और देह-अभिमान रूपी मिट्टी से स्वयं को बचाना है।

प्रश्न 5: तीन तख्तों के अधिकारी बच्चों के लिए बापदादा ने कौन-कौन से झूले दिए हैं?

उत्तर: बापदादा ने शान्ति, सुख और प्रेम के झूले दिए हैं। बच्चों को इन झूलों में झूलते रहना है और कभी भी देहभान की मिट्टी में नहीं उतरना है।

प्रश्न 6: भविष्य में रॉयल घराने में आने का आधार क्या है?

उत्तर: जितना समय संगमयुग में आत्मा बाप की गोदी, तख्त और झूलों में रहती है, उतना ही समय भविष्य में रॉयल फैमिली और राज्य घराने में रहने का भाग्य प्राप्त करती है।

प्रश्न 7: आजकल माया विशेष रूप से किन दो रूपों में आती है?

उत्तर: पहला, व्यर्थ संकल्पों के रूप में और दूसरा, “मैं ही राइट हूँ” अर्थात् अपने विचार को ही सर्वोपरि मानने की वृत्ति के रूप में।

प्रश्न 8: व्यर्थ संकल्पों से बचने का सहज उपाय क्या है?

उत्तर: रोज़ की मुरली का मनन, सेवा और चारों विषयों के होमवर्क में बुद्धि को व्यस्त रखना। जब मन शुभ कार्यों में बिजी रहता है तो व्यर्थ संकल्पों के लिए स्थान नहीं रहता।

प्रश्न 9: वर्तमान समय में किस धारणा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है?

उत्तर: सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाने की धारणा पर। परिस्थितियों और संस्कारों के पेपर में तुरंत विराम लगाना सीखना ही विजय का आधार है।

प्रश्न 10: समय की रफ्तार के अनुसार अभी किस पुरुषार्थ की आवश्यकता है?

उत्तर: सदा तीव्र पुरुषार्थ की आवश्यकता है। विशेष रूप से स्वभाव और संस्कार परिवर्तन में तेजी लाने की आवश्यकता है क्योंकि समय समीपता की ओर तीव्र गति से बढ़ रहा है।

प्रश्न 11: बाप समान बनने का सबसे सहज साधन क्या है?

उत्तर: ब्रह्मा बाप को फॉलो करना। प्रत्येक संकल्प, बोल और कर्म को पहले ब्रह्मा बाप से टैली करना कि क्या यह बाप के समान है।

प्रश्न 12: मन्सा सेवा क्या है?

उत्तर: मन्सा सेवा द्वारा आत्माओं को सुख, शान्ति, खुशी और प्रेम की किरणें देना, शुभ संकल्पों के द्वारा विश्व की आत्माओं को सहयोग देना ही मन्सा सेवा है।

प्रश्न 13: बापदादा ने साइंस और नई खोजों के बारे में क्या कहा?

उत्तर: साइंस की नई-नई खोजें वास्तव में ईश्वरीय सेवा की मददगार हैं। इन साधनों का उपयोग करके विश्व के कोने-कोने तक सन्देश पहुँचाना चाहिए।

प्रश्न 14: विघ्नों और माया को कैसे देखना चाहिए?

उत्तर: माया कहकर घबराना नहीं चाहिए। हर परिस्थिति को एक पेपर समझकर खुशी-खुशी पास करना चाहिए, क्योंकि यही पेपर अनुभव की अथॉरिटी बढ़ाते हैं।

प्रश्न 15: सदा खुश रहने का रहस्य क्या है?

उत्तर: हर परिस्थिति का स्वागत करना, उसे अनुभव बढ़ाने का अवसर समझना और त्रिकालदर्शी बनकर “क्या, क्यों, कैसे” में न उलझना ही सदा खुश रहने का रहस्य है।

वरदान

साधारणता द्वारा महानता को प्रसिद्ध करने वाले सिम्पल और सैम्पुल भव।

स्लोगन

दिल से कहो “मेरा बाबा”, तो माया की बेहोशी से बंद आँखें खुल जाएँगी।

अव्यक्त इशारा

सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल, सहज और सहनशील बनाओ।

ब्रह्मा कुमारीज, अव्यक्त मुरली, बापदादा, बीके मुरली, बीके नॉलेज, ओम शांति, राजयोग, राजयोग मेडिटेशन, स्पिरिचुअल नॉलेज, सेल्फ ट्रांसफॉर्मेशन, संस्कार परिवर्तन, स्वभाव परिवर्तन, मनसा सेवा, परमात्मा दिल तख्त, ब्राह्मण आत्मा, आत्मा चेतना, देह अभिमान, पॉजिटिव सोच, मन की शांति, स्पिरिचुअल अवेकनिंग, डिवाइन लव, पीस रेज़, हैप्पीनेस रेज़, फुल स्टॉप पावर, सिंपल लिविंग, टॉलरेंस पावर, मनमनाभव, बीके फैमिली, गॉडली नॉलेज, वर्ल्ड ट्रांसफॉर्मेशन, मेडिटेशन, मुरली क्लास,Brahma Kumaris, Avyakt Murli, BapDada, BK Murli, BK Knowledge, Om Shanti, Rajyoga, Rajyoga Meditation, Spiritual Knowledge, Self Transformation, Sanskar Parivartan, Swabhav Parivartan, Manasa Seva, Paramatma Dil Takht, Brahmin Soul, Soul Consciousness, Deh Abhiman, Positive Thinking, Inner Peace, Spiritual Awakening, Divine Love, Peace Rays, Happiness Rays, Full Stop Power, Simple Living, Tolerance Power, Manmanabhav, BK Family, Godly Knowledge, World Transformation, Meditation, Murli Class,