Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below
| 28-06-26 |
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
|
रिवाइज: 30-11-10 मधुबन |
हर घण्टे 5 स्वरूपों की एक्सरसाइज़ कर मन को शक्तिशाली बनाओ, जब बाबा ही संसार है तो संस्कार भी बाप जैसे बनाओ
आज बापदादा सभी एक देशी बच्चों से मिलने आये हैं, जो ओरीज्नल सबका देश है। जानते हो ना एक देश कितना प्यारा है! बापदादा भी उसी देश से सर्व बच्चों से मिलने आये हैं। बच्चों को बाप से मिलने की खुशी है और बाप को बच्चों से मिलने की खुशी है। आज बापदादा सभी बच्चों के स्वरूपों को, विशेष 5 रूपों को देख रहे हैं इसलिए 5 मुखी ब्रह्मा का भी गायन है। तो अपने 5 रूपों को जानते हो ना! पहला सभी का ज्योति बिन्दु रूप, आ गया आपके सामने! कितना चमकता हुआ प्यारा रूप है। दूसरा देवता रूप, वह रूप भी कितना प्यारा और न्यारा है। तीसरा रूप मध्य में पूज्यनीय रूप, चौथा रूप ब्राह्मण रूप संगमवासी, वह भी कितना महान है और पांचवा रूप फरिश्ता रूप। यह 5 ही रूप कितने प्यारे हैं। बापदादा आज बच्चों को मन की एक्सरसाइज़ सिखाते हैं क्योंकि मन बच्चों को कभी-कभी अपने तरफ खींच लेता है। तो आज बापदादा मन को एकरस बनाने की एक्सरसाइज़ सिखा रहा है। सारे दिन में इन 5 रूपों की एक्सरसाइज़ करो और अनुभव करो, जो रूप सोचो उसका मन में अनुभव करो। जैसे ज्योतिबिन्दू कहने से ही वह चमकता रूप सामने आ गया! ऐसे 5 ही रूप सामने लाओ और उस रूप का अनुभव करो। हर घण्टे में 5 सेकण्ड इस ड्रिल में लगाओ। अगर सेकण्ड नहीं तो 5 मिनट लगाओ। हर एक रूप सामने लाओ, अनुभव करो। मन को इस रूहानी एक्सरसाइज़ में बिजी करो तो मन एक्सरसाइज़ से सदा ठीक रहेगा। जैसे शरीर की एक्सरसाइज़ शरीर को तन्दरूस्त रखती है ऐसे यह एक्सरसाइज़ मन को शक्तिशाली रखेगा। एक सेकण्ड भी मन में उस रूप को लाओ, समझते हो सहज है ना यह, कि मुश्किल लगता है? मुश्किल नहीं लगेगा क्योंकि यह एक्सरसाइज़ आपने अनेक बार की हुई है। हर कल्प की है। अपना ही रूप सामने लाना यह मुश्किल नहीं होता। एक-एक रूप के सामने आते ही हर रूप की विशेषता का अनुभव होगा। कभी-कभी कई बच्चे कहते हैं कि हम इन्हीं रूपों का अनुभव करने चाहते लेकिन मन दूसरे तरफ चला जाता है। जितना समय जहाँ मन लगाने चाहते हैं उतना समय के बजाए व्यर्थ, अयथार्थ संकल्प भी आ जाते हैं। कभी मन में अलबेलापन भी आ जाता, तो बापदादा हर घण्टे 5 सेकण्ड या 5 मिनट इस एक्सरसाइज में अनुभव कराने चाहते हैं। 5 मिनट करके मन को इस तरफ चलाओ। चलना तो अच्छा होता है ना! फिर अपने काम में लग जाओ क्योंकि कार्य तो करना ही है। कार्य के बिना तो चलना नहीं है। यज्ञ सेवा, विश्व सेवा तो सभी कर रहे हो और करनी ही है। यह 5 मिनट की ड्रिल करने के बाद जो अपना कार्य है उसमें लग जाओ। चाहे 5 सेकण्ड लगाओ, चाहे 5 मिनट लगाओ लेकिन कोई ऐसा है जिसको इतना टाइम भी नहीं मिलता है! है कोई हाथ उठाओ, जिसको 5 मिनट भी नहीं हैं। कोई नहीं है। है कोई? सब निकाल सकते हैं। तो बार-बार यह एक्सरसाइज़ करो तो कार्य करते भी यह नशा रहेगा क्योंकि बाप का मन्त्र भी है मनमनाभव। तो यही मन्त्र मन के अनुभव से मायाजीत बनने में यन्त्र बन जायेगा क्योंकि बापदादा ने बता दिया है कि जितना समय आगे बढ़ेगा, उस अनुसार एक सेकण्ड में स्टॉप लगाना होगा। तो यह एक्सरसाइज़ करने से मनमनाभव होने में मदद मिलेगी क्योंकि बापदादा ने देखा कि जो भी भाषण करते हो या किसको भी सन्देश देते हो तो क्या कहते हो? हम विश्व को परिवर्तन करने वाले हैं। तो जब विश्व को परिवर्तन करना है तो पहले अपने मन को ऐसा शक्तिशाली बनाओ जो जिस समय जो संकल्प करने चाहे वही मन संकल्प कर सकता है। सेकण्ड में आर्डर करो, जैसे इस शरीर की और कर्मेन्द्रियों को आर्डर करते हो, ऊपर हो नीचे हो तो करती हैं ना! ऐसे मन व्यर्थ अयथार्थ से बच जाये, मन के मालिक हो, मेरा मन कहते हो ना! तो मेरा मन इतना आर्डर में रहे उसके लिए यह मन की एक्सरसाइज़ बताई।
बापदादा ने देखा हर एक बच्चा यही चाहता है कि हमें मन जीत जगतजीत बनना है इसलिए आने वाले समय के पहले यह अभ्यास जहाँ चाहें वहाँ मन सहज टिक जाए। तो आज बापदादा यही चाहते हैं कि हर बच्चा ऐसा शक्तिशाली बने जो जो संकल्प करे उसी अनुसार मन बुद्धि संस्कार आर्डर में हो। जिसका यह अभ्यास होगा वह जगतजीत अवश्य बनेगा। बापदादा से, परिवार से प्यार तो सबका है। जितना बच्चों का बाप से प्यार है उससे ज्यादा बाप का बच्चों से प्यार है। तो बच्चों ने चतुराई अच्छी की है, मेरा बाबा, मेरा बाबा कहकर मेरा बना लिया है। हर एक बच्चा यही निश्चय से कहता “मेरा बाबा”। और बाप भी कहता मेरा बच्चा। इस मेरे शब्द ने कमाल कर दिया। हर एक के दिल में कितना उमंग आता है मेरा बाबा, प्यारा बाबा और बाप भी बार-बार कहते मेरे बच्चे। कोई भी माया का वार हो क्योंकि आधाकल्प माया को अपना बनाया है ना! तो माया का भी आप लोगों से प्यार तो होगा ना! तो वह बार-बार आने की कोशिश करती है लेकिन जो दिल से मेरा बाबा कहता है तो बाप का सहयोग मिलता है। एक बार दिल से कहा मेरा बाबा तो हजार बार बाप बंधा हुआ है शक्तिशाली सहयोग देने के लिए। अनुभव है ना! सिर्फ समय पर इस अनुभव को प्रैक्टिकल में लाओ।
बापदादा बच्चों की एक बात देखकर दिल में बच्चों के ऊपर मुस्कराता है। जानते हो कौन सी बात? सभी कहते हैं कि बाबा ही मेरा संसार है, कहते हैं ना बाप ही हमारा संसार है! कहते हो, जो कहता है बाप ही मेरा संसार है, वह हाथ उठाओ। अच्छा, बाप ही संसार है। दूसरा तो कोई संसार नहीं है ना! संसार दूसरा नहीं है लेकिन दूसरा क्या है? संस्कार। जब बाप ही मेरा संसार है, दूसरा कोई संसार है ही नहीं। संसार नहीं है लेकिन संस्कार कैसे पैदा हो जाता है? आजकल बापदादा समय प्रमाण संस्कार शब्द को मिटाने चाहते हैं। मिट सकता है? मिट सकता है? जो समझते हैं कि संस्कार विघ्न रूप नहीं बन सकता, यह दृढ़ संकल्प कर सकते हैं, दृढ़ पुरुषार्थ द्वारा आज भी दृढ़ पुरुषार्थ कर सकते हैं कि खत्म करना ही है। करेंगे, सोचेंगे, देखेंगे… यह नहीं। करना ही है। संस्कार का काम है आना और बच्चों का काम है समाप्त करना ही है। है हिम्मत? है हिम्मत? पहले भी हाथ उठाया था लेकिन चेक करो जो संकल्प किया वह हो रहा है? जो समझते हैं कि बाप ने कहा, बाप का कार्य है लक्ष्य देना और बच्चों का कार्य है जो बाप ने कहा वह करना ही है। इसकी भी एक डेट फिक्स करो, जैसे भक्त लोगों ने डेट फिक्स की है, शिवरात्रि, तो मनाते हैं ना! तो इसकी डेट भी फिक्स करो। अच्छा सबकी इकट्ठी डेट नहीं हो तो पहले एक-एक अपने लिए तो डेट फिक्स कर सकते हैं ना! कर सकते हैं! कर सकते हैं तो हाथ उठाओ। तो किया! कर सकते हैं तो किया? डबल विदेशियों ने डेट फिक्स किया! अच्छा सामने वाले, किया फिक्स? जो डेट फिक्स की ना, वह बापदादा को लिखके देना। बापदादा भी बच्चों को पेपर पास करने की बहादुरी तो देंगे ना। फिर गीत गायेंगे वाह बच्चे वाह! सेरीमनी मनायेंगे जिसने संकल्प किया और उसी अनुसार प्रैक्टिकल किया उसकी सेरीमनी मनायेंगे क्योंकि फर्क तो आता रहेगा ना! जो डेट फिक्स करेंगे उसमें आगे बढ़ने के लिए समीप तो आयेंगे ना। फर्क तो होना शुरू होगा। तो जिसका डेट अनुसार सम्पन्न होगा उसकी बापदादा सेरीमनी मनायेंगे। अन्दर जो करेंगे तो देखने वाले भी वेरीफाय करेंगे क्योंकि सम्पर्क में तो आयेंगे ना! संस्कार किसी न किसी के साथ निकलता है ना! क्योंकि बापदादा ने देखा कि हर एक बच्चे को यह शुद्ध नशा तो है कि मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ। मास्टर तो हो ना? जब सर्वशक्तिवान हैं तो संकल्प को पूरा करना यह भी शक्ति है ना! अच्छा।
जो आज पहली बारी आये हैं वह उठो। देखो, कितने आये हैं। बापदादा मुबारक देते हैं। मधुबन में आने की मुबारक है, मुबारक है, मुबारक है। बापदादा फिर भी ऐसे समझते हैं कि टूलेट का बोर्ड लगने के पहले आ गये हो इसलिए सारे परिवार की, बापदादा की तो है सारे परिवार की भी आप सभी में यही शुभ आशा है कि सदा डबल पुरुषार्थ कर लास्ट आते हुए भी फास्ट जा सकते हो। है हिम्मत! जो आज आये हैं उन्हों में यह हिम्मत है! कि लास्ट आते भी फास्ट जाकर फर्स्ट आ जाओ। फर्स्ट नम्बर में। एक फर्स्ट नहीं, फर्स्टक्लास में फर्स्ट आओ, हो सकता है! जो समझते हैं हम फास्ट जाके फर्स्ट हो सकते हैं वह हाथ उठाओ। अपने में निश्चय है? अच्छा। पीछे वाले हाथ ऊंचा करो, हो सकता है तो! अच्छा। थोड़े हैं। फिर भी सारा परिवार और बापदादा आपको सहयोग देके आगे बढ़ाने चाहते हैं इसलिए जिस भी सेन्टर के तरफ से आये हो उस सेन्टर पर यह अपना वायदा बार-बार याद करना। हो सकता है, असम्भव नहीं है, है सम्भव लेकिन डबल अटेन्शन। अगर लास्ट और फास्ट जाके दिखायेंगे तो सेन्टर पर आपका तीव्र पुरुषार्थ का दिन मनायेंगे। फंक्शन करेंगे। सभी के दिल में उमंग तो है कि जल्दी से जल्दी बाप समान बनके ही दिखायें। बापदादा भी अमृतवेले जब बच्चे बाप से बातें करते हैं, तो खुश होते हैं। वाह बच्चे वाह! और बाप हर बच्चे को चाहे पुराना है, चाहे नया है, हर बच्चे को बहुत-बहुत दिल की दुआयें देते हैं। एक कदम आपका, हजार कदम बाप की मदद का क्योंकि अब समय का परिवर्तन फास्ट गति में जा रहा है। अच्छा।
सेवा का टर्न दिल्ली और आगरा ज़ोन का है:- बापदादा ने सुना कि देहली शुरू से लेके सेवा की नई-नई बातें करती आई है। की है ना! देहली ने की है। तो अभी कोई नई इन्वेन्शन निकालो सेवा की। जो भाषण चलते हैं, प्रोग्राम चलते हैं वह भी अच्छे हैं क्योंकि उससे वृद्धि होती है और सम्बन्ध में आते हैं। जो अभी चल रहे हैं वह भी अच्छे हैं लेकिन अभी यह प्रोग्राम्स बहुत समय चले हैं। अभी कोई नई बात निकालो जो सेवा करने वालों को नया उमंग, नया उत्साह आये। करेंगे ना! अच्छा है। सभी को उत्साह में लाकर सभी को उसमें बिजी करो। यह जो बड़े प्रोग्राम होते हैं उसमें भाषण करने वाले तो बिजी होते हैं लेकिन दूसरे सिर्फ साथ देते हैं। वह भी है जरूरी लेकिन ऐसा कोई कार्य निकालो जिसमें हर एक क्वालिटी वाले खुद करके बिजी रहें क्योंकि देहली को ही राजधानी बनना है। तो देहली वालों को ऐसी कोई इन्वेन्शन निकालनी चाहिए। ठीक है! ठीक है सभी करेंगे? हाथ उठाओ। अच्छा है। कोई भी निकाल सकते हैं। नये भी निकाल सकते हैं। अगर दूसरे कोई को भी कोई संकल्प आवे तो वह भी यहाँ हेड आफिस में, मधुबन आफिस में लिख सकते हैं। सबको चांस है। अच्छा। देहली वाले पुरुषार्थ में भी नम्बरवन लें। बापदादा ने बहुत समय से यह कहा है कि कोई भी सेन्टर चाहे देश, चाहे विदेश के सेन्टर और उसके कनेक्शन के सेन्टर 6 मास निर्विघ्न रहकर दिखाये, कोई भी विघ्न नहीं आये, निर्विघ्न। इसमें अगर नम्बर-वन बनेगा तो उसका भी निर्विघ्न भव का डे (दिन) मनायेंगे। अभी 6 मास कह रहे हैं, 6 मास का अभ्यास होगा तो आगे भी आदत हो जायेगी। लेकिन इनाम लेने के लिए 6 मास का टाइम देते हैं। तो देहली क्या नम्बर लेगी? पहला नम्बर। बापदादा को खुशी है। सारे परिवार को भी खुशी है। सन्तुष्टता का बोलबाला हो। चाहे सेवा में, चाहे जो नियम बने हुए हैं उस नियम में, तो देखेंगे, बापदादा ने कहा है लेकिन अभी तक नाम नहीं आया है। ज़ोन नहीं तो जो भी बड़े सेन्टर हैं उसके कनेक्शन वाले सेन्टर इतना भी करेंगे तो बापदादा देखेंगे। अभी जल्दी जल्दी कदम को आगे करना, क्यों? अचानक क्या भी हो सकता है। तारीख नहीं बतायेंगे। अच्छा।
आगरा सबज़ोन:- आगरा को ऐसा कोई कार्य या सेवा करनी है जो जैसे गवर्मेन्ट की लिस्ट में आगरा मशहूर है, ऐसे आगरा वाले कोई न कोई ऐसी सेवा ढूंढो जो आलमाइटी गवर्मेन्ट में भी मशहूर हो जाओ। तो जैसे आगरा में ताज हैं, वैसे कुछ करो। है, उम्मींद है! उम्मींद है उसकी मुबारक हो। क्या करेंगे? लेकिन कितने समय में करेंगे? (मेला करेंगे, मेगा प्रोग्राम करेंगे) मेगा प्रोग्राम तो सभी कर रहे हैं लेकिन कोई नई इन्वेन्शन निकालो जो किसी ज़ोन ने नहीं किया हो क्योंकि आगरा सभी के देखने लायक है। तो जैसे आजकल की गवर्मेन्ट का ताज है ना। अगर प्रोपोगण्डा होती है तो आगरा उसमें मशहूर है ना। ऐसा कोई कार्य करो। सोचना, अमृतवेले बैठना और सोचना तो कोई न कोई टचिंग आ जायेगी। ठीक है, टीचर्स हाथ उठाओ। बहुत हैं। तो कमाल करना। बाकी बापदादा सभी बच्चों को यही कहते हैं कोई नवीनता करो अभी। जो चल रहा है, समय अनुसार वह नवीनता है लेकिन अभी और नवीनता इन्वेन्शन करो, कोई भी ज़ोन करे, लेकिन नया निकालो। बाकी हर बच्चा बाप को प्यारा है, सिकीलधा है और बाप यही चाहते कि उड़ते रहो, उड़ाते रहो। अच्छा –
चारों ओर के बच्चे बाप के दिल के दुलारे हैं, हर एक बच्चा यही लक्ष्य बार-बार स्मृति में लाते हैं और लाना है कि हमें तीव्र पुरुषार्थ कर बाप को प्रत्यक्ष करना है। जो सबकी दिल कहे मेरा बाबा आ गया। ऐसा उमंग और उत्साह का संकल्प आजकल बापदादा के पास पहुंच रहा है। यह उमंग उत्साह मैजारिटी के दिल में आ गया है। बापदादा की यही आश है कि अभी जल्दी से जल्दी सबको यह सन्देश पहुंचाना है, कोई वंचित नहीं रहे। कुछ न कुछ वर्सा ले लें। चाहे जीवनमुक्ति का नहीं तो प्यार से मुक्ति का वर्सा तो ले ले क्योंकि बाप को सबको वर्सा देना है, जितनों को वर्सा दिलायेंगे उतना आपको भी अपने राज्य में राज्य अधिकारी बनने का वर्सा मिलेगा। सभी तरफ के हर बच्चे को बापदादा का बहुत-बहुत प्यार और दुआयें स्वीकार हो।
| वरदान:- | त्याग, तपस्या द्वारा सेवा में सफलता प्राप्त करने वाले सर्व के कल्याणकारी भव जैसे स्थूल अग्नि दूर से ही अपना अनुभव कराती है, ऐसे आपकी तपस्या और त्याग की झलक दूर से ही सर्व को आकर्षित करे। सेवाधारी के साथ-साथ त्यागी, तपस्वीमूर्त बनो तब सेवा का प्रत्यक्षफल दिखाई देगा। त्यागी अर्थात् कोई भी पुराने संकल्प वा संस्कार दिखाई न दें। तपस्वी अर्थात् बुद्धि की स्मृति वा दृष्टि से सिवाए आत्मिक स्वरूप के और कुछ भी दिखाई न दे। जो भी संकल्प उठे उसमें हर आत्मा का कल्याण समाया हुआ हो तब कहेंगे सर्व के कल्याणकारी। |
| स्लोगन:- | देह-भान से पार जाने के लिए चित्र को न देख चेतन और चरित्र को देखो। |
ये अव्यक्त इशारे – सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
आप सभी मास्टर विश्व-निर्माता हो। इस स्मृति से निर्मानता का गुण सहज आ जायेगा और जहाँ निर्माणता अर्थात् सरलता नेचुरल रूप में रहेगी वहाँ अन्य गुण भी आटोमेटिकली आ ही जाते हैं। तो सदैव इस स्मृति स्वरूप में स्थित रहकर फिर हर संकल्प वा कर्म करो। फिर यह जो भी छोटी-छोटी बातें सामना करने के लिए आती हैं, वह ऐसे अनुभव होंगी जैसे कोई बुजुर्ग के आगे छोटे-छोटे बच्चे बचपन के खेल करते हैं। उसका उन्हें कोई असर नहीं होता।
विषय: हर घण्टे 5 स्वरूपों की एक्सरसाइज़ कर मन को शक्तिशाली बनाओ, जब बाबा ही संसार है तो संस्कार भी बाप जैसे बनाओ
प्रश्न 1: बापदादा ने मन को शक्तिशाली बनाने के लिए कौन-सी विशेष एक्सरसाइज़ बताई है?
उत्तर:
बापदादा ने प्रतिघण्टा 5 सेकण्ड या 5 मिनट तक अपने पाँच स्वरूपों का अभ्यास करने की एक्सरसाइज़ बताई है। इससे मन व्यर्थ संकल्पों से मुक्त होकर शक्तिशाली, एकाग्र और आज्ञाकारी बनता है।
प्रश्न 2: वे पाँच स्वरूप कौन-कौन से हैं जिनका अभ्यास करना है?
उत्तर:
पाँच स्वरूप हैं—
- ज्योति बिन्दु आत्मा स्वरूप
- देवता स्वरूप
- पूज्य स्वरूप
- ब्राह्मण स्वरूप (संगमयुगी)
- फरिश्ता स्वरूप
प्रश्न 3: इन पाँच स्वरूपों का अभ्यास करने से क्या लाभ होता है?
उत्तर:
मन स्थिर होता है, व्यर्थ संकल्प समाप्त होते हैं, आत्मिक शक्ति बढ़ती है, मन पर अधिकार आता है और मनमनाभव की स्थिति सहज बनने लगती है।
प्रश्न 4: बापदादा ने मन की तुलना किससे की है?
उत्तर:
जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शारीरिक व्यायाम आवश्यक है, वैसे ही मन को स्वस्थ, शक्तिशाली और नियंत्रित रखने के लिए आत्मिक एक्सरसाइज़ आवश्यक है।
प्रश्न 5: “मनमनाभव” का वास्तविक अभ्यास कैसे होगा?
उत्तर:
जब मन को बार-बार आत्मा और बाबा की स्मृति में लगाया जाएगा तथा पाँच स्वरूपों का अभ्यास किया जाएगा, तब मन सहज रूप से मनमनाभव की स्थिति में रहने लगेगा।
प्रश्न 6: विश्व परिवर्तन करने से पहले हमें किस परिवर्तन पर ध्यान देना चाहिए?
उत्तर:
सबसे पहले अपने मन का परिवर्तन करना चाहिए ताकि मन हमारे आदेश के अनुसार कार्य करे और व्यर्थ संकल्पों में न भटके।
प्रश्न 7: बापदादा ने “मेरा बाबा” शब्द की क्या विशेषता बताई?
उत्तर:
जो बच्चा दिल से “मेरा बाबा” कहता है, उसे बाबा का हजार गुना सहयोग प्राप्त होता है। यह शब्द आत्मा और परमात्मा के प्रेम का अनुभव कराता है।
प्रश्न 8: “बाबा ही मेरा संसार है” कहने के बाद भी कौन-सी कमी रह जाती है?
उत्तर:
यदि बाबा ही संसार है तो पुराने संस्कार नहीं रहने चाहिए। लेकिन कई बार पुराने संस्कार बीच में आ जाते हैं, इसलिए उन्हें समाप्त करने का दृढ़ संकल्प करना आवश्यक है।
प्रश्न 9: बापदादा ने संस्कार परिवर्तन के लिए क्या प्रेरणा दी?
उत्तर:
बापदादा ने कहा कि “करेंगे, देखेंगे” नहीं, बल्कि संस्कारों को समाप्त करने की एक निश्चित तिथि (Date) तय करो और उसे पूरा करने का दृढ़ पुरुषार्थ करो।
प्रश्न 10: मन का मालिक बनने का क्या अर्थ है?
उत्तर:
मन का मालिक बनने का अर्थ है कि मन जहाँ चाहें, जितनी देर चाहें, उसी दिशा में चले और व्यर्थ या नकारात्मक संकल्प न करे।
प्रश्न 11: नए आने वाले बच्चों के लिए बापदादा ने क्या संदेश दिया?
उत्तर:
बापदादा ने कहा कि चाहे कोई अंत में आया हो, फिर भी तीव्र पुरुषार्थ करके सबसे आगे अर्थात् “लास्ट से फास्ट और फर्स्ट” बन सकता है।
प्रश्न 12: सेवा में नवीनता लाने के लिए बापदादा ने क्या कहा?
उत्तर:
बापदादा ने कहा कि केवल पुराने कार्यक्रमों तक सीमित न रहें, बल्कि समयानुसार नई योजनाएँ और नई विधियाँ (Innovation) खोजें ताकि अधिक आत्माओं तक ईश्वरीय संदेश पहुँच सके।
प्रश्न 13: निर्विघ्न जीवन के लिए बापदादा ने क्या लक्ष्य दिया?
उत्तर:
कम-से-कम छह महीने तक किसी भी प्रकार के विघ्न के बिना सेवा और पुरुषार्थ करने का अभ्यास करने का लक्ष्य दिया।
प्रश्न 14: सर्व के कल्याणकारी बनने का आधार क्या है?
उत्तर:
त्याग, तपस्या, आत्मिक दृष्टि और प्रत्येक संकल्प में सभी आत्माओं के कल्याण की भावना रखना ही सर्व के कल्याणकारी बनने का आधार है।
प्रश्न 15: त्यागी और तपस्वी आत्मा की पहचान क्या है?
उत्तर:
त्यागी वह है जिसके भीतर पुराने संकल्प और संस्कार समाप्त हो चुके हों। तपस्वी वह है जिसकी बुद्धि में केवल आत्मिक स्वरूप और परमात्म स्मृति ही बनी रहे।
प्रश्न 16: देह-भान से पार जाने का सहज उपाय क्या बताया गया है?
उत्तर:
चित्र (शरीर) को देखने के बजाय चेतन आत्मा और उसके श्रेष्ठ चरित्र को देखने का अभ्यास करना चाहिए।
प्रश्न 17: सदा हर्षित रहने के लिए कौन-सी विशेषता आवश्यक है?
उत्तर:
अपनी प्रकृति को सरल, सहनशील और निर्मान (अहंकार रहित) बनाना सदा हर्षित रहने का आधार है।
प्रश्न 18: मास्टर विश्व-निर्माता की स्मृति से कौन-सा गुण सहज आ जाता है?
उत्तर:
निर्मानता (विनम्रता) और सरलता का गुण सहज आ जाता है, जिससे अन्य सभी दिव्य गुण स्वतः प्रकट होने लगते हैं।
प्रश्न 19: वर्तमान समय में बापदादा की सबसे बड़ी आशा क्या है?
उत्तर:
बापदादा चाहते हैं कि शीघ्र से शीघ्र प्रत्येक आत्मा तक ईश्वरीय संदेश पहुँचे और कोई भी आत्मा इस दिव्य विरासत से वंचित न रहे।
प्रश्न 20: इस मुरली का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर:
अपने पाँच स्वरूपों का निरंतर अभ्यास करके मन को शक्तिशाली बनाना, पुराने संस्कारों को समाप्त करना, बाबा को अपना सम्पूर्ण संसार बनाना तथा नवीन उत्साह और तीव्र पुरुषार्थ के साथ विश्व-कल्याण की सेवा करना ही इस मुरली का मुख्य संदेश है।
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