A secret that needs to be told to everyone

गुह्य राज जो सबको बताना है

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

YouTube player

अध्याय 1

गुह्य राज जो सबको बताना है

बाबा का सीधा प्रश्न

साकार मुरली – 18 नवंबर 1975
“तुम्हें सबसे पहले कौन-सा गुप्त राज सबको समझाना है?”

बाबा यह प्रश्न हर ब्राह्मण आत्मा से पूछ रहे हैं।
मतलब — हम सिर्फ सुनने वाले नहीं, सुनाने वाले भी हैं।


 गुप्त और गुह्य में अंतर

  • गुप्त — जो दुनिया को पता नहीं

  • गुह्य — जो गहराई से समझाया जाए

 पहला गुह्य राज ऐसा है जिसे दुनिया जानती तो है,
लेकिन मानती नहीं।


 अध्याय 2

पहला गुह्य राज — मैं देह नहीं, आत्मा हूँ

दुनिया कहती है — आत्मा है
लेकिन जीवन में पहचान देह से करती है।

साकार मुरली – 3 फरवरी 1968
“देह-अभिमान ही सब दुखों की जड़ है।”


 उदाहरण

  • टीवी टूट जाए — हम नहीं रोते

  • शरीर बीमार हो जाए — हम दुखी हो जाते हैं

 क्यों?
क्योंकि पहचान टीवी से नहीं, शरीर से जुड़ी हुई है।

 जब तक “मैं शरीर हूँ” की धारणा है,
दुख समाप्त नहीं हो सकता।


 अध्याय 3

दूसरा गुह्य राज — आत्मा-परमात्मा का सच्चा परिचय

साकार मुरली – 10 जनवरी 1969
“परमपिता परमात्मा निराकार है।
न वे शरीर बनाते हैं,
न जन्म लेते हैं,
न भोगते हैं।”

परमात्मा का वास्तविक स्वरूप

  • अशरीरी

  • अजन्मा

  • अभोक्ता

 कमाल की बात यह है कि
इन तीनों बातों को दुनिया नहीं जानती।


 अध्याय 4

सबसे गहरा गुह्य राज — बाप-दादा साथ-साथ

दुनिया नहीं जानती कि —
एक शरीर में दो आत्माएँ कार्य कर रही थीं।

  • परमपिता शिव — पढ़ाने वाले

  • ब्रह्मा बाबा — माध्यम, बड़ा भाई

“मैं इस तन के द्वारा पढ़ाता हूँ।”


 उदाहरण — रेडियो

  • रेडियो = माध्यम

  • बोलने वाला = कोई और

 वैसे ही
ब्रह्मा बाबा माध्यम हैं,
पढ़ाने वाला शिव बाबा है।

 माध्यम भगवान नहीं बन जाता।


 अध्याय 5

परमात्मा की सीमाएँ — एक अनोखा सत्य

दुनिया कहती है —
“भगवान सब कुछ कर सकता है।”

परंतु बाबा स्वयं स्पष्ट करते हैं —

साकार मुरली – 2 जून 1984
“मैं जन्म-मरण में नहीं आता।
मैं किसी मृत को जीवित नहीं करता।
मैं शरीर का रचयिता नहीं हूँ।”


परमात्मा की हद (Limit)

  • न शरीर बनाना

  • न मृत को जीवित करना

  • न जीवन-मुक्ति देना

मैं केवल ज्ञान का मार्ग देता हूँ।
यही परमात्मा की सीमा है।


 अध्याय 6

साक्षी-दृष्टा बनने की शिक्षा

अव्यक्त मुरली – 30 मार्च 1987
“बाप समान साक्षी बनो।”

जब यह समझ आती है —

  • आत्मा आती-जाती है

  • शरीर बदलता है

  • कर्म खाते पूरे होते हैं

 तब —

  • डर समाप्त

  • मोह समाप्त

  • शांति स्थायी


 अध्याय 7

आज की मुरली का सार — निष्कर्ष

गरीब कौन?

चरित्र से गिरा हुआ

गरीब निवाज कौन?

चरित्र उठाने वाला


तीन मुख्य गुह्य राज

1️⃣ आत्मा की पहचान
“तुम ज्योति बिंदु आत्मा हो, शरीर नहीं।”

2️⃣ बाप-दादा का रहस्य
बाप कौन? दादा कौन?

3️⃣ परमात्मा का परिचय
परमात्मा — ज्ञान दाता, अभोक्ता

“बाप को पहचानो, वर्सा अपने आप मिल जाएगा।”


 अंतिम सत्य

गरीब निवाज बाबा
धन नहीं देते —
वे चरित्र का ताज पहनाते हैं।

जो इस गुह्य राज को समझ लेता है,
वह कौड़ी से हीरा बनकर
दुनिया में चमक उठता है।

गुह्य राज जो सबको बताना है

प्रश्न 1: बाबा का सीधा प्रश्न क्या है?
उत्तर:
साकार मुरली – 18 नवंबर 1975
बाबा पूछते हैं —
“तुम्हें सबसे पहले कौन-सा गुप्त राज सबको समझाना है?”


प्रश्न 2: यह प्रश्न बाबा किससे पूछ रहे हैं?
उत्तर:
यह प्रश्न बाबा हर ब्राह्मण आत्मा से पूछ रहे हैं, क्योंकि हम केवल सुनने वाले नहीं, बल्कि दुनिया को सुनाने वाले भी हैं।


प्रश्न 3: “गुप्त” और “गुह्य” में क्या अंतर है?
उत्तर:

  • गुप्त — जो दुनिया को पता नहीं

  • गुह्य — जिसे गहराई से समझाया जाए

 पहला गुह्य राज ऐसा है जिसे दुनिया जानती तो है, लेकिन मानती नहीं


 अध्याय 2

पहला गुह्य राज — मैं देह नहीं, आत्मा हूँ

प्रश्न 4: पहला गुह्य राज क्या है?
उत्तर:
पहला गुह्य राज है —
“मैं यह शरीर नहीं, बल्कि आत्मा हूँ।”


प्रश्न 5: दुनिया इस सत्य को क्यों नहीं मानती?
उत्तर:
क्योंकि दुनिया आत्मा को जानती तो है,
लेकिन जीवन में पहचान देह से करती है।


प्रश्न 6: देह-अभिमान का परिणाम क्या है?
उत्तर:
साकार मुरली – 3 फरवरी 1968
“देह-अभिमान ही सब दुखों की जड़ है।”


प्रश्न 7: टीवी और शरीर का उदाहरण क्या सिखाता है?
उत्तर:

  • टीवी टूटने पर दुख नहीं होता

  • शरीर बीमार होने पर दुख होता है

 क्योंकि पहचान टीवी से नहीं, शरीर से जुड़ी हुई है
जब तक “मैं शरीर हूँ” की धारणा है, दुख समाप्त नहीं हो सकता।


 अध्याय 3

दूसरा गुह्य राज — आत्मा-परमात्मा का सच्चा परिचय

प्रश्न 8: परमात्मा का सच्चा परिचय क्या है?
उत्तर:
साकार मुरली – 10 जनवरी 1969
परमपिता परमात्मा —

  • निराकार

  • अशरीरी

  • अजन्मा

  • अभोक्ता


प्रश्न 9: दुनिया इन बातों को क्यों नहीं जानती?
उत्तर:
क्योंकि दुनिया परमात्मा को सर्वशक्तिमान मानती है,
लेकिन उसके स्वरूप और सीमाओं को नहीं समझती।


 अध्याय 4

सबसे गहरा गुह्य राज — बाप-दादा साथ-साथ

प्रश्न 10: सबसे गहरा गुह्य राज कौन-सा है?
उत्तर:
सबसे गहरा गुह्य राज है —
बाप और दादा दोनों साथ-साथ कार्य कर रहे हैं।


प्रश्न 11: एक शरीर में दो आत्माओं का रहस्य क्या है?
उत्तर:

  • शिव बाबा — पढ़ाने वाले (परमपिता)

  • ब्रह्मा बाबा — माध्यम, बड़ा भाई

“मैं इस तन के द्वारा पढ़ाता हूँ।”


प्रश्न 12: रेडियो का उदाहरण क्या स्पष्ट करता है?
उत्तर:

  • रेडियो = माध्यम

  • बोलने वाला = कोई और

 वैसे ही ब्रह्मा बाबा माध्यम हैं,
लेकिन पढ़ाने वाला शिव बाबा है।
माध्यम भगवान नहीं बन जाता।


 अध्याय 5

परमात्मा की सीमाएँ — एक अनोखा सत्य

प्रश्न 13: परमात्मा की सीमाओं का सत्य क्या है?
उत्तर:
साकार मुरली – 2 जून 1984
परमात्मा कहते हैं —

  • मैं जन्म-मरण में नहीं आता

  • मैं मृत को जीवित नहीं करता

  • मैं शरीर का रचयिता नहीं हूँ


प्रश्न 14: परमात्मा का वास्तविक कार्य क्या है?
उत्तर:
परमात्मा कहते हैं —
“मैं केवल ज्ञान का मार्ग देता हूँ।”
यही परमात्मा की सीमा (Limit) है।


 अध्याय 6

साक्षी-दृष्टा बनने की शिक्षा

प्रश्न 15: शिव बाबा हमें कौन-सी विशेष शिक्षा देते हैं?
उत्तर:
📜 अव्यक्त मुरली – 30 मार्च 1987
“बाप समान साक्षी बनो।”


प्रश्न 16: साक्षी-दृष्टा बनने से क्या परिवर्तन आता है?
उत्तर:
जब यह समझ आती है कि —

  • आत्मा आती-जाती है

  • शरीर बदलता है

  • कर्म खाते पूरे होते हैं

 तब —
डर समाप्त, मोह समाप्त, और शांति स्थायी हो जाती है।


अध्याय 7

आज की मुरली का सार — निष्कर्ष

प्रश्न 17: मुरली के अनुसार “गरीब” कौन है?
उत्तर:
जो चरित्र से गिरा हुआ है।


प्रश्न 18: “गरीब निवाज” कौन है?
उत्तर:
जो चरित्र उठाने वाला है।


प्रश्न 19: तीन मुख्य गुह्य राज कौन-से हैं?
उत्तर:
1️⃣ आत्मा की पहचान — तुम ज्योति बिंदु आत्मा हो
2️⃣ बाप-दादा का रहस्य — बाप कौन, दादा कौन
3️⃣ परमात्मा का परिचय — ज्ञान दाता, अभोक्ता

“बाप को पहचानो, वर्सा अपने आप मिल जाएगा।”


प्रश्न 20: गरीब निवाज बाबा क्या देते हैं?
उत्तर:
गरीब निवाज बाबा धन नहीं देते,
वे चरित्र का ताज पहनाते हैं।

डिस्क्लेमर:
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की साकार एवं अव्यक्त मुरलियों पर आधारित एक आध्यात्मिक अध्ययन है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, व्यक्ति या मान्यता का खंडन करना नहीं है, बल्कि मुरली में निहित गुह्य और गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल भाषा में स्पष्ट करना है।
दर्शक इसे आत्म-चिंतन, आत्म-परिवर्तन और ईश्वरीय ज्ञान के अध्ययन के रूप में ग्रहण करें।

गुह्यराज, गुप्तराज, मुरलीज्ञान, साकारमुरली, अव्यक्तमुरली, शिवबाबा, ब्रह्माबाबा, बापदादा, आत्मज्ञान, देहअभिमान, आत्मापरमात्मा, निराकारपरमात्मा, ज्ञानदाता, साक्षीदृष्टि, आध्यात्मिक ज्ञान, ब्रह्माकुमारी, मुरलीरहस्य, गरीबनिवाज़, चरित्रपरिवर्तन, कौड़ीसेहीरा, ओमशांति,गुह्यराज, गुप्तराज, MurliGyan, SakarMurli, AvyaktMurli, ShivBaba, BrahmaBaba, BapDada, AtmaGyan, DehAbhiman, AtmaParmatma, NirakarParmatma, GyanData, SakshiDrishti, SpiritualKnowledge, BrahmaKumaris, MurliRahasya, GareebNiwaz, CharacterTransformation, KaudiSeHeera, OmShanti,