(88) Only by being introverted can one conquer the senses – the secret of divinity from Gita and Murli
(88)अन्तर्मुखी ही जीतेन्द्रिय गीता व मुरली से दिव्यता का रहस्य “अन्तर्मुखता: जीतेन्द्रिय बनने का राज़ | गीता व मुरली की…
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(88)अन्तर्मुखी ही जीतेन्द्रिय गीता व मुरली से दिव्यता का रहस्य “अन्तर्मुखता: जीतेन्द्रिय बनने का राज़ | गीता व मुरली की…
(87)गुण ग्राहक दृष्टि: दिव्य आचरण की सबसे बड़ी नींव “गुण-ग्राहक दृष्टि: गीता और ब्रह्माकुमारीज मुरली का अनमोल संदेश |” गुण-ग्राहक…
(85)करुणा का जीवन में स्थान “करुणा: गीता और मुरली का सर्वोच्च दैवी गुण |” 1. प्रस्तावना – करुणा का महत्व…
(84)स्वाध्याय से ही इन्द्रिय निग्रह सम्भव स्वाध्याय से ही इन्द्रिय निग्रह सम्भव | गीता की असली शिक्षा | मुख्य भाषण…
(72)यदुवंश और कौरवों के विनाश का असली रहस्य “यदुवंश और कौरवों के विनाश का असली रहस्य | गीता का सच्चा…
(70) पूतना, अघासुर तथा बकासुर वध का आध्यात्मिक अर्थ “पूतना, अघासुर, बकासुर वध का रहस्य | गीता का भगवान कौन?…
(83)गीता और दैवी सम्पदा-युक्त आचरण “गीता – केवल ग्रंथ नहीं, मानवता की आचार संहिता | योगी बनो, भोगी नहीं” 1.…
(82)राजा की राजधानी: आत्मा और इन्द्रियों का संगमयुग का राज “आत्मा की राजधानी: परमात्मा का अद्भुत रहस्य | संगमयुग में…
(80)“युद्ध कब करो? प्रतिक्षण परमात्मा की याद “युद्ध कब करो? गीता और मुरली का गुप्त रहस्य |” युद्ध कब करो?…