प्रश्न का मन्थन-भोला कौन और भोलानाथ कौन?
अध्याय : भोला कौन और भोलानाथ कौन?
डिस्क्लेमर
यह लेख/वीडियो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुरलियों, आध्यात्मिक शिक्षाओं तथा भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के अध्ययन पर आधारित है। इसमें प्रस्तुत “भोला” और “भोलानाथ” की व्याख्या ब्रह्माकुमारी ज्ञान की दृष्टि से की जा रही है। विभिन्न धर्मों, संप्रदायों और विद्वानों की इस विषय पर अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसी देवी-देवता, धर्म, ग्रंथ अथवा परंपरा का खंडन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रहस्य को सरल भाषा में समझाना है। दर्शकों से निवेदन है कि वे इस विषय को खुले मन, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक अध्ययन की भावना से सुनें।
भूमिका : एक ऐसा रहस्य जिसे अधिकांश लोग नहीं समझ पाए
जब भी भारत में “भोलेनाथ” शब्द बोला जाता है तो अधिकांश लोगों के मन में भगवान शंकर की छवि सामने आ जाती है। लेकिन क्या हमने कभी रुककर यह विचार किया कि “भोला” कौन है और “भोलानाथ” कौन है?
क्या दोनों शब्द एक ही अर्थ रखते हैं? क्या भोला और भोलानाथ दोनों एक ही सत्ता के लिए प्रयुक्त होते हैं? या इनके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा हुआ है?
आज हम इस विषय को मुरली ज्ञान, आध्यात्मिक विज्ञान और जीवन के व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर समझेंगे।
दुनिया की दृष्टि में भोला कौन है?
साधारण भाषा में भोला उस व्यक्ति को कहा जाता है जो छल-कपट नहीं जानता, जो दूसरों पर जल्दी विश्वास कर लेता है, जो दुनियादारी की राजनीति और चालाकियों में कुशल नहीं होता।
आज की दुनिया में कई बार “भोला” शब्द प्रशंसा के रूप में नहीं बल्कि कमजोरी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
यदि कोई व्यक्ति रिश्वत नहीं लेता, झूठ नहीं बोलता, किसी को धोखा नहीं देता, तो लोग कहते हैं—
“बहुत भोला है, अभी दुनिया नहीं देखी।”
दुनिया की नजर में भोला वह है जो दुनियावी चतुराई में कमजोर है।
लेकिन क्या परमात्मा की दृष्टि भी यही है?
नहीं।
शिव बाबा की दृष्टि में भोला कौन है?
परमात्मा शिव की दृष्टि संसार से बिल्कुल अलग है।
मुरली कोटेशन
“भारत के भोले-भाले बच्चों को माया ने लूट लिया है।”
— साकार मुरली, अनेक बार वर्णित
यहाँ बाबा भोला शब्द का प्रयोग मूर्खता के लिए नहीं करते।
बाबा भोला उस आत्मा को कहते हैं जो मूल रूप से पवित्र, प्रेममय और सत्य स्वरूप थी, लेकिन माया के धोखे को पहचान नहीं सकी।
अर्थात्—
भोला = मूल रूप से पवित्र आत्मा
एक सुंदर उदाहरण
एक छोटा बच्चा अपनी मां पर तुरंत विश्वास कर लेता है। कोई प्यार से बुलाए तो उसके पास चला जाता है। उसमें छल-कपट नहीं होता।
उसकी यही सरलता उसकी सुंदरता भी है और कभी-कभी उसकी कमजोरी भी बन सकती है।
ठीक इसी प्रकार आत्मा भी परमधाम से पवित्र, सरल और प्रेममयी बनकर आती है।
लेकिन जब वह देह-अभिमान, काम, क्रोध, लोभ और मोह के प्रभाव में आती है, तो माया उसे ठग लेती है।
दुनिया और बाबा की परिभाषा में अंतर
दुनिया कहती है—
भोला = दुनियादारी नहीं जानता।
बाबा कहते हैं—
भोला = मूल रूप से पवित्र आत्मा।
दुनिया के लिए भोला कमजोर है।
परमात्मा के लिए भोला श्रेष्ठ संस्कारों वाला है।
दुनिया के लिए भोला ठगा जा सकता है।
बाबा के लिए भोला वह आत्मा है जिसे माया ने ठग लिया है।
माया आत्मा को कैसे ठगती है?
जब आत्माएं परमधाम से आती हैं तो वे सतोप्रधान होती हैं। उनमें शांति, प्रेम, सुख और पवित्रता के संस्कार भरे होते हैं।
लेकिन जन्म-जन्मांतर के चक्र में धीरे-धीरे आत्मा अपने गुण और शक्तियां खोती जाती है।
जहां ज्ञान समाप्त होता है, वहां अज्ञान प्रवेश करता है।
जहां पवित्रता कम होती है, वहां विकार प्रवेश करते हैं।
जहां आत्म-स्मृति समाप्त होती है, वहां देह-अभिमान आ जाता है।
यही माया की ठगी है।
मुरली कोटेशन
“मीठे बच्चे, तुम विश्व के मालिक थे, माया ने तुम्हें भिखारी बना दिया।”
— साकार मुरली, 10-06-1969
आत्मा क्यों भोली कहलाती है?
आत्मा का मूल स्वभाव शांति, प्रेम, सुख और पवित्रता है।
वह किसी को दुख देने नहीं आती।
वह छल-कपट लेकर नहीं आती।
इसीलिए आत्मा अपने मूल स्वरूप में भोली है।
मुरली कोटेशन
“आत्मा स्वभाव से शान्ति स्वरूप है।”
— साकार मुरली, 20-01-1973
लेकिन यही आत्मा जब अपने स्वरूप को भूल जाती है, तब दुखी हो जाती है।
आधुनिक उदाहरण : साइबर फ्रॉड
आज के समय में यदि कोई छोटा बच्चा मोबाइल पर कोई संदिग्ध लिंक देखकर तुरंत क्लिक कर दे, तो वह धोखे का शिकार हो सकता है।
उसका दोष नहीं है।
वह भोला है।
उसे जानकारी नहीं है।
इसी प्रकार आत्मा भी मूल रूप से पवित्र थी, लेकिन माया के साइबर-जाल अर्थात् काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार में फंस गई।
भोलानाथ कौन है?
अब प्रश्न आता है—
यदि भोला आत्मा है, तो भोलानाथ कौन है?
“नाथ” शब्द का अर्थ है—
स्वामी, मालिक, रक्षक, मार्गदर्शक।
अर्थात्—
भोलानाथ = भोली आत्माओं का नाथ (स्वामी)।
परमात्मा क्यों कहलाते हैं भोलानाथ?
जब माया भोली आत्माओं को लूट लेती है, तब परमात्मा स्वयं आकर उन्हें ज्ञान देते हैं।
वे आत्मा को उसकी पहचान कराते हैं।
वे उसे उसका घर याद दिलाते हैं।
वे उसे उसका खोया हुआ राज्य वापस दिलाते हैं।
मुरली कोटेशन
“मैं आया हूँ तुम्हें फिर से विश्व का मालिक बनाने।”
— साकार मुरली, 08-03-1970
इसलिए जो भोली आत्माओं को माया से बचाकर पुनः उनके वास्तविक स्वरूप में स्थापित करता है, वही भोलानाथ है।
मेले में खोए हुए बच्चे का उदाहरण
कल्पना कीजिए कि एक छोटा बच्चा मेले में खो गया।
वह भोला है।
उसे रास्ता नहीं पता।
कोई भी उसे बहका सकता है।
लेकिन तभी उसका पिता आकर उसका हाथ पकड़ लेता है और उसे सुरक्षित घर पहुंचा देता है।
यहाँ—
- बच्चा = आत्मा
- मेला = संसार
- धोखा = माया
- पिता = भोलानाथ
यही आध्यात्मिक सत्य है।
शिव और शंकर में क्या अंतर है?
ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार शिव और शंकर दोनों अलग-अलग सत्ताएं हैं।
शिव — निराकार परमपिता परमात्मा हैं।
शंकर — सूक्ष्मवतन के देवता हैं।
विचार करने योग्य तथ्य
हम कहते हैं—
- शिवरात्रि
- शिवजयंती
- शिवलिंग
लेकिन हम नहीं कहते—
- शंकररात्रि
- शंकरजयंती
- शंकरलिंग
इससे संकेत मिलता है कि दोनों की पहचान अलग है।
ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार भोलानाथ वह परमपिता परमात्मा शिव हैं जो भोली आत्माओं को ज्ञान देकर जागृत करते हैं।
आज का सबसे बड़ा धोखा क्या है?
बाबा कहते हैं—
मनुष्य स्वयं को शरीर समझ बैठा है।
यही सबसे बड़ा धोखा है।
जब आत्मा अपने आपको शरीर समझती है, तभी दुख आरम्भ होता है।
जब वह स्वयं को आत्मा समझती है, तभी सुख लौटता है।
मुरली कोटेशन
“अपने को आत्मा समझो, देह नहीं।”
— साकार मुरली, 18-01-1969
भोलानाथ आत्मा को क्या याद दिलाते हैं?
भोलानाथ कहते हैं—
हे आत्मा!
तुम शरीर नहीं हो।
तुम परमधाम की निवासी हो।
तुम शांति स्वरूप हो।
तुम सुख स्वरूप हो।
तुम्हारा वास्तविक घर परमधाम है।
यह संसार एक मुसाफिरखाना है।
और एक दिन तुम्हें वापस अपने घर लौटना है।
निष्कर्ष
भोला वह नहीं है जो मूर्ख है।
भोला वह है जो मूल रूप से पवित्र है।
भोला वह है जिसने अभी तक अपने अंदर की अच्छाई को पूरी तरह नहीं खोया।
और भोलानाथ वह हैं जो उस भोली आत्मा को माया से बचाकर उसके वास्तविक स्वरूप की पहचान कराते हैं।
माया भूल करवाती है।
भोलानाथ स्मृति दिलाते हैं।
माया राज्य छीनती है।
भोलानाथ राज्य लौटाते हैं।
माया आत्मा को भटकाती है।
भोलानाथ आत्मा को घर का रास्ता दिखाते हैं।
पावरफुल लाइन
“दुनिया जिस भोलेपन को कमजोरी समझती है, शिव बाबा उसी भोलेपन को आत्मा की मूल पवित्रता कहते हैं।”
“दुनिया के लिए भोला वह है जो चालाक नहीं, लेकिन बाबा के लिए भोला वह है जिसने अभी भी अपने अंदर की अच्छाई को जीवित रखा है।”


