D.P 94 ड्रामा कहने का अधिकारी कौन
( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
“ड्रामा कहने का अधिकारी कौन? | क्या आप वर्ल्ड ड्रामा कहने के योग्य हैं?”
🎤 Script: “ड्रामा कहने का अधिकारी”
1. प्रश्न जो सभी आत्माओं को सोचना चाहिए
क्या आपने कभी सोचा है कि हम ‘ड्रामा’ शब्द बोलते तो हैं, लेकिन क्या हम उसे सच में समझते हैं?
क्या हर आत्मा को अधिकार है यह कहने का कि “यह वर्ल्ड ड्रामा है”?
2. ड्रामा को कहने की योग्यता क्या है?
‘ड्रामा’ शब्द को कहने के लिए सिर्फ बोलना काफी नहीं — समझ, स्वीकृति और स्थिति चाहिए।
जो आत्मा देही-अभिमानी है, जिसने इस ज्ञान को अपने जीवन में धारण किया है, वही ड्रामा कहने की अधिकारी बनती है।
एक बच्चा भी शब्द बोल सकता है — पर क्या उसे अर्थ का अनुभव है?
3. ड्रामा को जानने वाले ही उसे कह सकते हैं
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जो आत्मा ब्रह्मा कुमारियों के गूढ़ ज्ञान को पूरी तरह समझती है।
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जो आत्मा अपने संकल्प, वाणी और कर्म को ड्रामा के अनुसार बना लेती है।
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जो आत्मा साक्षी भाव में स्थित होकर हर दृश्य को सहज रूप से देखती है।
वही आत्मा कह सकती है — “यह वर्ल्ड ड्रामा है।”
4. सिर्फ कह देना नहीं, जीना होता है ड्रामा को
कुछ लोग कहते हैं: “ड्रामा भाई, ड्रामा!”
पर उनका ड्रामा सिर्फ 2-3 घंटे का सीमित नाटक है।
यहां हम बात कर रहे हैं “ब्रह्मांडीय ड्रामा” की — जिसमें सारा सृष्टि चक्र, आत्माएं, प्रकृति और समय भी पार्ट निभा रहे हैं।
इसे जानने, स्वीकार करने और जीने वाले ही सच्चे अधिकारी हैं।
5. क्या हर आत्मा ड्रामा कह सकती है?
नहीं।
यदि किसी ने परमात्मा को नहीं जाना, सृष्टि चक्र को नहीं पहचाना,
तो वह केवल शब्द बोलेगा — भाव नहीं समझेगा।
मुस्लिम “इंशा अल्लाह” बोलते हैं, पर क्या वह ड्रामा को समझते हैं? नहीं।
6. केवल परमात्मा ही पूर्ण ज्ञाता है
केवल परमात्मा शिव ही ड्रामा के सम्पूर्ण ज्ञाता हैं।
ब्रह्मा बाबा भी शिव बाबा के ज्ञान को धारणा करके ‘ड्रामा’ को समझ पाए।
परमात्मा सदा साक्षी रहते हैं — हम अभी अभ्यास कर रहे हैं उस स्थिति का।
7. ड्रामा को जानने से मिलती है चिंता मुक्त स्थिति
जब हमें यह निश्चित हो जाता है कि “जो हो रहा है, ड्रामा अनुसार हो रहा है”,
तब आत्मा फिक्र, पश्चाताप और दुख से मुक्त हो जाती है।
बाबा कहते हैं: “बच्चों को ड्रामा पर पक्का रहना है, तभी फिक्र से पार होंगे।”
8. क्यों नहीं बताया जाता भविष्य का ड्रामा?
कई पूछते हैं — अगर ड्रामा फिक्स है, तो पहले से क्यों नहीं बताया जाता?
उत्तर: क्योंकि तब यह कृत्रिम हो जाएगा।
बाबा ने अक्टूबर की मुरली में कहा —
“ड्रामा को साक्षी बनकर देखो, तभी उसका रस मिलेगा।”
9. निष्कर्ष: ड्रामा कहने का अधिकारी कौन है?
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जो आत्मा ज्ञान में स्थित है,
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देही अभिमानी है,
-
साक्षी भाव में स्थित है,
-
और अपने संकल्प व कर्म ड्रामा अनुसार करती है,
वही आत्मा ड्रामा कहने की अधिकारी है।
परमात्मा स्वयं, ज्ञान के सागर,
ही इस ब्रह्मांडीय ड्रामा के एकमात्र पूर्ण ज्ञाता हैं।
10. आत्ममंथन का आह्वान
तो आत्मा स्वरूप भाई-बहनों,
आज एक बार गहराई से सोचिए —
क्या मैं ड्रामा को सिर्फ बोल रहा हूँ या सच में जी रहा हूँ?
क्या मैं उसे स्वीकार करता हूँ?
क्या मेरा जीवन ड्रामा अनुसार सहज, साक्षी, और शक्तिशाली है?
यदि हाँ — तो आप ड्रामा कहने के अधिकारी हैं।
🧠 अंत में — “ड्रामा शब्द कोई साधारण शब्द नहीं, यह दिव्य ज्ञान का सार है।”
🌸 इसे समझो, स्वीकारो और जीओ।
🎬 शीर्षक: “ड्रामा कहने का अधिकारी कौन? | क्या आप वर्ल्ड ड्रामा कहने के योग्य हैं?”
❓ प्रश्न 1: क्या हर आत्मा ‘ड्रामा’ शब्द बोल सकती है?
उत्तर:हर आत्मा यह शब्द बोल तो सकती है, पर क्या वह उसे जान और जी रही है?
‘ड्रामा’ शब्द को बोलना आसान है, पर इसे समझना, स्वीकारना और अपनी स्थिति बनाना ही सच्ची योग्यता है।
बोलना कोई भी सीख सकता है, पर जीने के लिए आत्मिक स्थिति चाहिए।
❓ प्रश्न 2: ड्रामा कहने की असली योग्यता क्या है?
उत्तर:ड्रामा को कहने की योग्यता है:
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ज्ञान की गहराई से समझ।
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देही-अभिमान की स्थिति।
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हर कर्म, संकल्प व वाणी को ड्रामा के अनुसार बनाना।
जो आत्मा साक्षी होकर हर दृश्य को देखती है — वही सच्चे अर्थ में ड्रामा को जीती है।
❓ प्रश्न 3: क्या सिर्फ ‘ड्रामा है’ कहना काफी है?
उत्तर:नहीं।केवल कहना पर्याप्त नहीं —
अगर भावना, समझ और स्थिति नहीं है, तो यह केवल शब्द बनकर रह जाएगा।
ड्रामा को जीने वाले की वाणी में शक्ति होती है, और उसकी स्थिति दूसरों को भी निश्चिंत बना सकती है।
❓ प्रश्न 4: ब्रह्मांडीय ड्रामा और सामान्य नाटक में क्या अंतर है?
उत्तर:सामान्य नाटक 2-3 घंटे का होता है, जिसमें काल्पनिक पात्र होते हैं।
पर ब्रह्मांडीय ड्रामा अनादि, अविनाशी और सजीव है — इसमें आत्माएं, प्रकृति, समय, और परमात्मा सभी पार्टधारी हैं।
यह ड्रामा ज्ञान द्वारा ही समझा जा सकता है।
❓ प्रश्न 5: क्या सभी धर्मों के लोग ‘ड्रामा’ को समझते हैं?
उत्तर:नहीं।जैसे मुस्लिम “इंशा अल्लाह” कहते हैं — “ईश्वर की मर्जी” — पर उनका दृष्टिकोण सीमित होता है।
ड्रामा को पूर्णता से केवल वही आत्मा समझ सकती है, जो सृष्टि चक्र, आत्मा और परमात्मा के ज्ञान से युक्त हो।
❓ प्रश्न 6: ड्रामा का सबसे बड़ा ज्ञाता कौन है?
उत्तर:केवल परमात्मा शिव ही ड्रामा के सम्पूर्ण ज्ञाता हैं।
वे ही नॉलेजबुल, ट्रुथफुल और साक्षी स्वरूप हैं।
ब्रह्मा बाबा ने भी इस ज्ञान को धारणा करके ड्रामा को समझा।
❓ प्रश्न 7: ड्रामा को समझने से क्या लाभ होता है?
उत्तर:
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आत्मा फिक्र मुक्त हो जाती है।
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हर दृश्य को साक्षी बनकर देख सकती है।
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दुख, पश्चाताप, और अशांति से मुक्ति मिलती है।
बाबा कहते हैं: “ड्रामा फिक्स है” — यह समझ आत्मा को सहज, शांत और शक्तिशाली बना देती है।
❓ प्रश्न 8: अगर ड्रामा पहले से फिक्स है, तो भविष्य क्यों नहीं बताया जाता?
उत्तर:अगर भविष्य पहले से बताया जाए, तो जीवन नैचुरल नहीं रहेगा — सब कृत्रिम हो जाएगा।
बाबा कहते हैं: “ड्रामा को साक्षी बनकर देखो — तभी उसका रस मिलेगा।”
रहस्य बना रहे — यही ड्रामा की सुंदरता है।
❓ प्रश्न 9: निष्कर्षतः, ड्रामा कहने का अधिकारी कौन है?
उत्तर:
जो आत्मा:
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ज्ञान में स्थित है।
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देही अभिमानी है।
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साक्षी भाव में रहती है।
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संकल्प, वाणी, और कर्म को ड्रामा अनुसार बनाती है —
वही आत्मा ड्रामा कहने की अधिकारी है।
❓ प्रश्न 10: कैसे जानें कि मैं ड्रामा को सच में जी रहा हूँ?
उत्तर:अपने जीवन से पूछो:
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क्या मैं हरेक परिस्थिति में साक्षी भाव में रहता हूँ?
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क्या मैं फिक्र, डर, और पश्चाताप से मुक्त हूँ?
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क्या मैं हर दृश्य को “ड्रामा अनुसार” सहजता से स्वीकार करता हूँ?
यदि उत्तर हाँ है — तो आप ड्रामा के अधिकारी हैं।
🌟 अंतिम संदेश:
“ड्रामा शब्द कोई साधारण शब्द नहीं — यह दिव्य ज्ञान का सार है।”
इसे केवल बोलो मत — समझो, स्वीकारो, और जीओ।
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