Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below
| 26-10-25 |
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
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रिवाइज: 15-10-07 मधुबन |
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”
आज विश्व रचता बापदादा अपनी पहली रचना अति लवली और लक्की बच्चों से मिलन मेला मना रहा है। कई बच्चे सम्मुख हैं, नयनों से देख रहे हैं और चारों ओर के कई बच्चे दिल में समाये हुए हैं। बापदादा हर बच्चे के मस्तक में तीन भाग्य के तीन सितारे चमकते हुए देख रहे हैं। एक भाग्य है – बापदादा की श्रेष्ठ पालना का, दूसरा है शिक्षक द्वारा पढ़ाई का, तीसरा है सतगुरू द्वारा सर्व वरदानों का चमकता हुआ सितारा। तो आप सब भी अपने मस्तक पर चमकते हुए सितारे अनुभव कर रहे हो ना! सर्व सम्बन्ध बापदादा से हैं फिर भी जीवन में यह तीन सम्बन्ध आवश्यक हैं और आप सभी सिकीलधे लाडले बच्चों को सहज ही प्राप्त हैं। प्राप्त हैं ना! नशा है ना! दिल में गीत गाते रहते हैं ना – वाह! बाबा वाह! वाह! शिक्षक वाह! वाह! सतगुरू वाह! दुनिया वाले तो लौकिक गुरू जिसको महान आत्मा कहते हैं, उस द्वारा एक वरदान पाने के लिए भी कितना प्रयत्न करते हैं और आपको बाप ने जन्मते ही सहज वरदानों से सम्पन्न कर दिया। इतना श्रेष्ठ भाग्य क्या स्वप्न में भी सोचा था कि भगवान बाप इतना हमारे ऊपर बलिहार जायेगा! भक्त लोग भगवान के गीत गाते हैं और भगवान बाप किसके गीत गाते? आप लक्की बच्चों के।
अभी भी आप सभी भिन्न-भिन्न देशों से किस विमान में आये हो? स्थूल विमानों में कि परमात्म प्यार के विमान में सब तरफ से पहुंच गये हैं! परमात्म विमान कितना सहज ले आता है, कोई तकलीफ नहीं। तो सभी परमात्म प्यार के विमान में पहुंच गये हो इसकी मुबारक हो, मुबारक हो, मुबारक हो। बापदादा एक एक बच्चे को देख चाहे पहली बार आये हैं, चाहे बहुतकाल से आ रहे हैं। लेकिन बापदादा एक-एक बच्चे की विशेषता को जानते हैं। बापदादा का कोई भी बच्चा चाहे छोटा है, चाहे बड़ा है, चाहे महावीर है, चाहे पुरुषार्थी है, लेकिन हर एक बच्चा सिकीलधा है, क्यों? आपने तो बाप को ढूंढा, मिला नहीं, लेकिन बापदादा ने आप हर बच्चे को बहुत प्यार, सिक, स्नेह से कोने-कोने से ढूंढा है। तो प्यारे हैं तब तो ढूंढा क्योंकि बाप जानते हैं मेरा कोई एक भी बच्चा ऐसा नहीं है जिसमें कोई भी विशेषता नहीं हो। कोई विशेषता ने ही लाया है। कम से कम गुप्त रूप में आये हुए बाप को पहचान तो लिया। मेरा बाबा कहा, सब कहते हो ना मेरा बाबा! कोई है जो कहता है नहीं तेरा बाबा, कोई है? सब कहते हैं मेरा बाबा। तो विशेष हैं ना। इतने बड़े बड़े साइन्सदान, बड़े बड़े वी.आई.पी. पहचान नहीं सके, लेकिन आप सबने तो पहचान लिया ना। अपना बना लिया ना। तो बाप ने भी अपना बना लिया। इसी खुशी में पलते हुए उड़ रहे हो ना! उड़ रहे हो, चल नहीं रहे हो, उड़ रहे हो क्योंकि चलने वाले बाप के साथ अपने घर में जा नहीं सकेंगे क्योंकि बाप तो उड़ने वाले हैं, तो चलने वाले कैसे साथ पहुंचेंगे! इसलिए बाप सभी बच्चों को क्या वरदान देते हैं? फरिश्ता स्वरूप भव। फरिश्ता उड़ता है, चलता नहीं है, उड़ता है। तो आप सभी भी उड़ती कला वाले हो ना! हो? हाथ उठाओ जो उड़ती कला वाले हैं, कि कभी चलती कला, कभी उड़ती कला? नहीं? सदा उड़ने वाले, डबल लाइट हो ना! क्यों?सोचो, बाप ने आप सभी से गैरन्टी ली है कि जो भी किसी भी प्रकार का बोझ अगर मन में, बुद्धि में है तो बाप को दे दो, बाप लेने ही आये हैं। तो बाप को बोझ दिया है या थोड़ा-थोड़ा सम्भाल के रखा है? जब लेने वाला ले रहा है, तो बोझ देने में भी सोचने की बात है क्या? या 63 जन्म की आदत है बोझ सम्भालने की? तो कई बच्चे कभी कभी कहते हैं चाहते नहीं हैं, लेकिन आदत से मजबूर हैं। अभी तो मजबूर नहीं हो ना! मजबूर हो कि मजबूत हो? मजबूर कभी नहीं बनना। मजबूत हैं। शक्तियां मजबूत हो या मजबूर? मजबूत हैं ना? बोझ रखना अच्छा लगता है क्या? बोझ से दिल लग गई है क्या? छोड़ो, छोड़ो तो छूटो। छोड़ते नहीं हैं तो छूटते नहीं हैं। छोड़ने का साधन है – दृढ़ संकल्प। कई बच्चे कहते हैं दृढ़ संकल्प तो करते हैं, लेकिन, लेकिन…. कारण क्या है? दृढ़ संकल्प करते हो लेकिन किये हुए दृढ़ संकल्प को रिवाइज़ नहीं करते हो। बार-बार मन से रिवाइज़ करो और रियलाइज़ करो, बोझ क्या और डबल लाइट का अनुभव क्या! रियलाइजेशन का कोर्स अभी थोड़ा aऔर अण्डरलाइन करो। कहना और सोचना यह करते हो, लेकिन दिल से रियलाइज करो – बोझ क्या है और डबल लाइट क्या होता है? अन्तर सामने रखो क्योंकि बापदादा अभी समय की समीपता प्रमाण हर एक बच्चे में क्या देखने चाहते हैं? जो कहते हैं वह करके दिखाना है। जो सोचते हो वह स्वरूप में लाना है क्योंकि बाप का वर्सा है, जन्म सिद्ध अधिकार है मुक्ति और जीवनमुक्ति। सभी को निमंत्रण भी यही देते हो ना तो आकर मुक्ति जीवनमुक्ति का वर्सा प्राप्त करो। तो अपने से पूछो क्या मुक्तिधाम में मुक्ति का अनुभव करना है वा सतयुग में जीवनमुक्ति का अनुभव करना है वा अब संगमयुग में मुक्ति, जीवनमुक्ति का संस्कार बनाना है? क्योंकि आप कहते हो कि हम अभी अपने ईश्वरीय संस्कार से दैवी संसार बनाने वाले हैं। अपने संस्कार से नया संसार बना रहे हैं। तो अब संगम पर ही मुक्ति जीवनमुक्ति के संस्कार इमर्ज चाहिए ना! तो चेक करो सर्व बंधनों से मन और बुद्धि मुक्त हुए हैं? क्योंकि ब्राह्मण जीवन में कई बातों से जो पास्ट लाइफ के बन्धन हैं, उससे मुक्त हुए हो। लेकिन सर्व बन्धनों से मुक्त हैं या कोई कोई बंधन अभी भी अपने बन्धन में बांधता है? इस ब्राह्मण जीवन में मुक्ति जीवनमुक्ति का अनुभव करना ही ब्राह्मण जीवन की श्रेष्ठता है क्योंकि सतयुग में जीवनमुक्त, जीवनबंध दोनों का ज्ञान ही नहीं होगा। अभी अनुभव कर सकते हो, जीवनबंध क्या है,जीवनमुक्त क्या है, क्योंकि आप सबका वायदा है, अनेक बार वायदा किया है, क्या करते हो वायदा? याद है? किसी से भी पूछते हैं आपके इस ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य क्या है? क्या जवाब देते हो? बाप समान बनना है। पक्का है ना? बाप समान बनना है ना? या थोड़ा थोड़ा बनना है? समान बनना है ना! समान बनना है या थोड़ा भी बन गये तो चलेगा! चलेगा? उसको समान तो नहीं कहेंगे ना। तो बाप मुक्त है, या बंधन है? अगर किसी भी प्रकार का चाहे देह का, चाहे कोई देह के सम्बन्ध, माता पिता बंधु सखा नहीं, देह के साथ जो कर्मेन्द्रियों का सम्बन्ध है, उस कोई भी कर्मेन्द्रियों के सम्बन्ध का बंधन है, आदत का बंधन है, स्वभाव का बंधन है, पुराने संस्कार का बंधन है, तो बाप समान कैसे हुए? और रोज़ वायदा करते हो बाप समान बनना ही है। हाथ उठवाते हैं तो सभी क्या कहते हैं? लक्ष्मी नारायण बनना है। बापदादा को खुशी होती है,वायदा बहुत अच्छे अच्छे करते हैं लेकिन वायदे का फायदा नहीं उठाते हैं। वायदा और फायदा का बैलेन्स नहीं जानते। वायदों का फाइल बापदादा के पास बहुत-बहुत-बहुत बड़ा है, सभी का फाइल है। ऐसे ही फायदे का भी फाइल हो, बैलेन्स हो, तो कितना अच्छा लगेगा।
यह सेन्टर्स की टीचर्स बैठीहै ना। यह भी सेन्टर निवासी बैठेहैं ना? तो समान बनने वाले हुए ना। सेन्टर निवासी निमित्त बने हुए बच्चे तो समान चाहिए ना! हैं? हैं भी लेकिन कभी-कभी थोड़ा नटखट हो जाते हैं। बापदादा तो सभी बच्चों का सारे दिन का हाल और चाल दोनों देखते रहते हैं। आपकी दादी भी वतन में थी ना, तो दादी भी देखती थी तो क्या कहती थी, पता है? कहती थी बाबा ऐसा भी है क्या? ऐसा होता है, ऐसे करते हैं, आप देखते रहते हैं? सुना, आपकी दादी ने क्या देखा। अभी बापदादा यही देखने चाहते हैं कि एक-एक बच्चा मुक्ति जीवनमुक्ति के वर्से का अधिकारी बने, क्योंकि वर्सा अभी मिलता है। सतयुग में तो नेचुरल लाइफ होगी, अभी के अभ्यास की नेचुरल लाइफ, लेकिन वर्से का अधिकार अभी संगम पर है इसीलिए बापदादा यही चाहते हैं कि हर एक स्वयं चेक करे, अगर कोई भी बंधन खींचता है, तो कारण सोचो। कारण सोचो और कारण के साथ निवारण भी सोचो। निवारण बापदादा ने अनेक बार भिन्न-भिन्न रूप से दे दिये हैं। सर्वशक्तियों का वरदान दिया है, सर्वगुणों का खजाना दिया है, खजाने को यूज़ करने से खजाना बढ़ता है। खजाना सबके पास है, बापदादा ने देखा है। हर एक के स्टॉक को भी देखता है। बुद्धि है स्टॉक रूम। तो बापदादा ने सबका स्टॉक देखा है। स्टॉक में है लेकिन खजाने को समय पर यूज़ नहीं करते हैं। सिर्फ प्वाइंट के रूप से सोचते हैं, हाँ यह नहीं करना है, यह करना है, प्वाइंट के रूप से यूज़ करते हैं, सोचते हैं लेकिन प्वाइंट बनके प्वाइंट को यूज़ नहीं करते हैं इसीलिए प्वाइंट रह जाती है, प्वाइंट बनके यूज़ करो तो निवारण हो जाए। बोलते भी हैं, यह नहीं करना है, फिर भूलते भी हैं। बोलने के साथ भूलते भी हो। इतना सहज विधि सुनाई है, सिर्फ है ही संगमयुग में बिन्दी की कमाल, बस बिन्दी यूज़ करो और कोई मात्रा की आवश्यकता नहीं। तीन बिन्दी को यूज़ करो। आत्मा बिन्दी, बाप बिन्दी और ड्रामा बिन्दी। तीन बिन्दी यूज़ करते रहो तो बाप समान बनना कोई मुश्किल नहीं। लगाने चाहते हो बिन्दी लेकिन लगाने के समय हाथ हिल जाता, तो क्वेश्चन मार्क हो जाता या आश्चर्य की रेखा बन जाती है। वहाँ हाथ हिलता, यहाँ बुद्धि हिलती है। नहीं तो तीन बिन्दी को स्मृति में रखना क्या मुश्किल है? बापदादा ने तो दूसरी भी सहज युक्ति बताई है, वह क्या? दुआ दो और दुआ लो। अच्छा, योग शक्तिशाली नहीं लगता, धारणायें थोड़ी कम होती हैं, भाषण करने की हिम्मत नहीं होती है, लेकिन दुआ दो और दुआ लो, एक ही बात करो और सब छोड़ो, एक बात करो, दुआ लेनी है दुआ देनी है। कुछ भी हो जाए, कोई कुछ भी दे लेकिन मुझे दुआ देनी है, लेनी है। एक बात तो पक्की करो, इसमें सब आ जायेगा। अगर दुआ देंगे और दुआ लेंगे तो क्या इसमें शक्तियां और गुण नहीं आयेंगे? आटोमेटिकली आ जायेंगे ना! एक ही लक्ष्य रखो, करके देखो, एक दिन अभ्यास करके देखो, फिर सात दिन करके देखो, चलो और बातें बुद्धि में नहीं आती, एक तो आयेगी। कुछ भी हो जाए लेकिन दुआ देनी और लेनी है। यह तो कर सकते हैं या नहीं? कर सकते हैं? अच्छा, तो जब भी जाओ ना तो यह ट्रायल करना। इसमें सब योगयुक्त आपेही हो जायेंगे क्योंकि वेस्ट कर्म करेंगे नहीं तो योगयुक्त हो ही गये ना। लेकिन लक्ष्य रखो दुआ देना है, दुआ लेना है। कोई कुछ भी देवे, बददुआ भी मिलेगी,क्रोध की बातें भी आयेंगी क्योंकि वायदा करेंगे ना, तो माया भी सुन रही है, कि यह वायदा करेंगे, वह भी अपना काम तो करेगी ना। जब मायाजीत बन जायेंगे फिर नहीं करेंगी, अभी तो मायाजीत बन रहे हैं ना, तो वह अपना काम करेगी लेकिन मुझे दुआ देनी है और दुआ लेनी है। हो सकता है? हाथ उठाओ जो कहते हैं हो सकता है। अच्छा, शक्तियां हाथ उठाओ। हाँ,हो सकता है? सब तरफ की टीचर्स आई हैं ना। तो जब आप अपने देश में जाओ तो पहले-पहले सभी को एक सप्ताह यह होमवर्क करना है और रिजल्ट भेजनी है, कितने जने क्लास के मेम्बर कितने हैं, कितने ओ.के. हैं और कितने थोड़े कच्चे और कितने पक्के हैं, तो ओ.के. के बीच में लाइन लगाना बस ऐसे समाचार देना। इतने जने ओ.के., इतने जनों में ओ.के. में लकीर लगी है। इसमें देखो डबल फारेनर्स आये हैं तो डबल काम करेंगे ना। एक सप्ताह की रिजल्ट भेजना फिर बापदादा देखेंगे, सहज है ना, मुश्किल तो नहीं है। माया आयेगी, आप कहेंगे बाबा मेरे को पहले तो ऐसा संकल्प कभी नहीं आता था, अभी आ गया, यह होगा, लेकिन दृढ़ निश्चय वाले की निश्चित विजय है। दृढ़ता का फल है सफलता। सफलता न होने का कारण है दृढ़ता की कमी। तो दृढ़ता की सफलता प्राप्त करनी ही है।
जैसे सेवा उमंग-उत्साह से कर रहे हैं ऐसे स्वयं की, स्व के प्रति सेवा, स्व सेवा और विश्व सेवा, स्व सेवा अर्थात् चेक करना और अपने को बाप समान बनाना। कोई भी कमी, कमजोरी बाप को दे दो ना, क्यों रखी है, बाप को अच्छा नहीं लगता है। क्यों कमजोरी रखते हो? दे दो। देने के टाइम छोटे बच्चे बन जाओ। जैसे छोटा बच्चा कोई भी चीज़ सम्भाल नहीं सकता, कोई भी चीज पसन्द नहीं आती है तो क्या करता है? मम्मी पापा यह आप ले लो। ऐसे ही कोई भी प्रकार का बोझ, बंधन जो अच्छा नहीं लगता, क्योंकि बापदादा देखता है, एक तरफ यह सोच रहे हैं, है तो अच्छा नहीं, ठीक तो नहीं है लेकिन क्या करूं, कैसे करूं…. तो यह तो अच्छा नहीं है। एक तरफ अच्छा नहीं है कह रहे हैं, दूसरे तरफ सम्भाल के रख रहे हैं, तो इसको क्या कहें! अच्छा कहें? अच्छा तो नहीं है ना। तो आपको क्या बनना है? अच्छे ते अच्छा ना। अच्छा भी नहीं, अच्छे ते अच्छा। तो जो भी कोई ऐसी बात हो, बाबा हाज़िरा हज़ूर है, उसको दे दो, और अगर वापस आवे तो अमानत समझके फिर दे दो। अमानत में ख्यानत नहीं की जाती है क्योंकि आपने तो दे दी, तो बाप की चीज़ हो गई, बाप की चीज़ या दूसरे की चीज़ आपके पास गलती से आ जाए, आप अलमारी में रख देंगे? रख देंगे? निकालेंगे ना। कैसे भी करके निकालेंगे, रखेंगे नहीं। सम्भालेंगे तो नहीं ना। तो दे दो। बाप लेने के लिए आया है। और तो कुछ आपके पास है नहीं जो दो। लेकिन यह तो दे सकते हो ना। अक के फूल हैं, वह दे दो। सम्भालना अच्छा लगता है क्या? अच्छा।
चारों ओर के सभी बापदादा के दिल पसन्द बच्चे, दिलाराम है ना, तो दिलाराम के दिल पसन्द बच्चे, प्यार के अनुभवों में सदा लहराने वाले बच्चे, एक बाप दूसरा न कोई, स्वप्न में भी दूसरा न कोई, ऐसे बापदादा के अति प्यारे और अति देहभान से न्यारे, सिकीलधे, पदमगुणा भाग्यशाली बच्चों को दिल का यादप्यार और पदम-पदमगुणा दुआयें हों, साथ में बालक सो मालिक बच्चों को बापदादा का नमस्ते।
| वरदान:- | ईश्वरीय मर्यादाओं के आधार पर विश्व के आगे एग्जाम्पल बनने वाले सहजयोगी भव विश्व के आगे एग्जाम्पल बनने के लिए अमृतवेले से रात तक जो ईश्वरीय मर्यादायें हैं उसी प्रमाण चलते रहो। विशेष अमृतवेले के महत्व को जानकर उस समय पावरफुल स्टेज बनाओ तो सारे दिन की जीवन महान बन जायेगी। जब अमृतवेले विशेष बाप से शक्ति भर लेंगे तो शक्ति स्वरूप हो चलने से किसी भी कार्य में मुश्किल का अनुभव नहीं होगा और मर्यादा पूर्वक जीवन बिताने से सहजयोगी की स्टेज भी स्वत: बन जायेगी फिर विश्व आपके जीवन को देखकर अपनी जीवन बनायेगी। |
| स्लोगन:- | अपनी चलन और चेहरे से पवित्रता की श्रेष्ठता का अनुभव कराओ। |
अव्यक्त इशारे – स्वयं और सर्व के प्रति मन्सा द्वारा योग की शक्तियों का प्रयोग करो
प्रयोगी आत्मा संस्कारों के ऊपर, प्रकृति द्वारा आने वाली परिस्थितियों पर और विकारों पर सदा विजयी होगी। योगी वा प्रयोगी आत्मा के आगे ये पांच विकार रूपी सांप गले की माला अथवा खुशी में नाचने की स्टेज बन
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”
Q&A Format
प्रश्न 1: बापदादा ने बच्चों के मस्तक पर जो तीन सितारे दिखाए, उनका क्या अर्थ है?
उत्तर:
तीन सितारे यह दर्शाते हैं:
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बापदादा की श्रेष्ठ पालना का भाग्य
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शिक्षक द्वारा पढ़ाई का भाग्य
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सतगुरू द्वारा सर्व वरदानों का भाग्य
इन तीनों का अनुभव प्रत्येक बच्चे को जन्म से ही सहज रूप से मिलता है। यह दिखाता है कि हम सभी ‘लक्की बच्चे’ हैं, जिनके जीवन में बापदादा की विशेष देखभाल और आशीर्वाद है।
प्रश्न 2: बापदादा ने फरिश्ता स्वरूप बनने का क्या संदेश दिया?
उत्तर:
बापदादा ने कहा: “फरिश्ता स्वरूप भव। फरिश्ता उड़ता है, चलता नहीं।”
इसका अर्थ है कि बच्चों को ऊपर उठने वाली, बंधन मुक्त और उड़ती कला वाली स्थिति धारण करनी चाहिए। जीवन में बोझ और बंधनों से मुक्त होकर डबल लाइट बनना ही मुक्ति और जीवनमुक्ति का अनुभव है।
प्रश्न 3: बोझ और बंधन छोड़ने का तरीका क्या है?
उत्तर:
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दृढ़ संकल्प: मन में जो बोझ है उसे छोड़ने का अभ्यास करें।
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बार-बार रियलाइजेशन करें: मन से सोचें कि बोझ क्या है और डबल लाइट का अनुभव क्या है।
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बाप को सौंप दें: जो भी मानसिक, बौद्धिक या भावनात्मक बोझ है, उसे बाप को दे दें।
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छोटी-छोटी आदतें छोड़ें: पुराने संस्कार और बंधनों को पहचानें और उन्हें सौंपें।
प्रश्न 4: जीवनमुक्ति और जीवनबंध में अंतर क्या है?
उत्तर:
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जीवनबंध: पुराने संस्कार, आदतें, बंधन और कर्मेन्द्रियों का सम्बन्ध जो आत्मा को रोकते हैं।
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जीवनमुक्ति: आत्मा का बंधनों से मुक्त होना, डबल लाइट की स्थिति धारण करना और बाप समान बनना।
संगमयुग में हम यह अनुभव कर सकते हैं, जबकि सतयुग में ज्ञान तो होता है लेकिन अनुभव नहीं।
प्रश्न 5: “बाप समान बनना” क्या है और इसका अभ्यास कैसे करें?
उत्तर:
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बाप समान बनने का अर्थ है मुक्त, बंधन रहित और परमात्मा के अनुरूप जीवन जीना।
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अभ्यास:
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हर कमी और कमजोरी बाप को सौंप दें।
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तीन बिंदियाँ (आत्मा, बाप, ड्रामा) याद रखें और उनका प्रयोग करें।
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दुआ दें और लें: मानसिक शक्ति और गुण स्वतः बढ़ेंगे।
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रोज़ाना अपने वायदों और लक्ष्य की जाँच करें।
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प्रश्न 6: बापदादा ने बच्चों को किस प्रकार का वरदान दिया?
उत्तर:
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ईश्वरीय मर्यादाओं का पालन करके विश्व के सामने एग्जाम्पल बनने का वरदान।
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अमृतवेले में शक्ति ग्रहण करके दिनभर जीवन महान बनाना।
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स्वयं की सेवा और विश्व सेवा के माध्यम से योगी/प्रयोगी आत्मा बनना।
प्रश्न 7: बाप समान बनने के लिए रोज़ का अभ्यास क्या होना चाहिए?
उत्तर:
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सुबह अमृतवेला में बाप से शक्ति ग्रहण।
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दिनभर बंधनों और दोषों पर विजय पाने के लिए तीन बिंदियों का प्रयोग।
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खुद और सभी के लिए दुआ देना और लेना।
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हर संकल्प का पालन करना और परिणाम भेजना।
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स्वयं की सेवा (स्व-चेकिंग) और विश्व सेवा करना।
प्रश्न 8: तीन बिंदियों का प्रयोग कैसे करना चाहिए?
उत्तर:
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आत्मा बिंदि: अपने स्वरूप (साक्षी, मुक्त और दिव्य) को याद रखना।
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बाप बिंदि: बापदादा से मार्गदर्शन और शक्ति लेना।
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ड्रामा बिंदि: जीवन के घटनाओं और परिस्थितियों पर योग और निरीक्षण का प्रयोग।
तीनों बिंदियाँ नियमित प्रयोग करने से बच्चे बाप समान बन जाते हैं और जीवनमुक्ति अनुभव होती है।
प्रश्न 9: दृढ़ संकल्प का महत्व क्यों है?
उत्तर:
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दृढ़ संकल्प के बिना जीवनमुक्ति का अनुभव संभव नहीं।
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अभ्यास और नियमित रियलाइजेशन से संकल्प सशक्त बनता है।
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दृढ़ संकल्प से माया पर विजय मिलती है और जीवन में सफलता सुनिश्चित होती है।
प्रश्न 10: बच्चों को बापदादा की शिक्षा से क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर:बंधनों से मुक्त होकर डबल लाइट बनना।
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जीवनमुक्ति और मुक्ति का अनुभव।
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फरिश्ता स्वरूप बनकर उड़ने वाली आत्मा की स्थिति धारण करना।
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अपने जीवन को विश्व के लिए एग्जाम्पल बनाना।
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योगी और प्रयोगी आत्मा के रूप में विकारों पर विजय प्राप्त करना।
- संगमयुग, जीवनमुक्ति, बापदादा, डबल लाइट, बंधन मुक्त, फरिश्ता स्वरूप, आत्मा की उड़ान, ईश्वरीय वरदान, बाप समान बनना, दृढ़ संकल्प, अमृतवेला, योगी आत्मा, प्रयोगी आत्मा, संस्कार सुधार, बच्चों का मिलन मेला, भाग्य के सितारे, बापदादा का आशीर्वाद, लक्की बच्चे, बापदादा की शिक्षा, जीवन बंधन और मुक्ति, संगमयुग अभ्यास, बिंदियों का प्रयोग, दुआ देना और लेना, शक्ति और गुण, सहजयोगी भव, मर्यादा पालन, पवित्रता का अनुभव, ब्राह्मण जीवन, संतुलित वायदा, जीवन अभ्यास, विश्व के लिए एग्जाम्पल, आत्मा का ज्ञान, परमात्मा प्रेम, बंधनों से मुक्त, पवित्र जीवन, बच्चों के लिए संदेश, आध्यात्मिक प्रेरणा, बालक सो मालिक, बापदादा का संदेश, ईश्वरीय मर्यादा, अव्यक्त इशारे, विकार पर विजय, पाँच विकार, आत्मा का संस्कार, दिव्य जीवन, जीवन में सफलता, शक्तियों का विकास, अमृतवेले का महत्व, स्व और सर्व के लिए योग, Confluence Age, liberation in life, BapDada, double light, free from bondage, angelic form, flight of the soul, divine blessing, becoming like the Father, determined resolution, amrit vela, yogi soul, experimental soul, reform of sanskars, children’s meeting fair, stars of fortune, BapDada’s blessings, lucky children, BapDada’s teachings, life bondage and liberation, Confluence Age practice, use of dots, giving and receiving blessings, power and virtues, be an easy yogi, follow the code of conduct, experience of purity, Brahmin life, balanced promise, life practice, example for the world, knowledge of the soul, love of God, free from bondage, pure life, message for children, spiritual inspiration, child is master, BapDada’s message, divine code of conduct, subtle signals, victory over vices, five vices, soul’s sanskars, divine life, success in life, development of powers, importance of amrit vela, yoga for self and all,

