“स्वर्ग का पासपोर्ट और वीजा”
“स्वर्ग का पासपोर्ट और वीजा सबको चाहिए स्वर्ग का पासपोर्ट और वीजा। दोनों चाहिए कि एक चाहिए? दोनों चाहिए भाई जी। दोनों चाहिए। आज का विषय है — स्वर्ग का पासपोर्ट और वीजा। जैसे इस संसार में किसी देश में प्रवेश के लिए हमें पासपोर्ट और वीजा की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार स्वर्ग में प्रवेश के लिए भी हमें आध्यात्मिक पासपोर्ट और कार्मिक वीजा की आवश्यकता होगी। यह अत्यंत गहरा प्रश्न और बहुत ही सहज, सुंदर आध्यात्मिक रहस्य है, जो शिव बाबा ने स्वयं साकार मुरलियों में समझाया है। भौतिक पासपोर्ट और वीजा का उदाहरण दुनिया वाला पासपोर्ट और वीजा — किसी भी देश में जाने से पहले दो चीजें चाहिए — पासपोर्ट — जो हमारे देश से पहचान है। वीजा — जो उस देश की अनुमति है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति भारत से अमेरिका जाना चाहता है, तो उसे पहले भारत सरकार से पासपोर्ट लेना होता है और फिर अमेरिका की एंबेसी से वीजा प्राप्त करना होता है। हर देश के नियम अलग-अलग हैं। कहीं वर्क वीजा महंगा है, कहीं स्टडी वीजा सस्ता है। हर देश यह जांचता है कि यह व्यक्ति योग्य है या नहीं। स्वर्ग भी एक दिव्य देश उसी प्रकार स्वर्ग अर्थात सतयुग भी एक दिव्य देश है, जहां प्रवेश करने के लिए कुछ दिव्य योग्यताएँ चाहिए। स्वर्ग का पासपोर्ट क्या है? स्वर्ग का पासपोर्ट कोई कागज का नहीं — यह हमारी आत्मिक पहचान है। मुरली 14 जून 1967: बच्चे, आत्म अभिमानी बनो। अपना नाम रजिस्टर में लिखाओ, क्योंकि आत्म अभिमानी बनेंगे तो आपका नाम रजिस्टर में लिखा जाएगा कि “इनको पासपोर्ट बनाना है।” जब हम आत्मा बनकर परमात्मा शिव को याद करते हैं, तभी हमारा पासपोर्ट पुनः इशू होता है। क्योंकि हम सभी आत्माएं परमधाम से आई हैं — वह हमारा असली घर है। यहां आकर हमने कार्मिक लेनदेन बढ़ा लिया है। अब वापस जाने से पहले हमें अपना हिसाब-किताब बराबर करके ही जाना है। कार्मिक लेनदेन और पासपोर्ट की जांच बाबा कहते हैं — जो कर्म आपने बनाया, इस संसार में आकर किसी को सुख या दुख दिया, वो लिए-दिए बिना घर नहीं जा सकते। जो कर्जा है, वह उतारना ही होगा — तभी पासपोर्ट क्लियर होगा। स्वर्ग का वीजा क्या है? जैसे किसी देश का वीजा वहां की एंट्री की अनुमति देता है, वैसे ही कर्ममुक्त अवस्था — अकर्म का खाता ही स्वर्ग का वीजा है। मुरली 17 जून 1968: बाबा कहते हैं — पासपोर्ट में दोनों चीजें हैं — जाने की अनुमति भी है और वहां की स्वीकृति भी। जब आत्मा सभी कर्मों से पवित्र बन जाती है, तब स्वर्ग की एंट्री पीस अर्थात पुण्य की करेंसी पूर्ण रूप से भर जाती है। पासपोर्ट, वीजा और करेंसी का रहस्य पासपोर्ट — आत्म अभिमान की पहचान। वीजा — अकर्म अवस्था की अनुमति। करेंसी — पुण्य की पूंजी। जैसे जिस देश में जाना है, वहां की करेंसी चाहिए — अमेरिका में डॉलर, भारत में रुपया — उसी तरह हर युग की अपनी आध्यात्मिक करेंसी होती है। सतयुग की करेंसी: संपूर्ण पवित्रता। त्रेता की करेंसी: थोड़ी मिक्स, कम पुण्य वाली। द्वापर की करेंसी: कर्मयुक्त पुण्य। कलियुग की करेंसी: ऋणात्मक, यानी पाप की। जितना पुण्य खाता भरा होगा, उतना स्वर्ग में सुख भोग पाएंगे। पासपोर्ट जब्त क्यों होता है? यदि किसी ने गलती की है, तो उसका पासपोर्ट जब्त हो जाता है। ऐसे ही जब आत्मा के कार्मिक अकाउंट साफ नहीं होते, तो वह परमधाम नहीं जा सकती। मुरली 10 फरवरी 1967: बच्चे, हँसकर या रोकर अपना हिसाब-किताब बराबर करते ही हैं। जब तक कर्मों से मुक्त नहीं होंगे, तब तक स्वर्ग का पासपोर्ट इशू नहीं होगा। घर कौन-सा है? हमारा असली घर परमधाम है। यह दुनिया तो एक मुसाफ़िरख़ाना है। हम आत्माएं यहां आई हैं, और अब लौटने की तैयारी चल रही है। मुरली 5 अप्रैल 1968: बच्चे, यह दुनिया विदेशी देश है। अपना घर परमधाम है। स्वर्ग का वीजा किसे मिलेगा? जो अपने कर्मों से अकर्म बन सकेगा, जो आत्मा बनकर शिव बाबा को याद करेगा, जो किसी से द्वेष, ईर्ष्या, क्रोध, काम, लोभ में नहीं फँसेगा — वह आत्मा स्वर्ग की एंट्री पाएगी। मुरली 3 अगस्त 1965: काम ही महाशत्रु है। उस पर विजय प्राप्त करनी होगी — तभी भिखारी से प्रिंस बनेंगे। बाबा की इज्जत और बच्चों की श्रेष्ठता जब हम शिव बाबा की श्रीमत पर चलकर श्रेष्ठ बनते हैं, तो संसार कहता है — “इनके शिक्षक तो खुद परमात्मा हैं।” मुरली 29 मई 1966: जब बच्चे श्रेष्ठ बनते हैं, तो पिता की इज्जत बढ़ती है — जैसे प्रधानमंत्री का संस्कारी पुत्र देखकर सब कहते हैं, “वाह! क्या संस्कार।” निष्कर्ष – स्वर्ग का पासपोर्ट तैयार करें नंबर नौ निष्कर्ष: स्वर्ग का पासपोर्ट तैयार करें — आत्म अभिमानी बनें, देह अभिमान को मिटाएँ। अकर्म अवस्था का वीजा और पुण्य करेंसी एकत्र करें। परमधाम ही हमारा असली घर है। मुरली 25 जुलाई 1968: बच्चे, अब घर लौटने की तैयारी करो। अपने हिसाब-किताब समाप्त करो, अपने पासपोर्ट को स्वच्छ करो, और स्वर्ग के वीजा के लिए खुद को योग्य बनाओ।
