02/18-01-1995–“Sweet Mahavakyas (great versions) of Avyakt BapDada on the auspicious occasion of the inauguration of Gyan Sarovar (11:00 AM)”

AV-02/18-01-1995-“ज्ञान सरोवर उद्घाटन के शुभ मुहूर्त पर अव्यक्त बापदादा के मधुर महावाक्य (सुबह 11.00 बजे)”

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“ज्ञान सरोवर उद्घाटन के शुभ मुहूर्त पर अव्यक्त बापदादा के मधुर महावाक्य (सुबह 11.00 बजे)”

आज स्नेह सम्पन्न दिवस पर स्नेह के सागर बापदादा अपने अति स्नेही, स्नेह में समाए हुए लवलीन बच्चों से मिलने आए हैं। सबके स्नेह के गीत बापदादा सुनते रहे हैं और सुनते रहेंगे। हर एक बच्चे का स्नेह बापदादा देख, बाप भी गीत गाते हैं वाह मेरे स्नेही बच्चे वाह! बच्चों ने भी आज के समर्थ दिवस को सेवा में साकार किया है और करते रहेंगे। ब्रह्मा बाप भी बच्चों के गुणगान करते हैं। लेकिन साकार रूप से अव्यक्त रूप में और समीप वा साथ का विशेष अनुभव करा रहे हैं। क्या बच्चों को ऐसे लगता है कि बाप साथ नहीं है? लगता है? साथ जन्म लिया है, साथ सेवाधारी साथी रहे हैं और आगे भी साथ-साथ हैं और साथ चलेंगे। ब्रह्मा बाप को भी अकेला अच्छा नहीं लगता। आप लोगों को लगता है अकेले हैं? साथ हैं, साथ रहेंगे, साथ चलेंगे, साथ-साथ राज्य करेंगे। शिव बाप को आराम देंगे और आपके साथ ब्रह्मा बाप भी राज्य करेंगे। अपना राज्य याद है ना? आज सेवाधारी हैं और कल राज्य अधिकारी हैं। अपना राज्य सामने दिखाई दे रहा है ना? अपने राज्य का वो स्वर्ग का स्थान, स्वर्ग का दिव्य शरीर रूपी चोला सबके सामने स्पष्ट है ना। बस धारण किया कि किया। ऐसे अनुभव होता है ना? अपना भविष्य स्पष्ट है ना? आज वर्तमान है और कल भविष्य वर्तमान हो जायेगा – निश्चय है ना? पक्का निश्चय है?

सब पुराने-पुराने पक्के आए हैं ना। बापदादा को भी, विशेष ब्रह्मा बाप को भी खुशी है कि स्थापना के एक हैं आदि साथी रत्न, जो सामने बैठे हैं और दूसरे हैं स्थापना की वृद्धि के श्रेष्ठ रत्न। तो इस संगठन में ब्रह्मा बाप दोनों प्रकार के रत्नों को देख हर्षित हो रहे हैं। और बच्चे भी कितने उमंग-उत्साह से, शरीर का भी, सैलवेशन का भी ख्याल न करते हुए ठण्डी-ठण्डी हवाओं में पहुँच गए। ये ठण्डी हवाएं आप बच्चों से सलाम करने आती हैं। वैसे भी देखो जब राज्य तख्त पर बैठते हैं तो पीछे से क्या होता है? चंवर झुलाते हैं ना, तो उससे ठण्डी-ठण्डी हवाएं तो होती है। तो ये ठण्डी हवाएं भी चंवर झुलाने आती हैं। क्योंकि आप सब भी ऊंचे ते ऊंची विशेष आत्माएं हो। नशा है ना? तो आज ब्रह्मा बाप विशेष अपने जन्म के साथी और सेवा के साथी (सेवा के निमित्त पहले रत्न और जन्म के समय के पहले रत्न) दोनों को देख-देख हर्षित होते हैं।

अच्छा, यह हॉल भी राज दरबार माफिक बनाया है। (ज्ञान सरोवर का ऑडोटोरियम हॉल) राज दरबार लगती है तो गैलरी में बैठते हैं, तो गैलरी वाले भी अच्छे लग रहे हैं। (हॉल में सभी भाई बैठे हैं, मातायें सब बाहर बैठी हैं) अच्छा आज तो माताओं के त्याग का भाग्य उन्हों को अभी मिल ही जाएगा। अच्छी तरह से तपस्या कर ही रही हैं। तपस्या का फल मिल जाएगा। ठण्डी-ठण्डी हवा आ रही है तो धूप भी आ रही है। अच्छा।

ज्ञान सरोवर कहेंगे या स्नेह का सरोवर कहेंगे? ज्ञान सरोवर में स्नेह का सरोवर अच्छा है। ये ज्ञान सरोवर सेवा का विशेष लाइट हाउस और माइट हाउस है। इस धरनी से अनेक आत्माओं के भाग्य का सितारा चमकेगा। अनेक आत्माएं अपने बिछुड़े हुए बाप से मिलन मनायेंगी। अनेक आत्माओं के दु:ख दूर करने वाली धरनी है। सरोवर में आते ही सुख की लहरों में लहराने का अनुभव करते रहेंगे। इस ज्ञान सरोवर द्वारा तीन प्रकार के लोग, तीन प्रकार की प्राप्ति के अधिकारी बनेंगे – कोई वर्से के अधिकारी, कोई वरदानों के अधिकारी और कोई सिर्फ दुआओं के अधिकारी। तो तीन प्रकार के प्राप्ति सम्पन्न। ये श्रेष्ठ सरोवर है। साधारण आत्माएं आयेंगी और फ़रिश्ता जीवन का अनुभव कर जायेंगी। साथ-साथ अनेक ब्राह्मण आत्माएं तपस्या के सूक्ष्म अनुभूतियों द्वारा अव्यक्त पालना और सूक्ष्म योग के सहज अनुभव और प्राप्तियों का लाभ लेंगी। कई ब्राह्मण आत्माओं की श्रेष्ठ आशायें स्व उन्नति की पूर्ण होने का साधन बहुत श्रेष्ठ है। स्थान तो कॉमन है लेकिन स्थिति श्रेष्ठ अनुभव कराने वाला है। विधिपूर्वक ज्ञान के नॉलेज को विश्व में प्रत्यक्ष करने का स्थान है। और सबसे पहला फायदा तो बाप और बच्चों के मिलने का है। देखो, डबल संख्या में मिल तो रहे हैं ना! चाहे बाहर बैठे हैं या कहाँ भी रहे हैं, डबल संख्या तो है ना। तो सबसे प्रत्यक्षफल बच्चों की संख्या डबल मिलन मना रही है। समझा? ऐसे सरोवर में, सरोवर बनाने वालों को, सहयोग देने वालों को, संकल्प से हिम्मत दिलाने वालों को, स्नेह के हाथों से सरोवर को सम्पन्न करने वाले देश विदेश के बच्चों को पद्मगुणा मुबारक हो, मुबारक हो।

यह पहला ही स्थान है जिसमें छोटे बच्चों से लेकर जो भी ब्राह्मण हैं उनके सहयोग का तन-मन-धन लगा है। तन से इंट नहीं भी उठाई है लेकिन तन से अपने-अपने साथियों को साथी बनाया है, उमंग दिलाया है तो ऐसे स्नेह, सहयोग, शक्ति की बूँद-बूँद से सजा हुआ सरोवर श्रेष्ठ सफलता का अनुभव कराता रहेगा। तो सभी सहयोगियों को, कोने-कोने के विदेश, देश वालों को और विशेष जिन्होंने ठण्डी-ठण्डी हवाओं में, बारिश में भी हिम्मत नहीं हारी है, उन्हों को विशेष मुबारक है, मुबारक है। बापदादा जानते हैं बच्चों ने थोड़ी तकलीफ तो उठाई लेकिन प्यार से उठाई है। मोहब्बत में मेहनत का अनुभव नहीं किया है और जहाँ हिम्मत है वहाँ बापदादा की पद्मगुणा मदद भी है ही। इसलिये बापदादा मसाज़ करते रहे हैं, करते रहेंगे। अच्छा, यहाँ के इंजीनियर्स हाथ उठाओ। समय पर सम्पन्न करने की बहुत-बहुत मुबारक हो। आपको बैठने योग्य तो बना कर दे दिया ना! बाप तो आ गए ना! वायदा ही ये था। आप सब भी इन्हों को मुबारक दे रहे हो ना! जिन्होंने हॉल को सजाया वो कहाँ है? ये मुन्नी पार्टी है। देखो, स्नेह का सरोवर है ना तो कलकत्ता से यहाँ फूल आ गए। (कलकत्ता से बहुत सुन्दर रंग-बिरंगे फूल आये हैं जिससे सारी स्टेज सजी हुई है) अच्छा! आप सबको भी पहुँचने की मुबारक है और माताओं को पद्मगुणा मुबारक है।

(जाल मिस्त्री, जिन्होंने हॉल में साउण्ड का प्रबन्ध किया है) देखो अगर इनकी हिम्मत नहीं होती तो आप मुरली नहीं सुन सकते थे। सभी मुरली के पीछे तो दीवाने हैं ना। मुरली का साधन सबसे श्रेष्ठ है। कितना अच्छा प्रबन्ध किया है। आराम से सुनने आ रहा है। बाहर भी सुनाई दे रहा है। ये तो बहुत अच्छा प्रबन्ध किया है। जो भी सेवा के निमित्त हैं एक-एक डिपार्टमेन्ट का नाम नहीं लेते हैं लेकिन हर एक समझे मुझे स्नेह और सहयोग की मुबारक। अच्छा, सबसे पहली मुबारक किसको दें? दादी को। (बापदादा को) बापदादा तो देने वाला है ना। बापदादा सदा कहते हैं कि बच्चों का नम्बरवन सर्वेन्ट है तो बाप है। बाप तो सदा सेवाधारी है लेकिन बच्चे भी सेवा में बाप से भी आगे सहयोगी हैं। क्या एक-एक का नाम लें लेकिन दिल में एक-एक बच्चे का नाम ले रहे हैं और याद-प्यार दे रहे हैं। सभी डिपार्टमेन्ट को मुबारक है। लाइट के बिना भी काम नहीं, माइक के बिना भी काम नहीं। लाइट, माइट, माइक सभी को मुबारक।

(टीचर्स से) आप लोग नहीं होते तो सेन्टर्स नहीं खुलते। एक-एक ने देखो कितने सेन्टर्स खोले हैं। यहाँ सेवा की राजधानी और वहाँ राज्य की राजधानी होगी। अच्छा। पाण्डव भी देख रहे हैं। अच्छे-अच्छे पाण्डव भी पहुँच गये हैं। पाण्डव के बिना भी गति नहीं लेकिन पाण्डवों ने शक्तियों को आगे रखा है। आप लोगों ने रखा है कि बाप ने रखा है? फॉलो फादर किया है। वैसे आप सभी भी बाप के समीप बैठे हो। ऐसे नहीं समझना ये ही हैं समीप। लेकिन जो सामने हैं वो अति समीप हैं।

डबल फारेनर्स भी आए हैं। यह भी कमाल कर रहे हैं। देश-विदेश में प्रत्यक्ष करने की सेवा बहुत अच्छी कर रहे हैं और करते रहेंगे। अच्छा! (फिर बापदादा ने ज्ञान सरोवर की विशाल स्टेज पर खड़े होकर इंजीनियर्स के साथ मोमबत्ती जलाई तथा मुख्य टीचर्स एवं दादियों के साथ केक काटी, फिर मुख्य दादियां बापदादा के साथ हॉल के बाहर प्लाज़ा में आई, जहाँ पर बापदादा ने 2 हज़ार से भी अधिक संख्या में बैठी हुई माताओं से हाथ हिलाते हुए मुलाकात की तथा ध्वज़ फहराया, तत्पश्चात् जो महावाक्य उच्चारण किये वह इस प्रकार हैं):-

बापदादा, आप सभी बच्चों के दिल में जो बाप के स्नेह का झण्डा लहरा रहा है, उसको देख हर्षित हो रहे हैं। यह सेवा के लिए है और बाप बच्चों के बीच में दिल में स्नेह का झण्डा है। तो जैसे यह फ्लैग सेरीमनी करते हो तो ऊंचा लहराते हो ना, ऐसे ही सदा स्नेह में ऊंचे ते ऊंचा लहराते रहो। यह झण्डा भी बाप को प्रत्यक्ष करने का झण्डा है। यह कपड़े का झण्डा है लेकिन इस कपड़े के झण्डे में आप सबका आवाज़ समाया हुआ है कि “बाप आ गये हैं।” यही प्रत्यक्षता का झण्डा अभी कोने-कोने में लहरायेगा। और आप सभी वह लहराया हुआ प्रत्यक्षता का झण्डा देखेंगे, सुनेंगे, हर्षित होंगे। तो आज ज्ञान सरोवर में है, कल विश्व में यह झण्डा लहरायेगा। आप सभी को तपस्या करनी पड़ी उसकी मुबारक लेकिन बहुत आराम से अच्छे बैठे हो और जितना आपको देखने में आ रहा है उतना अन्दर पीछे वालों को नहीं। आप बाहर नहीं थे लेकिन दिल के अन्दर थे। सब बहुत-बहुत खुशनसीब हो इसलिये सदा खुशी बांटते रहना। खुश रहना और खुशी बांटते रहना। (फिर बापदादा ने चारों ओर बने भवनों पर अपनी दृष्टि डाली तथा पुन: हॉल में आकर सभी इंजीनियर्स को अपने हस्तों से टोली खिलाई तथा विदाई ली)

ज्ञान सरोवर का दिव्य उद्घाटन | बापदादा ने क्यों कहा “यह केवल सरोवर नहीं, लाइट हाउस और माइट हाउस है!” | Avyakt Murli

Alternative Titles:

  1. ज्ञान सरोवर उद्घाटन (1996) | बापदादा के अमूल्य महावाक्य | सेवा, स्नेह और विश्व परिवर्तन का संकल्प
  2. ज्ञान सरोवर का रहस्य | बापदादा ने बताए 3 प्रकार की प्राप्तियाँ | Avyakt BapDada Murli
  3. ज्ञान सरोवर: विश्व परिवर्तन का आध्यात्मिक केन्द्र | अव्यक्त बापदादा मधुर महावाक्य

📖 Chapter-wise Murli Notes

🗓️ Murli Date

अव्यक्त बापदादा महावाक्य
ज्ञान सरोवर उद्घाटन समारोह
तिथि: 21 नवम्बर 1996 (सुबह 11:00 बजे)


अध्याय 1 : स्नेह के सागर बापदादा का दिव्य मिलन

मुख्य बिंदु

  • बापदादा सभी बच्चों के स्नेह से प्रसन्न हैं।
  • ब्रह्मा बाबा आज भी बच्चों के साथ हैं।
  • साथ सेवा की, साथ राज्य करेंगे।

मुरली नोट्स

“साथ हैं, साथ रहेंगे, साथ चलेंगे, साथ-साथ राज्य करेंगे।”

उदाहरण

जैसे एक सच्चा पिता अपने बच्चों का हर परिस्थिति में साथ नहीं छोड़ता, वैसे ही परमपिता शिव और ब्रह्मा बाबा आत्माओं का साथ कभी नहीं छोड़ते।


अध्याय 2 : भविष्य के स्वराज्य का नशा

मुख्य बिंदु

  • वर्तमान सेवा है।
  • भविष्य में राज्य अधिकारी बनना है।
  • स्वर्ग का दिव्य जीवन सामने रखना है।

मुरली नोट्स

“आज सेवाधारी हैं और कल राज्य अधिकारी हैं।”

उदाहरण

एक विद्यार्थी पढ़ाई के समय अपने भविष्य के लक्ष्य को सामने रखकर मेहनत करता है। उसी प्रकार ब्राह्मण जीवन सेवा करते हुए भविष्य के राज्य का स्मृति रखे।


अध्याय 3 : ज्ञान सरोवर – लाइट हाउस और माइट हाउस

मुख्य बिंदु

  • ज्ञान सरोवर केवल भवन नहीं।
  • विश्व सेवा का आध्यात्मिक केन्द्र।
  • अनेक आत्माओं का भाग्य जागृत होगा।

मुरली नोट्स

“यह ज्ञान सरोवर सेवा का विशेष लाइट हाउस और माइट हाउस है।”

उदाहरण

समुद्र में लाइट हाउस जहाजों को दिशा देता है। उसी प्रकार ज्ञान सरोवर आत्माओं को ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है।


अध्याय 4 : तीन प्रकार की प्राप्तियाँ

मुख्य बिंदु

ज्ञान सरोवर आने वाली आत्माओं को तीन प्रकार की प्राप्ति होगी—

  • वर्से के अधिकारी
  • वरदानों के अधिकारी
  • दुआओं के अधिकारी

मुरली नोट्स

“कोई वर्से के अधिकारी, कोई वरदानों के अधिकारी और कोई सिर्फ दुआओं के अधिकारी।”

उदाहरण

हर विद्यार्थी अपनी मेहनत के अनुसार अलग-अलग परिणाम प्राप्त करता है।


अध्याय 5 : सहयोग की शक्ति

मुख्य बिंदु

  • तन
  • मन
  • धन
  • शुभ संकल्प

सभी का योगदान ईश्वरीय कार्य में समान रूप से मूल्यवान है।

मुरली नोट्स

“स्नेह, सहयोग और शक्ति की बूँद-बूँद से सजा हुआ सरोवर।”

उदाहरण

एक विशाल भवन केवल इंजीनियर नहीं बनाते; मजदूर, दाता, योजनाकार और प्रेरणा देने वाले सभी का योगदान होता है।


अध्याय 6 : हिम्मत और बाप की मदद

मुख्य बिंदु

  • कठिनाइयाँ आएँगी।
  • हिम्मत नहीं हारनी।
  • जहाँ हिम्मत है वहाँ बाप की मदद है।

मुरली नोट्स

“जहाँ हिम्मत है वहाँ बापदादा की पद्मगुणा मदद भी है।”

उदाहरण

बारिश और ठंड में भी सेवा करने वाले सेवाधारियों ने सिद्ध किया कि प्रेम कठिनाइयों से बड़ा होता है।


अध्याय 7 : सेवा का प्रत्येक विभाग महान

मुख्य बिंदु

  • इंजीनियर
  • साउंड विभाग
  • लाइट विभाग
  • टीचर्स
  • दादियाँ
  • पाण्डव
  • माताएँ
  • डबल विदेशी

सभी ईश्वरीय सेवा के समान सहयोगी हैं।

मुरली नोट्स

“लाइट, माइट, माइक सभी को मुबारक।”

उदाहरण

जैसे शरीर का प्रत्येक अंग आवश्यक है, वैसे ही ईश्वरीय सेवा का प्रत्येक विभाग महत्वपूर्ण है।


अध्याय 8 : प्रत्यक्षता का झण्डा

मुख्य बिंदु

  • सेवा का उद्देश्य केवल भवन बनाना नहीं।
  • विश्व में परमात्मा का प्रत्यक्ष होना।

मुरली नोट्स

“यह प्रत्यक्षता का झण्डा अभी कोने-कोने में लहरायेगा।”

उदाहरण

एक दीपक पहले घर को प्रकाशित करता है, फिर उसी प्रकाश से अनेक दीप जलते हैं।


अध्याय 9 : सदा खुश रहो, खुशी बाँटो

मुख्य बिंदु

  • खुशी ब्राह्मण जीवन की पहचान है।
  • स्वयं भी प्रसन्न रहें।
  • दूसरों को भी प्रसन्न करें।

मुरली नोट्स

“सदा खुश रहना और खुशी बाँटते रहना।”

उदाहरण

एक मुस्कान कई लोगों का दिन बदल सकती है; उसी प्रकार आध्यात्मिक खुशी अनेक आत्माओं को प्रेरित करती है।


 मुख्य शिक्षाएँ (Key Learnings)

✅ बाप सदा साथ है।
✅ सेवा वर्तमान है, राज्य भविष्य है।
✅ ज्ञान सरोवर विश्व सेवा का आध्यात्मिक केन्द्र है।
✅ सहयोग का प्रत्येक रूप महान है।
✅ जहाँ हिम्मत है, वहाँ बाप की मदद है।
✅ प्रत्यक्षता का झण्डा विश्व में लहराना है।
✅ सदा खुश रहना और खुशी बाँटना ही श्रेष्ठ सेवा है।

डिस्क्लेमर:(Disclaimer):यह वीडियो केवल आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें व्यक्त विचार ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं एवं अव्यक्त मुरली महावाक्यों पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य आत्मिक जागृति, सकारात्मक सोच, राजयोग मेडिटेशन तथा मानवीय मूल्यों का प्रसार करना है। यदि किसी सामग्री पर कॉपीराइट संबंधी कोई आपत्ति हो, तो कृपया संपर्क करें। उचित अनुरोध प्राप्त होने पर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

ज्ञान सरोवर उद्घाटन समारोह (21 नवम्बर 1996) | प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)

शीर्षक: ज्ञान सरोवर उद्घाटन – अव्यक्त बापदादा के मधुर महावाक्यों पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: ज्ञान सरोवर उद्घाटन के अवसर पर बापदादा किस भावना से बच्चों से मिलने आए?

उत्तर: स्नेह सम्पन्न दिवस पर स्नेह के सागर बापदादा अपने अति स्नेही और स्नेह में समाए हुए बच्चों से मिलने आए।


प्रश्न 2: बापदादा बच्चों को कौन-सा विश्वास दिलाते हैं?

उत्तर: बापदादा कहते हैं कि वे सदा बच्चों के साथ हैं, साथ रहेंगे, साथ चलेंगे और भविष्य में साथ-साथ राज्य करेंगे।


प्रश्न 3: वर्तमान और भविष्य में बच्चों की क्या स्थिति है?

उत्तर: वर्तमान में बच्चे सेवाधारी हैं और भविष्य में राज्य अधिकारी बनेंगे।


प्रश्न 4: ज्ञान सरोवर को बापदादा ने किन दो विशेष नामों से संबोधित किया?

उत्तर: ज्ञान सरोवर को “लाइट हाउस” और “माइट हाउस” कहा।


प्रश्न 5: ज्ञान सरोवर से अनेक आत्माओं को क्या लाभ मिलेगा?

उत्तर: अनेक आत्माएँ अपने बिछुड़े हुए परमपिता से मिलेंगी, दुखों से मुक्त होंगी और सुख की अनुभूति करेंगी।


प्रश्न 6: ज्ञान सरोवर में आने वाले लोगों को कितने प्रकार की प्राप्तियाँ होंगी?

उत्तर: तीन प्रकार की प्राप्तियाँ—

  1. वर्से के अधिकारी
  2. वरदानों के अधिकारी
  3. दुआओं के अधिकारी

प्रश्न 7: ज्ञान सरोवर में आने वाली साधारण आत्माएँ क्या अनुभव करेंगी?

उत्तर: वे फ़रिश्ता जीवन का अनुभव करके जाएँगी।


प्रश्न 8: ब्राह्मण आत्माओं के लिए ज्ञान सरोवर विशेष रूप से किसका साधन बनेगा?

उत्तर: श्रेष्ठ तपस्या, सूक्ष्म योग और स्व-उन्नति की श्रेष्ठ अनुभूतियों का साधन बनेगा।


प्रश्न 9: ज्ञान सरोवर के निर्माण में किन-किन का सहयोग रहा?

उत्तर: छोटे बच्चों से लेकर देश-विदेश के सभी ब्राह्मणों ने तन, मन, धन और शुभ संकल्प से सहयोग दिया।


प्रश्न 10: बापदादा ने सहयोगियों को किस शब्द से सम्मानित किया?

उत्तर: “पद्मगुणा मुबारक हो, मुबारक हो।”


प्रश्न 11: बापदादा ने इंजीनियर्स की किस बात के लिए प्रशंसा की?

उत्तर: समय पर ज्ञान सरोवर को तैयार करने और सेवा को सफल बनाने के लिए।


प्रश्न 12: साउंड व्यवस्था करने वालों की विशेषता क्या बताई?

उत्तर: उनके कारण सभी सहज रूप से मुरली सुन सके।


प्रश्न 13: बापदादा ने सभी सेवा विभागों के लिए क्या संदेश दिया?

उत्तर: प्रत्येक विभाग—लाइट, माइट, माइक, इंजीनियर, टीचर आदि सभी ईश्वरीय सेवा में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।


प्रश्न 14: टीचर्स की विशेष सेवा क्या बताई गई?

उत्तर: टीचर्स ने अनेक सेवा केन्द्र खोलकर ईश्वरीय सेवा का विस्तार किया।


प्रश्न 15: पाण्डवों की विशेषता क्या बताई?

उत्तर: पाण्डवों ने शक्तियों को आगे रखकर “फॉलो फादर” का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया।


प्रश्न 16: डबल विदेशी बच्चों की कौन-सी सेवा की सराहना की गई?

उत्तर: देश-विदेश में ईश्वरीय ज्ञान को प्रत्यक्ष करने की श्रेष्ठ सेवा।


प्रश्न 17: झण्डा फहराने के समय बापदादा ने किस झण्डे की बात कही?

उत्तर: दिल में लहराने वाले स्नेह और प्रत्यक्षता के झण्डे की।


प्रश्न 18: प्रत्यक्षता का झण्डा आगे कहाँ तक पहुँचेगा?

उत्तर: वह विश्व के कोने-कोने में लहराएगा।


प्रश्न 19: बापदादा ने बच्चों को सदा कौन-सी दो बातें करने की प्रेरणा दी?

उत्तर: स्वयं खुश रहो और दूसरों को खुशी बाँटते रहो।


प्रश्न 20: इस सम्पूर्ण मुरली का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: स्नेह, सेवा, सहयोग, तपस्या, विश्व कल्याण और परमात्मा की प्रत्यक्षता के लिए एकजुट होकर निरंतर आगे बढ़ना।


 मुख्य सार (One-Line Revision)

  • साथ हैं, साथ रहेंगे, साथ राज्य करेंगे।
  • आज सेवाधारी, कल राज्य अधिकारी।
  • ज्ञान सरोवर = लाइट हाउस + माइट हाउस।
  • तीन प्राप्तियाँ—वर्सा, वरदान और दुआएँ।
  • जहाँ हिम्मत, वहाँ बाप की पद्मगुणा मदद।
  • प्रत्यक्षता का झण्डा विश्व में लहराएगा।
  • सदा खुश रहो और खुशी बाँटते रहो।
  • ज्ञान सरोवर, बापदादा, अव्यक्त मुरली, ब्रह्माकुमारी, बीके, राजयोग, ओम शांति, शिव बाबा, ब्रह्मा बाबा, ज्ञान, सेवा, तपस्या, स्नेह, सहयोग, विश्व परिवर्तन, लाइट हाउस, माइट हाउस, स्वराज्य, फरिश्ता जीवन, मुरली क्लास, अव्यक्त वाणी, मधुबन, आध्यात्मिक ज्ञान, ईश्वरीय ज्ञान, ध्यान, शांति, खुशी, बीके मुरली, अव्यक्त बापदादा, ज्ञान सरोवर, ओम शांति, राजयोग, ब्रह्मा कुमारीज, अध्यात्म, ध्यान, ईश्वरीय ज्ञान, विश्व परिवर्तन, बीके, मुरली, बापदादा,Gyan Sarovar, BapDada, Avyakt Murli, Brahma Kumari, BK, Rajyoga, Om Shanti, Shiv Baba, Brahma Baba, Knowledge, Service, Penance, Affection, Cooperation, World Transformation, Light House, Might House, Swaraj, Angel Life, Murli Class, Avyakt Vani, Madhuban, Spiritual Knowledge, Divine Knowledge, Meditation, Peace, Happiness, BK Murli, Avyakt BapDada, Gyan Sarovar, Om Shanti, Rajyoga, Brahma Kumaris, Spirituality, Meditation, Divine Knowledge, World Transformation, BK, Murli, BapDada,