(11)Where fear ends, heaven begins.

S.Y.(11)जहां भय समाप्त वहीं स्वर्ग

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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भूमिका : संगम युग – नई दुनिया की नींव

हम संगम युग के ज्ञान में यह समझ रहे हैं कि नई दुनिया की नींव किस आधार पर रखी जाती है। यह इसका 11वाँ पाठ है।

आज का मुख्य विषय है —

 जहाँ भय समाप्त, वहीं स्वर्ग

जिसका भय समाप्त हो गया, वह समझ ले कि वह स्वर्ग में प्रवेश कर चुका है। यदि भय समाप्त है, तो अवस्था सतयुगी है।


 क्या सच में हमारा भय समाप्त हो गया है?

प्रश्न उठता है —

  • क्या सबका भय समाप्त हुआ है?
  • या अभी भी भय शेष है?

यदि भय समाप्त हो गया, तो यही प्रमाण है कि आत्मा स्वर्गीय स्थिति में है।


 नई दुनिया में भय क्यों नहीं होगा?

नई दुनिया में भय न होने के प्रमुख कारण हैं:

1️⃣ आत्माओं की स्वतंत्रता

वहाँ सभी आत्माएँ स्वतंत्र होंगी। स्वतंत्र आत्मा को डर नहीं लगता, क्योंकि डर परतंत्रता से पैदा होता है।

2️⃣ अपेक्षा का अभाव

वहाँ कोई किसी से अपेक्षा नहीं करता। जहाँ अपेक्षा समाप्त, वहाँ भय समाप्त।

3️⃣ आत्म‑स्मृति

वहाँ आत्माएँ स्वयं को आत्मा समझती हैं, देह नहीं। देह‑भान भय को जन्म देता है, आत्म‑भान भय को समाप्त करता है।


 भय क्यों पैदा होता है?

भय का मूल कारण है — देह‑भान

जब आत्मा स्वयं को शरीर समझती है, तब उसे:

  • हानि का डर
  • अपमान का डर
  • बीमारी का डर
  • भविष्य का डर

लगने लगता है।


 मुरली प्रमाण (Proper Date)

मुरली – 13 नवंबर 1967

बाबा कहते हैं:

“भय देह‑भान से पैदा होता है।”

जैसे ही हमने स्वयं को देह समझा — भय उत्पन्न हो गया। आत्मा स्वयं में निर्भय है।

जो आत्मा आत्म‑स्मृति में रहती है, जिसके पास ‘मेरा’ कहने के लिए केवल परमात्मा है, उसे कोई भय नहीं रहता।


 आज की दुनिया और भय की सच्चाई

आज संसार में ऐसा कोई मनुष्य ढूँढना कठिन है जो पूर्ण रूप से भय‑मुक्त हो।

 भय से जुड़ी कुछ सच्चाइयाँ:

  • अत्याचार और जुल्म — भय के कारण
  • बम, मिसाइल और विनाश के साधन — भय के कारण
  • धन संग्रह की होड़ — भय के कारण
  • क्रोध, लूट, अधिकार भावना — भय के कारण

हर एक्शन के पीछे भय छुपा हुआ है।


 भय, चिंता और शरीर का संबंध

भय और चिंता का सीधा संबंध शरीर से है।

जो आत्मा जितनी अधिक चिंता में रहती है:

  • शरीर में उतने अधिक ब्लॉकेज बनते हैं
  • हृदय रोग और तनाव बढ़ता है

भय पकड़ सिखाता है, चिपकाव पैदा करता है।


 एक सरल उदाहरण

बचपन में हम कहते थे — “तुझे डर लगता है?”

बच्चा कहता — “नहीं।”

जैसे ही आँखें दिखाईं या अचानक हाथ किया — डर पैदा हो गया।

अर्थात भय भीतर सुप्त रूप में मौजूद रहता है।


 कलयुग और भय

आज कलयुग में जीवन का आधार ही भय बन गया है:

  • नौकरी — भय के कारण
  • घर‑परिवार — भय के कारण
  • बच्चों की पालना — भय के कारण
  • शरीर में रहना — भय के कारण

भय के बिना जीवन असंभव‑सा लगने लगा है।


 ब्रह्मा कुमारी ज्ञान का उत्तर

ब्रह्मा कुमारी ज्ञान स्पष्ट कहता है —

 नई दुनिया में भय का नामोनिशान नहीं होगा।

क्योंकि वहाँ:

  • आत्म‑स्मृति होगी
  • देह‑भान नहीं होगा
  • ‘मेरा‑पन’ सीमित नहीं होगा

 सबसे बड़ा प्रश्न

जब आज भय के बिना जीवन असंभव लगता है,

तो नई दुनिया में भय कैसे समाप्त होगा?

उत्तर: देह‑भान के समाप्त होने से।


 निष्कर्ष : भय‑मुक्त अवस्था ही स्वर्ग

जहाँ भय समाप्त, वहीं स्वर्ग है।

स्वर्ग कोई स्थान नहीं, एक आत्मिक अवस्था है।

और उस अवस्था की प्राप्ति संगम युग में आत्म‑स्मृति द्वारा होती है।

प्रश्न 1: संगम युग किसे कहते हैं?

उत्तर:
संगम युग वह अलौकिक समय है जब पुरानी दुनिया का अंत और नई दुनिया की स्थापना होती है। इसी युग में आत्माएँ नई दुनिया की नींव अपने संस्कारों, अवस्था और आत्म-स्मृति से रखती हैं।


 प्रश्न 2: इस 11वें पाठ का मुख्य विषय क्या है?

उत्तर:
इस पाठ का मुख्य विषय है —
“जहाँ भय समाप्त, वहीं स्वर्ग”
अर्थात स्वर्ग कोई भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि भय-मुक्त आत्मिक अवस्था है।


 प्रश्न 3: भय समाप्त होने का क्या अर्थ है?

उत्तर:
भय समाप्त होने का अर्थ है कि आत्मा देह-भान से मुक्त होकर आत्म-स्मृति में स्थित हो गई है। जहाँ भय नहीं, वहाँ शांति, स्वतंत्रता और स्वर्गीय अवस्था स्वतः आ जाती है।


 प्रश्न 4: क्या सच में हमारा भय समाप्त हो गया है?

उत्तर:
यह आत्म-परीक्षण का प्रश्न है।
यदि भविष्य, शरीर, संबंध, मान-अपमान या असफलता का डर अभी भी है, तो भय पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
भय का समाप्त होना ही स्वर्गीय अवस्था का प्रमाण है।


 प्रश्न 5: नई दुनिया में भय क्यों नहीं होगा?

उत्तर:
नई दुनिया में भय इसलिए नहीं होगा क्योंकि वहाँ:

  • सभी आत्माएँ स्वतंत्र होंगी

  • अपेक्षा नहीं होगी

  • आत्माएँ स्वयं को आत्मा समझेंगी, देह नहीं


 प्रश्न 6: स्वतंत्र आत्मा को डर क्यों नहीं लगता?

उत्तर:
डर परतंत्रता से पैदा होता है।
जो आत्मा किसी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति पर निर्भर नहीं है, वह निर्भय होती है। स्वतंत्रता ही भय-मुक्ति की जड़ है।


 प्रश्न 7: अपेक्षा और भय का क्या संबंध है?

उत्तर:
जहाँ अपेक्षा होती है, वहाँ टूटने का डर होता है।
और जहाँ अपेक्षा समाप्त हो जाती है, वहाँ भय स्वतः समाप्त हो जाता है। नई दुनिया में कोई किसी से अपेक्षा नहीं करता।


 प्रश्न 8: आत्म-स्मृति भय को कैसे समाप्त करती है?

उत्तर:
आत्म-स्मृति में आत्मा जानती है —
“मैं अविनाशी आत्मा हूँ, शरीर मेरा साधन है।”
जब यह समझ पक्की हो जाती है, तो हानि, बीमारी और मृत्यु का डर समाप्त हो जाता है।


 प्रश्न 9: भय का मूल कारण क्या है?

उत्तर:
भय का मूल कारण है — देह-भान
जब आत्मा स्वयं को शरीर मान लेती है, तब भय जन्म लेता है।


 प्रश्न 10: देह-भान से कौन-कौन से भय पैदा होते हैं?

उत्तर:
देह-भान से:

  • हानि का डर

  • अपमान का डर

  • बीमारी का डर

  • भविष्य का डर

  • अकेलेपन का डर
    पैदा होता है।


 प्रश्न 11: मुरली में भय के बारे में क्या कहा गया है?

उत्तर:
मुरली – 13 नवंबर 1967
बाबा कहते हैं:

“भय देह-भान से पैदा होता है।”

आत्मा स्वयं में निर्भय है। भय आत्मा का स्वभाव नहीं है।


 प्रश्न 12: कौन-सी आत्मा वास्तव में निर्भय होती है?

उत्तर:
वह आत्मा:

  • जो आत्म-स्मृति में रहती है

  • जिसके पास ‘मेरा’ कहने के लिए केवल परमात्मा है

  • जो शरीर, संबंध और वस्तुओं को अपना अस्तित्व नहीं मानती


 प्रश्न 13: आज की दुनिया में भय की सच्चाई क्या है?

उत्तर:
आज ऐसा कोई मनुष्य मिलना कठिन है जो पूरी तरह भय-मुक्त हो।
अत्याचार, युद्ध, धन-लालसा, क्रोध — सबके मूल में भय छुपा है।


 प्रश्न 14: भय और शरीर का क्या संबंध है?

उत्तर:
भय और चिंता:

  • शरीर में ब्लॉकेज बनाते हैं

  • तनाव और हृदय रोग बढ़ाते हैं

  • आत्मा को पकड़ और चिपकाव सिखाते हैं


 प्रश्न 15: बचपन का उदाहरण भय को कैसे समझाता है?

उत्तर:
बच्चा कहता है — “मुझे डर नहीं लगता।”
लेकिन अचानक हरकत से डर जाता है।
यह सिद्ध करता है कि भय भीतर सुप्त रूप में मौजूद रहता है।


 प्रश्न 16: कलयुग में जीवन का आधार भय क्यों बन गया है?

उत्तर:
आज:

  • नौकरी

  • परिवार

  • बच्चों की पालना

  • शरीर की सुरक्षा

सब कुछ भय के कारण किया जा रहा है। भय के बिना जीवन असंभव-सा लगने लगा है।


 प्रश्न 17: ब्रह्मा कुमारी ज्ञान नई दुनिया के बारे में क्या कहता है?

उत्तर:
नई दुनिया में भय का नामोनिशान नहीं होगा, क्योंकि वहाँ:

  • आत्म-स्मृति होगी

  • देह-भान नहीं होगा

  • सीमित ‘मेरा-पन’ समाप्त हो जाएगा


 प्रश्न 18: सबसे बड़ा प्रश्न क्या है?

उत्तर:
जब आज भय के बिना जीवन असंभव लगता है,
तो नई दुनिया में भय कैसे समाप्त होगा?


✅ उत्तर:

देह-भान के समाप्त होने से।


 निष्कर्ष:

जहाँ भय समाप्त, वहीं स्वर्ग।
स्वर्ग कोई स्थान नहीं, एक आत्मिक अवस्था है।
और उस अवस्था की प्राप्ति संगम युग में आत्म-स्मृति द्वारा होती है।

डिस्क्लेमर

यह वीडियो/अध्याय प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुरली‑ज्ञान, आध्यात्मिक अध्ययन और आत्मिक चिंतन पर आधारित है।

इसका उद्देश्य किसी भी मनोवैज्ञानिक सिद्धांत, सामाजिक व्यवस्था, विज्ञान या वर्तमान परिस्थितियों का खंडन करना नहीं है। यह प्रस्तुति केवल ब्रह्मा कुमारीज़ के ज्ञान अनुसार भय के मूल कारण, भय‑मुक्त अवस्था और भय‑मुक्त नई दुनिया की व्यवस्था को समझाने हेतु है।

दर्शक/पाठक इसे आध्यात्मिक दृष्टि से ग्रहण करें।

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