(13)When you come, we will be overjoyed. What is the true meaning of dedicating one’s body, mind, and wealth?

प्रश्न मंथन:-(13)जब आप आएंगे तो हम वारी जाएंगे। तन मन धन समर्पण का सच्चा अर्थ क्या है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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हम विचार सागर मंथन कर रहे हैं।
आज का विषय है बाबा।

जब आप आएंगे
तो हम वारी जाएंगे।
तन मन धन समर्पण का सच्चा अर्थ क्या है?

जब आप आएंगे हम वारी जाएंगे।
ये वाक्य इतना मधुर क्यों है?
ये वाक्य इतना मीठा क्यों है?

यह सिर्फ एक संवाद नहीं,
यह एक भक्ति का भाव है।
प्रेम का संकल्प है।
पूर्ण समर्पण की प्रतिज्ञा है।

यह एक संवाद नहीं है।
यह क्या है?
भक्ति का भाव है।
प्रेम का संकल्प है।
पूर्ण समर्पण की प्रतिज्ञा है।

लेकिन बाबा हमें समझाते हैं
कि सच्चा समर्पण सिर्फ भावनात्मक नहीं,
एक आत्मिक अवस्था है।

सच्चा समर्पण क्या है?
सिर्फ एक भावना नहीं है।
यह एक आत्मिक अवस्था है।
आत्मा की अवस्था है।

मुरली पॉइंट:
समर्पण का अर्थ है परिवर्तन।

मुरली का पॉइंट क्या है?
समर्पण का अर्थ है परिवर्तन।
बदलना।
समर्पण का अर्थ है अपने आप को बदलना।
परिवर्तन।

मुरली है 25 फरवरी 2024।
बाबा कहते हैं—
समर्पित वे कहलाते हैं
जो तन, मन, धन को
ईश्वरीय कार्य में परिवर्तन करके लगाते हैं।

समर्पण का अर्थ त्याग नहीं।
दुनिया वाले समझते हैं कि
हमें कुछ त्यागना पड़ेगा,
कुछ छोड़ना पड़ेगा।

तो बाबा कहते हैं—
समर्पण का अर्थ त्याग नहीं।
समर्पण का अर्थ है परिवर्तन।

यानी समर्पण मतलब
बराबर रास्ता बदलना।
हमें अपना रास्ता बदलना है,
ना कि दुनिया को छोड़ देना है।
हमने दुनिया को छोड़ना नहीं,
हमने सिर्फ रास्ता बदलना है।

तन मन धन समर्पण का अर्थ क्या?

तन का समर्पण

शरीर को भगवान के कार्य में लगाना।
सेवा करना।
मधुर वाणी बोलना।
शुद्ध कर्म करना।

समर्पण का अर्थ शरीर छोड़ देना नहीं।
शरीर को ईश्वर का यंत्र बनाना है।

मन का समर्पण

मन को बाबा के प्रति स्थिर करना।
बाबा की श्रीमत पर चलाना।
मन में प्रेम, विश्वास और आज्ञाकारिता।

साकार मुरली 12 जून 2024—
मन को सबसे पहले समर्पित करो।
फिर तन और धन स्वतः ईश्वरीय बन जाएगा।

धन का समर्पण

धन का अर्थ सिर्फ पैसा नहीं।
धन में आता है—
समय,
प्रतिभा,
संसाधन,
क्षमता,
संस्कार।

जो कुछ मेरे पास है,
वो मेरा नहीं,
वो बाबा का है—
ऐसा समझकर उपयोग करना।

सच्चे समर्पण के उदाहरण

उदाहरण 1: दीपक
दीपक कहता है—
जब तुम आओगे,
मैं खुद को जलाकर
तुम्हारा मार्ग रोशन कर दूंगा।

वो जलना आनंद है,
क्योंकि वह ईश्वर के लिए है।
अपने अहंकार को जलाकर
प्रकाश बन जाना।

उदाहरण 2: मां का प्रेम
मां बच्चे के लिए
समय देती है,
शरीर का उपयोग करती है,
मन प्रेम में लगाती है,
धन खर्च करती है।

पर यह सब बोझ नहीं लगता।
प्रेम से होता है।

इसी प्रकार समर्पण
बोझ नहीं,
भगवान-प्रीति का स्वाभाविक फल है।

“जब आप आएंगे हम वारी जाएंगे” का अर्थ

वारी जाने का मतलब—
सब कुछ न्योछावर कर देना।
अहंकार, घमंड, वासनाएं,
कमजोरियां,
पुरानी गंदी आदतें—
सब बाबा पर वारी कर देना।

वारी जाना अर्थात
पुरानी स्थिति को छोड़ देना।
पुराने संस्कार,
पुराना व्यवहार—
आज खत्म।

मुरली टिप्पणी (18 अगस्त 2024):
समर्पण का मूल है निश्चय।
जिन्हें सच्चा निश्चय है,
वे स्वतः समर्पित हो जाते हैं।
उन्हें त्याग करना नहीं पड़ता,
त्याग उनके पीछे-पीछे चलता है।

समर्पण
एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है,
दबाव या मजबूरी नहीं।

बाबा वायदा याद दिलाते हैं

भक्ति में हमने कहा—
“तन मन धन सब तेरा…”

अब बाबा कहते हैं—
अब मैं आ गया हूं,
अब दे दो।

भक्ति में बोला गया वचन
ज्ञान में हिसाब बन जाता है।

जैसे मां बच्चे को प्यार से याद दिलाती है—
ठीक वैसे ही बाबा
हमारे ही गीतों से
हमारा वायदा याद दिला रहे हैं।

वारी जाने का आध्यात्मिक अर्थ

तन— सेवा, योग, मर्यादा
मन— विचार, भावनाएं श्रीमत अनुसार
धन— समय, संसाधन, योग्यताएं
सब ईश्वरीय कार्य में लगाना

जो बाबा कहे, वही करना।
जैसे मां बच्चे पर वारी जाती है—
उसकी खुशी में अपनी खुशी।

इसी तरह
“जब आप आएंगे हम वारी जाएंगे”
का अर्थ है—
पूरा जीवन बाबा की श्रीमत पर चढ़ा देना।

आज के समय में समर्पण

तन— सेवा और मर्यादा
मन— अविचल स्मृति
धन— समय, ऊर्जा, कौशल, सद्गुण
सब बाबा की सेवा में

अंतिम अनुभूति

समर्पण खोना नहीं,
समर्पण सब कुछ पा लेना है।

इसलिए प्रेम से कहते हैं—
“जब आप आएंगे हम वारी जाएंगे।”