
आप सभी ने बुलाया या बापदादा ने आप सभी को बुलाया है? किसने किसको बुलाया है? जो बच्चे बाप के कर्तव्य में निमित्त बने हुये हैं उन्हों को यह बात हर वक्त याद रखनी है कि हमें हर समय हर हालत में एवररेडी और आलराउन्ड होना है। अगर यह दो बातें सभी में आ जायें तो सर्विस का सबूत श्रेष्ठ निकल सकता है। लेकिन नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार यह बातें हैं। आप निमित्त बने हुए बच्चों को यह स्लोगन याद रखना चाहिये कि हम जो कर्म करेंगे मुझे देख और सभी करेंगे। हर समय अपने को ऐसा समझो। जैसे ड्रामा के स्टेज पर सभी के सामने हम पार्ट बजा रहे हैं। एक होता है अपने आप से रिहर्सल। एक होता है स्टेज पर सभी के सामने पार्ट बजाना। तो स्टेज पर एक्ट करने वाले का अपने ऊपर कितना ध्यान रहता है। एक-एक एक्ट पर हर समय अटेन्शन रहता है। हाथों पर, पांवों पर, आंखों पर सभी पर ध्यान रहता है। अगर कोई भी बात नीचे ऊपर होती है तो एक्टर के एक्ट में शोभा नहीं देती। तो ऐसे अपने को समझकर चलना है।
तीन मिनट का रिकार्ड जब भरते हैं तो कितना ध्यान देते हैं। आप सभी भी अपने 21 जन्मों का रिकार्ड भर रहे हो तो भरते समय बहुत ध्यान रखना है। रिकार्ड में जरा भी नीचे-ऊपर हो जाता है तो वह रिकार्ड हमेशा के लिये रद्दी हो जाता है। तुम्हारा भी 21 जन्मों के लिये सतयुगी राज़धानी का जो रिकार्ड भरता है तो वह रद्द न हो जाये। रद्द हुआ तो फिर दूर हो जाते हैं। तो यह सोचना चाहिए – हमारे हर कर्म के ऊपर सभी की आंख हैं। एक्टर्स जब देखते हैं, हमाको सभी देख रहे हैं तो खास अटेन्शन रहता है। कोई देखने वाला नहीं होता है तो अलबेलापन रहता है। तो हमेशा समझना चाहिए हम भले अकेलेपन में कुछ करते, तो भी सृष्टि के सामने हैं। सारी सृष्टि की आत्माएं चारों ओर से हमें देख रही हैं।
अगर एक-एक फूल ऐसा सम्पूर्ण और सुन्दर हो जाये तो इस बगीचे की खुशबू कितनी फैल जाती! लेकिन क्यों नहीं फैलती, उसका कारण क्या? खुशबू के साथ-साथ कहाँ-कहाँ बीच में और बातें भी आ जाती हैं। भले खुशबू कितनी भी हो लेकिन खुशबू से भी जल्दी फैलने वाली बदबू होती है, जो ज़रा सी बात सारी खुशबू को समाप्त कर देती है। अविनाशी खुशबू जिसको सदा गुलाब कहते हैं। एक होता है सदा गुलाब, दूसरा होता गुलाब, तीसरा होता है रूहे गुलाब। पहला नम्बर है रूहे गुलाब। वह रूह की स्थिति में रहता है और रूहानी रूह के हमेशा नज़दीक हैं। ऐसे हैं रूहे गुलाब। और दूसरी क्वालिटी जो है वह फिर सर्विस में बहुत अच्छे रहते हैं बाकी रूहानी स्थिति में कमी है। सर्विस में, धारणा में अच्छे हैं, संस्कार शीतल हैं। खुद अपने को क्या समझते हो? किस नम्बर का फूल समझते हो? कांटे तो यहाँ हो भी न सके। हैं तो सभी गुलाब लेकिन गुलाब में भी फर्क है। जो रूहे गुलाब होंगे उनकी निशानी क्या होगी?
आप लोगों को मस्तक की रेखा परखने आती है? ज्योतिषी बने हो वा नहीं? बापदादा जो ज्ञान और योग की ज्योतिषी दिखाते हैं उनसे क्या देखते हो? हरेक के मुखड़े से, नयनों से, मस्तक से मालूम पड़ता है। इसमें भी विशेष मस्तक और नयनों से मालूम पड़ता है। आप ज्योतिषी बनकर हरेक को परख सकते हो? नयनों में और मस्तक में वह रेखायें ज़रूर रहती हैं। किसको परखना यह भी ज्योतिष विद्या है। तो यह जो विद्या है परखने की यह कईयों में कम है। ज्ञान और योग सीखते हैं लेकिन यह परखने की ज्योतिष विद्या भी जाननी है। कोई भी व्यक्ति सामने आए तो आप लोगों को एक सेकेण्ड में उनके तीनों कालों को परख लेना चाहिए। एक तो पास्ट में उनकी लाइफ क्या थी और वर्तमान समय उनकी वृत्ति, दृष्टि और भविष्य में कहाँ तक यह अपनी प्रालब्ध बना सकते हैं। यह जानने की प्रैक्टिस चाहिए। यह परखने की जो नालेज है वह बहुत कम है। यह कमी अभी भरनी चाहिए। वर्तमान समय जो आने वाला है उसमें अगर यह गुण नहीं होगा, कमी होगी तो धोखे में आ जायेंगे। कई ऐसी आत्माएं आपके सामने आयेंगी जो अन्दर एक और बाहर से दूसरी होंगी। परीक्षा के लिए आयेंगी, क्योंकि कई समझते हैं कि यह सिर्फ रटे हुए हैं। तो कई रंग रूप से, आर्टिफीसियल रूप में भी परखने लिए आयेंगे, भिन्न-भिन्न रूप से। इसलिये यह ध्यान रखना है कि यह किसलिये आया है? उनकी वृत्ति क्या है? और अशुद्ध आत्माओं की भी बड़ी सम्भाल करनी है। ऐसे-ऐसे केस भी बहुत होंगे दिन प्रतिदिन पाप आत्मायें तो बहुत होते हैं। आपदायें, अकाले मृत्यु, पाप कर्म बढ़ते जाते हैं तो उन्हों की वासनाएं जो रह जाती हैं वह फिर अशुद्ध आत्माओं के रूप में भटकती हैं। इसलिये यह भी बहुत बड़ी सम्भाल रखनी है। कोई में अशुद्ध आत्मा की प्रवेशता होती है तो उनको भगाने लिए एक तो धूप जलाते हैं और आग में चीज़ को तपाकर लगाते हैं और लाल मिर्ची भी खिलाते हैं। तो आप सभी को फिर योग की अग्नि से काम लेना है। हर कर्मेन्द्रियों को योगाग्नि में तपाना है तो फिर कोई वार नहीं कर सकेंगे। थोड़ा भी कहाँ ढीलापन हुआ, कोई भी कर्मेन्द्रियां ढीली हुई तो फिर प्रवेशता हो सकती है। वह अशुद्ध आत्माएं भी बड़ी पावरफुल होती हैं। वह माया की पावर भी कम नहीं होती। यह बहुत ध्यान रखना है। और कई प्राकृतिक आपदाएं भी अपना कर्तव्य करेंगी। उसका सामना करने लिये अपने में ईश्वरीय शक्ति धारण करनी है। उस समय स्नेह नहीं रखना है। उस समय शक्तिरूप की आवश्यकता है। किस समय स्नेहमूर्त, किस समय शक्तिरूप बनना है यह भी सोचना है। इन सभी बातों में शक्तिरूप की आवश्यकता है। अगर कोई ऐसा आया और उनको ज्यादा स्नेह दिखाया तो कहाँ नुकसान भी हो सकता है। स्नेह बापदादा और दैवी परिवार से करना है। बाकी सभी से शक्तिरूप से सामना करना है। कई बच्चे गफलत करते हैं जो उन्हों के स्नेह में आ जाते हैं। वह स्नेह वृद्धि होकर कमज़ोर कर देता है, इसलिये अब शक्तिरूप की आवश्यकता है।
अन्तिम नारा भी भारत माता शक्ति अवतार का गायन है। गोपी माता थोड़ेही कहते हैं। अब शक्ति रूप का पार्ट है। गोपिकाओं का रूप साकार में था। अब अव्यक्त रूप से शक्ति का पार्ट है। हरेक जब अपने शक्तिरूप में स्थित होंगे तो इतने सभी की शक्ति मिलाकर कमाल कर दिखायेगी। यादगार रूप में अन्तिम चित्र कौन सा दिखाया हुआ है? पहाड़ को अंगुली देने का। अंगुली, यह शक्ति की देनी है। इससे ही कलियुगी पहाड़ खत्म होगा। इसमें हरेक की अंगुली की दरकार है। अभी वह अंगुली पुरी रीति नहीं दी है। उठाते जरूर हैं परन्तु कोई की कभी सीधी कोई की कभी टेढ़ी हो जाती है। जब पूरी अंगुली होगी तब प्रभाव निकलेगा। एक जैसे अंगुली देनी है। इस कलियुगी पहाड़ को जल्दी अंगुली देकर फिर सतयुगी दुनिया को लाना है। साकार के साथ स्नेह है तो जल्दी-जल्दी इस पुरानी दुनिया से चलने की तैयारी करो। आप कहेंगे अभी सर्विस कहाँ हुई है लेकिन सर्विस भी किसके लिये रुकी है? अगर आप हरेक शक्तिरूप में स्थित हो जाओ तो आपके जो भूले भटके भक्त हैं, न चाहते भी चकमक (चुम्बक) के आगे आ जायेंगे, देरी नहीं लगेगी।“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी बनो | हर कर्म का रिकॉर्ड बन रहा है | रूहे गुलाब बन शक्तिरूप धारण करो | अव्यक्त मुरली 18-05-1969”
वैकल्पिक छोटा Title“रूहे गुलाब बनो, ज्ञान-योग के ज्योतिषी बनो | Avyakt Murli 18-05-1969”
अध्याय: रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी
अव्यक्त मुरली — 18 मई 1969
मधुबन
अध्याय 1 — एवररेडी और आलराउन्ड बनो
बाप के कर्तव्य में निमित्त बने बच्चों को हर समय और हर परिस्थिति में एवररेडी तथा आलराउन्ड रहना है।
बापदादा का मुख्य संकेत है कि हमारी स्थिति केवल किसी एक क्षेत्र में अच्छी न हो, बल्कि ज्ञान, योग, धारणा, सेवा और व्यवहार—हर क्षेत्र में संतुलित हो।
उदाहरण
जैसे एक अच्छा खिलाड़ी केवल अभ्यास के समय ही तैयार नहीं रहता, बल्कि प्रतियोगिता के समय भी पूरी तरह तैयार रहता है, वैसे ही ब्राह्मण जीवन में हर परिस्थिति को परीक्षा समझकर एवररेडी रहना है।
“हमें हर समय हर हालत में एवररेडी और आलराउन्ड होना है।”
अध्याय 2 — “मुझे देखकर सभी करेंगे”
निमित्त आत्मा का हर कर्म दूसरों के लिए उदाहरण बनता है।
इसलिए यह स्मृति रखनी है:
मैं जो कर्म करूंगा, मुझे देखकर दूसरे भी करेंगे।
अपने जीवन को ऐसे देखना है जैसे हम ड्रामा की स्टेज पर सभी के सामने अपना पार्ट बजा रहे हैं।
उदाहरण
एक कलाकार जब मंच पर आता है तो उसे अपने हाथ, पैर, आंखों, चेहरे और प्रत्येक एक्ट पर पूरा ध्यान रहता है। छोटी-सी गलती भी पूरे अभिनय की शोभा को कम कर सकती है।
इसी प्रकार हमें अपने:
- कर्म
- वाणी
- दृष्टि
- वृत्ति
- व्यवहार
- संस्कार
पर निरन्तर अटेन्शन रखना है।
आज का अभ्यास
हर कर्म से पहले स्वयं से पूछें:
“अगर मुझे देखकर कोई दूसरा भी यही कर्म करे, तो क्या मैं इसे श्रेष्ठ कर्म कहूँगा?”
अध्याय 3 — 21 जन्मों का रिकॉर्ड
हम केवल आज का जीवन नहीं बना रहे हैं, बल्कि अपने श्रेष्ठ कर्मों द्वारा 21 जन्मों की प्रालब्ध का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं।
जैसे किसी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड में छोटी-सी गलती भी परिणाम बदल सकती है, वैसे ही पुरुषार्थ में अलबेलापन हमारी भविष्य की प्रालब्ध को प्रभावित कर सकता है।
उदाहरण
यदि कोई विद्यार्थी पूरे वर्ष मेहनत करता है लेकिन परीक्षा के समय लापरवाही करता है, तो उसका परिणाम प्रभावित हो सकता है।
इसी तरह संगमयुग के हर कर्म को बहुत मूल्यवान समझना है।
“तुम भी 21 जन्मों के लिए सतयुगी राजधानी का रिकॉर्ड भर रहे हो।”
अध्याय 4 — अकेले में भी अटेन्शन
अक्सर मनुष्य तब सावधान रहता है जब कोई उसे देख रहा हो। लेकिन रूहानी जीवन में वास्तविक अटेन्शन यह है कि कोई सामने न हो तब भी स्थिति श्रेष्ठ रहे।
हमें यह स्मृति रखनी है:
“मैं अकेला नहीं हूँ, मेरे हर कर्म का प्रभाव सृष्टि पर पड़ता है।”
उदाहरण
यदि कोई व्यक्ति अकेले में भी स्वच्छता रखता है, सत्य बोलता है और अनुशासन में रहता है, तो समझें कि उसके संस्कार वास्तविक हैं।
इसी प्रकार आत्मिक जीवन में भी हमारा अटेन्शन बाहरी प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि अन्दर की स्थिति के लिए होना चाहिए।
अध्याय 5 — खुशबू फैलाने वाला “रूहे गुलाब”
बापदादा बच्चों को गुलाब की उपमा देते हैं। सभी गुलाब हैं, लेकिन गुलाबों में भी क्वालिटी का अन्तर है।
तीन प्रकार की विशेषता
1. गुलाब
ज्ञान और धारणा में अच्छे।
2. सदा गुलाब
लगातार खुशबू देने वाले, अर्थात् स्थायी श्रेष्ठ स्थिति वाले।
3. रूहे गुलाब
रूहानी स्थिति में रहने वाले और सदा रूहानी बाप के समीप रहने वाले।
मुख्य प्रश्न
मैं अपने आपको किस नम्बर का फूल समझता हूँ?
यह प्रश्न आत्म-चेकिंग का माध्यम बन सकता है।
Murli Note
रूहे गुलाब की विशेषता केवल बाहरी सेवा नहीं, बल्कि रूहानी स्थिति और रूहानी बाप की समीपता है।
अध्याय 6 — ज्ञान-योग के ज्योतिषी बनो
यह अध्याय इस मुरली का अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय है।
बापदादा समझाते हैं कि ज्ञान और योग सीखने के साथ परखने की शक्ति भी चाहिए।
सच्चा रूहानी ज्योतिषी केवल बाहरी रेखाओं को नहीं देखता, बल्कि आत्मा की:
- वृत्ति
- दृष्टि
- स्थिति
- संस्कार
- कर्म
- भविष्य की सम्भावना
को समझने का अभ्यास करता है।
उदाहरण
किसी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान हो सकती है, लेकिन उसकी वृत्ति अलग हो सकती है।
इसलिए केवल बाहरी रूप देखकर निर्णय नहीं करना, बल्कि ज्ञान और योग की शक्ति से परखने का अभ्यास करना है।
Murli Note
ज्ञान और योग के साथ परखने की विद्या को भी विकसित करना है।
अध्याय 7 — योगाग्नि से स्वयं को शक्तिशाली बनाओ
मुरली में योगाग्नि की शक्ति पर विशेष बल दिया गया है।
हर कर्मेन्द्रिय को योग की अग्नि में तपाने का अर्थ है—अपनी कमजोरियों और ढीलेपन पर विजय प्राप्त करना।
उदाहरण
सोना आग में तपकर अधिक शुद्ध और मूल्यवान बनता है। उसी प्रकार आत्मा जब योग की अग्नि में स्वयं को तपाती है, तो उसकी कमजोरियाँ समाप्त होती जाती हैं और शक्ति प्रकट होती है।
दैनिक अभ्यास
“आज मेरी कौन-सी कर्मेन्द्रिय सबसे अधिक अटेन्शन मांग रही है?”
इसे पहचानकर योगबल द्वारा उस पर विजय का अभ्यास करें।
अध्याय 8 — स्नेहमूर्त भी, शक्तिरूप भी
हर परिस्थिति में केवल स्नेह ही पर्याप्त नहीं। समय प्रमाण स्नेहमूर्त और शक्तिरूप, दोनों बनने की आवश्यकता है।
दैवी परिवार के प्रति — स्नेह
आसुरी प्रवृत्तियों के सामने — शक्ति
उदाहरण
एक माता अपने बच्चे से प्रेम करती है, लेकिन बच्चे की गलत आदत को प्रेम के नाम पर बढ़ावा नहीं देती। आवश्यकता पड़ने पर दृढ़ता भी दिखाती है।
इसी प्रकार आध्यात्मिक जीवन में स्नेह के साथ शक्ति का संतुलन आवश्यक है।
अध्याय 9 — शक्ति अवतार बनकर सेवा
अन्तिम लक्ष्य केवल व्यक्तिगत परिवर्तन नहीं है। प्रत्येक शक्ति जब अपनी शक्ति का सहयोग देती है, तब सामूहिक शक्ति का प्रभाव दिखाई देता है।
कलियुगी पहाड़ को हटाने के लिए सभी की “अंगुली” चाहिए।
इसका अर्थ है—हर आत्मा अपने पुरुषार्थ, योग, पवित्रता और सेवा द्वारा विश्व परिवर्तन के कार्य में अपना सहयोग दे।
उदाहरण
एक अकेली शक्ति सीमित प्रभाव डाल सकती है, लेकिन अनेक शक्तियाँ एक संकल्प में जुड़ जाएँ तो बड़ा परिवर्तन सम्भव होता है।
अध्याय 10 — अपनी “अंगुली” पूरी दो
मुरली का अत्यन्त प्रेरणादायक संदेश है कि केवल अंगुली उठाना पर्याप्त नहीं, पूरी रीति से अंगुली देनी है।
कभी अंगुली सीधी और कभी टेढ़ी—ऐसा नहीं।
अर्थात् पुरुषार्थ में निरन्तरता चाहिए।
आज का संकल्प
“मैं अपने तन, मन, समय, संकल्प और कर्म से विश्व-परिवर्तन के कार्य में पूरी रीति से सहयोग दूँगा।”
मुरली का सार
18-05-1969 — “रूहानी ज्ञान-योग की ज्योतिषी”इस मुरली से हमें मुख्य रूप से ये शिक्षाएँ मिलती हैं:
एवररेडी और आलराउन्ड बनो।
अपने हर कर्म को स्टेज पर किए जाने वाले पार्ट की तरह देखो।
21 जन्मों की प्रालब्ध का श्रेष्ठ रिकॉर्ड बनाओ।
अकेले में भी अटेन्शन रखो।
साधारण गुलाब नहीं, रूहे गुलाब बनो।
ज्ञान और योग के साथ परखने की शक्ति बढ़ाओ।
योगाग्नि से कर्मेन्द्रियों को शक्तिशाली बनाओ।
समय प्रमाण स्नेहमूर्त और शक्तिरूप बनो।
अपनी शक्ति की अंगुली देकर विश्व परिवर्तन में सहयोगी बनो।
अंतिम चिंतन“मैं कौन-सा फूल हूँ—साधारण गुलाब, सदा गुलाब या रूहे गुलाब?”
और—“क्या मेरे हर कर्म से रूहानी खुशबू फैल रही है?”
यही आज के पुरुषार्थ की सच्ची चेकिंग है।
Disclaimer
यह वीडियो आध्यात्मिक एवं शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें दिए गए विचार 18-05-1969 की अव्यक्त मुरली “रूहानी ज्ञान-योग की ज्योतिषी” के आधार पर चिंतन एवं आत्मिक पुरुषार्थ के लिए प्रस्तुत किए गए हैं। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, धर्म, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। दर्शक इन आध्यात्मिक शिक्षाओं को अपनी समझ और विवेक के अनुसार ग्रहण करें।
1. निमित्त बने हुए बच्चों को हर समय किन दो बातों में रहना चाहिए?
उत्तर: एवररेडी और आलराउन्ड।
2. निमित्त बच्चों को कौन-सा स्लोगन याद रखना चाहिए?
उत्तर: “हम जो कर्म करेंगे, मुझे देख सभी करेंगे।”
3. जीवन को किसके समान समझकर हर कर्म पर अटेन्शन रखना है?
उत्तर: ड्रामा की स्टेज पर पार्ट बजाने वाले एक्टर के समान।
4. एक्टर स्टेज पर अपने ऊपर इतना अटेन्शन क्यों रखता है?
उत्तर: क्योंकि सभी उसकी एक्टिंग को देख रहे होते हैं और कोई भी गलती उसके पार्ट की शोभा को कम कर सकती है।
5. हम अपने कर्मों द्वारा कितने जन्मों का रिकॉर्ड भर रहे हैं?
उत्तर: 21 जन्मों का रिकॉर्ड।
6. 21 जन्मों का कौन-सा रिकॉर्ड तैयार हो रहा है?
उत्तर: सतयुगी राजधानी की श्रेष्ठ प्रालब्ध का रिकॉर्ड।
7. अकेले में भी हमें अपने कर्मों पर अटेन्शन क्यों रखना चाहिए?
उत्तर: क्योंकि हमें समझना है कि हम सृष्टि के सामने अपना पार्ट बजा रहे हैं।
8. सभी आत्माओं को किस फूल की उपमा दी गई है?
उत्तर: गुलाब के फूल की।
9. गुलाब की कौन-कौन सी क्वालिटी बताई गई है?
उत्तर: गुलाब, सदा गुलाब और रूहे गुलाब।
10. पहला नम्बर किस फूल का है?
उत्तर: रूहे गुलाब का।
11. रूहे गुलाब की मुख्य निशानी क्या है?
उत्तर: वह रूहानी स्थिति में रहता है और रूहानी बाप के सदा नज़दीक रहता है।
12. ज्ञान और योग के साथ कौन-सी विशेष विद्या सीखनी है?
उत्तर: आत्माओं को परखने की ज्योतिष विद्या।
13. किसी आत्मा को परखते समय किन बातों को देखना चाहिए?
उत्तर: उसकी वृत्ति, दृष्टि, वर्तमान स्थिति, संस्कार और भविष्य की प्रालब्ध बनाने की क्षमता को।
14. सामने आने वाली आत्माओं को किस प्रकार परखने का अभ्यास चाहिए?
उत्तर: उनके पास्ट, वर्तमान और भविष्य को ज्ञान-योग की दृष्टि से समझने का अभ्यास चाहिए।
15. अशुद्ध आत्माओं से बचने के लिए किस शक्ति का प्रयोग करना है?
उत्तर: योग की अग्नि का।
16. हर कर्मेन्द्रिय को किसमें तपाना है?
उत्तर: योगाग्नि में।
17. प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए अपने में क्या धारण करना है?
उत्तर: ईश्वरीय शक्ति।
18. किस समय स्नेहमूर्त और किस समय शक्तिरूप बनना है?
उत्तर: दैवी परिवार के प्रति स्नेहमूर्त और आसुरी प्रवृत्तियों तथा कठिन परिस्थितियों के सामने शक्तिरूप बनना है।
19. कलियुगी पहाड़ को समाप्त करने के लिए किसकी आवश्यकता है?
उत्तर: सभी शक्तियों की अंगुली के सहयोग की।
20. इस मुरली का मुख्य पुरुषार्थ क्या है?
उत्तर: एवररेडी और आलराउन्ड बनकर, रूहे गुलाब की रूहानी स्थिति धारण करना, ज्ञान-योग के ज्योतिषी बनना और शक्तिरूप में स्थित होकर विश्व परिवर्तन के कार्य में सहयोग देना।
रूहानी ज्ञान योग, ब्रह्माकुमारी मुरली, अव्यक्त मुरली, 18-05-1969 मुरली, ज्ञान योग के ज्योतिषी, रूहे गुलाब, शक्तिरूप, योगाग्नि, बापदादा, ब्रह्माकुमारी, राजयोग, आत्मिक ज्ञान, विश्व परिवर्तन, ओम शांति, मुरली ज्ञान, Brahma Kumaris, BapDada, Avyakt Murli, Rajyoga, Spiritual Knowledge, Om Shanti,Spiritual Knowledge Yoga, Brahma Kumari Murli, Avyakt Murli, 18-05-1969 Murli, Astrologer of Gyan Yoga, Ruhe Gulab, Shaktirup, Yogagni, BapDada, Brahma Kumari, Rajyoga, Spiritual Knowledge, World Transformation, Om Shanti, Murli Gyan, Brahma Kumaris, BapDada, Avyakt Murli, Rajyoga, Spiritual Knowledge, Om Shanti,
