(20)-श्री कृष्ण के असली माता-पिता कौन?
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श्री कृष्ण के असली माता-पिता कौन?
श्री कृष्ण के असली माता-पिता कौन?
कौन है श्री कृष्ण के असली माता-पिता?
सच्चाई वर्सेस कहानी।
एक तो हमारे पास दुनिया में कहानियां उपलब्ध है
और एक सच्चाई है तो क्या है?
इस सच्चाई को आज हम समझने का प्रयास करेंगे।
नंद यशोदा
वर्सेस
मुरली का रहस्य
आज तक हम समझते आए कि नंद यशोदा जो है वह कृष्ण के पालना के निमित्त बनते हैं।
वे पालना करते हैं और वासुदेव देवकी जन्म देने के निमित्त बनते हैं।
अब सच्चाई क्या है?
इस सच्चाई को हम समझने का प्रयास करेंगे। यह जो कहानी है उसमें कितनी सच्चाई है और कितना उसको हम मानें, यह हमारा आज का चर्चा का विषय रहेगा।
श्री कृष्ण के असली माता-पिता कौन है?
अच्छा आप यह कहते हो यह नहीं है तो दूसरे कौन है? पर वो क्यों है, कैसे हैं? उसका भी लॉजिक चाहिए। सच समझ में आए तब तो मानेंगे ना।
क्या सच में श्री कृष्ण के माता-पिता नंद यशोदा थे?
चर्चा का विषय — क्या सच में कृष्ण के माता-पिता नंद यशोदा थे?
या सिर्फ एक कहानी है।
जिसके पीछे छिपा है एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य।
जिसके पीछे छिपा हुआ है एक आध्यात्मिक गहरा रहस्य।
क्योंकि आज तक हम जो समझते आए, जो हम देखते आए, जो हम सुनते आए कि वासुदेव और देवकी ने जन्म दिया।
पालना की, गुरु संदीपनी के पास पढ़ने के लिए गए।
और मां देवकी ने जन्म दिया और यशोदा ने पालना किया। आज तक हम ऐसा समझते आए हैं।
और दूसरी हमारे पास कहानी आती है कि कृष्ण पीपल के पत्ते पर अंगूठा चूसता हुआ आया।
कहां से आया? फिर कहां चला गया? पता ही नहीं।
इन सब रहस्यों को समझने का प्रयास करेंगे।
अगर आज की बात समझ आ गई तो आपका कृष्ण को देखने का नजरिया बदल जाएगा।
कृष्ण को देखने का नजरिया ही आपका बदल जाएगा।
डिस्क्लेमर:
यह समझ ब्रह्माकुमारीज़ की मुरलियों पर आधारित है। उद्देश्य किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना नहीं बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक व्याख्या को सामने लाना है।
कॉमन बिलीफ — सामान्यतः लोगों की धारणा क्या है?
हमने बचपन से सुना कृष्ण का जन्म देवकी और वासुदेव से हुआ और पालन-पोषण हुआ यशोदा और नंद के घर में।
यह कहानी हम सब ने सुनी है। इसे ही सत्य मान लिया है। और इसे ही हमने सच भी स्वीकार कर लिया है।
किसी को कहो कि यह झूठ है, वो मानने के लिए भी तैयार नहीं होगा।
लेकिन एक सवाल है — क्या यह ऐतिहासिक घटना है?
क्योंकि जो हम पढ़ रहे हैं वह हम एक इतिहास के रूप में पढ़ रहे हैं।
आज जरा विचार करो। अपने अंदर बैठकर सोचो।
क्या यह ऐतिहासिक घटना है
या फिर एक प्रतीकात्मक, सिंबॉलिक कथा है?
श्री कृष्ण का जन्म सृष्टि के आदि में होगा
या द्वापर युग में सृष्टि के बीच में होगा?
जब सृष्टि का आरंभ होगा तब श्री कृष्ण का जन्म होगा या द्वापर में होगा?
इस बात को समझने के लिए हमें ध्यान से समझना है कि सृष्टि के आदि और मध्य का क्या मतलब है।
सृष्टि का जो चक्र है, वह 5000 साल का है।
5000 साल बाद हूबहू सृष्टि का चक्र चलता रहता है।
यह है हमारा सृष्टि का चक्र — सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अनुसार सतयुग के आदि में कृष्ण का जन्म होता है।
जब धरती 100% प्योर होती है।
33 करोड़ देवी-देवताओं में कृष्ण ही एक ऐसी आत्मा है जो 100% प्योर, 16 कला संपूर्ण है।
16 कला संपूर्ण का मतलब है 100% प्योर।
33 करोड़ देवी-देवताओं में से और किसी देवी-देवता को 100% प्योर कहा जाता हो तो मुझे बताओ।
कमेंट में लिखो।
33 करोड़ देवी-देवताओं में और किसी भी देवी या देवता को 16 कला संपूर्ण नहीं कहा जाता।
एक कृष्ण ही है।
राधा भी दूसरे नंबर पर आती है।
तो जो 100% प्योर है, वह 100% प्योर स्वर्ग में आएगा।
त्रेता 14 कला है।
द्वापर में कलाएं आठ हैं।
16 कला संपूर्ण क्या आठ कला वाले युग में आएगा?
यह आपको विचार करना है।
क्योंकि कृष्ण को इतिहास के हिसाब से, कहानी के हिसाब से द्वापर में दिखाया गया।
दूसरा प्रश्न खड़ा होता है।
श्री कृष्ण का जन्म स्वर्णिम दुनिया लाएगा
या कलयुग लाएगा?
अब श्री कृष्ण सतयुग के आदि में आता है तो स्वर्ग आएगा।
यदि श्री कृष्ण द्वापर के अंत में आए और उसके बाद घोर कलयुग शुरू हो जाए तो आठ कला भी नहीं रही।
अब उसके बाद गीता का ज्ञान सुनाने के बाद सारी दुनिया का विनाश कराने के बाद कौरव भी गए, पांडव भी गए, यादव भी गए और घोर कलयुग शुरू किया।
फिर भगवान के आने का फायदा क्या हुआ?
फिर गीता में लिखा गया —
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…”
जब-जब धर्म की ग्लानि होती है तब मैं अवतरित होता हूं।
अब धर्म की ग्लानि द्वापर में होगी या कलयुग के अंत में होगी?
घोर अति ग्लानि कलयुग के अंत में होगी, जो समय अब हम देख रहे हैं।
चारों तरफ पाप और भ्रष्टाचार अति पर है।
ऐसे समय में कृष्ण का जन्म होता है और जिसके बाद स्वर्णिम दुनिया सतयुग आता है।
बाकी आपकी मर्जी है, आपका विचार है।
ब्रह्माकुमारी के अनुसार परमात्मा आकर परमधाम से यह सत्य हमें समझा रहे हैं।
मुरली पर्सपेक्टिव में क्या है?
मुरली कोई किताब नहीं, किसी गुरु-संत-महात्मा के द्वारा लिखे हुए वाक्य नहीं।
यह तो परमपिता परमात्मा द्वारा सुनाया गया ज्ञान है।
मुरली में बार-बार संकेत मिलता है:
नई सृष्टि अचानक नहीं बनती।
पहले आत्माएं तैयार होती हैं।
संगम युग पर जब दुनिया अति पतित हो जाती है, तमोप्रधान हो जाती है, तब परमात्मा आकर पतित दुनिया में नई दुनिया की कलम लगाते हैं।
नई दुनिया को आरंभ करने का पहला पत्ता कृष्ण है।
पतित दुनिया से पावन बनने वाली दुनिया का पहला पत्ता कृष्ण है।
यह बहुत ध्यान से समझना है।
श्री कृष्ण पहला पत्ता है।
यह सृष्टि का झाड़ है।
सतयुग में कृष्ण होता है। वही 84 जन्म लेते-लेते अंत में तमोप्रधान बन जाता है।
तब परमात्मा आकर ज्ञान देकर उसे कमल फूल समान पवित्र बनाते हैं।
जब कृष्ण की आत्मा कमल फूल समान पवित्र बन जाती है, तब सतयुग के आदि के लिए कृष्ण का जन्म होता है।
सतयुग का प्रथम राजकुमार।
जिसका हमारे शास्त्रों में वर्णन है कि श्री कृष्ण पीपल के पत्ते पर अंगूठा चूसता हुआ आया।
क्योंकि कलयुग के बाद ऑटोमेटिक सतयुग आना है।
सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलयुग — ये चारों युग लगातार चलते रहते हैं।
श्री कृष्ण की आत्मा प्रथम 100% प्योर बनने वाली है।
उसका जन्म कलयुग के जेल में होता है।
कंस के राज्य में होता है।
आज चारों तरफ रावण राज्य, कंस राज्य है।
ऐसे समय में नर्क के अंत में कृष्ण का जन्म होता है, जो सतयुग का प्रथम राजा बनता है।
कलयुगी दुनिया का अंत होता है।
आसुरी दुनिया का अंत होता है।
तब कृष्ण का जन्म प्रत्यक्ष होता है।
सतयुग में नारायण के रूप में कृष्ण राजा बनता है।
कृष्ण बच्चा है, संगम पर राजा नहीं बनता।
राजा बनता है सतयुग का प्रथम राजा नारायण के रूप में।
इसीलिए राधा-कृष्ण ही लक्ष्मी-नारायण बनते हैं।
पवित्र आत्माएं उनको जन्म देने के निमित्त बनती हैं।
फिर नई दुनिया शुरू होती है।
रियल एक्सप्लेनेशन:
इस दृष्टिकोण में श्री कृष्ण के माता-पिता कोई specific historical character नहीं।
बल्कि उच्च कोटि की पवित्र आत्माएं संगम युग में पुरुषार्थ करती हैं, योगबल से पवित्र बनती हैं और नई सृष्टि की शुरुआत में गर्भ महल तैयार करती हैं।
जिसके द्वारा कृष्ण का जन्म होता है।
चारों तरफ आसुरी दुनिया में पवित्र आत्माओं के द्वारा जन्म दिया जाता है।
और ईश्वरीय सेवा के द्वारा सारे विश्व को पवित्र बनाने में सहयोगी बनते हैं।
कोर मैसेज:
मुरली हमें यह नहीं सिखाती कि कौन सा नाम सही है।
बल्कि यह सिखाती है — कौन सी आत्मा किस अवस्था में है।
कहानी बदल सकती है,
लेकिन आत्मा का सत्य नहीं बदलता।
फाइनल कंक्लूजन:
मुरली के अनुसार श्री कृष्ण के माता-पिता कोई विशेष नाम नहीं, बल्कि वे पवित्र आत्माएं हैं जो संगम युग में तैयार होकर नई सृष्टि की शुरुआत करती हैं।
अब खुद से पूछो:
क्या मैं भी उस नई दुनिया के लिए तैयार हो रहा हूं?
क्या मैं भी अपनी आत्मा को पवित्र बना रहा हूं?
परमात्मा परमधाम से आकर पढ़ा रहे हैं।
नई सृष्टि कृष्ण से ही शुरू होती है।
सृष्टि का पहला पत्ता कृष्ण बनता है।
आज तक हम नहीं जानते थे कि वह पहला पत्ता कहां से आता है।
अब परमात्मा ने आकर समझाया।

