प्रश्न का मन्थन- क्या जन्म और मृत्यु एक साथ होते हैं?
जन्म
और मृत्यु
एक साथ होते हैं।
क्या जन्म और मृत्यु एक साथ होते हैं?
मृत्यु और जन्म। हर सेकंड
जीवन का रहस्य खुल गया।
जन्म और मृत्यु एक साथ होते हैं।
क्या जन्म और मृत्यु एक साथ होते हैं? हर
सेकंड जीवन का रहस्य खुल गया। डिस्क्लेमर
है। यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी
ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शिक्षाओं पर
आधारित है। आध्यात्मिक ज्ञान को सरल
आध्यात्मिक ज्ञान को सरल भाषा में समझाने
हेतु बनाया गया है। यह किसी भी धर्म
संप्रदाय या व्यक्ति की आलोचना हेतु नहीं।
इसमें प्रस्तुत विचार आध्यात्मिक
अध्ययन एवं अनुभूति पर आधारित है। अधिक
जानकारी के लिए अपने नजदीकी ब्रह्मा
कुमारी केंद्र से संपर्क करें।
क्या जन्म और मृत्यु वास्तव में एक ही समय
पर होते हैं?
हर क्षण अंत और आरंभ का रहस्य। हर क्षण
अंत और आरंभ का रहस्य। आज का विषय बहुत ही
गहरा और चौंकाने वाला है। आज का जो रहस्य
है वह एक बहुत ही गहरा और चौंकाने वाला
है। हम बचपन से सुनते आए हैं जन्म अलग है
और मृत्यु अलग है। पढ़ते थे गीता में के
जन्म के बाद मृत्यु और मृत्यु के बाद जन्म
होता है।
लेकिन क्या यह पूरी सच्चाई है या इसके
पीछे कोई और ही गहरा राज छिपा हुआ है?
आज का मुख्य प्रश्न है क्या जन्म और
मृत्यु वास्तव में एक ही समय पर होते हैं
और कैसे?
हर क्षण अंत और आरंभ साथ चल रहा है। हर
क्षण अंत भी और आरंभ भी साथ चल रहे हैं।
जन्म और मृत्यु की सामान्य समझ। जन्म और
मृत्यु की सामान्य समझ क्या है? दुनिया
क्या मानती है? बच्चा पैदा हुआ जन्म।
व्यक्ति मर गया मृत्यु।
यह दुनिया मानती है।
यानी दोनों अलग-अलग घटनाएं हैं।
उदाहरण जन्म शुरुआत और मृत्यु अंत।
लेकिन क्या जीवन इतना सरल है?
क्या जीवन इतना सरल है?
मुरली का गहरा संकेत। मुरली संदर्भ हर पल
जन्म और मृत्यु साथ-साथ हो रही है।
इसका अर्थ जो खत्म हो रहा है मृत्यु।
जो शुरू हो रहा है जन्म।
जो खत्म हो रहा है मृत्यु, जो शुरू हो रहा
है जन्म। और हम यह भी अच्छी तरह से जानते
हैं कि आत्मा।
आत्मा क्या करती है? जब शरीर में प्रवेश
करती है तो जन्म।
आत्मा
जब शरीर को छोड़ती है तो मृत्यु।
आत्मा तो अजर अमर अविनाशी है। आत्मा यहां
पर इस संसार में
अपने आप एक शरीर को छोड़ना और दूसरे शरीर
को लेना। तो इधर से वह आत्मा शरीर को
छोड़ती है और दूसरी तरफ लेती है। दूसरी
तरफ लेती है। छोड़ना और लेना एक ही साथ
होता है।
जहां से आत्मा ने शरीर छोड़ा और उधर मां
के गर्भ में आत्मा ने प्रवेश किया।
इसीलिए सबसे बड़ी जो हम बात समझते थे जब
बच्चा मां के गर्भ से बाहर आता था, रोना
शुरू करता था तब जन्म समझते थे। अब
परमात्मा ने समझाया कि आत्मा
जब गर्भ में प्रवेश करती है और भ्रूण में
जब आत्मा प्रवेश करती है तो उसमें मूवमेंट
शुरू होता है। हलचल शुरू होती है। उसकी
धड़कन शुरू होती है।
दोनों अलग नहीं, एक ही प्रक्रिया के दो
पहलू हैं। हर क्षण अंत और आरंभ कैसे?
समझने के लिए एक सरल नियम: जहां अंत है
वहीं आरंभ है।
जहां अंत है वहीं आरंभ है। यह बात आपको
समझना है।
उदाहरण: एक विचार (थॉट लेवल)। एक विचार खत्म
होता है तो तुरंत दूसरा विचार शुरू हो
जाता है। एक विचार खत्म होता है। दूसरा
विचार क्या हो जाता है? शुरू होता है।
पुराने विचार की मृत्यु और नए विचार का
जन्म।
उदाहरण: सांस (ब्रीथिंग)। एक सांस बाहर गई।
दूसरी अंदर आई।
अब आप सांस को रोक सकते हैं। कह देंगे कि
हमने सांस को रोक रखा है। अब रोकना आपका
काम है। आप उसे ब्रेक लगा रहे हैं। रोक
रहे हैं। वह एक अलग बात है। आप नहीं रोकते
हैं। ऑटोमेटिक सांस अंदर आएगी। यह बात
बहुत अच्छी तरह से ध्यान रखना है कि सारा
दिन हम सांस लेते रहते हैं। सांस आती है।
अब कोई योगा कर रहा है। अपने सांस को रोक
रहा है। उसकी कैपेसिटी बढ़ा रहा है। अपनी
शक्ति को बढ़ा रहा है। वो एक अलग बात है।
नियम अनुसार यह है कि सांस बाहर गई तो
वापस अंदर जाना शुरू। अंदर गई तो वापस आना
शुरू।
एक का अंत दूसरे का आरंभ। यह प्रक्रिया हर
सेकंड चल रही है। नॉनस्टॉप हर सेकंड चल
रही है। संस्कार स्तर पर जन्म और मृत्यु।
संस्कार स्तर पर जन्म और मृत्यु। असली खेल
यहीं है। मुरली सार: हर एक्ट में जन्म और
मृत्यु दोनों हैं। हर एक्ट में कोई भी कर्म
है। कोई भी एक्ट माना कर्म।
कर्म के साथ जन्म भी है और मृत्यु भी है।
जैसे हमने इसको कई बार देखा है। आज हम
इसको फिर से भी देख सकते हैं कि इसके अंदर
यह जो बॉल है, यह आकर हिट कर रही है। यह
बॉल आकर हिट कर रही है। हिट जब कर रही है,
वह हिट कर रही है। जब वह हिट कर रही है
दूसरी को हिट हो रहा है।
मतलब हिट करना क्रिया और दूसरा कर्म। ठीक
है? नहीं तो जिसके आधार पर हिट कर रही है
तो हिट करने से ही दूसरे को हिट हो रहा
है। दोनों एक साथ हैं। अलग-अलग नहीं।
यह बात हमें बहुत अच्छी तरह से समझनी है।
उदाहरण
पहले गुस्सा आया।
उसने उसे रोक लिया।
गुस्से की मृत्यु।
गुस्सा आया किसी को परंतु उसने गुस्से को रोक
लिया तो क्या हुआ?
गुस्से की डेथ हुई। अब गुस्से की डेथ हुई
तो क्या हुआ? शांति का जन्म हुआ।
शांति का जन्म हुआ।
यही आंतरिक जन्म और मृत्यु है।
कर्म और जन्म
मृत्यु का संबंध। कर्म और जन्म मृत्यु का
संबंध।
हर कर्म क्या करता है? हर कर्म।
हर समय
क्या हो रहा है? पुराना हिसाब खत्म, नया
हिसाब शुरू।
हर एक्ट पिछला बराबर, नया शुरू। हर एक्ट।
मुरली: हर कर्म अंत भी है और आरंभ भी।
एक का अंत तो दूसरे का आरंभ।
एक ने अपना कर्म किया।
वह क्रिया हो गई और दूसरे के साथ जो कर्म
हो गया अब वो करेगी, कब करेगी वो उसका पाठ।
आपने किसी को दुख दिया।
पुराने हिसाब का अंत और नए दुख का बीज
बोया गया।
यानी एक ही कर्म
जन्म प्लस मृत्यु।
जन्म प्लस मृत्यु।
इस शरीर से
आत्मा निकली और दूसरे शरीर में प्रवेश
किया। नो डिले।
जीरो टाइम, जीरो डिले।
उसी समय निकलते के साथ वो दूसरे गर्भ में
प्रवेश करती है, चाहे वो करोड़ों मील दूर
बैठी हो।
क्यों हमें यह दिखाई नहीं देता?
क्योंकि हम केवल शरीर देखते हैं। सूक्ष्म
प्रक्रिया नहीं।
उदाहरण के लिए जैसे फिल्म चलती है।
हम कंटीन्यूस देखते हैं, हमें कंटीन्यूस दिखती
है। लेकिन वे फ्रेम बाय फ्रेम होती है।
फिल्म की बात समझ में आई है? फ्रेम बाय
फ्रेम की बात किसी को समझ में आई है तो
बताओ।
हां जी, नहीं समझ में आई।
नहीं समझ में आई।
आपने तारे ज़मीन पर फिल्म देखी है?
नहीं देखी।
चलो नहीं देखी। देखिए, देखिए।
देखिए ठीक है, उसके अंदर आपने देखा कि
बच्चे ने डायरी पर रोजाना एक पिक्चर बनाता
था और वो पिक्चर जब वो टीचर आकर के उनके
पेरेंट्स को कहते ये बनाता था। उसने ऐसे
उसके पन्ने पलटे तो उससे पता लगा कि वह
कैसे दूर होता जा रहा है।
मतलब कितनी उसकी समझ थी। टीचर ने उसको
पहचाना कि ये कमाल का जीनियस बच्चा है।
इतना छोटा बच्चा जो स्कूल में जब एडमिशन
करा दिया तो उसने उसके जो पिक्चर बनाई कि
धीरे-धीरे बच्चा दूर होता जा रहा है।
पढ़ने के साथ इसको एक्चुअल में
आप समझ सकेंगे।
आपने यदि वह देखा हो कभी फिल्म का दौर
था। आप में से भी सबने लगभग देखा होगा कि
एक रोल होता था।
एक रोल होता था डब्बे के अंदर और उस रोल
को चलाया जाता था। एक चरखी से चलाया जाता
था और दूसरी चरखी पर वो लिपटता जाता था।
देखा है आपने? आप में से किसी ने ना देखा
हो तो बताओ।
देखा है भाई।
आपने देखा है। किसने नहीं देखा? वह बताओ।
मैं फिर और एग्जांपल दूंगा उसको ना।
मैंने नहीं देखा भाई।
नहीं देखा। बहुत अच्छी बात है।
तो मैं आपको और आगे और पीछे ले चलता हूं।
पहली बार आपने कैमरा तो देखा ही है।
जो फोटो खींचने वाला कैमरा है।
तो पहली बार क्योंकि
पहले जो कैमरा बनाया गया था सिर्फ एक फोटो
ही खींचता था।
दूसरा फोटो खींचने के लिए दोबारा से उसको
करना पड़ेगा। पहले उसको ढकना लगाया जाता
था। फिर उसके बाद शटर आ गया।
पर जो लेंस था, लेंस के आगे से जब हम छोटे
बच्चे थे तो हम स्कूल में जब स्कूल का फोटो
खींचने के लिए आए थे तो वो उसका आगे का
ढकना हटा के गिनती गिनता था।
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 और
फिर ढकना लगा देता था।
मतलब इतनी देर तक ढकना खुला रहता था।
लेंस बहुत स्लो स्पीड का होता था और वह
हमारा फोटो बनाता था।
इस प्रकार से फोटो वो हाथ के हाथ ही तैयार
करके भी देता था। एक ही फोटो बनता था।
तो जब पहली फिल्म बनानी थी, पहली फिल्म जो
बनाई थी, वह कैसे बनाई थी? उसने यह ढकने
को हटाया और उसने क्या किया कि जल्दी-जल्दी
एक फोटो खींचा, दूसरा खींचा, तीसरा खींचा,
चौथा खींचा, पांचवा खींचा, सातवां, आठवां।
तो उसके अंदर जो रोल था वो इस प्रकार से
फोटो खींचे।
फिर उस रोल को लाकर उसने लाइट के आगे
बड़ी तेजी से चलाया।
तो ट्रेन का खींचा था, तो ट्रेन ऐसे लग रही
थी जैसे चल रही हो।
मतलब उसके अंदर तेजी से चलाने से वो चलती
हुई ट्रेन दिखाई दी।
पहली जो फिल्म कही जाती है वह चलती ट्रेन
कहा जाता है।
वह एक रील थी, उस रील में जितने भी फोटो
खींचे जा सकते थे उसने फोटो खींचे।
और उनको उसने हाथ से ही लाइट के आगे ऊपर
से नीचे खींचा।
और वो ऐसे लगा सामने पर्दे पर जैसे कि रेल
चल रही हो।
क्योंकि एक साथ ढेर सारे फोटो थे।
हर उस पर जो है ना वो थोड़ा-थोड़ा आगे
होती जा रही थी।
तो इसी प्रकार जब फिल्म बनी, जब पहली
फिल्में बनती थी तो पहले एक रील होती थी
बहुत लंबी।
और हर मतलब आप सोचिए कि एक बार हाथ ऐसे
हुआ, अगली बार ऐसे हुआ, अगली बार ऐसे हुआ।
तो वो फिल्म हटती जाती है और नई बनती जाती है।
तो इसको बोलते हैं फ्रेम।
इसे कहते हैं फ्रेम।
वो सेकंड का 1/8 हिस्सा जो रहता है ना
उसमें अगर चेंज करेंगे तो हमको लगता है कि
वो फिल्म चल रही है।
तो मतलब बहुत तेज स्पीड से उसको घुमाया
जाता है।
और जिसके कारण सारे एक्टर एक्टिंग करते
हुए दिखाई देते हैं।
वैसे ही जीवन हर सेकंड बदल रहा है लेकिन
हमें कंटीन्यूस लगता है।
क्या यह मृत्यु का डर खत्म कर सकता है?
बिल्कुल। क्योंकि मृत्यु अंत नहीं बल्कि परिवर्तन है।
आरंभ है नए जीवन का।
आत्मा परमधाम से आ गई है।
वह अमर है। उसने केवल ड्रेस चेंज करनी है।
कुछ भी परिवर्तन नहीं होता, बस ड्रेस चेंज
की तो ड्रामा दिखाई देता है।
जैसे आप ध्यान से देखें रात जिस सेकंड खत्म
हो रही है, सुबह शुरू है।
रात का अंत और सुबह की शुरुआत।
क्या रात मर गई या दिन पैदा हो गया?
रात मरी नहीं, दिन जन्मा नहीं। केवल
परिवर्तन हुआ है।
दोनों साथ हुए। अंतिम समय क्या होता है?
अंतिम क्षण: पुरानी स्थिति खत्म, नई अवस्था
शुरू।
आत्मा ने इधर शरीर छोड़ा, उसी सेकंड मां के
गर्भ में प्रवेश किया।
मुरली संकेत: एक सेकंड में परिवर्तन होता
है। बाबा मुरली में कहते हैं एक सेकंड का
ज्ञान है। जिसको समझ में आ गया तो एक
सेकंड में उसका जीवन परिवर्तन हो जाता है।
उसी क्षण तस्वीर कैप्चर।
वही अंतिम जन्म और मृत्यु का क्षण है।
जीवन में इसका उपयोग कैसे करें?
हम इसको कैसे अप्लाई करें?
हर स्थिति में याद रखें।
यह भी खत्म होगा। कुछ नया शुरू होगा।
हर पल खत्म भी हो रहा है और शुरू भी हो
रहा है।
हमारी गति भी इसी बात को दिखाती है।
और यह यूनिवर्सल लॉ है कि
change is the unchangeable law of nature.
प्रकृति का एक ऐसा नियम जो कभी बदलता नहीं
कि हर समय सब कुछ बदल रहा है।
उदाहरण: दुख आया तो क्या गया?
सुख चला गया।
सुख आया तो दुख चला गया।
सोचें यह अंत है। अब नया आरंभ आएगा।
तुरंत हल्कापन, स्वीकार्यता।
हल्कापन होगा यदि आप तुरंत उसको स्वीकार
कर लेते।
नंबर 10 पुरुषार्थ का रहस्य।
अगर हर पल जन्म और मृत्यु हो रही है
तो हम क्या कर सकते हैं?
हर पल नया जन्म लें।
हर पल पुराना छोड़ें।
हर पल नया जन्म लें, हर पल पुराना छोड़ें।
उदाहरण: आज से गुस्सा खत्म, तो क्या शुरू
हो जाएगी? शांति शुरू।
यह है जीवित अवस्था में पुनर्जन्म।
पावरफुल कंक्लूजन।
जन्म और मृत्यु दो अलग चीजें नहीं हैं।
वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
याद रखो हर पल अंत।
हर पल आरंभ।
हर पल अंत है और हर पल आरंभ है।
यही है जीवन का सच्चा रहस्य।
फाइनल टेकअवे।
अब से
हर स्थिति का अंत मत समझो।
हर स्थिति का अंत समझो, उसे नया आरंभ
समझो।
क्योंकि
जहां कुछ खत्म होता है वहीं से नया जीवन
शुरू होता है।
अगर आपको यह ज्ञान अच्छा लगा
लाइक करें, सब्सक्राइब करें, शेयर करें और
कमेंट में लिखें — मैं हर पल
नया जन्म ले रहा।


