S.Y.(10)क्या वैज्ञानिक बंकर और सुरक्षा महल बनाते हैं?
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
भूमिका: संगम युग — नई दुनिया की नींव
संगम युग कोई सामान्य समय नहीं है। यह वह अति‑विशेष काल है जहाँ पुरानी दुनिया समाप्ति की ओर और नई दुनिया सृजन की ओर अग्रसर होती है।
आज हम इस श्रृंखला के दसवें विषय में यह समझेंगे कि:
- संगम युग क्या है?
- वैज्ञानिक बंकर और सुरक्षा महल क्यों बनाए जा रहे हैं?
- यह डर है या ड्रामा अनुसार भविष्य की तैयारी?
ब्रह्माकुमारी ज्ञान कहता है — संगम युग ही नई दुनिया की नींव है।
अध्याय 1️⃣ — समय उचित है
समय के अनुसार जो उचित है, वही सामने आता है। आज एक चौंकाने वाला प्रश्न पूरी दुनिया में गूंज रहा है:
- भूमिगत परमाणु सुरक्षा बंकर
- रेडिएशन‑प्रूफ शहर
- इमरजेंसी सर्वाइवल प्लान
- सीमित लोगों के लिए सुरक्षा महल
जब सबको बचाया नहीं जा सकता, तो सोच बदलती है:
“हम सबको सुरक्षित नहीं कर सकते, पर स्वयं को तो बचा लें।”
प्रश्न
क्या यह सब डर के कारण हो रहा है या ड्रामा अनुसार भविष्य की तैयारी है?
उत्तर
मनुष्य डर से करता है,
लेकिन ड्रामा भविष्य की तैयारी कराता है।
अध्याय 2️⃣ — मनुष्य निमित्त है, कराने वाला बाबा
ब्रह्माकुमारी ज्ञान स्पष्ट करता है:
- मनुष्य आत्मा निमित्त है
- कराने वाला परमात्मा है
मुरली संकेत
बाबा कहते हैं:
“मेरे ऊपर मुसीबत मत डालो, मैं अपने बच्चों को क्यों मारूँगा?”
ड्रामा बना‑बनाया है, पर:
- समय
- प्रकृति
- आत्माएँ
- और परमात्मा
इन चारों की संयुक्त भूमिका से यह महान विश्व ड्रामा चलता है।
हर कल्प परमात्मा आकर:
- कर्म की सही विधि सिखाते हैं
- जिससे नई दुनिया की क्रांति संभव होती है
अध्याय 3️⃣ — ड्रामा का मूल नियम
मूल नियम
ड्रामा में कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता।
ड्रामा इतना एक्यूरेट है कि:
- एक सेकंड भी व्यर्थ नहीं होता
- हर घटना के पीछे निश्चित कारण होता है
चाहे:
- वैज्ञानिक खोज हो
- युद्ध की तैयारी हो
सब पहले से फिक्स दृश्य हैं।
अध्याय 4️⃣ — विज्ञान करता नहीं, विज्ञान साधन है
मुरली 21 मार्च 1970
“विज्ञान मनुष्य का सहायक है, मालिक नहीं।”
विज्ञान:
- साधन है
- इंस्ट्रूमेंट है
कौन बचेगा? क्या बचेगा?
यह विज्ञान तय नहीं करता, ड्रामा तय करता है।
मुरली 18 जनवरी 1969
“मनुष्य डर से करता है, लेकिन ड्रामा भविष्य का काम करा लेता है।”
अध्याय 5️⃣ — प्रकृति से सीख: उदाहरण
- चींटी बारिश से पहले स्थान बदलती है
- पक्षी मौसम बदलने से पहले उड़ जाते हैं
उन्हें कारण नहीं पता, पर प्रकृति संचालन कर रही होती है।
उसी प्रकार:
- वैज्ञानिक सोचते हैं कि वे स्वयं को बचा रहे हैं
- पर ड्रामा उनसे नई दुनिया की व्यवस्था करा रहा है
अध्याय 6️⃣ — बंकर और सुरक्षा महल क्यों?
मुरली 5 दिसंबर 1966
“जो काम आने वाला है, उसकी व्यवस्था पहले से होती है।”
नई दुनिया के लिए चाहिए:
- कुछ स्थान
- कुछ शरीर
- कुछ संरचनाएँ
- कुछ संसाधन
इसलिए:
- अत्यंत सुरक्षित निर्माण
- पृथ्वी के भीतर
- दूरस्थ क्षेत्रों में
क्या बनाने वालों को पता है?
नहीं।
निमित्त आत्माएँ स्वयं नहीं जानतीं कि वे किस महान सेवा में लगी हैं।
ड्रामा समझता है:
यह बीजों की रक्षा है।
बीज = इस समय के शरीर
अध्याय 7️⃣ — विज्ञान की सीमा, ड्रामा की सत्ता
मुरली 9 सितंबर 1965
“मनुष्य बुद्धि सीमित है, ड्रामा अनंत है।”
विज्ञान:
- रेडिएशन माप सकता है
- दूरी बता सकता है
लेकिन:
- आत्मा की सुरक्षा
- भाग्य की सुरक्षा
यह विज्ञान नहीं जानता।
बाबा का वाक्य
“रक्षा स्थान से नहीं, स्थिति से होती है।”
इतिहास गवाह है:
- सुरक्षित स्थान पर भी विनाश
- असुरक्षित स्थान पर भी सुरक्षा
कारण:
- योग बल
- आत्मिक अवस्था
- ज्ञान का चयन
अध्याय 8️⃣ — संगम युग में हमारी वास्तविक तैयारी
मुरली 14 अप्रैल 1972
“देह की नहीं, आत्मा की सुरक्षा करो।”
यदि तैयारी केवल भौतिक है, तो ड्रामा का आधा ज्ञान है।
पूरी तैयारी:
- पवित्रता
- योग
- बाप की याद
निष्कर्ष
क्या वैज्ञानिक प्रयास ड्रामा की तैयारी हैं?
हाँ — लेकिन सीमित अर्थ में।
मुरली (1965)
“ड्रामा से बाहर कोई प्रयास सफल नहीं हो सकता।”
- विज्ञान साधन देता है
- ड्रामा चयन करता है
अंतिम संदेश
दुनिया तैयारी कर रही है,
तो हम भी तैयारी करें —
बंकर के लिए नहीं
स्वर्ग के लिए
ड्रामा में वही सुरक्षित है, जो आत्मिक रूप से तैयार है।
शीर्षक
प्रश्न–उत्तर: संगम युग — नई दुनिया की नींव | ड्रामा, विज्ञान और आत्मिक तैयारी
भूमिका: संगम युग — नई दुनिया की नींव
प्रश्न 1️⃣: संगम युग क्या है?
उत्तर: संगम युग कोई सामान्य समय नहीं है। यह वह अति‑विशेष काल है जहाँ पुरानी दुनिया समाप्ति की ओर और नई दुनिया सृजन की ओर अग्रसर होती है। ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार संगम युग ही स्वर्ग रूपी नई दुनिया की नींव रखता है।
प्रश्न 2️⃣: संगम युग को नई दुनिया की नींव क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि इसी समय आत्माओं को ज्ञान, योग और पवित्रता के माध्यम से नई सृष्टि के योग्य बनाया जाता है। जैसे भवन की नींव मजबूत होती है, वैसे ही नई दुनिया की आत्मिक नींव संगम युग में पड़ती है।
अध्याय 1️⃣ — समय उचित है
प्रश्न 3️⃣: आज पूरी दुनिया में सुरक्षा बंकर और सर्वाइवल प्लान क्यों बन रहे हैं?
उत्तर: क्योंकि समय अनुसार वही सामने आता है जो होना निश्चित है। भूमिगत परमाणु बंकर, रेडिएशन‑प्रूफ शहर और सीमित लोगों के लिए सुरक्षा योजनाएँ इस बात का संकेत हैं कि विश्व अवचेतन रूप से बड़े परिवर्तन को महसूस कर रहा है।
प्रश्न 4️⃣: जब सबको बचाया नहीं जा सकता तो ऐसी योजनाओं का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: तब सोच बदल जाती है — “हम सबको सुरक्षित नहीं कर सकते, पर स्वयं को तो बचा लें।” यह मनुष्य की सीमित सोच है।
प्रश्न 5️⃣: क्या यह सब डर के कारण हो रहा है या ड्रामा अनुसार तैयारी है?
उत्तर: मनुष्य यह सब डर के कारण कर रहा है, लेकिन ड्रामा अनुसार यह भविष्य की तैयारी बन जाती है।
अध्याय 2️⃣ — मनुष्य निमित्त है, कराने वाला बाबा
प्रश्न 6️⃣: ब्रह्माकुमारी ज्ञान मनुष्य और परमात्मा की भूमिका कैसे बताता है?
उत्तर: ब्रह्माकुमारी ज्ञान स्पष्ट करता है कि मनुष्य आत्मा केवल निमित्त है, जबकि कराने वाला स्वयं परमात्मा है।
प्रश्न 7️⃣: क्या परमात्मा अपने बच्चों को कष्ट में डालते हैं?
उत्तर: नहीं। बाबा स्वयं कहते हैं —
“मेरे ऊपर मुसीबत मत डालो, मैं अपने बच्चों को क्यों मारूँगा?”
प्रश्न 8️⃣: विश्व ड्रामा किन तत्वों से मिलकर चलता है?
उत्तर: समय, प्रकृति, आत्माएँ और परमात्मा — इन चारों की संयुक्त भूमिका से यह महान विश्व ड्रामा चलता है।
अध्याय 3️⃣ — ड्रामा का मूल नियम
प्रश्न 9️⃣: ड्रामा का मूल नियम क्या है?
उत्तर: ड्रामा का मूल नियम है कि कोई भी कर्म व्यर्थ नहीं जाता।
प्रश्न 🔟: क्या ड्रामा में सब कुछ पहले से निश्चित है?
उत्तर: हाँ। ड्रामा इतना एक्यूरेट है कि एक‑एक सेकंड पहले से फिक्स है और हर घटना के पीछे निश्चित कारण है।
अध्याय 4️⃣ — विज्ञान करता नहीं, विज्ञान साधन है
प्रश्न 1️⃣1️⃣: विज्ञान की वास्तविक भूमिका क्या है?
उत्तर: मुरली 21 मार्च 1970 के अनुसार —
“विज्ञान मनुष्य का सहायक है, मालिक नहीं।”
विज्ञान केवल साधन और इंस्ट्रूमेंट है।
प्रश्न 1️⃣2️⃣: कौन बचेगा और क्या बचेगा — यह कौन तय करता है?
उत्तर: यह विज्ञान तय नहीं करता, यह ड्रामा तय करता है।
प्रश्न 1️⃣3️⃣: मुरली 18 जनवरी 1969 का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर:
“मनुष्य डर से करता है, लेकिन ड्रामा भविष्य का काम करा लेता है।”
अध्याय 5️⃣ — प्रकृति से सीख
प्रश्न 1️⃣4️⃣: प्रकृति हमें क्या संकेत देती है?
उत्तर: जैसे चींटी बारिश से पहले स्थान बदलती है और पक्षी मौसम बदलने से पहले उड़ जाते हैं, वैसे ही प्रकृति आने वाले परिवर्तन का संकेत पहले ही दे देती है।
प्रश्न 1️⃣5️⃣: वैज्ञानिक प्रयासों को ड्रामा कैसे देखता है?
उत्तर: वैज्ञानिक सोचते हैं कि वे स्वयं को बचा रहे हैं, लेकिन ड्रामा उनसे नई दुनिया की व्यवस्था करा रहा है।
अध्याय 6️⃣ — बंकर और सुरक्षा महल क्यों?
प्रश्न 1️⃣6️⃣: बंकर और अत्यंत सुरक्षित निर्माण क्यों हो रहे हैं?
उत्तर: मुरली 5 दिसंबर 1966 के अनुसार —
“जो काम आने वाला है, उसकी व्यवस्था पहले से होती है।”
प्रश्न 1️⃣7️⃣: नई दुनिया के लिए किन चीज़ों की आवश्यकता है?
उत्तर: नई दुनिया के लिए कुछ स्थान, कुछ शरीर, कुछ संरचनाएँ और कुछ संसाधन आवश्यक हैं।
प्रश्न 1️⃣8️⃣: क्या निर्माण करने वालों को पता है कि वे किसके लिए बना रहे हैं?
उत्तर: नहीं। निमित्त आत्माएँ स्वयं नहीं जानतीं कि वे किस महान सेवा में लगी हैं। ड्रामा इसे बीजों की रक्षा मानता है।
प्रश्न 1️⃣9️⃣: यहाँ ‘बीज’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इस समय के शरीर ही बीज हैं, क्योंकि बिना शरीर के नया जीवन आगे नहीं बढ़ सकता।
अध्याय 7️⃣ — विज्ञान की सीमा, ड्रामा की सत्ता
प्रश्न 2️⃣0️⃣: विज्ञान की सीमा क्या है?
उत्तर: मुरली 9 सितंबर 1965 के अनुसार —
“मनुष्य बुद्धि सीमित है, ड्रामा अनंत है।”
प्रश्न 2️⃣1️⃣: विज्ञान क्या नहीं जानता?
उत्तर: विज्ञान आत्मा की सुरक्षा और भाग्य की सुरक्षा नहीं जानता।
प्रश्न 2️⃣2️⃣: सच्ची सुरक्षा किससे होती है?
उत्तर: बाबा कहते हैं —
“रक्षा स्थान से नहीं, स्थिति से होती है।”
अध्याय 8️⃣ — संगम युग में वास्तविक तैयारी
प्रश्न 2️⃣3️⃣: संगम युग में सबसे बड़ी तैयारी क्या होनी चाहिए?
उत्तर: मुरली 14 अप्रैल 1972 के अनुसार —
“देह की नहीं, आत्मा की सुरक्षा करो।”
प्रश्न 2️⃣4️⃣: केवल भौतिक सुरक्षा क्यों पर्याप्त नहीं है?
उत्तर: क्योंकि इससे हम ड्रामा का केवल आधा ज्ञान समझते हैं। पूरी तैयारी आत्मिक होती है।
प्रश्न 2️⃣5️⃣: पूरी आत्मिक तैयारी के मुख्य आधार क्या हैं?
उत्तर: पवित्रता, योग और बाप की निरंतर याद।
निष्कर्ष
प्रश्न 2️⃣6️⃣: क्या वैज्ञानिक प्रयास ड्रामा की तैयारी हैं?
उत्तर: हाँ — लेकिन सीमित अर्थ में।
प्रश्न 2️⃣7️⃣: अंतिम सच्चाई क्या है?
उत्तर: मुरली (1965) कहती है —
“ड्रामा से बाहर कोई प्रयास सफल नहीं हो सकता।”
अंतिम संदेश:
दुनिया तैयारी कर रही है, तो हम भी तैयारी करें —
बंकर के लिए नहीं, स्वर्ग के लिए।
ड्रामा में वही सुरक्षित है, जो आत्मिक रूप से तैयार है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की मुरली शिक्षाओं, आध्यात्मिक ज्ञान एवं आत्मिक चिंतन पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार का भय पैदा करना नहीं है और न ही यह किसी वैज्ञानिक अनुसंधान, सैन्य नीति या राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी या भविष्यवाणी करता है।
इस वीडियो का उद्देश्य केवल विश्व ड्रामा के आध्यात्मिक नियमों को समझाना है। कृपया इसे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ही ग्रहण करें।
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