Who is poor and who is rich?

गरीब कौन और निवाज कौन?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय : गरीब कौन और निवाज कौन?

भूमिका : एक गहरा आध्यात्मिक प्रश्न

गरीब कौन और निवाज कौन?
यह प्रश्न सुनने में साधारण लगता है,
लेकिन मुरली के प्रकाश में यह प्रश्न
आत्मा, परमात्मा और उनके संबंध का
एक अत्यंत गूढ़ रहस्य खोल देता है।

इस अध्याय में हम समझेंगे—

  • गरीब निवाज बाबा कौन हैं?

  • ब्रह्मा बाबा या शिव बाबा — गरीब निवाज कौन?

  • सबसे पहला गुप्त राज कौन-सा है जो दुनिया को बताना है?

बापदादा का यह रहस्य
सिर्फ ज्ञान नहीं,
जीवन परिवर्तन की चाबी है।


अध्याय 1 : गरीब निवाज बाबा कौन है?

सबसे पहला प्रश्न यही उठता है—

गरीब निवाज बाबा कौन है?
क्या ब्रह्मा बाबा?
या शिव बाबा?

मुरली स्पष्ट करती है कि—

बाप और दादा दोनों का गुप्त रहस्य है यह।

ब्रह्मा बाबा माध्यम हैं,
लेकिन गरीब निवाज
स्वयं शिव बाबा हैं —
जो पतित आत्माओं को पावन बनाते हैं।


अध्याय 2 : मुरली का मूल सिद्धांत

“एक वाक्य — अनेक अर्थ”

मुरली कहती है—

मुरली का एक वाक्य और उसके अर्थ अनेक।

इसीलिए “गरीब” और “निवाज”
दुनिया के अर्थ से बिल्कुल अलग
मुरली के अर्थ में समझने होंगे।


अध्याय 3 : गरीब कौन है? (सामान्य अर्थ बनाम मुरली अर्थ)

 दुनिया का अर्थ

दुनिया में “गरीब” का अर्थ माना जाता है—

  • धन-साधन हीन

  • आर्थिक रूप से कमजोर

 मुरली का स्पष्ट कथन

साकार मुरली – 8 दिसंबर 1967

“मुझे धनवान या निर्धन से कोई लेना-देना नहीं।”

तो प्रश्न उठता है—

फिर गरीब कौन?


अध्याय 4 : मुरली के अनुसार गरीब कौन है?

 मुरली प्रमाण

साकार मुरली – 21 जनवरी 1969

“आज सारी दुनिया पतित है।
आज सारी दुनिया चरित्र से गरीब है।”

गरीब = चरित्र से गरीब

पतित का अर्थ

  • जिनका चरित्र नीचे गिर गया

  • जो विकारों के अधीन हो गए

  • जिनकी आत्मिक शक्तियाँ समाप्त हो गईं

यही है चरित्र की दृष्टि से गरीबी


उदाहरण : करोड़पति लेकिन गरीब

कोई व्यक्ति—

  • करोड़पति है

  • लेकिन क्रोध में अंधा है

  • लोभ-मोह में फँसा है

  • रिश्तों में दुखी है

 बाबा की दृष्टि में वह अमीर नहीं, गरीब है।


अध्याय 5 : “निवाज” शब्द का मुरली अर्थ

शब्दार्थ

“निवाज” शब्द उर्दू-हिंदी में प्रयुक्त होता है।
इसके सामान्य अर्थ हैं—

  • उठाने वाला

  • सुनने वाला

  • सहारा देने वाला

 मुरली का विशेष अर्थ

मुरली में “निवाज” का सबसे ऊँचा अर्थ है—

सिरताज बनाने वाला

जिसके सिर पर ताज हो,
ऐसा बनाने वाला ही
सच्चा गरीब निवाज है।


अध्याय 6 : गरीब निवाज का वास्तविक कार्य

गरीब निवाज वह है—

  • जो पतित आत्माओं को सुनता है

  • उन्हें समझता है

  • और राजा (सिरताज) बना देता है

मुरली का वाक्य—

“मैं पतितों को पावन बनाता हूँ।”


अध्याय 7 : कौड़ी से हीरा — यह तुलना क्यों?

 साकार मुरली – 30 मार्च 1968

“तुम अभी कौड़ी जैसे हो,
मैं तुम्हें हीरा बनाता हूँ।”

तुलना का रहस्य

कौड़ी

  • कम मूल्यवान

  • समुद्र में पड़ी रहती है

हीरा

  • सबसे मूल्यवान

  • चमक, पवित्रता, शुद्धता का प्रतीक


अध्याय 8 : बाबा क्या बदलते हैं?

बाबा—

  • न शरीर बदलते हैं

  • न पद बदलते हैं

 बाबा बदलते हैं—

  • चरित्र

  • आत्मिक मूल्य

यही सच्चा परिवर्तन है।


 निष्कर्ष : गरीब निवाज कौन?

गरीब निवाज
धन देने वाला नहीं,
बल्कि—

चरित्र उठाने वाला बाप है
 पतित को पावन
कौड़ी को हीरा
 दास को राजा बनाने वाला है

प्रश्न 1️⃣ : “गरीब कौन और निवाज कौन?” यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

उत्तर :
यह प्रश्न सुनने में साधारण लगता है, लेकिन मुरली के प्रकाश में यह आत्मा, परमात्मा और उनके आपसी संबंध का अत्यंत गूढ़ रहस्य खोल देता है।
यह केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि जीवन परिवर्तन की चाबी है।


प्रश्न 2️⃣ : इस अध्याय के माध्यम से किन मुख्य प्रश्नों को समझना है?

उत्तर :
इस अध्याय में हम तीन मुख्य बातों को समझते हैं—

  1. गरीब निवाज बाबा कौन हैं?

  2. ब्रह्मा बाबा या शिव बाबा — गरीब निवाज कौन?

  3. सबसे पहला गुप्त राज कौन-सा है जो दुनिया को बताना है?


अध्याय 1 : गरीब निवाज बाबा कौन है?

प्रश्न 3️⃣ : गरीब निवाज बाबा कौन है—ब्रह्मा बाबा या शिव बाबा?

उत्तर :
मुरली स्पष्ट करती है कि यह बाप और दादा दोनों का गुप्त रहस्य है।
ब्रह्मा बाबा माध्यम हैं, लेकिन गरीब निवाज स्वयं शिव बाबा हैं, जो पतित आत्माओं को पावन बनाते हैं।


अध्याय 2 : मुरली का मूल सिद्धांत

“एक वाक्य — अनेक अर्थ”

प्रश्न 4️⃣ : मुरली में “एक वाक्य — अनेक अर्थ” का क्या अर्थ है?

उत्तर :
मुरली का हर एक वाक्य गहराई से भरा होता है।
उसी एक वाक्य से आत्मिक अवस्था, संस्कार और जीवन परिवर्तन के अनेक अर्थ निकलते हैं।
इसीलिए “गरीब” और “निवाज” को भी दुनिया के नहीं, मुरली के अर्थ में समझना आवश्यक है।


अध्याय 3 : गरीब कौन है?

(सामान्य अर्थ बनाम मुरली अर्थ)

प्रश्न 5️⃣ : दुनिया के अनुसार “गरीब” किसे कहते हैं?

उत्तर :
दुनिया में गरीब का अर्थ माना जाता है—

  • धन-साधन हीन

  • आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति


प्रश्न 6️⃣ : मुरली इस धारणा को कैसे बदलती है?

उत्तर :
साकार मुरली – 8 दिसंबर 1967 में बाबा स्पष्ट कहते हैं—

“मुझे धनवान या निर्धन से कोई लेना-देना नहीं।”

इससे स्पष्ट है कि बाबा की दृष्टि में गरीबी का आधार धन नहीं है।


अध्याय 4 : मुरली के अनुसार गरीब कौन है?

प्रश्न 7️⃣ : मुरली के अनुसार गरीब किसे कहते हैं?

उत्तर :
साकार मुरली – 21 जनवरी 1969

“आज सारी दुनिया पतित है।
आज सारी दुनिया चरित्र से गरीब है।”

अर्थात—
गरीब = चरित्र से गरीब


प्रश्न 8️⃣ : “पतित” होने का वास्तविक अर्थ क्या है?

उत्तर :
पतित वह है—

  • जिसका चरित्र नीचे गिर गया

  • जो विकारों के अधीन हो गया

  • जिसकी आत्मिक शक्तियाँ समाप्त हो गईं

यही है चरित्र की दृष्टि से गरीबी


प्रश्न 9️⃣ : क्या कोई अमीर व्यक्ति भी गरीब हो सकता है?

उत्तर :
हाँ।
यदि कोई व्यक्ति—

  • करोड़पति है

  • लेकिन क्रोध, लोभ, मोह में फँसा है

  • रिश्तों में दुखी है

तो बाबा की दृष्टि में वह अमीर नहीं, गरीब है।


अध्याय 5 : “निवाज” शब्द का मुरली अर्थ

प्रश्न 🔟 : “निवाज” शब्द का सामान्य अर्थ क्या है?

उत्तर :
“निवाज” शब्द उर्दू-हिंदी में प्रयुक्त होता है।
इसके सामान्य अर्थ हैं—

  • उठाने वाला

  • सुनने वाला

  • सहारा देने वाला


प्रश्न 1️⃣1️⃣ : मुरली में “निवाज” का विशेष अर्थ क्या है?

उत्तर :
मुरली में “निवाज” का सबसे ऊँचा अर्थ है—
सिरताज बनाने वाला
जो आत्मा को राजा बना दे, उसके सिर पर ताज रख दे—
वही सच्चा गरीब निवाज है।


अध्याय 6 : गरीब निवाज का वास्तविक कार्य

प्रश्न 1️⃣2️⃣ : गरीब निवाज का वास्तविक कार्य क्या है?

उत्तर :
गरीब निवाज वह है जो—

  • पतित आत्माओं को सुनता है

  • उन्हें समझता है

  • और उन्हें राजा (सिरताज) बना देता है

जैसा कि मुरली में बाबा कहते हैं—

“मैं पतितों को पावन बनाता हूँ।”


अध्याय 7 : कौड़ी से हीरा — यह तुलना क्यों?

प्रश्न 1️⃣3️⃣ : बाबा “कौड़ी से हीरा” की तुलना क्यों करते हैं?

उत्तर :
साकार मुरली – 30 मार्च 1968

“तुम अभी कौड़ी जैसे हो,
मैं तुम्हें हीरा बनाता हूँ।”

क्योंकि—

  • कौड़ी: कम मूल्यवान, समुद्र में पड़ी रहती है

  • हीरा: सबसे मूल्यवान, चमक, पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक

यह तुलना आत्मिक मूल्य परिवर्तन को दर्शाती है।


अध्याय 8 : बाबा क्या बदलते हैं?

प्रश्न 1️⃣4️⃣ : बाबा मनुष्य में क्या परिवर्तन करते हैं?

उत्तर :
बाबा—

  • न शरीर बदलते हैं

  • न पद बदलते हैं

 बाबा बदलते हैं—

  • चरित्र

  • आत्मिक मूल्य

यही सच्चा और स्थायी परिवर्तन है।


 निष्कर्ष : गरीब निवाज कौन?

प्रश्न 1️⃣5️⃣ : अंत में, गरीब निवाज कौन हैं?

उत्तर :
गरीब निवाज—
धन देने वाला नहीं, बल्कि—

 चरित्र उठाने वाला बाप
 पतित को पावन बनाने वाला
 कौड़ी को हीरा बनाने वाला
 दास को राजा बनाने वाला है

Disclaimer:
यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की साकार मुरलियों पर आधारित एक आध्यात्मिक अध्ययन है।
इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, व्यक्ति या मान्यता का खंडन करना नहीं है, बल्कि मुरली में निहित गूढ़ आध्यात्मिक अर्थों को सरल भाषा में स्पष्ट करना है।
दर्शक इसे आत्म-चिंतन एवं ईश्वरीय ज्ञान के अध्ययन के रूप में ग्रहण करें।

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