AV-19/18-11-1987-“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन – अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन – अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
आज सर्वशक्तिवान बापदादा अपने शक्ति सेना को देख रहे हैं। यह रूहानी शक्ति सेना विचित्र सेना है। नाम रूहानी सेना है लेकिन विशेष साइलेन्स की शक्ति है, शान्ति देने वाली अहिंसक सेना है। तो आज बापदादा हर एक शान्ति देवा बच्चे को देख रहे हैं कि हर एक ने शान्ति की शक्ति कहाँ तक जमा की है? यह शान्ति की शक्ति इस रूहानी सेना के विशेष शस्त्र हैं। हैं सभी शस्त्रधारी लेकिन नम्बरवार हैं। शान्ति की शक्ति सारे विश्व को अशान्त से शान्त बनाने वाली है, न सिर्फ मनुष्य आत्माओं को लेकिन प्रकृति को भी परिवर्तन करने वाली है। शान्ति की शक्ति को अभी और भी गुह्य रूप से जानने और अनुभव करने का है। जितना इस शक्ति में शक्तिशाली बनेंगे, उतना ही शान्ति की शक्ति का महत्व, महानता का अनुभव ज्यादा करते जायेंगे। अभी वाणी की शक्ति से सेवा के साधनों की शक्ति अनुभव कर रहे हो और इस अनुभव द्वारा सफलता भी प्राप्त कर रहे हो। लेकिन वाणी की शक्ति वा स्थूल सेवा के साधनों से ज्यादा साइलेन्स की शक्ति अति श्रेष्ठ है। साइलेन्स की शक्ति के साधन भी श्रेष्ठ हैं। जैसे वाणी की सेवा के साधन चित्र, प्रोजेक्टर वा वीडियो आदि बनाते हो, ऐसे शान्ति की शक्ति के साधन – शुभ संकल्प, शुभ भावना और नयनों की भाषा है। जैसे मुख की भाषा द्वारा बाप का वा रचना का परिचय देते हो, ऐसे साइलेन्स की शक्ति के आधार पर नयनों की भाषा से नयनों द्वारा बाप का अनुभव करा सकते हो। जैसे प्रोजेक्टर द्वारा चित्र दिखाते हो, वैसे आपके मस्तक के बीच चमकता हुआ आपका वा बाप का चित्र स्पष्ट दिखा सकते हो। जैसे वर्तमान समय वाणी द्वारा याद की यात्रा का अनुभव कराते हो, ऐसे साइलेन्स की शक्ति द्वारा आपका चेहरा (जिसको मुख कहते हो) आप द्वारा भिन्न-भिन्न याद की स्टेजेस का स्वत: ही अनुभव करायेगा। अनुभव करने वालों को यह सहज महसूस होगा कि इस समय बीजरूप स्टेज का अनुभव हो रहा है वा फरिश्ते-रूप का अनुभव हो रहा है वा भिन्न-भिन्न गुणों का अनुभव आपके इस शक्तिशाली फेस से स्वत: ही होता रहेगा।
जैसे वाणी द्वारा आत्माओं को स्नेह के सहयोग की भावना उत्पन्न कराते हो, ऐसे जब आप शुभ भावना, स्नेह के भावना की स्थिति में स्वयं स्थित होंगे तो जैसी आपकी भावना होगी वैसी भावना उन्हों में भी उत्पन्न होगी। आपकी शुभ भावना उन्हों की भावना को प्रज्जवलित करेगी। जैसे दीपक, दीपक को जगा देता है, ऐसे आपकी शक्तिशाली शुभ भावना औरों में भी सर्वश्रेष्ठ भावना सहज ही उत्पन्न करायेगी। जैसे वाणी द्वारा अभी सारा स्थूल कार्य करते रहते हो, ऐसे साइलेन्स के शक्ति के श्रेष्ठ साधन – शुभ संकल्प की शक्ति से स्थूल कार्य भी ऐसे ही सहज कर सकते हो वा करा सकते हो। जैसे साइन्स की शक्ति के साधन टेलीफोन, वायरलेस हैं, ऐसे यह शुभ संकल्प सम्मुख बात करने वा टेलीफोन, वायरलेस द्वारा कार्य कराने का अनुभव करायेगा। ऐसे साइलेन्स की शक्ति में विशेषतायें हैं। साइलेन्स की शक्ति कम नहीं है। लेकिन अभी वाणी की शक्ति को, स्थूल साधनों को ज्यादा कार्य में लगाते हो, इसलिए यह सहज लगते हैं। साइलेन्स की शक्ति के साधनों को प्रयोग में नहीं लाया है, इसलिए इनका अनुभव नहीं है। वह सहज लगता है, यह मेहनत का लगता है। लेकिन समय परिवर्तन प्रमाण यह शान्ति की शक्ति के साधन प्रयोग में लाने ही होंगे।
इसलिए, हे शान्ति देवा श्रेष्ठ आत्मायें! इस शान्ति की शक्ति को अनुभव में लाओ। जैसे वाणी की प्रैक्टिस करते-करते वाणी के शक्तिशाली हो गये हो, ऐसे शान्ति की शक्ति के भी अभ्यासी बनते जाओ। आगे चल वाणी वा स्थूल साधनों के द्वारा सेवा का समय नहीं मिलेगा। ऐसे समय पर शान्ति की शक्ति के साधन आवश्यक होंगे क्योंकि जितना जो महान् शक्तिशाली होता है वह अति सूक्ष्म होता है। तो वाणी से शुद्ध-संकल्प सूक्ष्म हैं, इसलिए सूक्ष्म का प्रभाव शक्तिशाली होगा। अभी भी अनुभवी हो, जहाँ वाणी द्वारा कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है तो कहते हो – यह वाणी से नहीं समझेंगे, शुभ भावना से परिवर्तन होंगे। जहाँ वाणी कार्य को सफल नहीं कर सकती, वहाँ साइलेन्स की शक्ति का साधन शुभ-संकल्प, शुभ-भावना, नयनों की भाषा द्वारा रहम और स्नेह की अनुभूति कार्य सिद्ध कर सकती है। जैसे अभी भी कोई वाद-विवाद वाला आता है तो वाणी से और ज्यादा वाद-विवाद में आ जाता है। उसको याद में बिठाए साइलेन्स की शक्ति का अनुभव कराते हो ना। एक सेकेण्ड भी अगर याद द्वारा शान्ति का अनुभव कर लेते हैं तो स्वयं ही अपनी वाद-विवाद की बुद्धि को साइलेन्स की अनुभूति के आगे सरेण्डर कर देते हैं। तो इस साइलेन्स की शक्ति का अनुभव बढ़ाते जाओ। अभी यह साइलेन्स की शक्ति की अनुभूति बहुत कम है। साइलेन्स की शक्ति का रस अब तक मैजारिटी ने सिर्फ अंचली मात्र अनुभव किया है। हे शान्ति-देवा, आपके भक्त आपके जड़ चित्रों से शान्ति ही ज्यादा मांगते हैं क्योंकि शान्ति में ही सुख समाया हुआ है। वह अल्पकाल का अनुभव भी करते हैं। तो बापदादा देख रहे थे शान्ति की शक्ति के अनुभवी आत्मायें कितनी हैं, वर्णन करने वाली कितनी हैं और प्रयोग करने वाली कितनी हैं। इसके लिए अन्तर्मुखता और एकान्तवासी बनने की आवश्यकता है। बाहरमुखता में आना सहज है लेकिन अन्तर्मुखी का अभ्यास अभी समय प्रमाण बहुत चाहिए। कई बच्चे कहते हैं – एकान्तवासी बनने का समय नहीं मिलता, अन्तर्मुखी स्थिति का अनुभव करने का समय नहीं मिलता क्योंकि सेवा की प्रवृत्ति, वाणी के शक्ति की प्रवृत्ति बहुत बढ़ गई है। लेकिन इसके लिए कोई इकट्ठा आधा वा एक घण्टा निकालने की आवश्यकता नहीं है। सेवा की प्रवृत्ति में रहते भी बीच-बीच में इतना समय मिल सकता है जो एकान्तवासी बनने का अनुभव करो।
एकान्तवासी अर्थात् कोई भी एक शक्तिशाली स्थिति में स्थित होना। चाहे बीजरूप स्थिति में स्थित हो जाओ, चाहे लाइट-हाउस, माइट-हाउस स्थिति में स्थित हो जाओ अर्थात् विश्व को लाइट-माइट देने वाले – इस अनुभूति में स्थित हो जाओ। चाहे फरिश्तेपन की स्थिति द्वारा औरों को भी अव्यक्त स्थिति का अनुभव कराओ। एक सेकेण्ड वा एक मिनट अगर इस स्थिति में एकाग्र हो स्थित हो जाओ तो यह एक मिनट की स्थिति स्वयं आपको और औरों को भी बहुत लाभ दे सकती है। सिर्फ इसकी प्रैक्टिस चाहिये। अब ऐसा कौन है जिसको एक मिनट भी फुर्सत नहीं मिल सकती? जैसे पहले ट्रैफिक कन्ट्रोल का प्रोग्राम बना तो कई सोचते थे यह कैसे हो सकता? सेवा की प्रवृत्ति बहुत बड़ी है, बिजी रहते हैं। लेकिन लक्ष्य रखा तो हो रहा है ना। प्रोग्राम चल रहा है ना। सेन्टर्स पर यह ट्रैफिक कन्ट्रोल का प्रोग्राम चलाते हो वा कभी मिस करते, कभी चलाते? यह एक ब्राह्मण कुल की रीति है, नियम है। जैसे और नियम आवश्यक समझते हो, ऐसे यह भी स्व-उन्नति के लिए वा सेवा की सफलता के लिए, सेवाकेन्द्र के वातावरण के लिए आवश्यक है। ऐसे अन्तर्मुखी, एकान्तवासी बनने के अभ्यास के लक्ष्य को लेकर अपने दिल की लगन से बीच-बीच में समय निकालो। महत्व जानने वाले को समय स्वत: ही मिल जाता है। महत्व नहीं है तो समय भी नहीं मिलता। एक पॉवरफुल स्थिति में अपने मन को, बुद्धि को स्थित करना ही एकान्तवासी बनना है। जैसे साकार ब्रह्मा बाप को देखा, सम्पूर्णता के समीपता की निशानी – सेवा में रहते, समाचार भी सुनते-सुनते एकान्तवासी बन जाते थे। यह अनुभव किया ना। एक घण्टे के समाचार को भी 5 मिनट में सार समझ बच्चों को भी खुश किया और अपनी अन्तर्मुखी, एकान्तवासी स्थिति का भी अनुभव कराया। सम्पूर्णता की निशानी – अन्तर्मुखी, एकान्तवासी स्थिति चलते-फिरते, सुनते, करते अनुभव किया। तो फॉलो फादर नहीं कर सकते हो? ब्रह्मा बाप से ज्यादा जिम्मेवारी और किसकी है क्या? ब्रह्मा बाप ने कभी नहीं कहा कि मैं बहुत बिजी हूँ। लेकिन बच्चों के आगे एग्जैम्पल बने। ऐसे अभी समय प्रमाण इस अभ्यास की आवश्यकता है। सब सेवा के साधन होते हुए भी साइलेन्स की शक्ति के सेवा की आवश्यकता होगी क्योंकि साइलेन्स की शक्ति अनुभूति कराने की शक्ति है। वाणी की शक्ति का तीर बहुत करके दिमाग तक पहुँचता है और अनुभूति का तीर दिल तक पहुँचता है। तो समय प्रमाण एक सेकेण्ड में अनुभूति करा लो – यही पुकार होगी। सुनने-सुनाने से थके हुए आयेंगे। साइलेन्स की शक्ति के साधनों द्वारा नज़र से निहाल कर देंगे। शुभ संकल्प से आत्माओं के व्यर्थ संकल्पों को समाप्त कर देंगे। शुभ भावना से बाप की तरफ स्नेह की भावना उत्पन्न करा लेंगे। ऐसे उन आत्माओं को शान्ति की शक्ति से सन्तुष्ट करेंगे, तब आप चैतन्य शान्ति देव आत्माओं के आगे ‘शान्ति देवा, शान्ति देवा’ कह करके महिमा करेंगे और यही अंतिम संस्कार ले जाने के कारण द्वापर में भक्त आत्मा बन आपके जड़ चित्रों की यह महिमा करेंगे। यह ट्रैफिक कन्ट्रोल का भी महत्व कितना बड़ा है और कितना आवश्यक है – यह फिर सुनायेंगे। लेकिन शान्ति की शक्ति के महत्व को स्वयं जानो और सेवा में लगाओ। समझा?
आज पंजाब आया है ना। पंजाब में सेवा का महत्व भी साइलेन्स की शक्ति का है। साइलेन्स की शक्ति से हिंसक वृत्ति वाले को अहिंसक बना सकते हो। जैसे स्थापना के आदि के समय में देखा – हिंसक वृत्ति वाले रूहानी शान्ति की शक्ति के आगे परिवर्तन हो गये ना। तो हिंसक वृत्ति को शान्त बनाने वाली शान्ति की शक्ति है। वाणी सुनने के लिए तैयार ही नहीं होते। जब प्रकृति की शक्ति से गर्मी वा सर्दी की लहर चारों ओर फैल सकती है तो प्रकृतिपति की शान्ति की लहर चारों ओर नहीं फैल सकती? साइन्स के साधन भी गर्मी को सर्दी के वातावरण में बदल सकते हैं, तो रूहानी शक्ति रूहों को नहीं बदल सकती? तो पंजाब वालों ने क्या सुना? सभी को वायब्रेशन आवे कि कोई शान्ति का पुंज, शान्ति की किरणें दे रहे हैं। ऐसी सेवा करने का समय पंजाब को मिला है। फँक्शन, प्रदर्शनी आदि, वह तो करते ही हो लेकिन इस शक्ति का अनुभव करो और कराओ। सिर्फ अपने मन की एकाग्र वृत्ति, शक्तिशाली वृत्ति चाहिए। लाइट हाउस जितना शक्तिशाली होता है, उतना दूर तक लाइट दे सकता है। तो पंजाब वालों के लिए यह समय है इस शक्ति को प्रयोग में लाने का। समझा? अच्छा।
आन्ध्र प्रदेश का भी ग्रुप है। वह क्या करेंगे? तूफान को शान्त करेंगे। आन्ध्रा में तूफान बहुत आते हैं ना। तूफानों को शान्त करने के लिए भी शान्ति की शक्ति चाहिए। तूफानों में मनुष्य आत्मायें भटक जाती हैं। तो भटकी हुई आत्माओं को शान्ति का ठिकाना देना – यह आन्ध्रा वालों की विशेष सेवा है। अगर शरीर से भी भटकते हैं तो पहले मन भटकता है, फिर शरीर भटकता है। मन के ठिकाने से शरीर के ठिकाने लिए भी बुद्धि काम करेगी। अगर मन का ठिकाना नहीं होता तो शरीर के साधनों के लिए भी बुद्धि काम नहीं करती। इसलिए सबके मन को ठिकाने पर लगाने के लिए इस शक्ति को कार्य में लगाओ। दोनों को तूफानों से बचाना है। वहाँ हिंसा का तूफान है, वहाँ समुद्र का तूफान है। वहाँ व्यक्तियों का है, वहाँ प्रकृति का है। लेकिन है दोनों तरफ तूफान। तूफान वालों को शान्ति का तोहफा दो। तोहफा तूफान को बदल लेगा। अच्छा।
चारों ओर के शान्ति देवा श्रेष्ठ आत्माओं को, चारों ओर के अन्तर्मुखी महान् आत्माओं को, सदा एकान्तवासी बन कर्म में आने वाले कर्मयोगी श्रेष्ठ आत्माओं को, सदा शान्ति की शक्ति का प्रयोग करने वाले श्रेष्ठ योगी आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।
पार्टियों से अव्यक्त बापदादा की मुलाकात:-
सदा अपने को श्रेष्ठ भाग्यवान समझते हो? घर बैठे भाग्यविधाता द्वारा श्रेष्ठ भाग्य मिल गया। घर बैठे भाग्य मिलना यह कितनी खुशी की बात है! अविनाशी बाप, अविनाशी प्राप्ति कराते हैं। तो अविनाशी अर्थात् सदा, कभी-कभी नहीं। तो भाग्य को देखकर सदा खुश रहते हो? हर समय भाग्य और भाग्यविधाता – दोनों ही स्वत: याद रहें। सदा ‘वाह, मेरा श्रेष्ठ भाग्य!’ यही गीत गाते रहो। यह मन का गीत है। जितना यह गीत गाते उतना सदा ही उड़ती कला का अनुभव करते रहेंगे। सारे कल्प में ऐसा भाग्य प्राप्त करने का यह एक ही समय है। इसलिए स्लोगन भी है ‘अब नहीं तो कब नहीं’। जो भी श्रेष्ठ कार्य करना है, वह अब करना है। हर कार्य में हर समय यह याद रखो कि अब नहीं तो कब नहीं। जिसको यह स्मृति में रहता है वह कभी भी समय, संकल्प वा कर्म वेस्ट होने नहीं देंगे, सदा जमा करते रहेंगे। विकर्म की तो बात ही नहीं है लेकिन व्यर्थ कर्म भी धोखा दे देते हैं। तो हर सेकेण्ड के हर संकल्प का महत्व जानते हो ना। जमा का खाता सदा भरता रहे। अगर हर सेकेण्ड वा हर संकल्प श्रेष्ठ जमा करते हो, व्यर्थ नहीं गंवाते हो तो 21 जन्म के लिए अपना खाता श्रेष्ठ बना लेते हो। तो जितना जमा करना चाहिए उतना कर रहे हो? इस बात पर और अण्डरलाइन करना – एक सेकेण्ड भी, संकल्प भी व्यर्थ न जाए। व्यर्थ खत्म हो जायेगा तो सदा समर्थ बन जायेगा। अच्छा। आन्ध्र प्रदेश में गरीबी बहुत है ना। और आप फिर इतने ही साहूकार हो! चारों ओर गरीबी बढ़ती जाती है और आपके यहाँ साहूकारी बढ़ती जाती है क्योंकि ज्ञान का धन आने से यह स्थूल भी स्वत: ही दाल-रोटी मिलने जितना आ ही जाता है। कोई ब्राह्मण भूखा रहता है? तो स्थूल धन की गरीबी भी समाप्त हो जाती है क्योंकि समझदार बन जाते हैं। काम करके स्वयं को खिलाने के लिए वा परिवार को खिलाने के लिए भी समझ आ जाती है। इसलिए डबल साहूकारी आ जाती है। शरीर को भी अच्छा और मन को भी अच्छा। दाल-रोटी आराम से मिल रही है ना। ब्रह्माकुमार-ब्रह्माकुमारी बनने से रॉयल भी हो गये, साहूकार भी हो गये और अनेक जन्म मालामाल रहेंगे। जैसे पहले चलते थे, रहते थे, पहनते थे… उससे अभी कितने रॉयल हो गये हो! अभी सदा ही स्वच्छ रहते हो। पहले कपड़े भी मैले पहनेंगे, अभी अन्दर बाहर दोनों से स्वच्छ हो गये। तो ब्रह्माकुमार बनने से फायदा हो गया ना। सब बदल जाता है, परिवर्तन हो जाता है। पहले की शक्ल, अक्ल देखो और अभी भी देखो तो फर्क का पता चलेगा। अभी रुहानियत की झलक आ गई, इसलिए सूरत ही बदल गई है। तो सदा ऐसे खुशी में नाचते रहो। अच्छा।
डबल विदेशी भाई-बहनों से:- डबल विदेशी हो? वैसे तो सभी ब्राह्मण आत्मायें इसी भारत देश की हैं। अनेक जन्म भारतवासी रहे हो, यह तो सेवा के लिए अनेक स्थानों पर पहुंचे हो। इसलिए यह निशानी है कि जब भारत में आते हो अर्थात् मधुबन धरनी में या ब्राह्मण परिवार में आते हो तो अपनापन अनुभव करते हो। वैसे विदेश की विदेशी आत्मायें कितने भी नज़दीक सम्पर्क वाली हों, सम्बन्ध वाली हों लेकिन जैसे यहाँ आत्मा को अपनापन लगता है, ऐसे नहीं लगेगा! जितनी नजदीक वाली आत्मा होगी उतने अपनेपन की ज्यादा महसूसता होगी। सोचना नहीं पड़ेगा कि मैं था या मैं हो सकता हूँ। हर एक स्थूल वस्तु भी अति प्यारी लगेगी। जैसे कोई अपनी चीज होती है ना। अपनी चीज सदा प्यारी लगती है। तो यह निशानियां हैं। बापदादा देख रहे हैं कि दूर रहते भी दिल से सदा नजदीक रहने वाले हैं। सारा परिवार आपको इस श्रेष्ठ भाग्यवान की नजर से देखता है।
विदाई के समय – सतगुरुवार की यादप्यार (प्रात: 6 बजे)
वृक्षपति दिवस पर वृक्ष के पहले आदि अमूल्य पत्तों को वृक्षपति बाप का यादप्यार और नमस्ते। बृहस्पति की दशा तो सभी श्रेष्ठ आत्माओं पर है ही। राहू की दशा और अनेक दशायें समाप्त हुई। अभी एक ही वृक्षपति की, बृहस्पति की दशा हर ब्राह्मण आत्मा की सदा रहती है। तो बृहस्पति की दशा भी है और दिन भी बृहस्पति का है और वृक्षपति अपने वृक्ष के आदि पत्तों से मिलन मना रहे हैं। तो सदा याद है और सदा याद रहेगी। सदा प्यार में समाये हुए हो और सदा ही प्यारे रहेंगे। समझा!
दादी जी एक दिन के राजपिपला (गुजरात) मेले में जाने की छुट्टी ले रही हैं
विशेष आत्माओं के हर कदम में पद्मों की कमाई है। बड़ों का सहयोग भी छत्रछाया बन चार चांद लगा देते है। जहाँ भी जाओ वहाँ सभी को एक-एक के नाम से यादप्यार स्वीकार कराना। नाम की माला तो भक्ति में बच्चों ने बहुत जपी। अभी बाप यह माला शुरु करेंगे तो बड़ी माला हो जायेगी। इसलिए जो भी जहाँ भी बच्चे (विशेष आत्मायें) जाते हैं – वहाँ विशेष उमंग-उत्साह बढ़ जाता है। विशेष आत्माओं का जाना अर्थात् सेवा में और विशेषता आना। यहाँ से शुरु होता है – सिर्फ धरनी में चरण घुमाकर जाना। तो चरण घुमाना माना चक्र लगाना। यहाँ सेवा में चक्र लगाते हो, वहाँ भक्ति में उन्होंने चरण रखने का महत्व बनाया है। लेकिन शुरु तो सब यहाँ से ही होता है। चाहे आधा घण्टा, एक घण्टा भी कहाँ जाते हो तो सब खुश हो जाते हैं। लेकिन यहाँ सेवा होती है। भक्ति में सिर्फ चरण रखने से खुशी अनुभव करते हैं। सब स्थापना यहाँ से ही हो रही है। पूरा ही भक्ति मार्ग का फाउण्डेशन यहाँ से ही पड़ता है, सिर्फ रूप बदली हो जायेगा। तो जो भी मेला सेवा के निमित्त बने हैं अर्थात् मिलन मनाने की सेवा के निमित्त बने हैं, उन सभी को बापदादा, मेले के पहले मिलन-मेला मना रहे हैं। यह बाप और बच्चों का मेला है, वह सेवा का मेला है। तो सभी को दिल से यादप्यार। अच्छा। दुनिया में नाइट क्लब होते हैं और यह अमृतवेला क्लब है। (दादियों से) आप सब अमृतवेले के क्लब की मेम्बर्स हो। सभी देख करके खुश होते हैं। विशेष आत्माओं को देख करके भी खुशी होती है।
साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन — अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति
🗓 मुरली संदर्भ:
अव्यक्त बापदादा मुरली — 18 जनवरी 1982
1. रूहानी शक्ति सेना — शान्ति की अहिंसक शक्ति
सर्वशक्तिवान बापदादा अपनी रूहानी शक्ति सेना को देख रहे हैं।
यह कोई साधारण सेना नहीं — यह शान्ति की सेना है।
- नाम: रूहानी सेना
- विशेषता: अहिंसक, शान्तिदायक, साइलेन्स शक्ति से सेवा करने वाली
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
- शान्ति की शक्ति = रूहानी सेना का श्रेष्ठ शस्त्र
- यह शक्ति मनुष्य आत्माओं और प्रकृति — दोनों को बदल सकती है
- शान्ति अशान्त विश्व को परिवर्तित करने की आधारशक्ति है
🔸 उदाहरण:
जैसे ठंडी हवा पूरे वातावरण को शीतल कर देती है,
वैसे शान्ति की शक्ति अशान्त मनों को स्थिर कर देती है।
2. वाणी की शक्ति बनाम साइलेन्स की शक्ति
अभी हम सेवा करते हैं:
- वाणी से
- साधनों से (चित्र, प्रोजेक्टर, वीडियो)
लेकिन बापदादा कहते हैं —
इनसे भी श्रेष्ठ है “साइलेन्स की शक्ति”
साइलेन्स सेवा के श्रेष्ठ साधन:
- शुभ संकल्प
- शुभ भावना
- नयनों की भाषा
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
- मुख की भाषा ज्ञान देती है
- नयनों की भाषा अनुभव कराती है
- वाणी दिमाग तक पहुँचती है
- अनुभूति दिल तक पहुँचती है
🔸 उदाहरण:
जैसे दीपक से दीपक जलता है,
वैसे शक्तिशाली शुभ भावना से दूसरे के भीतर दिव्यता जगती है।
3. चेहरा बने अनुभव का प्रोजेक्टर
जैसे मशीन प्रोजेक्टर चित्र दिखाता है,
वैसे साधक का चेहरा आध्यात्मिक स्थिति दिखाता है।
अनुभव करने वाली आत्मा सहज महसूस करेगी:
- अभी बीजरूप स्थिति है
- अभी फरिश्ता स्थिति है
- अभी गुणों की स्थिति है
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
शक्तिशाली चेहरा = मौन सेवा का माध्यम
🔸 उदाहरण:
शांत संत का चेहरा देखते ही मन स्वतः शांत हो जाता है।
4. साइलेन्स शक्ति क्यों कठिन लगती है?
- वाणी की प्रैक्टिस अधिक है
- साइलेन्स का अभ्यास कम है
इसलिए:
वाणी सहज लगती है
मौन कठिन लगता है
लेकिन समय परिवर्तन अनुसार —
साइलेन्स सेवा अनिवार्य होगी
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
सूक्ष्म शक्ति का प्रभाव स्थूल से अधिक होता है।
5. अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति का अभ्यास
कई बच्चे कहते हैं:
“समय नहीं मिलता”
बापदादा कहते हैं:
अलग से घंटों की जरूरत नहीं
सेवा के बीच भी एक मिनट पर्याप्त है
एकान्तवासी का अर्थ:
किसी एक शक्तिशाली स्थिति में स्थिर होना:
- बीजरूप स्थिति
- लाइट-हाउस, माइट-हाउस स्थिति
- फरिश्ता स्थिति
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
एक मिनट की एकाग्र स्थिति = स्वयं और विश्व को लाभ
🔸 उदाहरण:
मोबाइल की छोटी बैटरी भी चार्ज हो तो काम करती है,
वैसे ही एक मिनट की गहन शांति आत्मा को रीचार्ज कर देती है।
6. ट्रैफिक कंट्रोल — मौन अभ्यास का सहज साधन
जैसे ट्रैफिक कंट्रोल प्रोग्राम अपनाया,
वैसे ही “मौन विराम” अपनाओ।
- यह ब्राह्मण जीवन का नियम है
- वातावरण शुद्ध करने का साधन है
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
महत्व समझो → समय स्वतः मिलेगा
7. फॉलो फादर — साकार ब्रह्मा बाबा का उदाहरण
साकार ब्रह्मा बाप:
- सेवा में रहते
- समाचार सुनते
- फिर भी तुरन्त अन्तर्मुखी हो जाते
सम्पूर्णता की निशानी:
चलते-फिरते भी एकान्तवासी
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
जिम्मेदारी बहाना नहीं — अभ्यास की प्रेरणा है
8. साइलेन्स सेवा — समय की पुकार
भविष्य में लोग:
- सुनने से थकेंगे
- अनुभव चाहेंगे
तब:
- नज़र से निहाल करना होगा
- शुभ संकल्प से परिवर्तन करना होगा
- शुभ भावना से हृदय जोड़ना होगा
🔹 मुख्य मुरली बिंदु:
साइलेन्स शक्ति = अनुभूति कराने की शक्ति
9. विशेष सेवा संदेश
पंजाब वालों के लिए
- हिंसक वृत्ति को शान्त बनाओ
- शान्ति की वायब्रेशन फैलाओ
- लाइट-हाउस बनो
आंध्र प्रदेश वालों के लिए
- तूफानग्रस्त मनों को ठिकाना दो
- भटकी आत्माओं को शान्ति का घर दो
- मन को स्थिर करो → जीवन स्थिर होगा
🔸 उदाहरण:
जैसे समुद्री लाइटहाउस जहाज़ों को दिशा देता है,
वैसे स्थिर मन भटकी आत्माओं को मार्ग देता है।
10. अपनापन — रूहानी परिवार का अनुभव
जब आत्माएँ भारत की पवित्र धरती पर, विशेषकर मधुबन में आती हैं,
तो गहरा अपनापन अनुभव करती हैं।
यह जन्मों का रूहानी सम्बन्ध है।
समापन संदेश
हे शान्ति देव आत्माओं —
- वाणी से ऊपर उठो
- अनुभूति की सेवा करो
- अन्तर्मुखी बनो
- एकान्तवासी बनो
🔹 स्मरणीय सूत्र:
एक सेकेण्ड की सच्ची शान्ति
हजार शब्दों से अधिक प्रभावशाली है।1. रूहानी शक्ति सेना किसे कहा गया है?
उत्तर:
रूहानी शक्ति सेना वे आत्माएँ हैं जो शान्ति, अहिंसा और साइलेन्स की शक्ति से विश्व सेवा करती हैं। यह कोई भौतिक सेना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति से कार्य करने वाली शान्तिदूत आत्माओं की सेना है।🔹 मुरली बिंदु:
शान्ति की शक्ति ही इस सेना का श्रेष्ठ शस्त्र है।🔸 उदाहरण:
जैसे ठंडी हवा वातावरण को शीतल कर देती है, वैसे शान्त आत्माएँ अशान्त मनों को स्थिर कर देती हैं।
2. साइलेन्स की शक्ति वाणी की शक्ति से श्रेष्ठ क्यों है?
उत्तर:
वाणी ज्ञान देती है, लेकिन साइलेन्स अनुभूति कराती है।
वाणी दिमाग तक पहुँचती है, जबकि मौन की शक्ति सीधे दिल को स्पर्श करती है।🔹 मुरली बिंदु:
मुख की भाषा → ज्ञान
नयनों की भाषा → अनुभव🔸 उदाहरण:
दीपक की लौ से दूसरा दीपक स्वतः जल जाता है — ऐसे ही शुभ भावना से आत्माएँ बदलती हैं।
3. साइलेन्स सेवा के मुख्य साधन कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
साइलेन्स सेवा के तीन श्रेष्ठ साधन हैं:
1️⃣ शुभ संकल्प
2️⃣ शुभ भावना
3️⃣ नयनों की भाषा🔹 मुरली बिंदु:
मौन स्थिति से आत्माएँ ईश्वरीय अनुभव कर सकती हैं।
4. “चेहरा अनुभव का प्रोजेक्टर है” — इसका क्या अर्थ है?
उत्तर:
जैसे प्रोजेक्टर स्क्रीन पर चित्र दिखाता है, वैसे ही साधक का चेहरा उसकी आंतरिक आध्यात्मिक स्थिति प्रकट करता है।🔹 मुरली बिंदु:
शक्तिशाली चेहरा मौन सेवा का माध्यम है।🔸 उदाहरण:
किसी शांत संत का चेहरा देखते ही मन स्वतः शांत हो जाता है।
5. साइलेन्स की शक्ति कठिन क्यों लगती है?
उत्तर:
क्योंकि वाणी का अभ्यास अधिक है और मौन का अभ्यास कम है।
जो अभ्यास में आता है वह सहज लगता है, जो नहीं आता वह कठिन लगता है।🔹 मुरली बिंदु:
सूक्ष्म शक्ति का प्रभाव स्थूल शक्ति से अधिक होता है।
6. अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति क्या है?
उत्तर:
मन और बुद्धि को किसी एक शक्तिशाली आध्यात्मिक स्थिति में स्थिर कर देना ही एकान्तवासी बनना है।मुख्य स्थितियाँ:
• बीजरूप स्थिति
• लाइट-हाउस / माइट-हाउस स्थिति
• फरिश्ता स्थिति🔹 मुरली बिंदु:
एक मिनट की एकाग्र स्थिति स्वयं और विश्व दोनों को लाभ देती है।उदाहरण:
मोबाइल थोड़ी देर चार्ज होकर भी अच्छा काम करता है — वैसे ही आत्मा मौन से रीचार्ज होती है।
7. क्या एकान्तवासी बनने के लिए अलग से समय निकालना आवश्यक है?
उत्तर:
नहीं। सेवा करते हुए भी बीच-बीच में एक मिनट की मौन स्थिति का अभ्यास किया जा सकता है।🔹 मुरली बिंदु:
महत्व समझो → समय स्वतः मिल जाएगा।
8. ट्रैफिक कंट्रोल अभ्यास का क्या महत्व है?
उत्तर:
ट्रैफिक कंट्रोल मौन विराम का अभ्यास है, जो मन को स्थिर करता है और वातावरण को शुद्ध बनाता है। यह ब्राह्मण जीवन का आवश्यक नियम है।
9. साकार ब्रह्मा बाप का उदाहरण हमें क्या सिखाता है?
उत्तर:
जिम्मेदारियों के बीच भी अन्तर्मुखी और एकान्तवासी रहना सम्भव है।
वे सेवा करते हुए भी तुरन्त मौन स्थिति में स्थित हो जाते थे।🔹 मुरली बिंदु:
फॉलो फादर — जिम्मेदारी बहाना नहीं, प्रेरणा है।
10. भविष्य में साइलेन्स सेवा की आवश्यकता क्यों बढ़ेगी?
उत्तर:
लोग सुनने से थकेंगे, परन्तु अनुभूति चाहेंगे।
तब मौन की शक्ति से ही हृदय परिवर्तन सम्भव होगा।🔹 मुरली बिंदु:
साइलेन्स शक्ति = अनुभूति कराने की शक्ति
11. विशेष सेवा संदेश किन क्षेत्रों के लिए दिया गया?
उत्तर:
पंजाब के लिए:
हिंसक वृत्ति को शान्त बनाना, शान्ति की वायब्रेशन फैलाना, लाइट-हाउस बनना।आंध्र प्रदेश के लिए:
तूफानग्रस्त और भटकी आत्माओं को शान्ति का ठिकाना देना, मन को स्थिर करना।उदाहरण:
जैसे समुद्री लाइटहाउस जहाज़ों को दिशा देता है, वैसे स्थिर मन भटकी आत्माओं को मार्ग देता है।
12. मधुबन में अपनापन क्यों अनुभव होता है?
उत्तर:
क्योंकि यह रूहानी परिवार और जन्मों के आध्यात्मिक सम्बन्धों का मिलन स्थल है।🔹 मुरली संकेत:
पवित्र धरती पर आत्मा को अपना घर जैसा अनुभव होता है।
समापन सूत्र
एक सेकेण्ड की सच्ची शान्ति,
हजार शब्दों से अधिक प्रभावशाली है।
Disclaimer
यह आध्यात्मिक प्रस्तुति ब्रह्माकुमारीज़ की शिक्षाओं एवं अव्यक्त मुरली संदर्भों पर आधारित है। इसका उद्देश्य आध्यात्मिक अध्ययन, आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन मूल्यों को प्रेरित करना है। यह सामग्री किसी भी प्रकार के धार्मिक विवाद, अंधविश्वास या व्यक्तिगत मतभेद को बढ़ावा देने हेतु नहीं है।
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