(01)99% of people do not even know the meaning of the word ‘angel’.

PH.(01)99% लोगों फरिश्ता शब्द का अर्थ ही नहीं जानते

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अध्याय 1 – फरिश्ता कौन है?

मुख्य बिंदु

  • फरिश्ता शरीर नहीं, एक श्रेष्ठ चेतना की अवस्था है।
  • फरिश्ता परिस्थितियों से ऊपर रहने वाला है।

उदाहरण
यदि कोई आपका अपमान करे और फिर भी आपके मन में शांति बनी रहे, तो यही फरिश्ता अवस्था की शुरुआत है।


अध्याय 2 – फरिश्ते के पंख क्या हैं?

मुख्य बिंदु

  • फरिश्ते के पंख भौतिक नहीं होते।
  • वास्तविक पंख हैं – उमंग और उत्साह।

उदाहरण
जिस व्यक्ति के भीतर उत्साह बना रहता है, वह कठिन परिस्थितियों में भी टूटता नहीं।


अध्याय 3 – फरिश्ता किसे कहते हैं?

मुख्य बिंदु

  • क्रोध से ऊपर
  • अपमान से ऊपर
  • माया और व्यर्थ संकल्पों से ऊपर
  • शांति और प्रेम में स्थित

उदाहरण
दो लोगों का व्यापार में नुकसान हुआ—
एक टूट गया, दूसरा सीख लेकर आगे बढ़ गया।
दूसरा व्यक्ति फरिश्ता चेतना के अधिक निकट है।


अध्याय 4 – चेतना का विज्ञान

मुख्य बिंदु

  • मैं शरीर नहीं, आत्मा हूँ।
  • आत्मा की स्मृति से देह-अभिमान कम होता है।
  • देह-अभिमान कम होने से क्रोध भी कम होता है।

अध्याय 5 – कर्मिक अकाउंट

मुख्य बिंदु

  • प्रत्येक आत्मा अपना-अपना पार्ट निभा रही है।
  • जो मिलता है, वह कर्मों का हिसाब भी हो सकता है।
  • प्रतिक्रिया देने के बजाय सीख लेना श्रेष्ठ है।

उदाहरण
यदि कोई आलोचना करे, तो उसे आत्म-परिवर्तन का अवसर समझें।


अध्याय 6 – बिंदी लगाओ और उड़ जाओ

मुख्य बिंदु

  • पुरानी बातों को पकड़कर न बैठें।
  • जो बीत गया, उसे समाप्त करें।
  • मन जितना हल्का होगा, उतनी ऊँची उड़ान होगी।

अध्याय 7 – फरिश्ता जीवन का अभ्यास

प्रतिदिन सुबह स्वयं से कहें—

✔ मैं आत्मा हूँ।
✔ मैं फरिश्ता हूँ।
✔ मैं परिस्थितियों से ऊपर हूँ।
✔ मैं सबको प्रेम देने आया हूँ।
✔ मैं हर आत्मा में विशेषता देखूँगा।

रात्रि में स्वयं से पूछें—
“क्या आज मैं फरिश्ते की तरह जिया?”


Murli Notes (संदर्भ)

महत्वपूर्ण सूचना: नीचे दिए गए मुरली बिंदु विषयगत (thematic) संदर्भ हैं। आपने जिस ट्रांसक्रिप्ट को साझा किया है, उसमें मुरली की तिथि (Date) नहीं दी गई है। इसलिए किसी विशेष दिनांक को प्रमाणित रूप से लिखना उचित नहीं होगा।

ट्रांसक्रिप्ट में उल्लिखित प्रमुख मुरली विषय:

  • फरिश्ता अर्थात उड़ती कला वाला।
  • देह और देह के संबंधों से न्यारा बनना।
  • डबल लाइट अवस्था।
  • पहले स्वयं को बदलो, फिर संसार बदलेगा।
  • हर आत्मा अपना पार्ट एक्यूरेट बजा रही है।
  • बात आई और चली गई—उसे पकड़कर न बैठो।
  • परिस्थितियों के मालिक बनो, गुलाम नहीं।

यदि आपके पास मुरली की वास्तविक तिथि (DD/MM/YYYY) या मूल मुरली का PDF है, तो मैं प्रत्येक बिंदु के साथ उसकी सही तिथि भी जोड़ सकता हूँ।


 Disclaimer

यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ की आध्यात्मिक शिक्षाओं से प्रेरित अध्ययन एवं चिंतन पर आधारित है। इसका उद्देश्य आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करना है।

इस वीडियो में व्यक्त विचार किसी भी धर्म, संप्रदाय, आस्था या परंपरा का विरोध या आलोचना करने के उद्देश्य से प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। “फरिश्ता” शब्द की विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में अलग-अलग व्याख्याएँ मिलती हैं। यह प्रस्तुति आध्यात्मिक अध्ययन के एक दृष्टिकोण को साझा करती है और सभी मान्यताओं का सम्मान करती है।

यह सामग्री केवल शैक्षिक एवं आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए प्रस्तुत की गई है।

फरिश्ता कौन है? – प्रश्नोत्तर (Q&A) | राजयोग के अनुसार फरिश्ता जीवन

प्रश्न 1: फरिश्ता कौन है?

उत्तर:
फरिश्ता वह नहीं जो पंख लगाकर आकाश में उड़ता हो। राजयोग के अनुसार फरिश्ता वह है जो परिस्थितियों, क्रोध, अपमान, अहंकार और माया से ऊपर उठकर शांति, प्रेम और पवित्रता में स्थित रहता है।


प्रश्न 2: क्या हम भी फरिश्ता बन सकते हैं?

उत्तर:
हाँ। जब हम स्वयं को शरीर नहीं बल्कि आत्मा समझकर परमात्मा की श्रीमत पर चलते हैं और अपने संस्कारों को श्रेष्ठ बनाते हैं, तब हम फरिश्ता जीवन का अनुभव कर सकते हैं।


प्रश्न 3: फरिश्ते के पंख क्या हैं?

उत्तर:
फरिश्ते के वास्तविक पंख उमंग और उत्साह हैं। इन्हीं के बल पर वह हर परिस्थिति से ऊपर उठ जाता है।


प्रश्न 4: फरिश्ता परिस्थितियों से कैसे ऊपर रहता है?

उत्तर:
वह परिस्थिति को अपने मन पर हावी नहीं होने देता। वह प्रतिक्रिया देने के बजाय समाधान, शांति और प्रेम को चुनता है।


प्रश्न 5: फरिश्ता बनने की पहली सीढ़ी क्या है?

उत्तर:
पहली सीढ़ी है आत्म-अभिमान—”मैं शरीर नहीं, मैं आत्मा हूँ।”


प्रश्न 6: आत्म-स्मृति से क्रोध क्यों कम हो जाता है?

उत्तर:
जब आत्मा अपने मूल स्वरूप—शांति, प्रेम और पवित्रता—का अनुभव करती है, तब क्रोध का प्रभाव स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है।


प्रश्न 7: फरिश्ता अपमान को कैसे देखता है?

उत्तर:
वह अपमान को व्यक्तिगत आघात नहीं मानता, बल्कि धैर्य, सहनशीलता और आत्म-परिवर्तन का अवसर समझता है।


प्रश्न 8: फरिश्ता व्यर्थ संकल्पों से कैसे बचता है?

उत्तर:
वह अपने मन को सकारात्मक, शुभ और परमात्म-स्मृति में व्यस्त रखता है, जिससे व्यर्थ विचार स्वतः कम हो जाते हैं।


प्रश्न 9: “डबल लाइट” का क्या अर्थ है?

उत्तर:
डबल लाइट का अर्थ है—

  1. देह-अभिमान और बोझ से हल्का होना।
  2. आत्मिक प्रकाश और दिव्य गुणों से भरपूर होना।

प्रश्न 10: फरिश्ता दूसरों की कमियों को क्यों नहीं देखता?

उत्तर:
क्योंकि वह हर आत्मा में कोई-न-कोई विशेषता अवश्य देखता है। विशेषताओं पर ध्यान देने से प्रेम और सम्मान बढ़ता है।


प्रश्न 11: कर्मिक अकाउंट को समझना क्यों आवश्यक है?

उत्तर:
इससे हम समझते हैं कि हर आत्मा अपने कर्मों का हिसाब चुकता कर रही है। इससे शिकायत कम होती है और स्वीकार्यता बढ़ती है।


प्रश्न 12: “बिंदी लगाओ और उड़ जाओ” का क्या अर्थ है?

उत्तर:
बीती हुई बातों, अपमान और नकारात्मक घटनाओं को समाप्त कर आगे बढ़ जाना। मन जितना हल्का होगा, उतनी ऊँची आध्यात्मिक उड़ान होगी।


प्रश्न 13: फरिश्ता बनने के लिए प्रतिदिन कौन-सा अभ्यास करें?

उत्तर:

  • मैं आत्मा हूँ।
  • मैं शांति स्वरूप हूँ।
  • मैं परिस्थितियों से ऊपर हूँ।
  • मैं सबको प्रेम और शुभकामनाएँ देने वाला हूँ।
  • मैं हर आत्मा में विशेषता देखूँगा।

प्रश्न 14: सच्चे फरिश्ते की पहचान क्या है?

उत्तर:
वह मान-अपमान, लाभ-हानि, यश-अपयश और सुख-दुःख में समान रहता है तथा किसी भी परिस्थिति में अपनी शांति और प्रेम नहीं खोता।


प्रश्न 15: इस पूरे अध्ययन का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर:
फरिश्ता वह नहीं जो आसमान में उड़ता है, बल्कि वह है जो जीवन की हर परिस्थिति से ऊपर उठना सीख जाता है। यही राजयोग है और यही फरिश्ता जीवन है।

 

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