AW.(11) 13-03-1969 “प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”
(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)
“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”
आत्म-अभिमानी हो याद की यात्रा में बैठे हो? याद की यात्रा में भी मुख्य किस गुण में स्थित हो? याद की यात्रा में होते हुए भी मुख्य किस गुण स्वरूप हो? इस समय आप का मुख्य गुण कौन सा है? (सभी ने अपना-अपना विचार सुनाया) इस समय तो सभी विशेष प्रेम स्वरूप की स्थिति में है। लेकिन प्रेम के साथ-साथ वर्तमान समय की परिस्थितियों के प्रमाण जितना ही प्रेम स्वरूप उतना ही शक्ति स्वरूप भी होना चाहिए। देवियों के चित्र देखे हैं – देवियों के चित्र में मुख्य क्या विशेषता होती है? अपने चित्रों को कब ध्यान से देखा नहीं हैं? जब देवियों के चित्र बनाते हें। काली के सिवाए बाकी जो भी देवियां हैं उन्हों के नयन हमेशा गीले दिखाते हैं। प्रेम में जैसे डूबे हुए नयन दिखाते हैं और साथ-साथ जो उनका चेहरा आदि बनाते हैं तो उनकी सूरत से ही शक्ति के संस्कार देखने में आते हैं। लेकिन नयनों में प्रेम, दया, शीतलता देखने में आती है। मातापन के प्रेम के संस्कार इन नयनों से दिखाई पड़ते हैं। उन्हों के ठहरने (बैठने) का ढंग वा सवारी अस्त्र-शस्त्र दिखाते हैं, वह शक्ति रूप प्रगट करता है। तो ऐसे ही आप शक्तियों में भी दोनों गुण समान होने चाहिए। जितना शक्ति स्वरूप उतना ही प्रेम स्वरूप। अभी तक दोनों नहीं हैं। कभी प्रेम की लहर में कभी शक्ति रूप में स्थित रहते हो। दोनों ही साथ और समान रहें। यह है शक्तिपन की अन्तिम सम्पूर्णता की निशानी। अभी बापदादा को अपने बच्चों के मस्तक में क्या देखने में आता है? अपने मस्तक में देखा है क्या है? प्रारब्ध देखते हो वा वर्तमान सौभाग्य का सितारा चमकता हुआ देखते हो वा और कुछ? (हरेक ने अपना-अपना विचार सुनाया) तीनों सम्बन्धों से तीनों ही बातें देखने में आती हैं। इसीलिए आपको त्रिशूल सौगात भेजी थी। तीनों ही सितारे दिखाई दे रहे हैं। एक तो भविष्य का, दूसरा वर्तमान सौभाग्य का और तीसरा जो परमधाम में आपकी आत्मा की सम्पूर्ण अवस्था होनी है, वह आत्मा की सम्पूर्ण स्थिति का सितारा। तीनों ही सितारे दिखाई पड़ते हैं। इन तीनों सितारों को देखते रहना। कभी-कभी सितारों के बीच बादल आ जाते हैं। कभी-कभी सितारे जगह भी बदली करते हैं। कभी टूट भी पड़ते हैं। यहां भी ऐसे जगह भी बदली करते हैं। कभी देखो तो बहुत ऊपर, कभी देखो तो बीच में, कभी देखो तो उससे भी नीचे। जगह भी अभी बदली नहीं करनी चाहिए। अगर बदली करो तो आगे भल बढ़ो। नीचे नहीं उतरो। अविनाशी सम्पूर्ण स्थिति में सदैव चढ़ते रहो। ऐसा सितारा बनना है। टूटने की तो यहाँ बात ही नहीं। सभी अच्छे पुरुषार्थी बैठे हुए हैं। बाकी जगह बदली की आदत को मिटाना है।
कुमारियों की रिजल्ट कैसी है? आप अपनी रिजल्ट क्या समझती हो? विशेष किस बात में उन्नति समझती हो? (हरेक ने अपना सुनाया) याद की यात्रा में कमी है। इसलिए इतनी महसूसता नहीं होती। अमृतवेले याद का इतना अनुभव नहीं होता है इसलिए जैसे साकार में यहाँ बाहर खुली हवा में सैर भी कराते थे, लक्ष्य भी देते थे, योग का अनुभव भी कराते थे। इसी रीति जो कुमारियों के निमित्त टीचर्स हैं वह उन्हों को आधा घण्टा एकान्त में सैर करावें। जैसे शुरू में तुम अलग-अलग जाकर बैठते थे, सागर के किनारे, कोई कहाँ, कोई कहाँ जाकर बैठते थे। ऐसी प्रैक्टिस कराओ। छतें तो यहाँ बहुत बड़ी-बड़ी हैं। फिर शाम के समय भी 7 से 7.30 तक यह समय विशेष अच्छा होता है। जैसे अमृतवेले का सतोगुणी टाइम होता है वैसे यह शाम का टाइम भी सतोगुणी है। सैर पर भी इसी टाइम निकलते हैं। उसी समय संगठन में योग कराओ और बीच-बीच में अव्यक्ति रूप से बोलते रहो, कोई का बुद्धियोग यहाँ वहाँ होगा तो फिर अटेन्शन खिंचेगा। योग की सबजेक्ट में बहुत कमी है। भाषण करना, प्रदर्शनी में समझाना यह तो आजकल के स्कूलों की कुमारियों को एक सप्ताह ट्रेनिंग दे दो तो बहुत अच्छा समझा लेंगी। लेकिन यह तो जीवन में अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करना है ना। उस समय ऐसे समझो जैसे कि बापदादा के निमन्त्रण पर जा रहे हैं। जैसे बापदादा सैर करने आते हैं वैसे बुद्धियोग बल से तुम सैर कर सकती हो। जब याद की यात्रा का अनुभव करेंगे तो अव्यक्त स्थिति का प्रभाव आपके नयनों से, चलन से प्रत्यक्ष देखने में आयेगा। फिर उन्हों से माला बनवायेंगे। जैसे शुरू में आप खुद माला बनाती थी ना।
इस ग्रुप को उमंग उत्साह अच्छा है। बाकी एक बात खास ध्यान में रखनी है कि एक दो के संस्कारों को जान करके, एक दो के स्नेह में एक दो से बिल्कुल मिल-जुल कर रहना है। जैसे कोई से विशेष स्नेह होता है तो उनसे कितना मिक्स हो जाते हैं। ऐसे ही सभी को एक दो में मिक्स होना चाहिए। जब कुमारियां ऐसा शो करके दिखायेंगी तब फिर और भी कुमारियाँ सर्विस करने के निमित्त बनेगी। और जो निमित्त बनता है उनको उसका फल भी मिल जाता है। आप शोकेस हो अनेक कुमारियों को उमंग और उत्साह, उन्नति में लाने की। जितना ही उमंग से साकार, निराकार दोनों ने मिलकर यह प्रोग्राम बनाया है उतना ही इसका उजूरा दिखाना है। कई कुमारियों की उन्नति के निमित्त बन सकती हो। अपनी हमजिन्स को गिरने से बचा सकती हो। कुमारियों के साथ बापदादा का काफी स्नेह है। क्योंकि बापदादा परमपवित्र हैं और कुमारियां भी पवित्र हैं। तो पवित्रता, पवित्रता को खींचती है। वर्तमान समय मुख्य विशेषता यही चाहिए, हरेक महारथी का फर्ज है अपना गुण औरों में भरना। जैसे ज्ञान का दान देना होता है वैसे गुणों का भी दान करना चाहिए। जैसे ज्ञान रत्नों का दान करते हो इसलिए महारथी कहलाये जाते हो, वैसे गुणों का दान भी बहुत बड़ा दान है। ज्ञान देना तो सहज है। गुणों का दान देना, इसमें जरा मेहनत है। गुणों का दान करने में सभी महारथियों से नम्बरबन कौन है? जनक। यह गुण उसमें विशेष है। तो एक दो से यह गुण उठाना चाहिए।
(आबू म्युज़ियम की तैयारी के बारे में बापदादा ने पूछा)
दूरांदेशी और विशाल बुद्धि बन म्युज़ियम तैयार करना है। पहले ही भविष्य को सोच समय को सफल करने का गुण धारण करना है और टाइम पर तैयार भी करना है। जल्दी भी हो और सम्पूर्ण भी हो तो कमाल है। अगर कोई भी कमी रही तो उस कमी की तरफ सभी की नज़र जायेगी। ऐसी कमी न हो। सभी के मुख से कमाल है, ऐसा निकलना चाहिए। सारा दैवी परिवार आपका चेहरा म्युज़ियम के दर्पण में दखेंगे।
प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता
प्रेम में शीतलता, शक्ति में दृढ़ता — दोनों का संतुलन ही सम्पूर्णता
मुरली संदर्भ: उपलब्ध पाठ में मुरली की मूल तिथि स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है। इसलिए बिना पुष्टि के कोई तारीख नहीं जोड़ी गई है। यदि यह किसी विशेष अव्यक्त मुरली की है, तो कृपया मूल मुरली की तारीख दें।
प्रेम भी चाहिए, शक्ति भी! | क्या आपकी आत्मा में दोनों गुण समान हैं? | BapDada Spiritual Message
Alternative Titles:
- प्रेम में शीतलता, शक्ति में दृढ़ता — सम्पूर्ण बनने का रहस्य | BapDada
- Love + Power = Complete Soul | प्रेम और शक्ति की समानता का गहरा रहस्य
- नयनों में प्रेम, कर्मों में शक्ति | बापदादा का विशेष संदेश
- क्या आप प्रेम स्वरूप हैं या शक्ति स्वरूप? दोनों बनिए! | Spiritual Wisdom
अध्याय 1 — आत्म-अभिमानी होकर याद की यात्रा
बापदादा आत्माओं को याद की यात्रा में आत्म-अभिमानी स्थिति में रहने की प्रेरणा देते हैं।
मुख्य बिंदु
- मैं शरीर नहीं, आत्मा हूँ।
- याद की यात्रा केवल बैठने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव की यात्रा है।
- याद में रहते हुए अपने मूल गुणों को अनुभव करना है।
उदाहरण
जैसे मोबाइल को चार्ज करने के लिए बिजली से कनेक्शन आवश्यक है, वैसे ही आत्मा को अपनी आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव करने के लिए परमात्म-स्मृति से जुड़ना आवश्यक है।
Murli Note:
याद की यात्रा का अनुभव जीवन में दिखाई देना चाहिए—नयनों, चेहरे और चलन से अव्यक्त स्थिति का प्रभाव प्रकट हो।
अध्याय 2 — प्रेम और शक्ति: दोनों साथ-साथ
वर्तमान परिस्थितियों में केवल प्रेम स्वरूप होना पर्याप्त नहीं है। प्रेम के साथ शक्ति स्वरूप भी आवश्यक है।
प्रेम स्वरूप क्या है?
- दया
- शीतलता
- अपनापन
- स्नेह
- करुणा
शक्ति स्वरूप क्या है?
- दृढ़ता
- निर्णय शक्ति
- सहन शक्ति
- परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता
- स्वयं को कमजोर न होने देना
उदाहरण
एक माँ अपने बच्चे से बहुत प्रेम करती है। लेकिन जब बच्चे को सही मार्ग पर लाने की आवश्यकता होती है, तब वह प्रेम के साथ दृढ़ता भी दिखाती है।
यही है प्रेम + शक्ति का संतुलन।
अध्याय 3 — देवियों के चित्रों का आध्यात्मिक रहस्य
देवियों के चित्रों में एक विशेष संदेश दिखाई देता है।
नयनों में क्या दिखाई देता है?
- प्रेम
- दया
- शीतलता
- मातापन
अस्त्र-शस्त्र क्या दर्शाते हैं?
- शक्ति
- निर्भयता
- विजय
- परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता
इसलिए देवी का स्वरूप केवल शक्ति का प्रतीक नहीं है। उसमें प्रेम की शीतलता और शक्ति की दृढ़ता दोनों दिखाई जाती हैं।
Murli Note
“जितना शक्ति स्वरूप, उतना ही प्रेम स्वरूप।”
दोनों गुणों का साथ-साथ और समान रहना ही शक्तिपन की सम्पूर्णता की निशानी बताया गया है।
अध्याय 4 — मस्तक के तीन सितारे
बापदादा आत्मा के मस्तक पर तीन प्रकार के सितारों की ओर संकेत करते हैं।
पहला सितारा — भविष्य का प्रारब्ध
भविष्य में प्राप्त होने वाले श्रेष्ठ पद और भाग्य की स्मृति।
दूसरा सितारा — वर्तमान सौभाग्य
आज परमात्मा से मिल रहे ज्ञान, योग, सेवा और श्रेष्ठ जीवन का सौभाग्य।
तीसरा सितारा — सम्पूर्ण स्थिति
परमधाम में आत्मा की सम्पूर्ण अवस्था का लक्ष्य।
उदाहरण
जैसे कोई विद्यार्थी आज पढ़ाई करता है, वर्तमान में परीक्षा देता है और भविष्य में अपने परिणाम की कल्पना करता है—वैसे ही आध्यात्मिक जीवन में भी वर्तमान पुरुषार्थ, भविष्य का प्रारब्ध और सम्पूर्ण स्थिति आपस में जुड़े हैं।
अध्याय 5 — स्थिति को नीचे नहीं आने देना
कभी आत्मिक स्थिति ऊँची होती है और कभी परिस्थितियों के कारण नीचे आ जाती है।
मुख्य पुरुषार्थ है:
“नीचे नहीं उतरना है, आगे बढ़ते रहना है।”
स्वयं से प्रश्न करें:
- क्या मेरी स्थिति परिस्थिति के अनुसार बदल जाती है?
- क्या किसी व्यक्ति के व्यवहार से मेरा मन अशान्त हो जाता है?
- क्या मैं अपनी आत्मिक स्थिति को स्थिर रख सकता/सकती हूँ?
Murli Note
सितारे की जगह बदलने के उदाहरण से समझाया गया है कि स्थिति में उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि निरंतर उन्नति चाहिए।
अध्याय 6 — याद की यात्रा में अनुभव की कमी
केवल ज्ञान सुनना और बोलना पर्याप्त नहीं है।
ज्ञान → अनुभव → व्यक्तित्व → सेवा
यह आध्यात्मिक प्रगति की दिशा होनी चाहिए।
उदाहरण
कोई व्यक्ति “शान्ति” शब्द को हजार बार बोल सकता है, लेकिन वास्तविक परीक्षा तब है जब कठिन परिस्थिति में भी वह शांत रह सके।
इसी प्रकार याद की यात्रा का प्रभाव हमारे:
- नयनों में
- चेहरे पर
- वाणी में
- व्यवहार में
- चलन में
दिखाई देना चाहिए।
अध्याय 7 — कुमारियों के लिए विशेष पुरुषार्थ
कुमारियों की उन्नति में विशेष रूप से याद की यात्रा पर ध्यान देने की प्रेरणा दी गई है।
अभ्यास
एकान्त में बैठकर योग का अभ्यास करें।
उदाहरण के लिए:
30 मिनट का शांत योग अभ्यास
- कुछ समय शरीर से न्यारा होने का अभ्यास
- स्वयं को आत्मा अनुभव करना
- परमात्म-पिता की स्मृति
- शान्ति का अनुभव
- प्रेम और शक्ति का अनुभव
- अंत में अपने अनुभव को देखना
शाम का समय भी योग-अभ्यास के लिए उपयोगी बताया गया है।
अध्याय 8 — एक-दूसरे के संस्कारों को समझना
संगठन में रहते हुए सभी के संस्कार समान नहीं होते।
इसलिए आवश्यकता है:
“एक-दूसरे के संस्कारों को जानकर भी प्रेम से मिल-जुलकर रहना।”
उदाहरण
यदि किसी साथी का स्वभाव हमसे अलग है, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय यह सोचें:
“यह आत्मा भी अपने पुरुषार्थ की यात्रा पर है।”
इस दृष्टि से संबंधों में प्रेम और शक्ति दोनों बने रहते हैं।
अध्याय 9 — गुणों का दान भी महान दान है
ज्ञान का दान करना महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल ज्ञान देना पर्याप्त नहीं।
हमें क्या दान करना है?
शान्ति प्रेम
सहनशीलता
नम्रता
खुशी
शक्ति
पवित्रता
उदाहरण
यदि कोई व्यक्ति परेशान होकर आपके पास आता है और बातचीत के बाद उसे शान्ति और हिम्मत मिलती है, तो आपने केवल शब्द नहीं दिए—आपने गुणों का दान किया।
अध्याय 10 — दूरदर्शी और विशाल बुद्धि
किसी भी सेवा या प्रोजेक्ट को करते समय केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य को भी देखना है।
तीन विशेषताएँ:
- दूरदर्शिता
- विशाल बुद्धि
- समय की सफलता
कार्य ऐसा हो कि उसमें:
जल्दी भी हो + सम्पूर्णता भी हो।
यदि कार्य जल्दी हो लेकिन गुणवत्ता कम हो जाए, तो सम्पूर्णता नहीं है।
और यदि बहुत अच्छा कार्य हो लेकिन समय पर पूरा न हो, तो समय की सफलता नहीं हुई।
इसलिए लक्ष्य:
“जल्दी + सम्पूर्ण = कमाल”
आज का मुख्य आध्यात्मिक संदेश
प्रेम हमें जोड़ता है और शक्ति हमें परिस्थितियों में स्थिर रखती है।
प्रेम बिना शक्ति के कभी-कभी कमजोरी बन सकता है और शक्ति बिना प्रेम के कठोरता बन सकती है।
इसलिए श्रेष्ठ स्थिति है:
प्रेम में शीतलता
शक्ति में दृढ़ता
आत्मा में शान्ति
कर्मों में श्रेष्ठता
जितना प्रेम स्वरूप, उतना ही शक्ति स्वरूप।
Murlis Notes — Quick Revision
विषय: प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता
- आत्म-अभिमानी स्थिति में रहना।
- याद की यात्रा का अनुभव करना।
- प्रेम और शक्ति दोनों को समान रूप से धारण करना।
- नयनों में प्रेम, दया और शीतलता।
- कर्म और स्थिति में शक्ति की झलक।
- तीन सितारों—भविष्य, वर्तमान सौभाग्य और सम्पूर्ण स्थिति—की स्मृति।
- अपनी स्थिति को नीचे नहीं आने देना।
- याद की यात्रा को अनुभव में लाना।
- संगठन में प्रेम और मिलन-सारता रखना।
- ज्ञान के साथ गुणों का दान करना।
- दूरदर्शी और विशाल बुद्धि बनना।
- समय को सफल करते हुए कार्य को सम्पूर्ण बनाना।
Self-Check — आज स्वयं से पूछें
1. क्या मैं प्रेम स्वरूप हूँ?
2. क्या मैं शक्ति स्वरूप भी हूँ?
3. क्या मेरी स्थिति परिस्थितियों के अनुसार बदलती है?
4. क्या मेरी याद का प्रभाव मेरे चेहरे और व्यवहार से दिखाई देता है?
5. आज मैंने किसी आत्मा को कौन-सा गुण दिया?
Disclaimer / अस्वीकरण
यह वीडियो आध्यात्मिक चिंतन, अध्ययन और आत्मिक उन्नति के उद्देश्य से बनाया गया है। इसमें प्रस्तुत विचार उपलब्ध मुरली-संदेश के आधार पर सरल भाषा में समझाने और मनन करने के लिए प्रस्तुत किए गए हैं।
यह सामग्री किसी व्यक्ति, संस्था, धर्म या समुदाय की आलोचना करने के उद्देश्य से नहीं है। दर्शक अपने विवेक और व्यक्तिगत आध्यात्मिक समझ के अनुसार इसका अध्ययन करें।
महत्वपूर्ण: उपलब्ध स्रोत-पाठ में मुरली की मूल तिथि स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। इसलिए इस वीडियो विवरण में किसी अपुष्ट तारीख को “मुरली दिनांक” के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। मूल मुरली की सही तारीख उपलब्ध होने पर उसे संदर्भ में जोड़ा जा सकता है।
प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता
प्रश्न एवं उत्तर | Questions & Answers
मुरली संदर्भ: उपलब्ध पाठ के आधार पर
विषय: प्रेम स्वरूप, शक्ति स्वरूप और सम्पूर्ण स्थिति
प्रश्न 1: याद की यात्रा में इस समय मुख्य रूप से किस गुण में स्थित होना है?
उत्तर: इस समय आत्मा को विशेष रूप से प्रेम स्वरूप की स्थिति में रहना है। साथ-साथ वर्तमान परिस्थितियों के प्रमाण शक्ति स्वरूप भी बनना है।
प्रश्न 2: प्रेम के साथ कौन-सा गुण समान रूप से आवश्यक है?
उत्तर: प्रेम के साथ शक्ति का गुण भी समान रूप से आवश्यक है। जितना प्रेम स्वरूप, उतना ही शक्ति स्वरूप होना चाहिए।
प्रश्न 3: देवियों के नयनों में कौन-से गुण दिखाई देते हैं?
उत्तर: देवियों के नयनों में प्रेम, दया, शीतलता और मातापन के संस्कार दिखाई देते हैं।
प्रश्न 4: देवियों के अस्त्र-शस्त्र क्या दर्शाते हैं?
उत्तर: अस्त्र-शस्त्र शक्ति स्वरूप, दृढ़ता और विजय का प्रतीक हैं।
प्रश्न 5: प्रेम और शक्ति दोनों का समान होना किसकी निशानी है?
उत्तर: प्रेम और शक्ति दोनों का साथ-साथ और समान रहना शक्तिपन की अन्तिम सम्पूर्णता की निशानी है।
प्रश्न 6: बापदादा को आत्माओं के मस्तक में कौन-से तीन सितारे दिखाई देते हैं?
उत्तर: तीन सितारे हैं—
- भविष्य का प्रारब्ध
- वर्तमान सौभाग्य
- आत्मा की सम्पूर्ण स्थिति
प्रश्न 7: इन तीनों सितारों को देखते रहने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: ताकि आत्मा को अपने वर्तमान सौभाग्य, भविष्य के श्रेष्ठ प्रारब्ध और सम्पूर्ण स्थिति की निरंतर स्मृति बनी रहे और पुरुषार्थ में उन्नति होती रहे।
प्रश्न 8: स्थिति में “जगह बदलना” किस बात का संकेत है?
उत्तर: यह आत्मिक स्थिति के ऊपर-नीचे होने का संकेत है। लक्ष्य यह है कि स्थिति नीचे न आए, बल्कि निरंतर आगे और ऊपर बढ़ती रहे।
प्रश्न 9: याद की यात्रा में कमी होने पर क्या अनुभव कम हो जाता है?
उत्तर: हाँ। याद की यात्रा में कमी होने से आत्मिक अनुभव और अव्यक्त स्थिति की महसूसता कम हो जाती है।
प्रश्न 10: याद की यात्रा का प्रभाव किस प्रकार दिखाई देना चाहिए?
उत्तर: याद की यात्रा का प्रभाव नयनों, चेहरे, चलन और व्यवहार से दिखाई देना चाहिए।
प्रश्न 11: कुमारियों के लिए विशेष रूप से किस विषय में पुरुषार्थ की आवश्यकता बताई गई है?
उत्तर: कुमारियों को विशेष रूप से याद की यात्रा और योग के अनुभव में उन्नति करने का पुरुषार्थ करना है।
प्रश्न 12: एकान्त में योग-अभ्यास करने का क्या लाभ है?
उत्तर: एकान्त में योग करने से बुद्धियोग को एकाग्र करके परमात्म-स्मृति और अव्यक्त स्थिति का अनुभव करना सहज होता है।
प्रश्न 13: संगठन में एक-दूसरे के संस्कारों के प्रति कैसी भावना रखनी चाहिए?
उत्तर: एक-दूसरे के संस्कारों को समझकर प्रेम, मिलन-सारता और सहयोग से रहना चाहिए।
प्रश्न 14: कुमारियाँ अन्य कुमारियों के लिए क्या निमित्त बन सकती हैं?
उत्तर: वे अन्य कुमारियों को उमंग-उत्साह और उन्नति में लाने तथा उन्हें गिरने से बचाने की निमित्त बन सकती हैं।
प्रश्न 15: ज्ञान के साथ और किस प्रकार का दान करना चाहिए?
उत्तर: ज्ञान के साथ गुणों का दान भी करना चाहिए।
प्रश्न 16: गुणों का दान ज्ञान के दान से किस प्रकार अलग है?
उत्तर: ज्ञान देना अपेक्षाकृत सहज है, लेकिन अपने व्यवहार और जीवन द्वारा गुणों को दूसरों में भरना अधिक पुरुषार्थ मांगता है।
प्रश्न 17: वर्तमान समय महारथियों की मुख्य विशेषता क्या होनी चाहिए?
उत्तर: महारथियों को अपने गुण दूसरों में भरने का फर्ज निभाना चाहिए।
प्रश्न 18: म्यूज़ियम की तैयारी के संदर्भ में कौन-सी बुद्धि धारण करने की प्रेरणा दी गई?
उत्तर: दूरदर्शी और विशाल बुद्धि धारण करके भविष्य को ध्यान में रखते हुए कार्य को समय पर और सम्पूर्ण रूप से पूरा करना है।
प्रश्न 19: किसी भी सेवा या कार्य को सफल बनाने के लिए कौन-सी दो बातें विशेष हैं?
उत्तर: कार्य में जल्दी भी हो और सम्पूर्णता भी हो—इन दोनों का संतुलन ही कमाल है।
प्रश्न 20: इस पूरे संदेश का मुख्य सार क्या है?
उत्तर: आत्मा को प्रेम और शक्ति दोनों गुणों में समान बनना है। प्रेम में शीतलता, दया और अपनापन हो तथा शक्ति में दृढ़ता, स्थिरता और विजय की भावना हो। यही सम्पूर्ण शक्तिस्वरूप बनने का पुरुषार्थ है।
एक लाइन में याद रखने योग्य सार
“जितना प्रेम स्वरूप, उतना ही शक्ति स्वरूप — दोनों गुणों की समानता ही शक्तिपन की अन्तिम सम्पूर्णता की निशानी है।”
आत्म-चेक
आज मैं स्वयं से पूछूँ:
“क्या मेरे नयनों में प्रेम और मेरे कर्मों में शक्ति दिखाई देती है?”
प्रेम और शक्ति, प्रेम का स्वरूप, शक्ति का स्वरूप, बापदादा, मुरली, ब्रह्मा कुमारी, याद की यात्रा, स्वमान, राजयोग, आध्यात्मिक ज्ञान, गुणों का दान, आध्यात्मिक शक्ति, दिव्य स्मृति, ओम शांति, बापदादा, ब्रह्मा कुमारी, मुरली, राजयोग, आध्यात्मिक ज्ञान, प्रेम और शक्ति, आत्म चेतना, ध्यान, पवित्रता, शांति, दिव्य गुण,Love and power, form of love, form of power, BapDada, Murli, Brahma Kumaris, journey of remembrance, self-respect, Rajyoga, spiritual knowledge, donation of virtues, spiritual power, divine memory, Om Shanti, BapDada, Brahma Kumaris, Murli, Rajyoga, Spiritual Knowledge, Love and Power, Soul Consciousness, Meditation, Purity, Peace, Divine Qualities,

