(32)Did the universe begin at some point? Or is it eternal?

विश्व नाटक :-(32)क्या ब्रह्मांड बना? या शाश्वत है।

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय : विश्व नाटक – क्या ब्रह्मांड बना या शाश्वत है?


 भूमिका : अध्ययन का उद्देश्य

हमारे जगदीश भाई जी द्वारा लिखित
“World Drama (विश्व नाटक)” पुस्तक के अध्ययन के क्रम में
आज हम एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर चिंतन कर रहे हैं—

क्या यह ब्रह्मांड कभी बना?
या यह हमेशा से था, है और रहेगा?

यह प्रश्न केवल विज्ञान का नहीं,
यह आत्मिक ज्ञान का भी मूल आधार है।


 चुनौती : सुनने से पहले लोग क्यों पीछे हट जाते हैं?

जब हम किसी को ईश्वरीय ज्ञान सुनाते हैं,
तो उनके मन में पहले से ही—

  • विज्ञान की मान्यताएँ

  • अलग-अलग धर्मों के सिद्धांत

  • किताबों और शिक्षाओं की बातें

बैठी हुई होती हैं।

 इसलिए वे कहते हैं—
“हमारा मानना कुछ और है, हम यह ज्ञान नहीं सुनते।”

यही कारण है कि
पहले उनके विचार समझना ज़रूरी है,
 तभी बाबा का ज्ञान प्रभावी बनता है।


 आज का मुख्य प्रश्न

 क्या गैस के बादलों से तारे बनना संभव है?

विज्ञान की सामान्य धारणा कहती है—

  • अंतरिक्ष में गैस के विशाल बादल थे

  • वे आपस में जुड़ते गए

  • संघनन हुआ

  • और तारा बन गया

लेकिन क्या यह सच में संभव है?


4️⃣ वैज्ञानिक मतभेद : खुद विज्ञान उलझा हुआ है

कुछ वैज्ञानिक कहते हैं—
✔ हाँ, तारे गैस बादलों से बने

कुछ वैज्ञानिक कहते हैं—
 नहीं, यह गणितीय और भौतिक रूप से संभव नहीं

जब विश्व-प्रसिद्ध खगोलशास्त्रियों की गणनाएँ देखी जाती हैं
तो एक चौंकाने वाला सत्य सामने आता है—

गैस बादलों से तारे बनना लगभग असंभव है।


5️⃣ साधारण बुद्धि का उदाहरण

गैस का स्वभाव क्या है?

 गैस हमेशा फैलती है
 गैस कभी स्वयं सिकुड़ती नहीं

 उदाहरण:

जब हम फुटबॉल में हवा भरते हैं,
तो हमें बाहर से प्रेशर देना पड़ता है
हवा अपने आप अंदर नहीं जाती।

 तो प्रश्न यह है—
अंतरिक्ष में गैस को दबाने वाली शक्ति कहाँ से आई?
किसने दबाया?

यहीं विज्ञान स्वयं अटक जाता है।


6️⃣ अनंत प्रतिगमन (Infinite Regression)

जब इस प्रश्न से बचने के लिए
नए सिद्धांत दिए जाते हैं—

तो नए प्रश्न खड़े हो जाते हैं:

  • वह ऊर्जा कहाँ से आई?

  • उस ऊर्जा को किसने बनाया?

  • वह गैस कहाँ से आई?

यह प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती

 इसे कहते हैं — अनंत प्रतिगमन
जिसका न कोई आरंभ है, न अंत।


 मुरली का स्पष्ट उत्तर (BK Spiritual Science)

 साकार मुरली – 12 फरवरी 1969

“सृष्टि अनादि और अनंत है।
ना इसे किसी ने बनाया,
ना कोई इसे मिटा सकता है।”


 साकार मुरली – 15 मार्च 1970

“दुनिया की चीजें बनती नहीं,
नई से पुरानी होती हैं।”


 अव्यक्त मुरली – 18 जनवरी 1971

“मैं रचना नहीं करता,
मैं नवीनता लाता हूँ।”


 तीन अत्यंत स्पष्ट सत्य

1️⃣ ब्रह्मांड का जन्म नहीं हुआ
2️⃣ वह हमेशा से था, है और रहेगा
3️⃣ केवल अवस्था में परिवर्तन होता है

 तारे बनते नहीं
 उनकी अवस्था बदलती है

 परमात्मा की भूमिका – रचयिता या पुनर्निर्माता?

परमात्मा—

 भौतिक पदार्थों को नहीं रचते
 गैस से तारे नहीं बनाते

✔ वे आत्माओं की अवस्था बदलते हैं
✔ वे सतोप्रधानता की स्थापना करते हैं

यही परिवर्तन
 पूरे विश्व नाटक को आगे बढ़ाता है।


 निष्कर्ष : स्पष्ट समाधान

✔ गैस से तारे बनना
वैज्ञानिक रूप से असंभव है

✔ वैज्ञानिक मॉडल
अनंत उलझन में फँस जाता है

✔ आध्यात्मिक ज्ञान
स्पष्ट और पूर्ण समाधान देता है

 परमात्मा भौतिक सृष्टि नहीं रचते
 वे संगम युग पर आकर आत्माओं का रूपांतरण करते हैं

यही है
विश्व नाटक का वास्तविक रहस्य।

प्रश्न 1: इस अध्याय के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर:
इस अध्याय का उद्देश्य यह समझना है कि—

 क्या यह ब्रह्मांड कभी बना है?
 या यह हमेशा से था, है और रहेगा?

यह प्रश्न केवल विज्ञान तक सीमित नहीं है,
बल्कि आत्मिक ज्ञान और विश्व नाटक की समझ का मूल आधार है।
इसी विषय को जगदीश भाई जी की “World Drama” पुस्तक के अध्ययन के माध्यम से स्पष्ट किया जा रहा है।


 प्रश्न 2: जब हम किसी को ज्ञान सुनाते हैं तो लोग पीछे क्यों हट जाते हैं?

उत्तर:
क्योंकि सुनने वाले की बुद्धि में पहले से—

  • विज्ञान की मान्यताएँ

  • अलग-अलग धर्मों के सिद्धांत

  • पुस्तकों और शिक्षाओं की धारणाएँ

बैठी होती हैं।

इसलिए वे कहते हैं—
“हमारा मानना कुछ और है, हम यह ज्ञान नहीं सुनते।”

 यही कारण है कि
पहले उनके विचारों को समझना आवश्यक है,
तभी बाबा का ज्ञान उनकी बुद्धि तक पहुँच सकता है।


 प्रश्न 3: आज का मुख्य वैज्ञानिक प्रश्न क्या है?

उत्तर:
आज का मुख्य प्रश्न है—

क्या गैस के बादलों से तारे बनना संभव है?

विज्ञान की सामान्य धारणा कहती है कि—

  • अंतरिक्ष में गैस के विशाल बादल थे

  • वे आपस में जुड़ते गए

  • संघनन हुआ

  • और तारा बन गया

लेकिन यह धारणा गहराई से जाँचने योग्य है।


 प्रश्न 4: क्या इस विषय पर वैज्ञानिक एकमत हैं?

उत्तर:
नहीं। इस विषय पर स्वयं विज्ञान विभाजित है।

  • कुछ वैज्ञानिक कहते हैं — ✔ हाँ, तारे गैस से बने

  • कुछ वैज्ञानिक कहते हैं —  यह गणितीय और भौतिक रूप से संभव नहीं

जब विश्व-प्रसिद्ध खगोलशास्त्रियों की गणनाएँ देखी जाती हैं,
तो निष्कर्ष निकलता है—

गैस के बादलों से तारे बनना लगभग असंभव है।


 प्रश्न 5: साधारण बुद्धि से यह बात कैसे समझी जा सकती है?

उत्तर:
गैस का स्वभाव है—

 गैस हमेशा फैलती है
 गैस स्वयं कभी सिकुड़ती नहीं

 उदाहरण:

जब हम फुटबॉल में हवा भरते हैं,
तो बाहर से प्रेशर देना पड़ता है
हवा अपने आप अंदर नहीं जाती।

 तो प्रश्न उठता है—
अंतरिक्ष में गैस को दबाने वाली शक्ति कहाँ से आई?
किसने उस गैस को दबाया?

यहीं पर विज्ञान स्वयं उलझ जाता है।


 प्रश्न 6: विज्ञान इस उलझन से कैसे बचने की कोशिश करता है?

उत्तर:
विज्ञान नए-नए सिद्धांत प्रस्तुत करता है,
लेकिन हर नया सिद्धांत—

  • एक नया प्रश्न खड़ा कर देता है

  • समस्या को और जटिल बना देता है

जैसे—

  • वह ऊर्जा कहाँ से आई?

  • उस ऊर्जा को किसने बनाया?

  • वह गैस कहाँ से आई?

यह प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।


 प्रश्न 7: अनंत प्रतिगमन (Infinite Regression) क्या है?

उत्तर:
जब किसी प्रश्न का उत्तर
और अधिक प्रश्नों को जन्म देता जाए
और कोई अंतिम समाधान न मिले—

 इसे कहते हैं अनंत प्रतिगमन (Infinite Regression)

इसका न कोई आरंभ होता है
और न ही कोई अंतिम उत्तर।


 प्रश्न 8: इस विषय पर मुरली क्या स्पष्ट उत्तर देती है?

उत्तर:
मुरली इस विषय पर बिल्कुल स्पष्ट है।

 साकार मुरली – 12 फरवरी 1969

“सृष्टि अनादि और अनंत है।
ना इसे किसी ने बनाया,
ना कोई इसे मिटा सकता है।”


 साकार मुरली – 15 मार्च 1970

“दुनिया की चीजें बनती नहीं,
नई से पुरानी होती हैं।”


 अव्यक्त मुरली – 18 जनवरी 1971

“मैं रचना नहीं करता,
मैं नवीनता लाता हूँ।”


 प्रश्न 9: मुरली के अनुसार ब्रह्मांड के बारे में तीन स्पष्ट सत्य कौन-से हैं?

उत्तर:

 ब्रह्मांड का कभी जन्म नहीं हुआ
 वह हमेशा से था, है और रहेगा
 केवल उसकी अवस्था में परिवर्तन होता है

 तारे बनते नहीं
 उनकी अवस्था बदलती है


 प्रश्न 10: परमात्मा की वास्तविक भूमिका क्या है?

उत्तर:
परमात्मा—

 भौतिक सृष्टि के रचयिता नहीं हैं
 गैस से तारे नहीं बनाते

✔ वे आत्माओं की अवस्था बदलते हैं
✔ वे सतोप्रधानता की स्थापना करते हैं

यही परिवर्तन
 पूरे विश्व नाटक को आगे बढ़ाता है।


 प्रश्न 11: इस अध्याय का अंतिम निष्कर्ष क्या है?

उत्तर:

✔ गैस से तारे बनना
वैज्ञानिक रूप से असंभव है

✔ वैज्ञानिक मॉडल
अनंत उलझन में फँस जाता है

✔ आध्यात्मिक ज्ञान
स्पष्ट और पूर्ण समाधान देता है

 परमात्मा भौतिक सृष्टि नहीं रचते
 वे संगम युग पर आकर आत्माओं का रूपांतरण करते हैं

यही है

Disclaimer:
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी आध्यात्मिक ज्ञान, साकार एवं अव्यक्त मुरलियों तथा आध्यात्मिक तर्कों पर आधारित है।
इसका उद्देश्य किसी वैज्ञानिक, धार्मिक या वैचारिक मान्यता का खंडन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।
दर्शक अपने विवेक से विचार करें।

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