(18)09-03-1985 “Love for the Father and service – this is the lifeblood of a Brahmin’s life.”

09-अव्यक्त मुरली-(18)09-03-1985 “बाप और सेवा से स्नेह – यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है”

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

YouTube player

03-1985 “बाप और सेवा से स्नेह – यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है”

आज बापदादा सभी बच्चों के पुरूषार्थ की लगन को देख रहे थे। हर एक बच्चा अपने-अपने हिम्मत-उल्हास से आगे बढ़ते जा रहे हैं। हिम्मत भी सबमें हैं, उमंग-उल्हास भी सबमें हैं। हर एक के अन्दर एक ही श्रेष्ठ संकल्प भी है कि हमें बापदादा के समीप रत्न, नूरे रत्न, दिल तख्तनशीन दिलाराम के प्यारे बनना ही है। लक्ष्य भी सभी का सम्पन्न बनने का है। सभी बच्चों के दिल का आवाज़ एक ही है कि स्नेह के रिटर्न में हमें समान और सम्पन्न बनना है और इसी लक्ष्य प्रमाण आगे बढ़ने में सफल भी हो रहे हैं। किसी से भी पूछो क्या चाहते हो? तो सभी का एक ही उमंग का आवाज है कि सम्पूर्ण और सम्पन्न बनना ही है। बापदादा सभी का यह उमंग-उत्साह देख, श्रेष्ठ लक्ष्य देख हर्षित होते हैं और सभी बच्चों को ऐसे एक उमंग-उत्साह की, एक मत की ऑफरीन देते हैं कि कैसे एक बाप, एक मत, एक ही लक्ष्य और एक ही घर में, एक ही राज्य में चल रहे हैं वा उड़ रहे हैं। एक बाप और इतने योग्य वा योगी बच्चे, हर एक, एक दो से विशेषता में विशेष आगे बढ़ रहे हैं। सारे कल्प में ऐसा न बाप होगा न बच्चे होंगे जो कोई भी बच्चा उमंग-उत्साह में कम न हो। विशेषता सम्पन्न हो। एक ही लगन में मगन हो। ऐसा कभी हो नहीं सकता। इसलिए बापदादा को भी ऐसे बच्चों पर नाज़ है और बच्चों को बाप का नाज़ है। जहाँ भी देखो एक ही विशेष आवाज सभी की दिल अन्दर है – बाबा और सेवा! जितना बाप से स्नेह है उतना सेवा से भी स्नेह है। दोनों स्नेह हरेक के ब्राह्मण जीवन का जीयदान हैं। इसी में ही सदा बिजी रहने का आधार मायाजीत बना रहा है।

बापदादा के पास सभी बच्चों के सेवा के उमंग उत्साह के प्लैन्स पहुँचते रहते हैं। प्लैन सभी अच्छे ते अच्छे हैं। ड्रामा अनुसार जिस विधि से वृद्धि को प्राप्त करते आये हो वह आदि से अब तक अच्छे ते अच्छा ही कहेंगे। अभी सेवा के वा ब्राह्मणों के विजयी रत्न बनने के वा सफलता के बहुत वर्ष बीत चुके हैं। अभी गोल्डन जुबली तक पहुँच गये हो। गोल्डन जुबली क्यों मना रहे हो? क्या दुनिया के हिसाब से मना रहे हो वा समय के प्रमाण विश्व को तीव्रगति से सन्देश देने के उमंग से मना रहे हो? चारों ओर बुलन्द आवाज द्वारा सोई हुई आत्माओं को जगाने का साधन बना रहे हो! जहाँ भी सुनें, जहाँ भी देखें वहाँ चारों ओर यही आवाज गूँजता हुआ सुनाई दे कि समय प्रमाण अब गोल्डन एज सुनहरी समय, सुनहरी युग आने का सुनहरी सन्देश द्वारा खुशखबरी मिल रही है। इस गोल्डन जुबली द्वारा गोल्डन एज के आने की विशेष सूचना वा सन्देश देने के लिए तैयारी कर रहे हो। चारों ओर ऐसी लहर फैल जाए कि अब सुनहरी युग आया कि आया। चारों ओर ऐसा दृश्य दिखाई दे जैसे सवेरे के समय अंधकार के बाद सूर्य उदय होता है तो सूर्य का उदय होना और रोशनी की खुशखबरी चारों ओर फैलना। अंधकार भूल रोशनी में आ जाते। ऐसे विश्व की आत्मायें जो दु:ख अशान्ति के समाचार सुन सुन, विनाश के भय में भयभीत हो, दिलशिकस्त हो गई हैं, नाउम्मींद हो गई हैं ऐसे विश्व की आत्माओं को इस गोल्डन जुबली द्वारा शुभ उम्मीदों का सूर्य उदय होने का अनुभव कराओ। जैसे विनाश की लहर है वैसे सतयुगी सृष्टि के स्थापना की खुशखबरी की लहर चारों ओर फैलाओ। सभी के दिल में यह उम्मीद का सितारा चमकाओ। क्या होगा, क्या होगा के बजाए समझें कि अब यह होगा। ऐसी लहर फैलाओ। गोल्डन जुबली गोल्डन एज के आने की खुशखबरी का साधन है। जैसे आप बच्चों को दु:खधाम देखते हुए भी सुखधाम सदा स्वत: ही स्मृति में रहता है और सुखधाम की स्मृति दु:खधाम भुला देती है। और सुखधाम वा शान्तिधाम जाने की तैयारियों में खोये हुए रहते हो। जाना है और सुखधाम में आना है। जाना है और आना है – यह स्मृति समर्थ भी बना रही है और खुशी-खुशी से सेवा के निमित्त भी बना रही है। अभी लोग ऐसे दु:ख की खबरें बहुत सुन चुके हैं। अब इस खुशखबरी द्वारा दु:खधाम से सुखधाम जाने के लिए खुशी-खुशी से तैयारी करो उन्हों में भी यह लहर फैल जाए कि हमें भी जाना है। नाउम्मीद वालों को उम्मीद दिलाओ। दिलशिकस्त आत्माओं को खुशखबरी सुनाओ। ऐसे प्लैन बनाओ जो विशेष समाचार पत्रों में वा जो भी आवाज फैलाने के साधन हैं – एक ही समय एक ही खुशखबरी वा सन्देश चारों ओर सभी को पहुँचे। जहाँ से भी कोई आवे तो यह एक ही बात सभी को मालूम पड़े। ऐसे तरीके से चारों ओर एक ही आवाज हो। नवीनता भी करनी है। अपने नॉलेजफुल स्वरूप को प्रत्यक्ष करना है। अभी समझते हैं कि शान्त स्वरूप आत्मायें हैं। शान्ति का सहज रास्ता बताने वाले हैं। यह स्वरूप प्रत्यक्ष हुआ भी है और हो रहा है। लेकिन नॉलेजफुल बाप की नॉलेज है तो यही है। अब यह आवाज हो। जैसे अब कहते हैं शान्ति का स्थान है तो यही है। ऐसे सबके मुख से यह आवाज निकले कि सत्य ज्ञान है तो यही है। जैसे शान्ति और स्नेह की शक्ति अनुभव करते हैं वैसे सत्यता सिद्ध हो, तो और सब क्या हैं, वह सिद्ध हो ही जायेगा। कहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अब वह सत्यता की शक्ति कैसे प्रत्यक्ष करो, वह विधि क्या अपनाओ जो आपको कहना न पड़े। लेकिन वह स्वयं ही कहें कि इससे यह सिद्ध होता है कि सत्य ज्ञान, परमात्म ज्ञान, शक्तिशाली ज्ञान है तो यही है। इसके लिए विधि फिर सुनायेंगे। आप लोग भी इस पर सोचना। फिर दूसरे बारी सुनायेंगे। स्नेह और शान्ति की धरनी तो बन गई है ना। अभी ज्ञान का बीज पड़ना है तब तो ज्ञान के बीज का फल स्वर्ग के वर्से के अधिकारी बनेंगे।

बापदादा सभी देखते-सुनते रहते हैं। क्या-क्या रूह-रूहान करते हैं। अच्छा प्यार से बैठते हैं, सोचते हैं। मथनी अच्छी चला रहे हैं। माखन खाने लिए मंथन तो कर रहे हैं। अभी गोल्डन जुबली का मंथन कर रहे हैं। शक्तिशाली माखन ही निकलेगा। सबके दिल में लहर अच्छी है। और यही दिल के उमंगों की लहर वायुमण्डल बनाती है। वायुमण्डल बनते-बनते आत्माओं में समीप आने की आकर्षण बढ़ती जाती है। अभी जाना चाहिए, देखना चाहिए यह लहर फैलती जा रही है। पहले था कि पता नहीं क्या है। अभी है कि अच्छा है, जाना चाहिए। देखना चाहिए। फिर आखरीन कहेंगे कि यही हैं। अभी आपके दिल का उमंग उत्साह उन्हों में भी उमंग पैदा कर रहा है। अभी आपकी दिल नाचती है। उन्हों के पांव चलने शुरू होते हैं। जैसे यहाँ कोई बहुत अच्छा डांस करता है तो दूर बैठने वालों का भी पांव चलना शुरू हो जाता है। ऐसा उमंग उत्साह का वातावरण अनेकों के पांव को चलाने शुरू कर रहा है। अच्छा।

सदा अपने को गोल्डन दुनिया के अधिकारी अनुभव करने वाले, सदा अपनी गोल्डन एजड स्थिति बनाने के उमंग-उत्साह में रहने वाले, सदा रहमदिल बन सर्व आत्माओं को गोल्डन एज का रास्ता बताने की लगन में रहने वाले, सदा बाप के हर एक गोल्डन वर्शन को जीवन में धारण करने वाले, ऐसे सदा बापदादा के दिल तख्तनशीन, सदा स्नेह में समाये हुए विजयी रत्नों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।

आस्ट्रेलिया के भाई-बहिनों से अव्यक्त बापदादा की मुलाकात:-

सारा ग्रुप समीप आत्माओं का है ना? बापदादा सदा बच्चों को समीप रत्न के रूप में देखते हैं। समीप रहना अर्थात् जैसा बाप वैसे बच्चे। ऐसे अनुभव करते हो? हर कदम में फॉलो फादर करने वाले हो! बापदादा आस्ट्रेलिया निवासियों को सदा आगे रखते हैं क्योंकि जितना स्वयं प्राप्त करते हैं उतना औरों को देने का उमंग उत्साह अच्छा रहा है। सेवा का उमंग अच्छा है। जिसका सेवा से प्यार है – यह सिद्ध करता है बाप से भी प्यार है। शक्तियाँ भी सेवा के उमंग में हैं तो पाण्डव भी। पाण्डव भी आज्ञाकारी हैं तो शक्तियाँ भी कमाल करने वाली हैं। शक्तियों को आगे बढ़ने का समय है क्योंकि आधाकल्प दुनिया वालों ने शक्तियों को नीचे किया इसलिए बाप संगमयुग पर चांस दे रहा है। तो अभी शक्तियाँ क्या करेंगी? बापदादा को सेवा के आदि का समय याद आ रहा है, शक्तियों का झुण्ड बहुत अच्छा लवली रूप रहा है। अभी भी सदा ही आगे चांस लेने वाली बनो। पाण्डव तो स्वत: उनके साथ हैं क्योंकि दोनों के बिना कोई कार्य चलता नहीं।]

बाप और सेवा से स्नेह – यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है

(अव्यक्त बापदादा मुरली – 09 मार्च 1985)


 1. बापदादा की दृष्टि – बच्चों के पुरुषार्थ की लगन

आज बापदादा सभी बच्चों के उमंग-उत्साह, हिम्मत और लगन को देख रहे हैं।
हर बच्चा अपने-अपने पुरुषार्थ से आगे बढ़ रहा है।

मुख्य भाव

  • लक्ष्य सभी का एक – संपूर्ण और सम्पन्न बनना

  • संकल्प एक – बापदादा के दिलतख्तनशीन बनना

  • दिल की आवाज एक – “बाबा और सेवा”

 मुरली नोट

स्नेह के रिटर्न में समान और सम्पन्न बनना – यही सच्चा ब्राह्मण लक्ष्य है।


 2. एक बाप – एक मत – एक लक्ष्य

बापदादा बच्चों को देखकर हर्षित होते हैं कि

  • एक बाप

  • एक मत

  • एक लक्ष्य

  • एक घर और एक राज्य

सभी बच्चे अपनी-अपनी विशेषताओं में आगे बढ़ रहे हैं।
कल्प में ऐसा न बाप होगा, न ऐसे बच्चे।

 उदाहरण

जैसे एक ही सूर्य से अनेक किरणें निकलती हैं,
वैसे एक बाप से अनेक योग्य, योगी आत्माएँ प्रकट होती हैं।

 मुरली नोट

बाप को बच्चों पर नाज़ है और बच्चों को बाप का नाज़ है।


 3. बाप और सेवा – दो स्नेह, एक जीवन

जहाँ भी देखो, एक ही आवाज है –
“बाबा और सेवा”

  • जितना बाप से स्नेह

  • उतना ही सेवा से स्नेह

यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है।

 क्यों जीयदान?

  • सेवा में बिजी रहने से मायाजीत स्थिति

  • व्यर्थ से स्वतः सुरक्षा

  • आत्मा सदा हल्की और खुशहाल

 मुरली नोट

सेवा में बिजी रहना ही माया से बचने का सहज साधन है।


 4. गोल्डन जुबली – गोल्डन एज की खुशखबरी

बापदादा पूछते हैं –
गोल्डन जुबली क्यों मना रहे हो?

  • केवल उत्सव के लिए?

  • या विश्व को तीव्र गति से सन्देश देने के लिए?

 सन्देश

जैसे अंधकार के बाद सूर्य उदय होता है,
वैसे ही अब सतयुग की सुनहरी सुबह आने वाली है।

 मुरली नोट

गोल्डन जुबली – गोल्डन एज के आगमन की विशेष सूचना है।


 5. नाउम्मीद को उम्मीद देने की सेवा

आज विश्व की आत्माएँ

  • दुख

  • अशान्ति

  • विनाश के समाचार सुन-सुनकर
    नाउम्मीद हो गई हैं।

बापदादा कहते हैं –
 अब खुशखबरी की लहर फैलाओ।

 उदाहरण

जैसे एक अच्छी खबर पूरे गाँव में फैल जाती है,
वैसे ही सुखधाम की खबर चारों ओर फैलनी चाहिए।

 मुरली नोट

“क्या होगा?” के बजाय अब यह निश्चय हो – “अब यह होगा”


 6. सत्य ज्ञान की प्रत्यक्षता

अब तक लोग कहते हैं –

  • यहाँ शान्ति मिलती है

  • यहाँ स्नेह मिलता है

अब अगला चरण है –
“सत्य ज्ञान है तो यही है”

 विधि

इतना प्रत्यक्ष बनो कि

  • कहना न पड़े

  • लोग स्वयं कहें –
    यही सत्य ज्ञान है

 मुरली नोट

सत्यता सिद्ध होगी तो असत्य स्वतः ही सिद्ध हो जाएगा।


 7. उमंग-उत्साह का वायुमण्डल

आपके दिल का उमंग
दूसरों के दिलों को आकर्षित कर रहा है।

 उदाहरण

जैसे कोई अच्छा नृत्य करता है तो
दूर बैठे लोगों के भी पाँव चलने लगते हैं।

वैसे ही

  • आपकी दिल की खुशी

  • दूसरों के कदम ईश्वरीय मार्ग पर चला रही है।


 8. वरदान और नमस्ते

सदा स्वयं को

  • गोल्डन दुनिया का अधिकारी

  • गोल्डन स्थिति में रहने वाला

  • रहमदिल सेवाधारी

अनुभव करने वाले
विजयी रत्नों को
बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।


 विशेष मुलाकात – ऑस्ट्रेलिया के भाई-बहन

बापदादा कहते हैं –

  • सेवा से प्यार = बाप से प्यार

  • शक्तियाँ और पाण्डव – दोनों आवश्यक

अब शक्तियों के आगे बढ़ने का समय है।
संगमयुग पर बाप ने विशेष चांस दिया है।

 मुरली नोट

शक्तियाँ और पाण्डव – दोनों के बिना कोई कार्य पूर्ण नहीं होता।

अब शक्तियों के आगे बढ़ने का समय है – संगमयुग का विशेष चांस”

(अव्यक्त बापदादा मुरली – 09 मार्च 1985)


 प्रश्न 1: बापदादा क्यों कहते हैं कि “अब शक्तियों के आगे बढ़ने का समय है”?

✅ उत्तर:

बापदादा कहते हैं कि आधा कल्प संसार में शक्तियों (नारी शक्ति) को दबाया गया, नीचे रखा गया।
इसलिए संगमयुग पर परमात्मा स्वयं विशेष चांस देकर शक्तियों को आगे बढ़ा रहे हैं —
ताकि वे अपनी आत्मिक शक्ति, पवित्रता और सेवा-भाव से विश्व परिवर्तन में अग्रणी बनें।

मुरली भाव

जो आत्माएँ लंबे समय तक वंचित रहीं, उन्हें संगमयुग पर बाप समान बनने का अवसर मिलता है।


 प्रश्न 2: संगमयुग को “विशेष चांस” क्यों कहा गया है?

✅ उत्तर:

संगमयुग वह समय है जहाँ

  • आत्मा को बाप का प्रत्यक्ष साथ मिलता है

  • समान बनने की पढ़ाई मिलती है

  • विश्व सेवा का श्रेष्ठ अवसर मिलता है

यह समय फिर कल्प में नहीं आता।
इसलिए बापदादा कहते हैं —
“यह चांस गंवाया तो फिर पछताना पड़ेगा।”

मुरली नोट

संगमयुग = परिवर्तन का समय + वरदानों का समय


 प्रश्न 3: क्या केवल शक्तियाँ ही आगे बढ़ें, पाण्डवों की भूमिका क्या है?

 उत्तर:

बापदादा स्पष्ट करते हैं कि
शक्तियाँ और पाण्डव – दोनों आवश्यक हैं।

  • शक्तियाँ — संवेदनशीलता, सहनशीलता, पवित्रता की शक्ति

  • पाण्डव — साहस, स्थिरता और संरक्षण की शक्ति

दोनों मिलकर ही
ईश्वरीय कार्य को सफल बनाते हैं।

मुरली नोट

दोनों के बिना कोई भी महान कार्य पूर्ण नहीं होता।


 प्रश्न 4: सेवा से प्यार को बाप से प्यार क्यों कहा गया है?

✅ उत्तर:

क्योंकि

  • सेवा, बाप के दिल का कार्य है

  • जो सेवा से प्रेम करता है, वह वास्तव में बाप की भावना को समझता है

इसलिए बापदादा कहते हैं —
सेवा से प्यार = बाप से सच्चा प्यार

मुरली भाव

सेवा केवल कार्य नहीं, प्रेम की पहचान है।


 प्रश्न 5: शक्तियाँ आगे बढ़ें — इसका व्यावहारिक अर्थ क्या है?

✅ उत्तर:

आगे बढ़ने का अर्थ केवल मंच पर आना नहीं, बल्कि

  • आत्मिक स्थिति में स्थिर रहना

  • निर्णय शक्ति में मजबूत बनना

  • सेवा में निर्भीक और निश्चयी होना

  • स्वयं उदाहरण बनकर चलना

यही सच्ची शक्ति है।

मुरली नोट

शक्ति = आत्मिक स्थिति + पवित्र संकल्प + सेवा भाव


 प्रश्न 6: आज की ब्राह्मण आत्मा को इससे क्या सीख मिलती है?

✅ उत्तर:

आज हर ब्राह्मण आत्मा को यह निश्चय करना है कि

  • मैं संगमयुग के चांस को व्यर्थ नहीं जाने दूँगा

  • शक्ति बनकर, पाण्डव बनकर — दोनों रूप में सेवा करूंगा

  • बाप और सेवा — दोनों से स्नेह रखूँगा

मुरली सार

बाप और सेवा से स्नेह — यही ब्राह्मण जीवन का जीयदान है।

डिस्क्लेमर :

यह वीडियो/लेख ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की अव्यक्त बापदादा मुरली (09-03-1985) पर आधारित आध्यात्मिक व्याख्या है।
इसका उद्देश्य आत्मिक जागृति, सकारात्मक जीवन दृष्टि और सेवा भाव को प्रोत्साहित करना है।
यह किसी भी धर्म, व्यक्ति या संस्था की आलोचना हेतु नहीं है।
सभी आध्यात्मिक अनुभूतियाँ व्यक्तिगत साधना पर आधारित होती हैं।

बाप और सेवा से स्नेह, ब्राह्मण जीवन का जीयदान, अव्यक्त बापदादा मुरली, 09 मार्च 1985 मुरली, बापदादा मुरली हिंदी, ब्रह्माकुमारी अव्यक्त मुरली, ब्रह्माकुमारी मुरली हिंदी, बाबा और सेवा, ब्राह्मण जीवन रहस्य, ब्रह्माकुमारी ज्ञान, ईश्वरीय सेवा, संगमयुग विशेष चांस, संगमयुग मुरली, शक्तियों के आगे बढ़ने का समय, नारी शक्ति ईश्वरीय सेवा, शक्तियाँ और पाण्डव, पाण्डव शक्ति, विश्व सेवा ब्रह्माकुमारी, गोल्डन जुबली मुरली, गोल्डन एज खुशखबरी, सतयुग स्थापना, सुखधाम की खबर, नाउम्मीद को उम्मीद, सत्य ज्ञान प्रत्यक्षता, परमात्म ज्ञान, शान्ति और स्नेह, उमंग उत्साह सेवा, मायाजीत स्थिति, ब्राह्मण जीवन लक्ष्य, बाप समान बनना, दिलतख्तनशीन बनना, विजयी रत्न, ईश्वरीय ज्ञान हिंदी,Love for the Father and service, the life-giving gift of Brahmin life, Avyakt BapDada Murli, 09 March 1985 Murli, BapDada Murli Hindi, Brahma Kumari Avyakt Murli, Brahma Kumari Murli Hindi, Baba and service, secret of Brahmin life, Brahma Kumari knowledge, divine service, Confluence Age special chance, Confluence Age Murli, time for Shaktis to move forward, women power divine service, Shaktis and Pandavas, Pandava power, world service Brahma Kumaris, Golden Jubilee Murli, Golden Age good news, establishment of Satyayuga, news of Sukhdham, hope for the hopeless, revelation of true knowledge, divine knowledge, peace and love, zeal and enthusiasm, service, Maya-conquering stage, Brahmin life goal, to become like the Father, to become seated on the heart-throne, victorious jewel, divine knowledge Hindi,