5-3 What powers does the soul receive through remembering God through Raja Yoga?

J.D.BK 5-3 ईश्वर स्मृति राज योग से आत्मा को कौन सी शक्तियां मिलती है?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय : ईश्वर स्मृति

राजयोग से आत्मा को मिलने वाली दिव्य शक्तियाँ


 भूमिका (Introduction)

राजयोग से आत्मा को कौन-सी शक्तियाँ मिलती हैं?
क्या ये शक्तियाँ शरीर को मिलती हैं या आत्मा को?
और यदि आत्मा शक्ति-स्वरूप है, तो आज मनुष्य भीतर से इतना कमजोर क्यों अनुभव करता है?

आज के इस अध्याय में हम जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज के आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर
ईश्वर स्मृति और राजयोग द्वारा प्राप्त होने वाली दिव्य शक्तियों पर गहन मंथन करेंगे।


  जैन और बीके स्पिरिचुअल साइंस – एक साझा दृष्टि

जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज — दोनों ही यह स्वीकार करते हैं कि
आत्मा चेतन, शक्ति-स्वरूप और स्वतंत्र सत्ता है।

अंतर केवल समझाने की भाषा और अनुभव की विधि का है।


 शक्ति की आवश्यकता क्यों है?

पूरी दुनिया सदियों से एक ही प्रार्थना करती आई है —
“हे दाता! हमें शक्ति दो।”

लेकिन प्रश्न है —
कौन-सी शक्ति?

  • क्या शरीर की शक्ति? 
    (अगर शरीर की शक्ति चाहिए होती तो भोजन और व्यायाम पर्याप्त होते)

  • या कोई बाहरी साधन की शक्ति?

असल में मनुष्य को चाहिए आत्मिक शक्ति।


 उदाहरण से समझें

आज मनुष्य के पास:

  • साधन हैं

  • तकनीक है

  • सुविधाएँ हैं

लेकिन फिर भी:

  • तनाव बढ़ रहा है

  • भय बढ़ रहा है

  • निर्णय शक्ति कमजोर होती जा रही है

 इसका कारण है — आंतरिक शक्ति की कमी।


 जैन दर्शन की मान्यता

जैन दर्शन कहता है:

आत्मा स्वयं शक्ति-स्वरूप है।

फिर प्रश्न उठता है:

अगर आत्मा शक्ति-स्वरूप है,
तो आज आत्मा कमजोर क्यों अनुभव करती है?


 उत्तर – आत्म स्मृति की कमी

मुख्य कारण:
आत्म विस्मृति (Self Forgetfulness)

जैसे ही आत्मा:

  • अपने असली स्वरूप को भूलती है

  • देह के आकर्षण में आती है

  • और अपने को शरीर समझने लगती है

 उसी क्षण शक्ति का पतन शुरू हो जाता है।


🪞 सबसे बड़ी भूल कहाँ हुई?

हमने कहना शुरू किया —

  • “मैं यह शरीर हूँ” 
    जबकि सत्य है —

  • “मैं आत्मा हूँ, यह शरीर मेरा साधन है”

शरीर दुख का कारण नहीं है,
शरीर को ‘मैं’ मान लेना दुख का कारण बन गया।


 समाधान क्या है?

यदि हमें दुख से मुक्त होना है,
तो फिर से लौटना होगा —

आत्म स्मृति में
ईश्वर स्मृति में


 ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान का स्पष्ट सिद्धांत

ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान कहता है:
 आत्मा कभी शक्ति खोती नहीं है।
 आत्मा केवल परमात्मा से कट जाती है।

यानी समस्या आत्मा में नहीं,
कनेक्शन में है।


 ईश्वर स्मृति = शक्ति का स्रोत

जब आत्मा:

  • स्वयं को आत्मा समझती है

  • और परमात्मा को शक्ति-स्रोत मानकर स्मृति में रहती है

 तब राजयोग के माध्यम से आत्मा में
दिव्य शक्तियाँ स्वतः प्रवाहित होने लगती हैं।


 Murli Reference (Proper Date)

 मुरली – 7 अगस्त 2024

“बच्चे, तुम शक्तिशाली आत्माएँ हो।
कमजोरी तुम्हारी नहीं है,
कमजोरी परमात्मा से कनेक्शन टूटने की है।”


 निष्कर्ष (Conclusion)

  • शक्ति शरीर को नहीं, आत्मा को चाहिए

  • आत्मा शक्ति-स्वरूप है, कमजोर नहीं

  • कमजोरी का कारण है — आत्म विस्मृति

  • समाधान है — ईश्वर स्मृति और राजयोग

 जैसे ही आत्मा परमात्मा से जुड़ती है,
 शक्ति स्वतः अनुभव में आने लगती है।

प्रश्न 1:

राजयोग से आत्मा को कौन-सी शक्तियाँ मिलती हैं?

उत्तर:

राजयोग से आत्मा को शारीरिक नहीं, आत्मिक और दिव्य शक्तियाँ मिलती हैं।
ये शक्तियाँ मन, बुद्धि और संस्कारों को सशक्त बनाती हैं, जिससे आत्मा स्थिर, निर्भीक और समर्थ बनती है।


 प्रश्न 2:

क्या राजयोग की शक्तियाँ शरीर को मिलती हैं या आत्मा को?

उत्तर:

राजयोग की शक्तियाँ सीधे आत्मा को मिलती हैं।
शरीर तो केवल एक साधन है, लेकिन शक्ति का अनुभव आत्मा करती है।
जब आत्मा शक्तिशाली होती है, तब उसका प्रभाव शरीर और कर्मों में दिखाई देता है।


 प्रश्न 3:

यदि आत्मा शक्ति-स्वरूप है, तो आज मनुष्य भीतर से कमजोर क्यों अनुभव करता है?

उत्तर:

क्योंकि आज मनुष्य आत्म स्मृति में नहीं, बल्कि देह स्मृति में जी रहा है
आत्मा शक्ति खोती नहीं, लेकिन अपने स्रोत से कनेक्शन खो बैठती है, इसलिए कमजोरी का अनुभव होता है।


 प्रश्न 4:

जैन दर्शन और ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान आत्मा के विषय में क्या समान मान्यता रखते हैं?

उत्तर:

दोनों ही यह स्वीकार करते हैं कि:

  • आत्मा चेतन है

  • आत्मा शक्ति-स्वरूप है

  • आत्मा स्वतंत्र सत्ता है

अंतर केवल इतना है कि
जैन दर्शन इसे दर्शन और साधना से समझाता है,
जबकि ब्रह्मा कुमारीज इसे ईश्वर स्मृति और राजयोग के अनुभव से स्पष्ट करता है।


 प्रश्न 5:

मनुष्य को शक्ति की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

उत्तर:

क्योंकि मनुष्य आज:

  • तनाव में है

  • भय में है

  • निर्णय नहीं ले पा रहा

यह सब आंतरिक शक्ति की कमी के लक्षण हैं।
इसीलिए सदियों से मनुष्य प्रार्थना करता आया है —
“हे दाता! हमें शक्ति दो।”


 प्रश्न 6:

क्या मनुष्य को शरीर की शक्ति चाहिए?

उत्तर:

नहीं।
अगर शरीर की शक्ति चाहिए होती, तो भोजन और व्यायाम पर्याप्त होते।
लेकिन वास्तविक आवश्यकता है —
आत्मिक शक्ति,
जो मन को स्थिर, बुद्धि को स्पष्ट और संस्कारों को शुद्ध बनाए।


 प्रश्न 7:

आज साधन और तकनीक बढ़ने के बावजूद मनुष्य कमजोर क्यों हो रहा है?

उत्तर:

क्योंकि:

  • बाहरी साधन बढ़े हैं

  • लेकिन आंतरिक शक्ति घटती जा रही है

साधन सुविधा देते हैं,
लेकिन सहनशक्ति, निर्णय शक्ति और धैर्य केवल आत्मिक शक्ति से आते हैं।


 प्रश्न 8:

जैन दर्शन के अनुसार आत्मा कमजोर कैसे हो सकती है?

उत्तर:

जैन दर्शन कहता है कि आत्मा मूल रूप से कमजोर नहीं है।
कमजोरी का अनुभव तब होता है, जब आत्मा:

  • अपने असली स्वरूप को भूल जाती है

  • देह और विषय-विकारों में उलझ जाती है

यही स्थिति ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान में आत्म विस्मृति कहलाती है।


 प्रश्न 9:

आत्म विस्मृति क्या है?

उत्तर:

आत्म विस्मृति का अर्थ है —
अपने को आत्मा न समझकर शरीर समझ लेना।

जैसे ही आत्मा कहने लगती है —
“मैं यह शरीर हूँ”
उसी क्षण शक्ति का पतन शुरू हो जाता है।


 प्रश्न 10:

सबसे बड़ी भूल कहाँ हुई?

उत्तर:

सबसे बड़ी भूल यह हुई कि हमने:

  • “मैं आत्मा हूँ” कहना छोड़ दिया

  • और “मैं यह शरीर हूँ” कहना शुरू कर दिया

शरीर दुख का कारण नहीं है,
लेकिन शरीर को ही ‘मैं’ मान लेना दुख का कारण बन गया।


 प्रश्न 11:

दुखों से मुक्त होने का समाधान क्या है?

उत्तर:

समाधान है —

  • आत्म स्मृति में लौटना

  • और ईश्वर स्मृति को जीवन में लाना

यही राजयोग की मूल शिक्षा है।


 प्रश्न 12:

ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान आत्मा की शक्ति के विषय में क्या स्पष्ट करता है?

उत्तर:

ब्रह्मा कुमारीज ज्ञान कहता है:

  • आत्मा कभी शक्ति खोती नहीं

  • आत्मा केवल परमात्मा से कट जाती है

अर्थात समस्या आत्मा में नहीं,
कनेक्शन में है।


 प्रश्न 13:

ईश्वर स्मृति को शक्ति का स्रोत क्यों कहा गया है?

उत्तर:

क्योंकि जब आत्मा:

  • स्वयं को आत्मा समझती है

  • और परमात्मा को सर्वोच्च शक्ति-स्रोत मानकर स्मृति में रहती है

तो राजयोग के माध्यम से
दिव्य शक्तियाँ स्वतः आत्मा में प्रवाहित होने लगती हैं।


 प्रश्न 14:

इस सत्य को मुरली कैसे स्पष्ट करती है?

उत्तर:

मुरली – 7 अगस्त 2024

“बच्चे, तुम शक्तिशाली आत्माएँ हो।
कमजोरी तुम्हारी नहीं है,
कमजोरी परमात्मा से कनेक्शन टूटने की है।”


 प्रश्न 15:

इस अध्याय का मुख्य निष्कर्ष क्या है?

उत्तर:

  • शक्ति शरीर को नहीं, आत्मा को चाहिए

  • आत्मा मूल रूप से शक्तिशाली है

  • कमजोरी का कारण आत्म विस्मृति है

  • समाधान है ईश्वर स्मृति और राजयोग

 जैसे ही आत्मा परमात्मा से जुड़ती है,
 शक्ति स्वतः अनुभव में आने लगती है।

Disclaimer (YouTube के लिए उपयुक्त)

यह वीडियो प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की आध्यात्मिक शिक्षाओं पर आधारित है।
इस प्रस्तुति का उद्देश्य जैन धर्म, किसी भी अन्य धर्म, दर्शन या वैज्ञानिक मत की आलोचना करना नहीं है।

यह सामग्री केवल

  • आत्म-चिंतन

  • आध्यात्मिक अध्ययन

  • और जीवन को गहराई से समझने
    के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

दर्शक इसे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण करें।

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