Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below
| 24-05-26 |
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
”अव्यक्त-बापदादा”
|
रिवाइज: 28-02-10 मधुबन |
देहभान के ‘मैं-मैं’ की होली जलाकर परमात्म संग के रंग की होली मनाओ
आज होलीएस्ट बाप अपने होली बच्चों से होली मनाने आये हैं। चारों ओर के बच्चे दूर दूर से स्नेह में दिल में समा रहे हैं। बापदादा चारों ओर के बच्चों के मस्तक में भाग्य का सितारा चमकता हुआ देख रहे हैं। इतना बड़ा भाग्य सारे कल्प में और किसका भी नहीं होता। इस संगमयुग के प्राप्ति के आधार से आप बच्चे ही इतने श्रेष्ठ पवित्र बनते हो जो भविष्य में आप डबल पवित्र बनते हो। आत्मा भी पवित्र और शरीर भी पवित्र। सारे कल्प में चक्र लगाके देखो कोई धर्मात्मा भी डबल पवित्र नहीं बना है। आप बच्चे डबल पवित्र भी बनते हो और डबल पवित्रता की निशानी डबल ताजधारी बनते हो।
आज होली सब मनाते हैं लेकिन आप इस समय जो डबल होली अर्थात् पवित्र बनते हो उसका यादगार उत्सव के रूप में होली मनाते हैं। आपके ही हर कदम-कदम का, जीवन का महत्व उत्सव के रूप में मनाते हैं। आप इस संगम पर हर दिन, हर कदम उमंग और उत्साह में रहते हो तो आपके उमंग-उत्साह का यादगार यह उत्सव के रूप में मनाते हैं। क्यों उमंग-उत्साह रहता? क्योंकि आप परमात्मा के संग के रंग की होली मनाते हो। तो आपका हर कदम उत्सव के रूप में मनाते हैं। अभी होली में पहले जलाते हैं फिर मनाते हैं। आप भी संगम पर अभी अपने पुराने संस्कार स्वभाव को योग अग्नि में जलाते हो क्योंकि अपने पुराने संस्कार को जलाने के बिना परमात्म संग का रंग लग नहीं सकता, परमात्म मिलन हो नहीं सकता। तो आपने योग अग्नि में संस्कारों को जलाया फिर परमात्म संग के रंग में रंगे। तो आजकल जलाते भी हैं और रंग भी लगाते हैं लेकिन आपके अध्यात्मिक रूप को स्थूल रूप दे दिया है। वह स्थूल आग जलाते, स्थूल रंग लगाते क्योंकि अभी बॉडीकान्सेस वृत्ति है। आप होली बनते हो वह होली मनाते हैं। सारे कल्प में कोई भी अध्यात्मिक होली मनाके डबल होली नहीं बनें। तो आप सभी जो भी जहाँ से आये हो तो परमात्म संग की होली में आये हो। परमात्म संग की होली मनाने आये हैं। आप होली के लिए कहते हो कि होली अर्थात् जो बात हो चुकी वह हो ली। तो ड्रामा अनुसार जो बीत चुका उसको कहते हैं हो ली, बीती सो बीती। कोई भी व्यर्थ बात चित पर नहीं लाते हैं, हो चुकी, ऐसी होली मनाते रहते हो ना। आप सभी ने होली अर्थात् पवित्र बनने का पूर्ण पुरुषार्थ कर पवित्रता को धारण किया है तभी भविष्य में आपको डबल पवित्रता की निशानी डबल ताज दिखाते हैं।
आज के दिन आप हर एक बच्चा क्या जलाके जायेंगे? बापदादा ने देखा कि जन्मदिन पर जो बाप ने होमवर्क दिया था – क्रोध को जन्मदिन पर जन्मदिन की गिफ्ट दे दो। तो उसकी रिजल्ट बापदादा के पास कुछ बच्चों की आज पहुंची है। बापदादा ने देखा कि कहाँ-कहाँ बच्चों ने अटेन्शन दिया है। आप सबने भी अपनी रिजल्ट निकाली होगी तो जो भी आज बैठे हैं, उन्होंने अपनी रिजल्ट निकाली, जिन्होंने अपनी रिजल्ट में कन्ट्रोल किया और सफलता का अनुभव किया वह हाथ उठाओ। सफलता को प्राप्त किया! बड़ा हाथ उठाओ। टीचर्स हाथ उठाओ, फारेनर्स हाथ उठाओ। (सभी ने उठाया) अच्छा। मुबारक हो। इससे आप सबने अपने में हिम्मत रखी और हिम्मत का फल प्राप्त हो सकता है, यह अनुभव किया। तो क्या अगर इस अनुभव को आगे भी लक्ष्य रखके बार-बार चेकिंग करते और आगे बढ़ाने चाहे तो समझते हो कि सम्भव है? सम्भव है? आगे हो सकता है? वह हाथ उठाओ। अच्छा। हो सकता है? टीचर्स हो सकता है? पाण्डव हो सकता है? अच्छा। सम्भव हो सकता है, नहीं, होना ही है इसकी ताली बजाओ। अच्छा। अभी तो ज्यादा दिन नहीं हुए हैं लेकिन अभी हर तीन मास के बाद आज से तीन मास अटेन्शन रख क्रोध का टेन्शन खत्म कर सकते हो? कर सकते हो? वह हाथ उठाओ। अच्छा। यह तो खुशखबरी बहुत अच्छी है, क्यों? क्रोध का कारण क्या होता है? क्रोध का बीज क्या होता है? आप सदा अपना भविष्य स्वरूप सामने रखो, आपका भविष्य स्वरूप कितना सजा सजाया हर्षित चेहरा है और बापदादा को देखो उसमें भी ब्रह्मा बाप को सामने लाओ, क्यों? शिव बाप तो है ही निराकार लेकिन ब्रह्मा बाप आपके सदृश्य साकार रूपधारी, आपके सदृश्य जिम्मेवारी का ताजधारी फिर भी सदा मुस्कराता हुआ, खुशनुमा चेहरा क्योंकि इन विकारों पर विजय प्राप्त कर, शरीर होते कार्य करते आपके आगे एक्जैम्पुल रहा। ब्रह्मा बाप से ज्यादा आपकी जिम्मेवारी है? ब्रह्मा बाप की जिम्मेवारी के आगे आपकी जिम्मेवारी तो कुछ भी नहीं है। और लास्ट तक देखा कर्मातीत वायब्रेशन में अव्यक्त फरिश्ते बन गये। तो अभी बापदादा को दी हुई सौगात वापस तो नहीं लेंगे ना! बापदादा समझते हैं कि कारोबार में आते हैं तो कहाँ-कहाँ ऐसे सरकमस्टांश बनते हैं, कईयों ने रिजल्ट में भी लिखा कि तेज आवाज हो जाता है। मूड में थोड़ी तेजी आ जाती है। लेकिन जब ऐसी बातें सामने आती हैं तब ही तो विजयी बनने का चांस है। बातों का काम है आना लेकिन आपका नॉलेज है बातों से पार हो विजयी बनना। तो पसन्द है? क्रोध को विदाई देंगे, सदा के लिए या तीन मास के लिए? कितना समय की हिम्मत है? जो समझते हैं सदा के लिए क्रोध जीत बनना मुश्किल नहीं है, होना ही है वह हाथ उठाओ। होना ही है। अच्छा। बापदादा खुश है क्यों? आपके लास्ट जन्म में भी आपकी महिमा क्या गाते हैं? आपके देवता रूप के आगे आपकी महिमा सर्वगुण सम्पन्न, सम्पूर्ण निर्विकारी यह गाते हैं। तो आपका यह बनने का पार्ट अभी संगमयुग का ही गायन है।
बापदादा के दिल की विशेष आशा है बतायें? कांध हिलाओ बतायें? बापदादा अभी से, अभी से हर एक बच्चे को सदा खिला हुआ गुलाब का पुष्प देखने चाहते हैं। खुशनसीब, खुशनुमा। बातों का काम है आना, यह भी समझ लो। बातें आयेंगी लेकिन अपना लक्ष्य लक्षण में लाना है। घबराना नहीं। तो जैसे अभी कहते हैं कि ब्रह्माकुमारियां पवित्रता का बहुत पाठ पढ़ाती हैं, ऐसे प्रसिद्ध हो कि ब्रह्माकुमारियां क्रोधमुक्त बनाती हैं क्योंकि क्रोध से मुक्त होना सब चाहते हैं। तनाव होता है ना! तो तनाव पैदा होता है इसलिए सभी चाहते हैं लेकिन उन्हों को विधि नहीं आती है। जैसे पवित्र बनना असम्भव समझते थे लेकिन अभी आप सबके अनुभव के आधार से समझते हैं कि हो सकता है। ऐसे अभी इस वर्ष यह लहर फैलाओ कि क्रोध जीत बनना हो सकता है, कोई मुश्किल नहीं है। ऐसा एक्जैम्पुल के अनुभव प्रैक्टिकल में स्टेज पर लाओ। बापदादा ने देखा है कि बहुत बच्चे कार्य करते भी क्रोध जीत बने हैं। ऐसे दृष्टान्त आपके परिवार में, ब्राह्मण परिवार में बने हैं। तो इस वर्ष क्या करेंगे? होली मनाने आये हो ना! तो होली में क्या करते हैं? कुछ जलाते हैं ना! तो आज की होली में आप क्या जलायेंगे? क्रोध का तो कर लिया, इसको पक्का करेंगे! लेकिन बापदादा ने देखा कि तनाव में आने का कारण देह अभिमान का ‘मैं’ शब्द है। देहभान का ‘मैं’, एक है मैं आत्मा हूँ – यह ‘मैं’ है, लेकिन देहभान का मैं शब्द अभिमान का भी होता, अपमान का भी होता और दिलशिकस्त का भी मैं-मैं नीचे गिराता। तो आज क्रोध जीत में आगे बढ़ने के लिए बॉडी-कॉन्सेस का मैं इसको योग अग्नि में जलाओ। अनेक मैं-मैं को जलाओ और एक मैं आत्मा हूँ, इस ‘मैं’ शब्द को पक्का करो और बाकी ‘मैं’ आज योग अग्नि में जलाके जाओ। अनेक मैं है ना। तो आज जलाने की होली मनायेंगे! क्योंकि क्रोध का कारण तनाव बहुत होता है। तो इस ‘मैं’ को समाप्त करने के लिए आज अपने अन्दर संकल्प लो। जलाना है क्योंकि यह भी तो बोझ है ना। तो ट्रेन में जाओ, प्लेन में जाओ तो यह बोझ यहाँ जलाके जाओ। जला सकते हो? जो समझते हैं हिम्मते बच्चे मददे बाप साथ है ही, तो विजय भी साथ है, जो यह सोचते हैं कि मुझे विजयी बनना ही है, वह हाथ उठाओ। बनना ही है अच्छा। जो आज वी.आई.पी आये हैं, वह हाथ उठा रहे हैं। जो वी.आई.पी आये हैं उठो, खड़े हो जाओ। हाथ उठा रहे हैं। ताली तो बजाओ। विजयी बनेंगे? देखो। जो भी विजयी बनेंगे, उस एक-एक को माला पहना रहे हैं। मुबारक हो, मुबारक हो। अच्छा। अभी जो भी वी.आई.पी आये हैं, सब हिम्मत वाले हैं इसीलिए बापदादा वरदान दे रहे हैं। इस समय आप जो भी एक जन्म के लिए किसी भी कार्य में वी.आई.पी बने हो लेकिन बापदादा आप हिम्मत वाले बच्चों को, अब वी.आई.पी नहीं कहेंगे, बच्चे कहेंगे। बापदादा यह वरदान देते हैं, गैरन्टी देते हैं कि आप सभी 21 जन्म वी.आई.पी बनेंगे। यह इलेक्शन, सेलेक्शन नहीं चलेगी। तो सभी सिर्फ एक बात छोड़ना नहीं, जैसे अभी सम्बन्ध-सम्पर्क में आये हो ऐसे इस ब्राह्मण परिवार के कनेक्शन को छोड़ना नहीं। जितना कनेक्शन रखेंगे उतना रिलेशन पक्का होगा और बाप का वरदान प्राप्त कर ही लेंगे। तो मंजूर है? कनेक्शन रखना मंजूर है? हाथ उठाओ। अच्छा। (बापदादा ने फूलों की माला उठाकर आगे बढ़ाई) यह माला आप सभी पहनना।
आप सभी नये बच्चे वा रियल गोल्ड बच्चे सदा बाप के आज्ञाकारी हो ना! तो आज इस मैं को जलाके ही जाना। जो पहले बारी आये हैं वह उठो। अच्छा। बापदादा पहले बारी आने वाले बच्चों को पहले बारी आने की पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं। लेकिन जैसे अभी पहले बारी आये हो ऐसे ही पहला नम्बर, फर्स्ट डिवीजन में आना, पहला नम्बर में तो फिक्स है लेकिन फर्स्ट डिवीजन में आयेंगे, यह हिम्मत है? हाथ उठाओ जिसमें हिम्मत है। देखो, सोच के उठाओ। अच्छा। तो लक्ष्य रखो कि हम लास्ट आये हैं लेकिन फास्ट जायेंगे क्योंकि समय का कोई भरोसा नहीं। अभी जो करना है वह तीव्र पुरुषार्थी बन कर लो क्योंकि बहुत समय का पुरुषार्थ आप सबको थोड़े समय में पूरा करना पड़ेगा। तो हिम्मत है? है हिम्मत? हाथ उठाओ। देखो आपका फोटो निकल रहा है। बापदादा ऐसे हिम्मत वालों को मुबारक देते हैं कि हिम्मत आपकी मदद बाप की। लेकिन हिम्मत नहीं हारना। अपने भाग्य का सितारा सदा चमकाते रहना क्योंकि इस जन्म का तीव्र पुरुषार्थ, पुरुषार्थ नहीं तीव्र पुरुषार्थ अनेक जन्मों का भाग्य बनाने वाला है इसलिए हिम्मत कभी नहीं हारना। बातें आयेंगी लेकिन बात महावीर नहीं है, आप सर्वशक्तिवान के बच्चे हो, आपके आगे बात क्या है! बात आती है और चली जाती है। जो चली जाने वाली है उसके पीछे अपनी तकदीर नहीं गंवाना। अच्छा बैठो। तो सभी को बाप-दादा स्नेह से मुबारक दे रहे हैं, किस बात की? हिम्मत रखी है और बापदादा हर एक बच्चे के हिम्मत के संकल्प पर खुश है। तो होली मनाई? जलाने की होली तो मनाई और परमात्म संग के रंग की होली भी मनाई। जलाई भी मनाई भी।
अभी बापदादा सभी बच्चों को एक ड्रिल कराने चाहते हैं क्योंकि चारों ओर की परिस्थितियां हैं, कहाँ कोई परिस्थिति है, कहाँ कोई परिस्थिति है, ऐसे चारों ओर की परिस्थितियों के बीच में आप एक सेकण्ड में एकाग्र हो सकते हो? ऐसी प्रैक्टिस स्वयं में अनुभव करते हो? या समझो जिस समय आपको कारणे अकारणे किसी बात के प्रति व्यर्थ संकल्प का तूफान आ गया है, ऐसे समय पर आप अपने मन बुद्धि को एकाग्र कर सकते हो? यह एकाग्रता के शक्ति की ड्रिल समय पर करके देखी है? अगर ऐसे समय पर एक सेकण्ड में एकाग्रता की शक्ति कार्य में नहीं आती तो आगे चलकर ऐसी परिस्थिति बार-बार आयेगी। तो आज बापदादा सेकण्ड में फुलस्टॉप अर्थात् एकाग्र स्थिति के अभ्यास पर अटेन्शन खिंचवाना चाहते हैं क्योंकि प्रकृति ने अपने भिन्न-भिन्न रंग दिखाने शुरू कर दिये हैं। चारों ओर क्या-क्या हो रहा है, वह आप सब ज्यादा जानते हो। तो ऐसे मन-बुद्धि को भटकाने वाली बातें आनी ही हैं, तो अभी यह प्रैक्टिस करो कि मन को बुद्धि को आप एक सेकण्ड में परमधाम में टिका सकते हो! अभी अपने को फरिश्ते रूप में टिकाओ। अभी अपने को मैं ब्राह्मण मास्टर सर्वशक्तिवान स्थिति में हूँ, इस मास्टर सर्वशक्तिवान स्थिति में स्थित हो जाओ। (बापदादा ने ड्रिल कराई) ऐसी प्रैक्टिस सारे दिन में जब भी समय मिले, बार-बार मन को एकाग्र करके देखो। जो चाहो, जहाँ चाहो वहाँ मन एकाग्र हो। पुरुषार्थ एक मिनट लगे, एक सेकण्ड में फुलस्टॉप क्योंकि ऐसा समय हलचल का अभी तैयारी कर रहा है इसलिए माइण्ड कन्ट्रोल – मन मेरा है, मैं मन नहीं, मेरा मन है तो मेरे के ऊपर मैं का कन्ट्रोल है? यह ड्रिल बहुत आवश्यक है।
सभी जो भी आये हैं, बापदादा को एक-एक बच्चा प्यारा है। क्यों? कैसा भी है लेकिन बापदादा हर बच्चे को कोटों में कोई आत्मा देखते हैं। चाहे पुरुषार्थ में कमजोर है लेकिन बाप का प्यारा बना है। दिल से कहते हैं मेरा बाबा इसलिए बाप का भी अति प्यारा है। सिर्फ बापदादा एक बात फिर से याद दिला रहा है कि अपना चेहरा सदा खुशनुमा, खुशी में चमकता रहे। बातें चली जायें लेकिन खुशी नहीं जाये। संगमयुग की खुशी परमात्म गिफ्ट है। तो होली अर्थात् कोई ऐसी बातें आवें तो याद करना कि होली मनाके आये हैं, जो होली बात हो ली, खुशी नहीं जाये। परमात्म सौगात, खजाना खुशी है।
बापदादा सदा कहते हैं यह स्लोगन सदा याद रहे – खुश रहना है और खुशी बांटनी है। जितना बांटेंगे उतनी बढ़ेगी और खुशनुमा चेहरा चलते फिरते ऑटोमेटिक सेवा करता रहेगा। जो भी देखेगा वह यही सोचेगा क्या मिला है। तो आज होली की दिलखुश मिठाई है खुशी। सबने खाई? सदा खाते रहना। इसमें कोई बीमारी नहीं होगी। अच्छा।
बापदादा फिर से इशारा दे रहे हैं कि स्व पुरुषार्थ, स्व पुरुषार्थ से स्व उन्नति और सेवा की उन्नति दोनों तरफ अटेन्शन देते रहो, आगे बढ़ते रहो और सदा उड़ते रहो, उड़ाते रहो। अच्छा।
चारों ओर के बापदादा के स्नेह में समाये हुए याद और सेवा में आगे से आगे बढ़ने और बढ़ाने वाले, अमृतवेला सबसे अच्छा पावरफुल बनाने वाले और मन्सा सेवा द्वारा रहमदिल, दयालु, कृपालु बन आत्माओं को कुछ न कुछ अंचली देने वाले, अपनी इस विधि को आगे बढ़ाते चलो। बापदादा देखते हैं कि हर एक बच्चा उमंग-उत्साह में रहता है लेकिन अभी एडीशन क्या करो? सदा शब्द एडीशन करो। कभी-कभी शब्द डिक्शनरी से निकाल दो। तो चारों ओर के बच्चों ने होली भी मनाई, जलाई भी और संग का रंग भी लगाया, बीती सो बीती की होली भी मनाई, इसीलिए बापदादा चारों ओर के बच्चों को सम्मुख दिल में देख रहे हैं। बापदादा की पदम पदम गुणा यादप्यार और नमस्ते।
| वरदान:- | सदा फरमान के तिलक को धारण कर फर्स्ट प्राइज लेने वाले फरमानवरदार भव जिन बच्चों के मस्तक पर फरमानबरदारी की स्मृति का तिलक लगा हुआ है, एक संकल्प भी फरमान के बिना नहीं करते उन्हें फर्स्ट प्राइज़ प्राप्त होती है। जैसे सीता को लकीर के अन्दर बैठने का फरमान था, ऐसे हर कदम उठाते हुए, हर संकल्प करते हुए बाप के फरमान की लकीर के अन्दर रहो तो सदा सेफ रहेंगे। कोई भी प्रकार के रावण के संस्कार वार नहीं करेंगे और समय भी व्यर्थ नहीं जायेगा। |
| स्लोगन:- | किसी से भी लगाव है तो वह लगाव पुरुषार्थ में अलबेला अवश्य बनायेगा। |
ये अव्यक्त इशारे – सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
सदा एक की याद में रहकर एकरस अवस्था बनाओ तो वन-वन और वन में आ जायेंगे। बाहर रहते हुए भी यही पाठ पक्का करो – “सी फादर, फालो फादर”, तो कभी किसी परिस्थिति में डगमग नहीं होंगे, ब्रह्मा बाप के सामने कितनी भी बातें आई लेकिन बातों को न देख एक बाप को ही देखा इसलिए नम्बरवन बना। तो फालो फादर।
देहभान के ‘मैं-मैं’ की होली जलाकर परमात्म संग के रंग की होली मनाओ
आध्यात्मिक प्रश्नोत्तर (Questions & Answers)
प्रश्न 1: संगमयुग में बच्चों का सबसे बड़ा भाग्य क्या है?
उत्तर: संगमयुग में बच्चों का सबसे बड़ा भाग्य यह है कि वे डबल पवित्र बनते हैं — आत्मा भी पवित्र और शरीर भी पवित्र। इसी कारण भविष्य में डबल ताजधारी बनते हैं।
प्रश्न 2: वास्तविक आध्यात्मिक होली क्या है?
उत्तर: वास्तविक आध्यात्मिक होली अपने पुराने संस्कारों, स्वभाव और देह-अभिमान को योग-अग्नि में जलाकर परमात्मा के प्रेम और याद के रंग में रंग जाना है।
प्रश्न 3: परमात्म संग का रंग कब लगता है?
उत्तर: जब आत्मा अपने पुराने संस्कारों और विकारों को योग अग्नि में समर्पित कर देती है, तब परमात्म संग का सच्चा रंग लगता है।
प्रश्न 4: “होली” शब्द का आध्यात्मिक अर्थ क्या बताया गया है?
उत्तर: “हो ली” अर्थात जो बीत गया वह बीत गया। पुरानी बातों को समाप्त कर आगे बढ़ना ही सच्ची होली मनाना है।
प्रश्न 5: क्रोध का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: क्रोध का मुख्य कारण देह-अभिमान और “मैं-मैं” की भावना है। जब व्यक्ति स्वयं को शरीर समझता है, तब तनाव और क्रोध उत्पन्न होता है।
प्रश्न 6: बापदादा ने किस “मैं” को समाप्त करने की प्रेरणा दी?
उत्तर: देहभान के “मैं” को समाप्त करने और “मैं आत्मा हूँ” इस आत्म-अभिमानी स्मृति को पक्का करने की प्रेरणा दी।
प्रश्न 7: क्रोध जीत बनने का सहज उपाय क्या बताया?
उत्तर: अपने भविष्य स्वरूप को सामने रखना, ब्रह्मा बाबा को फॉलो करना और हर परिस्थिति में मुस्कराते रहना — यही क्रोध जीत बनने का सहज उपाय है।
प्रश्न 8: बापदादा बच्चों को किस रूप में देखना चाहते हैं?
उत्तर: बापदादा हर बच्चे को सदा खिला हुआ गुलाब का फूल, खुशनसीब और खुशनुमा चेहरे वाला देखना चाहते हैं।
प्रश्न 9: “खुश रहना और खुशी बाँटना” क्यों आवश्यक है?
उत्तर: क्योंकि खुशी परमात्मा की सौगात है। जितनी खुशी बाँटेंगे उतनी बढ़ती जाएगी और स्वतः सेवा होती रहेगी।
प्रश्न 10: एक सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाने का क्या अर्थ है?
उत्तर: परिस्थिति, व्यर्थ संकल्प या हलचल के समय मन-बुद्धि को तुरंत एकाग्र कर परमधाम या आत्मस्थिति में स्थित हो जाना ही “एक सेकण्ड में फुलस्टॉप” है।
प्रश्न 11: बापदादा ने कौन-सी विशेष ड्रिल करने को कहा?
उत्तर: मन और बुद्धि को एक सेकण्ड में जहाँ चाहें वहाँ एकाग्र करने की शक्ति का अभ्यास करने को कहा।
प्रश्न 12: “मन मेरा है, मैं मन नहीं” — इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: आत्मा मन की मालिक है। मन आत्मा को नहीं चलाए, बल्कि आत्मा मन को कंट्रोल करे।
प्रश्न 13: बापदादा ने वी.आई.पी बच्चों को कौन-सा वरदान दिया?
उत्तर: यदि वे ब्राह्मण परिवार का कनेक्शन बनाए रखेंगे तो 21 जन्मों तक वी.आई.पी अर्थात श्रेष्ठ आत्माएँ बनेंगे।
प्रश्न 14: “हम लास्ट आये हैं लेकिन फास्ट जायेंगे” का क्या अर्थ है?
उत्तर: जो बच्चे अभी ज्ञान में आये हैं, वे भी तीव्र पुरुषार्थ द्वारा शीघ्र उन्नति कर सकते हैं।
प्रश्न 15: संगमयुग की सबसे बड़ी सौगात क्या है?
उत्तर: संगमयुग की सबसे बड़ी सौगात परमात्म खुशी है, जिसे कोई परिस्थिति छीन नहीं सकती।
प्रश्न 16: फरमानबरदार बच्चे कौन होते हैं?
उत्तर: जो हर संकल्प और हर कर्म बाप की श्रीमत और फरमान के अनुसार करते हैं, वे फरमानबरदार बच्चे हैं।
प्रश्न 17: “सी फादर, फालो फादर” का क्या अर्थ है?
उत्तर: ब्रह्मा बाबा के जीवन को देखकर उनके समान चलना, परिस्थितियों को नहीं बल्कि केवल एक बाप को देखना।
प्रश्न 18: किस लगाव से पुरुषार्थ में अलबेलापन आता है?
उत्तर: किसी व्यक्ति, वस्तु या देह संबंधी आकर्षण का लगाव पुरुषार्थ में अलबेला बना देता है।
प्रश्न 19: बापदादा ने “कभी-कभी” शब्द के बारे में क्या कहा?
उत्तर: “कभी-कभी” शब्द को डिक्शनरी से निकाल दो और हर समय उमंग-उत्साह में रहने का अभ्यास करो।
प्रश्न 20: इस मुरली का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: देह-अभिमान, क्रोध और पुराने संस्कारों को योग अग्नि में जलाकर आत्म-अभिमानी बनो, खुश रहो, खुशी बाँटो और परमात्म संग के रंग में रंग जाओ।
Disclaimer (डिस्क्लेमर):यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ की आध्यात्मिक शिक्षाओं, अव्यक्त मुरली एवं व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आत्मिक जागृति, सकारात्मक चिंतन और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों का प्रसार करना है। इस वीडियो में व्यक्त विचार किसी धर्म, जाति, समुदाय या व्यक्ति की भावनाओं को आहत करने हेतु नहीं हैं। दर्शकों से निवेदन है कि वे इसे आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझें और अपने विवेक अनुसार ग्रहण करें। “देहभान के ‘मैं-मैं’ की होली जलाकर परमात्म संग के रंग की होली मनाओ”
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