Satyayuga – (08) – Date of final destruction suddenly Are you ever ready?

सतयुग-(08)-फाइनल विनाश की डेट अचानक क्या आप एवररेडी हैं?

( प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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फाइनल विनाश की डेट अचानक! क्या आप एवररेडी हैं? | 


ओम् शांति।
आज मैं आप सभी आत्माओं के सामने एक बहुत ही गम्भीर लेकिन सशक्त और प्रेरक विषय लेकर आया हूँ –
“फाइनल विनाश की डेट अचानक! क्या आप एवररेडी हैं?”

दुनिया के दृश्य बहुत तेज़ी से बदल रहे हैं। हम सब देख रहे हैं – प्रकृति, विज्ञान, मानवीय संबंध – सब कुछ एक अंतिम बिंदु की ओर बढ़ रहा है।

लेकिन… क्या हम आत्मिक रूप से तैयार हैं?


 1. विनाश की डेट पहले नहीं बताई जाएगी – क्यों?

बाबा ने बहुत स्पष्ट कहा है –

“फाइनल विनाश की डेट पहले नहीं बताई जाएगी, वह अचानक होगा।”

जैसे एग्जाम की डेट अचानक सामने आ जाये – और हमने पढ़ाई नहीं की हो – तो क्या होगा?

ड्रामा के अनुसार, फाइनल पेपर भी अचानक आएगा!
जो एवररेडी नहीं होंगे, वो धोखा खा जायेंगे।


 2. संगमयुग की मौज मनाओ… लेकिन रहो एवररेडी!

यह संगमयुग – सर्वोच्च सुख और सर्वश्रेष्ठ पुरशार्थ का युग है।
मौज भी है… सेवा भी है… लेकिन सतर्कता सबसे जरूरी है।

“सदा याद रखो – हम और बाप सदा साथ हैं।
बाप सम्पन्न है, तो संग-साथ में रहने वाला भी सम्पन्न बन जायेगा।”

इसलिए…
संगमयुग की मौज मनाओ
लेकिन सदा एवररेडी रहो!


 3. साथ का अनुभव = निरंतर योगी

जब हम सच में अनुभव करते हैं कि बाबा हमारे साथ है –
तब हम स्वतः निरंतर योगी बन जाते हैं।

जो आत्माएं बाबा की कम्पैनियन बनती हैं –
वो साथ चलती हैं।

लेकिन जो सिर्फ बराती हैं – देखने वाले हैं –
वो पीछे-पीछे चलते हैं।

अब आप तय करें: आप कम्पैनियन बनना चाहेंगे या केवल बराती?


 4. “समय पड़ा है” — ये सोच ही धोखा देगी

बहुतों की सोच होती है:
“अभी तो समय पड़ा है। 10 साल होंगे, 20 साल होंगे… कुछ तो कर लें।”

 यही सबसे बड़ी गलती है।

क्योंकि सृष्टि के विनाश की बात अलग है —
लेकिन स्वयं की एवररेडी स्थिति की बात अलग है।

“यदि आज ही शरीर छूट जाए — तो क्या हम पास विद ऑनर निकलेंगे?”


 5. नष्टोमोहाः बनो, ट्रस्टी बनो – तभी सच्ची सहजता

“थोड़ा तो जमा कर लें”, “कुछ सम्हाल लें”, “धन-संपत्ति की चिंता…”
— यह सब मोह है।

नष्टोमोहाः बनकर चलो।
ट्रस्टी बनकर चलो।

ताकि धन कमाने या संभालने में कोई दुःख या अशांति की लहर न आये।


 6. विनाश के समय एक ही सेट काम करेगा – ‘वाइसलेस का वायरलेस’

जब वह समय आएगा — कोई टेलीग्राम, फोन कॉल या मैसेज नहीं आयेगा।

“केवल एक ही सेट काम करेगा – वाइसलेस का वायरलेस!”

जिसकी बुद्धि वाइसलेस होगी, वही बाबा की आवाज़ पकड़ सकेगा।

 इसलिए अभी से जल्दी-जल्दी सम्पूर्ण वाइसलेस बनने की तैयारी करो।


 7. भ्रम मत पालो – ‘मेरा पार्ट तो बाद में है’

कुछ आत्माएं सोचती हैं –
“मेरा पार्ट तो एडवांस पार्टी में है…”
“मैं तो अभी नहीं जाऊंगा…”

ये सब मन के भ्रम हैं।

भिन्न आत्माओं का भिन्न पार्ट हो सकता है, लेकिन आपकी तैयारी आज होनी चाहिए!

20 वर्ष और जीवित रहें या 50 वर्ष – कोई हर्ज नहीं।
लेकिन अगर आज ही बुलावा आ जाये — तो “पास विद ऑनर” हों!


 8. अंतिम निर्णय: क्या आप सदा एवररेडी हैं?

अब समय है स्वयं से पूछने का:

 क्या आप बाबा के साथ सदा कम्पैनियन बनकर चल रहे हैं?

 क्या आपकी बुद्धि वाइसलेस बनी है?

 क्या आप आज भी शरीर छोड़ें तो पास विद ऑनर निकल सकते हैं?

अगर नहीं –
तो अभी से तैयारी शुरू करें।

“संगमयुग की मौज मनाओ, लेकिन सदा एवररेडी रहो!”


उपसंहार:

फाइनल विनाश की डेट अचानक आयेगी –
लेकिन बाबा की संतान कभी डरती नहीं – सिर्फ तैयार रहती है।

“जो तैयार हैं, वही रचयिता के साथ स्वर्ग की स्थापना में सहभागी बनेंगे।”

ओम् शांति।


प्रश्न 1: क्या फाइनल विनाश की कोई फिक्स डेट मिलेगी?

 उत्तर: नहीं! फाइनल विनाश की डेट पहले से नहीं मिलेगी। यह अचानक होगा। इसलिए सदा एवररेडी रहना जरूरी है। जो तैयार नहीं होंगे, वे धोखा खा सकते हैं।


प्रश्न 2: संगमयुग की मौज का क्या अर्थ है?

उत्तर: संगमयुग की मौज का मतलब है—बाबा के साथ रहकर, खुशी में रहना, सेवा करना, लेकिन साथ ही आत्मा को हर पल एवररेडी बनाकर रखना। केवल मस्ती नहीं, साथ में सजगता भी हो।


प्रश्न 3: एवररेडी रहने का वास्तविक अर्थ क्या है?

उत्तर: एवररेडी रहने का मतलब है—हर परिस्थिति में बाबा के साथ अनुभव करना, निरंतर योग में रहना, संपूर्ण ट्रस्टी बन जाना और नष्टोमोहाः की स्थिति में स्थित रहना।


प्रश्न 4: क्या यह सोच सकते हैं कि अभी तो बहुत समय है—10 या 50 साल?

 उत्तर:  नहीं! ऐसा सोचकर लापरवाही आ जाती है। ड्रामा में कुछ निश्चित नहीं है। इसलिए अभी से तैयारी ज़रूरी है। समय की गारंटी नहीं, लेकिन हमारी तैयारी होनी चाहिए।


प्रश्न 5: कौन साथ चलेंगे—कम्पैनियन या बराती?

उत्तर: जो बाप के समान बनते हैं, निरंतर संग में अनुभव करते हैं, वे कम्पैनियन हैं और वही बाप के साथ स्वीट होम जाएंगे। जो सिर्फ दर्शक बने रहते हैं, वे पीछे-पीछे चलने वाले बराती बनते हैं।


प्रश्न 6: पास विद ऑनर कौन बन सकता है?

उत्तर: जो आज भी शरीर छोड़ना पड़े तो पूरी तैयारी के साथ, बाप के सामने पास हो जाए। जिसका हिसाब-किताब पूरा हो, जो निश्चिंत भाव से, सहज स्थिति में हो—वही पास विद ऑनर बनता है।


प्रश्न 7: वायरलेस सेट का क्या अर्थ है?

 उत्तर: विनाश के समय कोई स्थूल सूचना नहीं मिलेगी। बाबा का बुलावा केवल ‘वाइसलेस बुद्धि’ वाले ही कैच कर सकेंगे। यही सच्चा वायरलेस सेट है। इसलिए अभी से सम्पूर्ण वाइसलेस बनने की तैयारी ज़रूरी है।


प्रश्न 8: क्या धन कमाना और जमा करना गलत है?

 उत्तर: नहीं, लेकिन उसमें मोह या भय नहीं होना चाहिए। ट्रस्टी भावना होनी चाहिए। धन से मोह हो या दुःख आए तो वह बंधन बन जाता है। नष्टोमोहाः बनकर धन को भी सहजता से उपयोग करना ही सही तरीका है।


प्रश्न 9: क्या सभी आत्माओं का पार्ट एक जैसा होता है?

 उत्तर: नहीं! ड्रामा अनुसार हर आत्मा का पार्ट अलग है—कोई विनाश के पहले जाएगा, कोई बाद में, कोई एडवांस पार्टी में। लेकिन हमें यह सोचकर लापरवाह नहीं होना है, बल्कि सदा एवररेडी रहना है।


प्रश्न 10: अब हमें क्या निर्णय लेना चाहिए?

 उत्तर:

  • क्या हम बाप के सच्चे कम्पैनियन बनेंगे या केवल बराती रहेंगे?

  • क्या हम संगमयुग की मौज मनाते हुए भी सदा एवररेडी रहेंगे?

  • क्या हमारा वायरलेस सेट पूरी तरह वाइसलेस है?

 यदि हाँ, तो आप हर स्थिति में सेफ और सफल रहेंगे।

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