(13) Why are families breaking apart? What does God say about the bitterness in relationships?

PR:-(13)परिवार क्यों टूट रहे हैं? रिश्तों की कड़वाहट पर परमात्मा क्या कहते हैं?

(प्रश्न और उत्तर नीचे दिए गए हैं)

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अध्याय 13 : परमात्मा क्या कहते हैं?

परिवार क्यों टूट रहे हैं?


 भूमिका : आज हर घर की एक ही पीड़ा

आज हम परमात्मा क्या कहते हैं?
श्रृंखला का 13वाँ विषय समझने जा रहे हैं।

आज का विषय है —
परिवार क्यों टूट रहे हैं?
रिश्तों में कड़वाहट क्यों बढ़ रही है?
घर होते हुए भी घर जैसा सुकून क्यों नहीं लगता?

आज हर जगह एक ही दर्द की आवाज सुनाई देती है —
➡ पति–पत्नी में तनाव
➡ माता–पिता और बच्चों के बीच दूरी
➡ घर है, लेकिन शांति नहीं
➡ साथ रहते हुए भी अपनापन नहीं


 आज के परिवार की बदलती तस्वीर

पहले संयुक्त परिवार हुआ करते थे।
आज वे टूटकर एकाकी जीवन में बदल गए।

और आश्चर्य की बात यह है कि —
आज तो पति–पत्नी भी
अपने को एक परिवार नहीं समझ पा रहे।

घर है —
❌ लेकिन विश्वास नहीं
 लेकिन भावनात्मक जुड़ाव नहीं
 लेकिन आत्मिक अपनापन नहीं


 मुख्य प्रश्न : परिवार टूट क्यों रहे हैं?

प्रश्न सिर्फ इतना नहीं है कि
परिवार क्यों टूट रहे हैं?

उससे भी गहरा प्रश्न है —
परमात्मा इसे कैसे देखते हैं?

क्योंकि मनुष्य तो मनुष्य से पूछेगा,
सब अपनी-अपनी कहानी बताएँगे।

लेकिन
परमात्मा का दृष्टिकोण सदा मूल कारण तक जाता है।


मुरली प्रमाण (मूल आधार)

मुरली – 21 जुलाई 1967
“जहाँ प्रेम नहीं, वहाँ घर भी जेल बन जाता है।”

➡ परमात्मा स्पष्ट करते हैं —
घर को घर बनाने वाली चीज़
दीवारें नहीं, सुविधाएँ नहीं,
प्रेम और आत्मिक समझ है।


 भाग 1 : बाहर से दिखने वाले कारण (Visible Causes)

आज के परिवारों में टूटन के कुछ कारण
बाहर से साफ दिखाई देते हैं:

  • पैसों की कमी

  • काम का अत्यधिक दबाव

  • मोबाइल और सोशल मीडिया का अधिक उपयोग

 अपेक्षाओं का टकराव

  • पति कुछ चाहता है

  • पत्नी कुछ और चाहती है

  • माता–पिता बच्चों से

  • बच्चे माता–पिता से

अपेक्षाएँ इतनी बढ़ गई हैं
कि रिश्ते बोझ बनते जा रहे हैं।


 भाग 2 : भीतर के असली कारण (Invisible Causes)

परमात्मा कहते हैं —
असली कारण बाहर नहीं, भीतर हैं।

भीतर छुपे कारण हैं:

  • अहंकार

  • असहिष्णुता (सहन न कर पाना)

  • अधिकार की भावना

  • “मैं” का टकराव


मुरली नोट (भीतरी कारणों पर)

मुरली – 4 अप्रैल 1967
“देह-अभिमान से रिश्ते कड़वे बनते हैं।”

➡ जब हम स्वयं को आत्मा नहीं,
बल्कि शरीर, पद, अधिकार मान लेते हैं,
तभी रिश्तों में टकराव शुरू होता है।


 उदाहरण : पति–पत्नी का दैनिक संघर्ष

पति कहता है —
“मेरी बात क्यों नहीं मानी?”

पत्नी कहती है —
“मेरी बात क्यों नहीं मानी?”

यहीं से झगड़ा शुरू होता है।

दोनों अपने-अपने स्थान पर सही दिखते हैं,
लेकिन दोनों अहंकार के चश्मे से देख रहे होते हैं।


 परमात्मा की गहराई वाली दृष्टि

परमात्मा कहते हैं —

“रिश्ते नहीं टूटते, संस्कार टकराते हैं।”

हम कहते हैं —
“रिश्ता खराब हो गया।”

पर परमात्मा कहते हैं —
“संस्कार सामने आ गए।”


 संस्कार और कार्मिक अकाउंट का रहस्य

हर आत्मा
अपने कार्मिक अकाउंट के अनुसार
संस्कार लेकर आती है।

जब दो आत्माएँ साथ आती हैं,
तो संस्कार मेल भी खाते हैं
और कभी-कभी टकराते भी हैं।

➡ यह टकराव
रिश्ता तोड़ने के लिए नहीं,
कर्मों का हिसाब चुकता करने के लिए होता है।


 सार निष्कर्ष (Chapter Conclusion)

परिवार टूटने का मूल कारण है —
 लोग नहीं
 परिस्थितियाँ नहीं

बल्कि —
देह-अभिमान
अहंकार
आत्मिक पहचान की भूल

जहाँ आत्मिक दृष्टि आती है,
वहीं रिश्ते फिर से
प्रेम, सहनशीलता और शांति से भर जाते हैं।

प्रश्न 1 : आज हर घर में बेचैनी क्यों दिखाई देती है?

उत्तर :
आज लगभग हर घर से एक जैसी पीड़ा की आवाज़ आ रही है —

  • पति–पत्नी में तनाव

  • माता–पिता और बच्चों के बीच दूरी

  • घर है, लेकिन शांति नहीं

  • साथ रहते हुए भी अपनापन नहीं

परमात्मा कहते हैं —
समस्या घर की संरचना में नहीं, चेतना की स्थिति में है


प्रश्न 2 : घर होते हुए भी घर जैसा सुकून क्यों नहीं लगता?

उत्तर :
क्योंकि आज घर में —

  • विश्वास कम हो गया है

  • भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो गया है

  • आत्मिक अपनापन समाप्त हो रहा है

मुरली प्रमाण
21 जुलाई 1967

“जहाँ प्रेम नहीं, वहाँ घर भी जेल बन जाता है।”

➡ परमात्मा स्पष्ट करते हैं —
घर को घर दीवारें नहीं,
बल्कि प्रेम और आत्मिक समझ बनाती है।


प्रश्न 3 : क्या परिवार टूटने का कारण केवल परिस्थितियाँ हैं?

उत्तर :
नहीं। परिस्थितियाँ केवल बाहरी कारण हैं।

बाहर से दिखने वाले कारण:

  • पैसों की कमी

  • काम का अत्यधिक दबाव

  • मोबाइल और सोशल मीडिया की अधिकता

ये कारण दिखाई तो देते हैं,
पर मूल कारण नहीं हैं


प्रश्न 4 : आज रिश्तों में अपेक्षाएँ क्यों टकरा रही हैं?

उत्तर :
क्योंकि आज —

  • पति कुछ और चाहता है

  • पत्नी कुछ और चाहती है

  • माता–पिता बच्चों से अपेक्षा रखते हैं

  • बच्चे माता–पिता से

अपेक्षाएँ इतनी बढ़ गई हैं
कि रिश्ते आनंद नहीं, बोझ लगने लगे हैं।


प्रश्न 5 : परमात्मा के अनुसार असली कारण क्या हैं?

उत्तर :
परमात्मा कहते हैं —
असली कारण बाहर नहीं, भीतर हैं।

भीतर के कारण:

  • अहंकार

  • असहिष्णुता (सहन न कर पाना)

  • अधिकार की भावना

  • “मैं” का टकराव

मुरली प्रमाण
4 अप्रैल 1967

“देह-अभिमान से रिश्ते कड़वे बनते हैं।”

➡ जब आत्मिक पहचान भूल जाती है,
तभी रिश्ते बिगड़ते हैं।


प्रश्न 6 : पति–पत्नी के झगड़े की जड़ क्या है?

उत्तर :
साधारण-सा उदाहरण देखें —

पति कहता है —
“मेरी बात क्यों नहीं मानी?”

पत्नी कहती है —
“मेरी बात क्यों नहीं मानी?”

➡ यहीं से टकराव शुरू होता है।

दोनों अपने-अपने स्थान पर सही दिखते हैं,
लेकिन दोनों अहंकार के चश्मे से देख रहे होते हैं।


प्रश्न 7 : परमात्मा रिश्तों को कैसे देखते हैं?

उत्तर :
परमात्मा की दृष्टि बहुत गहरी है।

वे कहते हैं —

“रिश्ते नहीं टूटते, संस्कार टकराते हैं।”

हम कहते हैं —
“रिश्ता खराब हो गया।”

पर परमात्मा कहते हैं —
“संस्कार सामने आ गए।”


प्रश्न 8 : संस्कार टकराव क्यों होते हैं?

उत्तर :
हर आत्मा
अपने कार्मिक अकाउंट के अनुसार
संस्कार लेकर आती है।

जब दो आत्माएँ साथ आती हैं —

  • कभी संस्कार मेल खाते हैं

  • कभी टकराते हैं

➡ यह टकराव
रिश्ता तोड़ने के लिए नहीं,
कर्मों का हिसाब चुकता करने के लिए होता है।


प्रश्न 9 : परिवार टूटने का मूल कारण क्या है?

उत्तर :
परिवार टूटने का मूल कारण है —

 लोग नहीं
 परिस्थितियाँ नहीं

बल्कि —

  • देह-अभिमान

  • अहंकार

  • आत्मिक पहचान की भूल


अध्याय सार निष्कर्ष

जहाँ आत्मिक दृष्टि आती है,
वहीं रिश्ते फिर से —

  • प्रेम

  • सहनशीलता

  • विश्वास

  • शांति

से भर जाते हैं।

परमात्मा कहते हैं —
घर को बचाना है
तो पहले स्वयं की चेतना को बदलो


 Disclaimer

यह वीडियो ब्रह्माकुमारीज़ के मुरली ज्ञान पर आधारित आध्यात्मिक प्रस्तुति है।
इसका उद्देश्य पारिवारिक जीवन में आत्मिक समझ, शांति और प्रेम को बढ़ाना है।
यह किसी धर्म, व्यक्ति, समाज या संस्था के विरोध में नहीं है।
सभी विचार परमात्मा शिव के मुरली महावाक्यों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।

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