अव्यक्त मुरली-(24)27-03-1985 “कर्मातीत अवस्था”
1️⃣ भूमिका: बापदादा की दिव्य परिक्रमा
मुरली भावार्थ (27-03-1985):
जैसे भक्ति मार्ग में भक्त परिक्रमा करते हैं,
वैसे ही आज बापदादा ने चारों ओर ब्राह्मण बच्चों के स्थानों और स्थितियों की परिक्रमा की।
बापदादा ने क्या देखा?
-
कहीं स्थूल साधनों का आकर्षण
-
कहीं तपस्या के वायब्रेशन
-
कहीं सादगी और त्याग का वातावरण
-
और कहीं साधारण स्वरूप
लेकिन बापदादा का मुख्य फोकस था –
“बच्चों की स्थिति”
यानी तैयारी कहाँ तक पहुँची है?
2️⃣ बंधनमुक्त – योगयुक्त – जीवनमुक्त: वास्तविक परीक्षा
प्रश्न:
क्या बच्चे सच में एवररेडी हैं
या केवल समय का इंतज़ार कर रहे हैं?
मुरली नोट (27-03-1985):
“बंधनमुक्त आत्मा ही जीवनमुक्त का अनुभव कर सकती है।”
यदि किसी भी प्रकार का
-
स्थूल सहारा
-
सूक्ष्म लगाव
-
मनसा या कर्म का आधार
बचा हुआ है
तो वह बंधनमुक्त अवस्था नहीं है।
3️⃣ सूक्ष्म बंधन: जो दिखाई नहीं देते
बापदादा ने देखा —
अधिकांश बच्चे बड़े बंधनों से मुक्त हो चुके हैं,
लेकिन अभी भी अति सूक्ष्म बंधन शेष हैं।
उदाहरण:
जैसे सूक्ष्म जीवाणु
नंगी आँखों से नहीं दिखते
वैसे ही
ये सूक्ष्म बंधन
महीन बुद्धि से ही पकड़े जाते हैं।
ऊपर-ऊपर से देखने वाला
खुद को बंधनमुक्त समझ लेता है
और यहीं धोखा हो जाता है।
4️⃣ पहला सूक्ष्म सहारा: “सेवा के साथी का लगाव”
मुरली निरीक्षण (27-03-1985):
सबसे अधिक देखा गया सूक्ष्म बंधन –
किसी सेवा साथी का विशेष झुकाव
लगाव कैसे बनता है?
-
“ये ही अच्छा सहयोगी है”
-
“ये ही सबसे समझदार है”
-
“इसी से ही बात करना अच्छा लगता है”
यह “ही” शब्द ही बंधन की निशानी है।
आत्मिक चेकिंग:
-
विशेषता देखो,
-
गुण देखो,
-
सहयोग लो –
लेकिन “इसी से ही” नहीं।
मुरली संदेश:
“सहारा एक बाप है, कोई मनुष्य आत्मा नहीं।”
5️⃣ दूसरा सूक्ष्म सहारा: साधनों पर निर्भरता
मुरली नोट (27-03-1985):
कई बच्चे साधनों को सेवा के बजाय आधार बना लेते हैं।
अंतर समझो:
-
✔️ साधनों को कार्य में लगाना – सही
-
साधनों के वश होकर सेवा करना – बंधन
विनाशी साधनों को आधार बनाने से
स्थिति भी विनाशी हो जाती है –
कभी ऊपर, कभी नीचे।
आधार एक ही:
अविनाशी बाप
6️⃣ कर्मातीत अवस्था क्या है?
कर्म छोड़ देना – कर्मातीत नहीं
कर्म के बंधन से न्यारा होकर कर्म करना – कर्मातीत
कर्मातीत अवस्था =
-
बंधनमुक्त
-
योगयुक्त
-
जीवनमुक्त
-
एवररेडी
हर व्यक्ति, वस्तु और कर्म से
अंदर से न्यारा होना।
7️⃣ परखने की शक्ति क्यों कमजोर होती है?
मुरली नोट (27-03-1985):
परखने की शक्ति कमजोर होने का कारण –
एकाग्रता की कमी
एकाग्रता की पहचान:
-
सदा उड़ती कला का अनुभव
-
कल से आज परसेंटेज वृद्धि की अनुभूति
जहाँ एकाग्रता
वहाँ परख स्वतः तेज़।
8️⃣ कमजोरी छिपाने के दो साधन
बापदादा ने बताया –
जब परखने की शक्ति कम होती है, तो व्यक्ति:
1️⃣ खुद को राइट सिद्ध करता है
2️⃣ जिद्द करता है
ये दोनों बातें
कमजोरी को बड़ा बना देती हैं।
उपाय:
छिपाओ नहीं –
छोटे रूप में स्वीकार कर
समाप्त करो।
9️⃣ सोने का हिरण: रॉयल सूक्ष्म बंधन
मुरली उदाहरण (27-03-1985):
जैसे सोने का हिरण
सीता को राम से दूर ले गया,
वैसे ही
सूक्ष्म आकर्षण
श्रेष्ठ भाग्य को खो देता है।
यह सोना नहीं
खोना है।
🔟 ब्रह्मा बाप का प्यार: “जितना प्यारा, उतना न्यारा”
ब्रह्मा बाप बच्चों को
अपने समान एवररेडी देखना चाहते हैं।
संदेश:
-
बुलावा आये – और चले जायें
-
बिना किसी खिंचाव के
यही है सम्पूर्णता।
1️⃣1️⃣ कर्मातीत बनने का सूत्र
✔️ व्यक्ति का सहारा नहीं
✔️ वस्तु का सहारा नहीं
✔️ वैभव का सहारा नहीं
सहारा केवल एक अविनाशी बाप
1️⃣2️⃣ समापन आशीर्वचन (27-03-1985)
बापदादा की शुभकामनाएँ:
-
सदा कर्मबन्धन मुक्त
-
सदा योगयुक्त
-
सदा परखने की शक्ति से सम्पन्न
-
सदा एक बाप को आधार बनाने वाले
-
प्रश्न 1️⃣: बापदादा की “दिव्य परिक्रमा” का अर्थ क्या है?
उत्तर:
जैसे भक्ति मार्ग में भक्त परिक्रमा करते हैं,
वैसे ही 27-03-1985 को बापदादा ने ब्राह्मण बच्चों के स्थानों और उनकी आत्मिक स्थिति की परिक्रमा की।
यह परिक्रमा बाहरी व्यवस्था देखने के लिए नहीं,
बल्कि यह देखने के लिए थी कि बच्चों की तैयारी कहाँ तक पहुँची है।
प्रश्न 2️⃣: बापदादा ने परिक्रमा में क्या-क्या देखा?
उत्तर:
बापदादा ने देखा कि:-
कहीं स्थूल साधनों का आकर्षण है
-
कहीं तपस्या के शक्तिशाली वायब्रेशन हैं
-
कहीं सादगी और त्याग का वातावरण है
-
कहीं साधारण लेकिन स्थिर स्वरूप है
लेकिन इन सब से ऊपर बापदादा का फोकस था —
“स्थिति” यानी आत्मा की वास्तविक अवस्था।
प्रश्न 3️⃣: बंधनमुक्त, योगयुक्त और जीवनमुक्त की वास्तविक परीक्षा क्या है?
उत्तर:
मुरली (27-03-1985) कहती है —“बंधनमुक्त आत्मा ही जीवनमुक्त का अनुभव कर सकती है।”
यदि आत्मा में अभी भी:
-
कोई स्थूल सहारा
-
कोई सूक्ष्म लगाव
-
मनसा या कर्म का आधार
बचा हुआ है,
तो वह अवस्था अभी एवररेडी नहीं है।
प्रश्न 4️⃣: सूक्ष्म बंधन क्या होते हैं और वे क्यों दिखाई नहीं देते?
उत्तर:
सूक्ष्म बंधन वे होते हैं जो:-
बाहर से दिखाई नहीं देते
-
लेकिन अंदर स्थिति को रोकते हैं
जैसे सूक्ष्म जीवाणु नंगी आँखों से नहीं दिखते,
वैसे ही ये बंधन केवल महीन बुद्धि और परखने की शक्ति से ही पकड़े जाते हैं।
प्रश्न 5️⃣: पहला और सबसे बड़ा सूक्ष्म बंधन कौन-सा है?
उत्तर:
मुरली के अनुसार सबसे अधिक देखा गया सूक्ष्म बंधन है —
👉 सेवा के साथी का विशेष लगाव।जब मन में आने लगे:
-
“ये ही अच्छा है”
-
“इसी से ही बात करना अच्छा लगता है”
तो यह “ही” शब्द ही लगाव और बंधन की पहचान है।
प्रश्न 6️⃣: सेवा में सहयोग और लगाव में क्या अंतर है?
उत्तर:
✔️ विशेषता देखना सही है
✔️ गुणों की कद्र करना सही है
✔️ सहयोग लेना–देना सही है❌ लेकिन “इसी से ही” की भावना आना — बंधन है
मुरली संदेश स्पष्ट है:
“सहारा एक बाप है, कोई मनुष्य आत्मा नहीं।”
प्रश्न 7️⃣: दूसरा सूक्ष्म सहारा कौन-सा है?
उत्तर:
दूसरा सूक्ष्म बंधन है —
साधनों पर निर्भरता।जब साधन सेवा के साधन न रहकर
सेवा का आधार बन जाएँ,
तो स्थिति भी विनाशी हो जाती है —
कभी ऊपर, कभी नीचे।
प्रश्न 8️⃣: कर्मातीत अवस्था वास्तव में क्या है?
उत्तर:
कर्म छोड़ देना कर्मातीत नहीं
कर्म के बंधनों से न्यारा होकर कर्म करना कर्मातीत हैकर्मातीत अवस्था का अर्थ है:
-
बंधनमुक्त
-
योगयुक्त
-
जीवनमुक्त
-
एवररेडी
प्रश्न 9️⃣: परखने की शक्ति कमजोर क्यों हो जाती है?
उत्तर:
मुरली (27-03-1985) कहती है —
परखने की शक्ति कमजोर होने का मुख्य कारण है:
एकाग्रता की कमी।जहाँ एकाग्रता होती है,
वहाँ परखने की शक्ति स्वतः तेज़ हो जाती है।
प्रश्न 🔟: कमजोरी छिपाने के दो मुख्य तरीके कौन-से हैं?
उत्तर:
जब परखने की शक्ति कम होती है, तो व्यक्ति:
1️⃣ खुद को “राइट” सिद्ध करता है
2️⃣ जिद्द करता हैये दोनों ही बातें कमजोरी को और बड़ा बना देती हैं।
प्रश्न 1️⃣1️⃣: “सोने का हिरण” किस बात का प्रतीक है?
उत्तर:
मुरली में दिया गया उदाहरण बताता है कि
जैसे सोने का हिरण सीता को राम से दूर ले गया,
वैसे ही सूक्ष्म आकर्षण आत्मा को
अपने श्रेष्ठ भाग्य से दूर ले जाते हैं।यह सोना नहीं, खोना है।
प्रश्न 1️⃣2️⃣: ब्रह्मा बाप का बच्चों के लिए विशेष संदेश क्या है?
उत्तर:
ब्रह्मा बाप चाहते हैं कि बच्चे:-
जितने प्यारे हों
-
उतने ही न्यारे हों
बुलावा आए — और बिना खिंचाव के चल पड़ें।
यही सम्पूर्णता और कर्मातीत अवस्था है।
प्रश्न 1️⃣3️⃣: कर्मातीत बनने का एक सूत्र क्या है?
उत्तर:
-
न व्यक्ति का सहारा
-
न वस्तु का सहारा
-
न वैभव का सहारा
सहारा केवल एक अविनाशी बाप।
समापन आशीर्वचन (27-03-1985)
उत्तर:
बापदादा की शुभकामनाएँ हैं कि बच्चे:-
सदा कर्मबन्धन मुक्त रहें
-
सदा योगयुक्त रहें
-
सदा परखने की शक्ति से सम्पन्न रहें
-
और सदा एक बाप को ही आधार बनाए रखें
-
Disclaimer
यह वीडियो ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की
अव्यक्त बापदादा मुरली (27 मार्च 1985) पर आधारित
आध्यात्मिक अध्ययन और आत्मचिंतन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है।
यह किसी धर्म, व्यक्ति, संस्था या विचारधारा के विरुद्ध नहीं है।
सभी विचार आत्मिक उन्नति, शांति और पवित्र जीवन के लिए हैं।
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