03/ When does God come? 99% of people don’t know. The truth!

BH.-03/भगवान कब आते हैं?99%लोग नहीं जानते।सच्चाई!

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भगवान कब और क्यों आते हैं?

विवरण (Description)

यह अध्याय “भगवान कौन हैं?” और “भगवान कहाँ रहते हैं?” जैसे पूर्व अध्यायों के आधार पर आगे बढ़ते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास करता है—भगवान कब आते हैं और उन्हें आने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

इस अध्याय में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय महावाक्यों (मुरलियों), आध्यात्मिक सिद्धांतों, वैज्ञानिक उदाहरणों तथा विभिन्न धर्मों में वर्णित भविष्यवाणियों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। उद्देश्य किसी भी धर्म या आस्था का खंडन करना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चिंतन के लिए एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।


अस्वीकरण (Disclaimer)

यह अध्याय ब्रह्माकुमारीज के राजयोग ज्ञान, ईश्वरीय महावाक्यों (मुरली) तथा लेखक के व्यक्तिगत आध्यात्मिक अध्ययन एवं चिंतन पर आधारित है।

इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, देवी-देवता, अवतार, पैगंबर, मसीहा अथवा धार्मिक आस्था का विरोध या अपमान करना नहीं है।

विभिन्न धर्मों में वर्णित मान्यताओं का उल्लेख केवल तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study) के रूप में किया गया है। प्रत्येक पाठक से निवेदन है कि वह खुले मन से अध्ययन करे, स्वयं चिंतन करे तथा अपने विवेक के आधार पर निष्कर्ष निकाले।


इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे?

  • भगवान कब आते हैं?
  • भगवान क्यों आते हैं?
  • क्या भगवान प्रत्येक युग में आते हैं?
  • क्या सभी धर्म भगवान के आगमन की बात करते हैं?
  • भगवान किस प्रकार आते हैं?
  • भगवान संसार का परिवर्तन कैसे करते हैं?
  • भगवान दुख समाप्त करते हैं या दुख से निकलने का मार्ग बताते हैं?

भगवान कब आते हैं?

संसार के लगभग प्रत्येक प्रमुख धर्म में यह विश्वास पाया जाता है कि एक समय ऐसा आएगा जब परम सत्ता मानवता के उद्धार के लिए प्रकट होगी।

कहीं उसे महदी कहा गया है।

कहीं मसीहा।

कहीं कल्कि अवतार।

कहीं उद्धारकर्ता।

नाम अलग-अलग हैं, परन्तु उद्देश्य लगभग समान दिखाई देता है—धर्म की पुनः स्थापना, अधर्म का अंत, मानवता का कल्याण और नई व्यवस्था की शुरुआत।

यहीं से प्रश्न उठता है—

क्या ये सभी अलग-अलग व्यक्तित्व हैं, या एक ही सत्य की विभिन्न स्मृतियाँ हैं?


सबसे पहले भगवान को जानना आवश्यक है

यदि हमें यह नहीं पता कि भगवान कौन हैं, तो हम यह भी नहीं जान पाएँगे कि भगवान कब आते हैं।

क्योंकि संसार में अनेक महापुरुष, अवतार, संत, पैगंबर, गुरु और आध्यात्मिक नेता हुए हैं।

किन्तु क्या सभी भगवान हैं?

ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार—

परमात्मा…

  • अशरीरी हैं।
  • अजन्मा हैं।
  • अयोनि हैं।
  • अभोक्ता हैं।
  • सर्वज्ञ हैं।
  • सर्वशक्तिमान हैं।
  • एक हैं।

इसी आधार पर भगवान की पहचान की जाती है।


क्या भगवान हर युग में आते हैं?

यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है।

बहुत लोग श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक—

“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…”

का अर्थ यह समझते हैं कि भगवान प्रत्येक युग में जन्म लेते हैं।

किन्तु ब्रह्माकुमारी ज्ञान इस विषय को भिन्न प्रकार से समझाता है।

ईश्वर स्वयं कहते हैं—

“मैं संगमयुग पर आता हूँ।”
(मुरली)

अर्थात परमात्मा प्रत्येक युग में नहीं, बल्कि पूरे कल्प के परिवर्तन काल अर्थात संगमयुग में आते हैं।


संगमयुग क्या है?

जैसे…

रात और दिन के बीच एक क्षण होता है।

सर्दी और गर्मी के बीच परिवर्तन का समय होता है।

पुराने वर्ष और नए वर्ष के बीच एक छोटा-सा संक्रमण क्षण होता है।

उसी प्रकार…

पुरानी दुनिया और नई दुनिया के बीच जो परिवर्तन काल है, उसे संगमयुग कहा जाता है।

यही परमात्मा के अवतरण का समय माना गया है।


भगवान को आने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

यदि भगवान सर्वशक्तिमान हैं, तो क्या वे परमधाम में बैठकर ही संसार नहीं बदल सकते?

यह प्रश्न स्वाभाविक है।

उत्तर है—

संसार कर्म के अटल नियम पर चलता है।

ईश्वर नियम नहीं तोड़ते।

वे ज्ञान देते हैं।

मार्ग दिखाते हैं।

परिवर्तन मनुष्य को स्वयं करना होता है।


मुरली महावाक्य

“मैं आकर केवल ज्ञान देता हूँ, कर्म तुम्हें ही करना है।”


एक सरल उदाहरण

मान लीजिए…

एक डॉक्टर मरीज को दवा देता है।

क्या डॉक्टर स्वयं दवा खा सकता है?

नहीं।

दवा मरीज को स्वयं खानी होगी।

इसी प्रकार…

परमात्मा ज्ञान देते हैं।

चलना हमें पड़ता है।


दूसरा उदाहरण — विद्यालय

यदि किसी विद्यालय में सब कुछ व्यवस्थित चल रहा हो…

तो क्या प्रधानाचार्य प्रतिदिन प्रत्येक कक्षा में जाते हैं?

नहीं।

लेकिन जब अनुशासन समाप्त हो जाता है…

तब प्रधानाचार्य स्वयं हस्तक्षेप करते हैं।

इसी प्रकार…

जब संसार में धर्म की ग्लानि हो जाती है…

तब परमात्मा स्वयं आते हैं।


तीसरा उदाहरण — कंपनी का मालिक

एक बड़ी कंपनी का मालिक प्रतिदिन मशीन नहीं चलाता।

लेकिन जब पूरी कंपनी संकट में आ जाती है…

तब वही मालिक स्वयं व्यवस्था संभालने आता है।

क्यों?

क्योंकि वही सम्पूर्ण व्यवस्था को जानता है।

इसी प्रकार…

जब संसार अत्यधिक दुःखी हो जाता है…

तब परमात्मा आते हैं।


विभिन्न धर्मों की भविष्यवाणियाँ

इस्लाम

महदी के आने की प्रतीक्षा।

मुख्य उद्देश्य—

धर्म और न्याय की स्थापना।


ईसाई एवं यहूदी धर्म

मसीहा के पुनः आने की प्रतीक्षा।

मुख्य उद्देश्य—

मानवता का उद्धार।


सनातन धर्म

कल्कि अवतार।

मुख्य उद्देश्य—

अधर्म का विनाश तथा सतयुग की स्थापना।


ब्रह्माकुमारी दृष्टिकोण

ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार—

इन सभी भविष्यवाणियों का मूल संकेत एक ही परमात्मा की विश्व-परिवर्तनकारी भूमिका की ओर है।

नाम अलग हैं।

स्मृतियाँ अलग हैं।

परन्तु कार्य एक है।


भगवान कैसे आते हैं?

ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार—

परमात्मा जन्म नहीं लेते।

वे किसी माता के गर्भ से पैदा नहीं होते।

वे स्वयं कहते हैं—

“मैं जन्म नहीं लेता।”

वे एक मनुष्य शरीर को माध्यम बनाकर ज्ञान देते हैं।

इसे “परकाया प्रवेश” कहा जाता है।


रेडियो का उदाहरण

रेडियो स्टेशन स्वयं प्रत्येक घर नहीं जाता।

वह अपनी आवाज़ एक माध्यम से पहुँचाता है।

इसी प्रकार…

परमात्मा भी एक माध्यम द्वारा सम्पूर्ण संसार तक अपना संदेश पहुँचाते हैं।


भगवान क्या करने आते हैं?

परमात्मा आते हैं—

  • आत्मा का परिचय देने।
  • परमात्मा का परिचय देने।
  • कर्म का रहस्य समझाने।
  • राजयोग सिखाने।
  • आत्माओं को पवित्र बनाने।
  • नई दुनिया की स्थापना करने।

मुरली महावाक्य

“मैं पतित दुनिया को पावन बनाने आता हूँ।”


क्या भगवान दुख समाप्त कर देते हैं?

बहुत लोग सोचते हैं—

भगवान आएँगे…

और सारी समस्याएँ समाप्त कर देंगे।

किन्तु ब्रह्माकुमारी ज्ञान कहता है—

भगवान दुःख हटाने नहीं…

दुःख से निकलने का मार्ग बताने आते हैं।


GPS का उदाहरण

GPS केवल रास्ता बताता है।

चलना आपको स्वयं पड़ता है।

इसी प्रकार…

परमात्मा दिशा देते हैं।

परिवर्तन हमें करना होता है।


क्या भगवान केवल एक धर्म के हैं?

नहीं।

ईश्वर कहते हैं—

“मैं सर्व आत्माओं का पिता हूँ।”

सूर्य केवल एक धर्म पर प्रकाश नहीं देता।

वायु केवल एक देश को जीवन नहीं देती।

जल केवल एक जाति के लिए नहीं बहता।

इसी प्रकार…

परमात्मा सम्पूर्ण मानवता के हैं।


मुरली संदर्भ

15 दिसम्बर 1969

“बाप आकर सभी धर्मों की आत्माओं को शांति और मुक्ति का रास्ता बताते हैं।”


21 जनवरी 1973

“सर्व धर्मों का बीजरूप एक बाप है।”


10 अक्टूबर 1971

“ज्ञान तलवार से ही रावण पर विजय प्राप्त होती है।”


चिंतन

यदि भगवान आ चुके हों…

तो क्या हमने उन्हें पहचाना?

यह प्रश्न केवल धार्मिक नहीं…

जीवन परिवर्तन का प्रश्न है।


अध्याय का सार

  • भगवान प्रत्येक युग में नहीं, संगमयुग में आते हैं।
  • परमात्मा जन्म नहीं लेते, माध्यम द्वारा ज्ञान देते हैं।
  • वे कर्म का नियम नहीं बदलते, ज्ञान देकर दिशा बदलते हैं।
  • सभी धर्मों की भविष्यवाणियाँ एक विश्व परिवर्तन की ओर संकेत करती हैं।
  • भगवान सम्पूर्ण मानवता के पिता हैं।
  • वे नई दुनिया की स्थापना हेतु आत्माओं को पवित्र बनाने आते हैं।
  • प्रश्न 1. भगवान कब आते हैं?

    उत्तर :

    ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार परमात्मा प्रत्येक युग में नहीं आते। वे केवल संगमयुग में आते हैं, अर्थात जब पुरानी दुनिया समाप्ति की ओर होती है और नई दुनिया की स्थापना का समय होता है।

    मुरली महावाक्य

    “मैं संगमयुग पर आता हूँ।”

    संगमयुग वह संक्रमण काल है जहाँ मानव आत्माओं को पुनः सत्य ज्ञान देकर नई दुनिया की स्थापना की जाती है।


    प्रश्न 2. भगवान हर युग में क्यों नहीं आते?

    उत्तर :

    यदि संसार अपनी व्यवस्था के अनुसार ठीक प्रकार चल रहा हो तो परमात्मा को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं होती। जैसे किसी विद्यालय में सब कुछ व्यवस्थित हो तो प्रधानाचार्य को प्रत्येक कक्षा में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन जब अनुशासन समाप्त हो जाता है, तब प्रधानाचार्य स्वयं आते हैं।

    इसी प्रकार जब संसार में धर्म की ग्लानि, दुःख, अशांति और अज्ञान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब परमात्मा आते हैं।


    प्रश्न 3. भगवान को आने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

    उत्तर :

    परमात्मा संसार को चलाने के लिए नहीं, बल्कि संसार को सही दिशा देने के लिए आते हैं। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप, कर्म सिद्धांत और जीवन के उद्देश्य को भूल जाता है, तब परमात्मा आकर सत्य ज्ञान प्रदान करते हैं।

    मुरली महावाक्य

    “मैं आकर केवल ज्ञान देता हूँ, कर्म तुम्हें ही करना है।”


    प्रश्न 4. यदि भगवान सर्वशक्तिमान हैं तो वे ऊपर बैठे-बैठे संसार क्यों नहीं बदल देते?

    उत्तर :

    संसार कर्म के अटल नियम पर चलता है। परमात्मा स्वयं भी कर्म के नियम को नहीं तोड़ते। वे मनुष्य को ज्ञान देते हैं, लेकिन कर्म मनुष्य को स्वयं करना होता है।

    उदाहरण

    डॉक्टर दवा दे सकता है, लेकिन दवा मरीज को स्वयं खानी पड़ती है।

    इसी प्रकार परमात्मा ज्ञान देते हैं, परन्तु जीवन में परिवर्तन हमें स्वयं करना होता है।


    प्रश्न 5. क्या भगवान जन्म लेते हैं?

    उत्तर :

    ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार परमात्मा अजन्मा हैं। वे किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते।

    वे एक माध्यम के द्वारा अपना ज्ञान देते हैं।

    मुरली महावाक्य

    “मैं जन्म नहीं लेता, मैं अवतरित होता हूँ।”


    प्रश्न 6. भगवान किस प्रकार आते हैं?

    उत्तर :

    परमात्मा स्वयं शरीर धारण नहीं करते। वे एक मनुष्य शरीर को माध्यम बनाकर ईश्वरीय ज्ञान प्रदान करते हैं।

    उदाहरण

    रेडियो स्टेशन स्वयं प्रत्येक घर नहीं जाता, बल्कि अपनी आवाज़ एक माध्यम द्वारा पहुँचाता है।

    इसी प्रकार परमात्मा भी एक माध्यम के द्वारा सम्पूर्ण मानवता तक अपना संदेश पहुँचाते हैं।


    प्रश्न 7. भगवान इस संसार में क्या करने आते हैं?

    उत्तर :

    परमात्मा का मुख्य कार्य है—

    • आत्मा का परिचय देना।
    • परमात्मा का परिचय देना।
    • कर्म का रहस्य समझाना।
    • राजयोग सिखाना।
    • आत्माओं को पवित्र बनाना।
    • नई दुनिया की स्थापना करना।

    मुरली महावाक्य

    “मैं पतित दुनिया को पावन बनाने आता हूँ।”


    प्रश्न 8. क्या भगवान दुःख समाप्त कर देते हैं?

    उत्तर :

    नहीं।

    परमात्मा दुःख समाप्त करने नहीं, बल्कि दुःख से बाहर निकलने का मार्ग बताने आते हैं।

    उदाहरण

    GPS केवल रास्ता बताता है, चलना यात्री को स्वयं पड़ता है।

    इसी प्रकार परमात्मा दिशा देते हैं, परिवर्तन हमें करना होता है।


    प्रश्न 9. क्या भगवान केवल एक धर्म के लिए आते हैं?

    उत्तर :

    नहीं।

    परमात्मा सम्पूर्ण मानवता के पिता हैं। वे किसी एक धर्म, जाति या राष्ट्र तक सीमित नहीं हैं।

    मुरली महावाक्य

    “मैं सर्व आत्माओं का पिता हूँ।”

    उदाहरण

    सूर्य केवल एक धर्म के लोगों के लिए प्रकाश नहीं देता। वह सभी को समान रूप से प्रकाश देता है।

    इसी प्रकार परमात्मा का प्रेम और ज्ञान भी सम्पूर्ण मानवता के लिए है।


    प्रश्न 10. क्या विभिन्न धर्मों में वर्णित महदी, मसीहा और कल्कि एक ही सत्य की ओर संकेत करते हैं?

    उत्तर :

    ब्रह्माकुमारी ज्ञान के अनुसार विभिन्न धर्मों में वर्णित उद्धारकर्ता, महदी, मसीहा और कल्कि अवतार की भविष्यवाणियाँ एक ही विश्व-परिवर्तनकारी समय की विभिन्न स्मृतियाँ मानी जाती हैं।

    यद्यपि उनके नाम और वर्णन अलग-अलग हैं, परन्तु उनका उद्देश्य मानवता का कल्याण, धर्म की पुनः स्थापना और नई व्यवस्था का प्रारम्भ माना गया है।


    प्रश्न 11. भगवान कब आते हैं—इसकी पहचान कैसे करें?

    उत्तर :

    जब संसार में—

    • धर्म की ग्लानि बढ़ जाती है।
    • मनुष्य दुःखी और अशांत हो जाता है।
    • नैतिक पतन बढ़ जाता है।
    • आध्यात्मिक ज्ञान लुप्त हो जाता है।

    तब परमात्मा सत्य ज्ञान देकर आत्माओं को पुनः जागृत करते हैं।


    प्रश्न 12. भगवान के आने का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है?

    उत्तर :

    परमात्मा का सबसे बड़ा उद्देश्य मानव आत्माओं को उनकी वास्तविक पहचान कराना, परमात्मा से संबंध जोड़ना, राजयोग सिखाना तथा नई सतयुगी दुनिया की स्थापना करना है।


    प्रमुख मुरली संदर्भ

    15 दिसम्बर 1969

    “बाप आकर सभी धर्मों की आत्माओं को शांति और मुक्ति का रास्ता बताते हैं।”

    21 जनवरी 1973

    “सर्व धर्मों का बीजरूप एक बाप है।”

    10 अक्टूबर 1971

    “ज्ञान तलवार से ही रावण पर विजय प्राप्त होती है।”


    चिंतन प्रश्न

    1. क्या मैं स्वयं को शरीर मानता हूँ या आत्मा?
    2. क्या मैंने परमात्मा को सही रूप में जाना है?
    3. यदि भगवान आज आएँ, तो क्या मैं उन्हें पहचान सकूँगा?
    4. क्या मैं परमात्मा द्वारा बताए गए ज्ञान को अपने जीवन में धारण कर रहा हूँ?
    5. क्या मेरा जीवन नई दुनिया के निर्माण में योगदान दे रहा है?

    अध्याय का निष्कर्ष

    भगवान प्रत्येक युग में नहीं आते, बल्कि संगमयुग में मानवता को सत्य ज्ञान देने के लिए आते हैं। वे जन्म लेकर नहीं, बल्कि एक माध्यम द्वारा अपना दिव्य संदेश देते हैं। उनका उद्देश्य किसी धर्म विशेष की स्थापना नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता को आत्मज्ञान, कर्मज्ञान और राजयोग के माध्यम से शांति, पवित्रता और नई दुनिया की ओर ले जाना है।

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