MURLI 21-07-2026 |BRAHMA KUMARIS

Questions & Answers (प्रश्नोत्तर):are given below

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21-07-2026
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन
“मीठे बच्चे – अभी तक तुम सुनी सुनाई बातों पर चलते आये, अब बाप तुम्हें डायरेक्ट सुनाकर आपसमान नॉलेजफुल बनाते हैं”
प्रश्नः- अच्छे पुरुषार्थी बच्चों की निशानी तथा उनकी अवस्था का गायन क्या है?
उत्तर:- अच्छे पुरुषार्थी बच्चे – मदर, फादर को पूरा-पूरा फालो करेंगे। अपनी जीवन पर तरस खायेंगे। पूरा-पूरा अटेन्शन रखेंगे। थोड़ा भी समय निकाल बाबा की याद में जरूर बैठेंगे। उनकी अवस्था का गायन है – अचल, अडोल, स्थिर। उन्हें ही महावीर कहा जाता है।
गीत:- भोलेनाथ से निराला…

ओम् शान्ति। भक्ति मार्ग में दुनिया सिर्फ गाती है। तुम बच्चे अभी समझते हो – भक्ति मार्ग में हम भी गाते थे। अब वही भोलानाथ सम्मुख है, भोलानाथ अक्षर भक्ति मार्ग का है। ज्ञान मार्ग का अक्षर है शिवबाबा। तुम समझते हो अनादि बने बनाये ड्रामा-प्लैन अनुसार अब संगमयुग पर बाप को आकर हमसे यह पुरुषार्थ कराना ही है। कल्प-कल्प पुरुषार्थ कराते आये हैं। कितना समय तुम बच्चों ने भक्ति की है, यह भी सिद्धकर बतलाते हैं। जिन्होंने पहले-पहले भक्ति शुरू की है वही आकर ज्ञान लेंगे और फिर सूर्यवंशी बनेंगे। सतयुग में सिर्फ एक लक्ष्मी-नारायण तो नहीं आते। उनकी डिनायस्टी भी है ना। उसको कहा जाता है दैवी वर्ण। भारत में दैवी वर्ण था। अब आसुरी वर्ण है। यह है संगम। अब आसुरी से दैवी वर्ण में जाना है। बरोबर यह महाभारत लड़ाई भी वही है जो गाई हुई है। सिर्फ नाम शिव के बदले श्रीकृष्ण का डाल दिया है। एक गीता खण्डन हुई तो सब शास्त्र खण्डन हो जाते हैं। मूल बात गीता की है। गीता पाठशालायें वा गीता भवन कितने हैं! गीता ज्ञान सुनने की पाठशाला। खुद सुनाने वाला है नहीं। जो होकर जाते हैं वह फिर गायन चलता है। बच्चों को तो रोज़ बाप बहुत प्यार से समझाते हैं। बच्चे जानते हैं – बाबा प्यार का सागर है। सबको प्यार से सिखलाते हैं। बाबा कभी गुस्सा नहीं करते, सदैव प्यार से समझाते हैं। बच्चे तुम सतोप्रधान थे फिर पुनर्जन्म लेते आये हो। तुम भारतवासी ही असुल देवी-देवता धर्म के हो। यह भी बतलाते हैं। पहले-पहले वर्सा लेने कौन आयेंगे? जिन्होंने कल्प पहले लिया है, वही कहेंगे बाबा आपके सिवाए हमारा सहायक और कोई नहीं। बाप क्षमा भी तब करेंगे जब संगमयुग होगा। यह तो बच्चे जानते हैं कि रावण राज्य और रामराज्य यहाँ ही होता है। रावणराज्य है तब तो रामराज्य चाहते हैं। तुम जब शिवबाबा कहते हो तो बुद्धि निराकार तरफ ही जाती है। निराकार ही याद आता है। आत्मा ही बाप को पुकारती है। ऐसे भी नहीं कि परमात्मा कोई बैठ सुनते हैं। बाप समझाते हैं ड्रामा प्लैन अनुसार पतितों को पावन बनाने के लिए तो मैं शरीर में आता हूँ। ऐसे नहीं कि पुकार सुनकर आता हूँ। भक्ति जब पूरी होती है तब मुझे आना ही है। यह समझने की बातें हैं। वह समय आता है, बच्चे पुकारने लगते हैं। यह तो कहाँ लिखा हुआ नहीं है कि कब आयेंगे? उन्होंने कल्प की आयु रांग लिख दी है। यह चित्र घर-घर में होने चाहिए। जो रोज़ देखें और याद करें कि यह बाबा, यह दादा, यह वर्सा। बाप कहते हैं बच्चे सतोप्रधान बनने के लिए मुझे याद करो तो खाद निकल जायेगी। यह युक्ति बाप ही समझाते हैं। यह बाप भी कहते हैं मैं भी पुरुषार्थ करता हूँ। बच्चे एक दो को सावधान कर उन्नति को पाना है। यह चित्रों की समझानी बहुत अच्छी है। शिवबाबा ब्रह्मा द्वारा स्थापना कर रहे हैं। सामने महाभारी महाभारत लड़ाई खड़ी है। इतने अनेक धर्म विनाश होंगे, उसके लिए लड़ाई जरूर चाहिए। यह बातें बच्चों को भूलनी नहीं चाहिए। बरोबर अब कलियुग घोर अन्धियारा है। कितने ढेर मनुष्य हैं, जरूर विनाश होना है। सतयुग में एक धर्म होगा। जरूर 84 जन्म का चक्र भी उन्होंने ही लगाया है। यह तो सहज है। बाकी इतने सब धर्मों का जरूर विनाश होगा। फिर एक धर्म की स्थापना बरोबर हो रही है। सर्व का सद्गति दाता बाप है। बाप से ही बच्चों को वर्सा मिलता है। बच्चे जानते हैं – हम जो यह पढ़ाई पढ़ते हैं वह भविष्य 21 जन्मों के लिए पढ़ते हैं। भगवानुवाच – मैं तुमको पढ़ाकर 21 जन्मों के लिए स्वर्ग का मालिक बनाता हूँ। सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी घराने की बरोबर स्थापना होती है। जो जितना पुरुषार्थ करेगा, उतना ऊंच पद पायेगा, तो शिवबाबा कहते हैं इन मदर-फादर को फालो करो। इन्हों को सूक्ष्मवतन, वैकुण्ठ में भी देखते हो। अपने को भी देखते हो, हम भी महाराजा, महारानी बनते हैं। वैकुण्ठ का भी साक्षात्कार होता है। मानते भी हैं बरोबर भारत वैकुण्ठ था, श्रीकृष्णपुरी थी। आज कंसपुरी है, कल कृष्णपुरी होगी। रात बदल दिन होना है। यह है आधाकल्प बेहद का दिन और आधाकल्प बेहद की रात। अन्धियारे में ठोकरें ही खाते रहते हैं। ब्रह्मा की रात सो ब्राह्मणों की रात। फिर तुम ब्राह्मण से देवता बनते हो। सतयुग में ब्राह्मण होते नहीं, देवता होते हैं।

यह भी बच्चे जानते हैं भारत पवित्र राजस्थान था फिर अपवित्र राजस्थान बना है। भारत सदैव राजस्थान रहा है। राजाई चलती आती है और धर्म वालों की शुरू से ही राजाई नहीं चलती है। भगवान ही राजाई स्थापन करते हैं। भगवान ही आकर राजयोग सिखलाते हैं। वह है निराकार ज्ञान का सागर, सुख का सागर… तुम जानते हो बाबा से हमको वर्सा मिल रहा है। जरूर हमारे पुरुषार्थ की देरी है। जितना जो पुरुषार्थ करेंगे, जितना रास्ता बतायेंगे। बाप कहते हैं – मुझ बाप को याद करो तो तुम पतित से पावन बन पावन दुनिया के मालिक बन जायेंगे, कितना सहज है। लौकिक माँ बाप ज्ञान में अगर हैं तो बच्चों को भी आप समान बनाना पड़े। मां बाप सच्ची कमाई करते हैं तो बच्चों को सच्ची कमाई करानी चाहिए। कोई-कोई बच्चे अच्छे होते हैं। कहते हैं हम रूहानी पढ़ाई पढ़कर घर-घर में यह पैगाम देते रहेंगे। बाप भी कहते हैं कि पैगम्बर और मैसेन्जर मैं हूँ, तुमको मैसेज देता हूँ कि घर चलो और धर्म स्थापक तो सिर्फ आकर अपना-अपना धर्म स्थापन करते हैं। मैं सबको मैसेज देता हूँ कि अब वापिस चलना है। यह दुनिया अब रहने के लायक नहीं है। मुझे याद करो तो पावन बन जायेंगे। तुम पावन थे फिर रावण ने पतित बनाया है। मैं फिर पावन बनाने आया हूँ। थोड़े समय में ही यह बाम्बस आदि चलेंगे तो समझेंगे यह वही महाभारत लड़ाई है। तो जरूर भगवान भी होगा। परन्तु वह समझते हैं गीता का भगवान श्रीकृष्ण है। कितनी मूँझ है। मूँझे नहीं होते तो भगवान को आने की क्या दरकार। भक्ति मार्ग को भूल-भुलैया का खेल कहा जाता है। अब बाप कहते हैं मुझे याद करने से सब भूलें खत्म हो जायेंगी। आगे अपने को देह समझते थे। अब अपने को देही समझते हो। यह सावधानी बाप ही देते हैं कि बच्चों देही-अभिमानी बनो। यहाँ तुम बाप के सम्मुख बैठे हो। वहाँ सेन्टर्स पर बच्चियाँ बैठ समझायेंगी कि शिवबाबा ऐसे कहते हैं। यहाँ तो डायरेक्ट बाप कहते हैं मैं आत्माओं से बैठ बात करता हूँ। तुम बच्चे जानते हो बाबा इन द्वारा हमको समझा रहे हैं। यह बड़ा कल्याणकारी मेला है। बाप कहते हैं निरन्तर मुझे याद करो। बाबा से हमको स्वर्ग का वर्सा लेना है। बाप और स्वर्ग को याद करना है। कोई भी विकर्म नहीं करना है। अगर विकर्म करेंगे तो सौगुणा बन जायेगा। विकर्म कराने वाली है माया, उस पर जीत पानी है इसलिए हनुमान महावीर की कथा है। तुम हनुमान महावीर हो ना। हम तो बाबा के बन गये। माया से हार नहीं सकते। तो बाबा को याद करते-करते सतोप्रधान, विकर्माजीत बन जायेंगे। नहीं बनेंगे तो अपना पद भ्रष्ट करेंगे। पुरुषार्थी बच्चे जो होते हैं वह अपनी जीवन पर तरस खाते हैं। कुछ भी हो जाए, याद की यात्रा में रहेंगे, अचल-अडोल-स्थिर रहेंगे। विनाश तो होना ही है। सबके काका, चाचा, मामा, गुरू, गोसाई आदि सब खत्म हो जाते हैं। सतगुरू कहते हैं मैं तुमको साथ ले जाने वाला हूँ। मनुष्य तो बिल्कुल अन्धियारे में है, तुम जानते हो शिवबाबा हमको साथ ले जायेंगे। कहते हैं ना – काल खा गया। परन्तु मैं तो तुमको शान्तिधाम में ले जाता हूँ। आत्मा शरीर छोड़ चली जाती है। काल नहीं ले जाते हैं, आत्मा को निकलना होता है। अब तो मैं खुद आया हूँ – तुमको वापिस ले जाने। बाबा कोई मारने आया है क्या? नहीं। तुमको पुराना शरीर छोड़ना है। आत्मा तमोप्रधान से सतोप्रधान होनी है। अब 5 तत्व भी तमोप्रधान हैं, इसलिए शरीर भी ऐसे बनते हैं। वहाँ सतोप्रधान तत्वों से तुम्हारे शरीर भी गोरे बनेंगे।

बाप कहते हैं मैं फिर से सतयुगी आदि सनातन देवी-देवता धर्म स्थापन करता हूँ। तुमने ही 84 जन्म भोगे हैं। तुम अपने धर्म को भूल गये हो और कोई अपने धर्म को भूले नहीं हैं। तुम अभी जानते हो हम असुल में देवी-देवता धर्म वाले इतने ऊंच से फिर नीच कैसे बने हैं। बाप बैठ कल्प-कल्प तुमको ही समझाते हैं। तुम फिर औरों को समझाते रहेंगे। अब 84 का चक्र पूरा होता है, विनाश सामने खड़ा है। स्वर्ग का मालिक बनने के लिए अपने को लायक बनाना है। वह बनना है याद से। सुबह को उठ बाबा को याद करो। बाबा वन्डर है – आप कैसे आते हो। कैसे आप सम्मुख बात कर रहे हो। वह है सुनी सुनाई भक्ति मार्ग की बातें। अब तो हम आत्माओं को आप बाप मिले हो, आत्मा को बाप मिलता है तो उस प्यार में आकर मिलते हैं। बच्चे बाप के साथ बहुत प्यार से मिलते हैं। यहाँ तो वह निराकार बाप है गुप्त इसलिए बाबा हमेशा कहते हैं इनसे मिलते हो तो शिवबाबा को याद कर मिलो। मनुष्य तो कुछ भी नहीं जानते हैं। तुम्हारे में भी जो कोई जानते हैं, मेरा बनकर फिर भूल जाते हैं। देह-अभिमान में आ जाते हैं। प्रतिज्ञा भी करते हैं – बाबा मैं आपका हो चुका हूँ। मेल, चाहे फीमेल, दोनों की आत्मा कहती है। परन्तु शरीर में है तो मेल कहता है – आपका बन चुका हूँ। फिमेल कहेगी – मैं बन चुकी हूँ। बाबा हम आपसे पूरा वर्सा लेंगे। पूरा याद करेंगे। याद बिगर कट निकल नहीं सकती, तमोप्रधान से सतोप्रधान बन नहीं सकते। सतयुग में तुमको अखण्ड अटल, सुख-शान्ति, सम्पत्ति का 21 जन्म राज्य मिलता है। स्वर्ग का रचयिता बाप जरूर अपना वर्सा देंगे। गाते भी हैं परवाह है पार ब्रह्म में रहने वाले परमपिता परमात्मा की। वह तो एक ही बार आते हैं। यह भी समझने की बातें हैं ना। कई तो समझते ही नहीं, आगे चल आंख खुलेगी। थोड़ी बड़ी लड़ाई लगे। वास्तव में यह यज्ञ रचा हुआ है। लड़ाई भी है। इस यज्ञ का किसको पता ही नहीं है। रूद्र ज्ञान यज्ञ रचा ही था कि विनाश हो। वह फिर यज्ञ रचते हैं कि विनाश न हो, शान्ति हो जाए। यह यज्ञ फिर भी रचेंगे। उनको यह पता नहीं है कि विनाश होगा फिर क्या रहेगा? अभी तुम बच्चे सारे विश्व के आदि-मध्य-अन्त को जानते हो। सबकी बेहद की जन्म कहानी को जानते हो। ऐसे कोई नहीं, जो कहे कि परमपिता परमात्मा की हम जीवन कहानी बताते हैं। परमात्मा को ही सब बुलाते हैं ना। घड़ी-घड़ी याद करते हैं। कहते हैं ना – भगवान ने यह बच्चा दिया, यह किया। कोई-कोई यह समझते हैं – जिसकी वस्तु थी, उसने ले ली। ऐसे भी कोई समझदार पुरुष होते हैं। अनेक प्रकार के मनुष्य हैं। अब तुमको बाप मिला है तो बाप को ही याद करना है। याद से ही कमाई होती है। तुम विष्णुपुरी के मालिक बन जायेंगे। तुम सतयुग से लेकर कलियुग अन्त तक सारे चक्र को जानते हो। तुम्हारी बुद्धि में हूबहू ऐसा है, जैसे बाप की बुद्धि में है इसलिए उनको ज्ञान का सागर, नॉलेजफुल कहा जाता है। अभी तुम बाप से वर्सा ले रहे हो। तुम बच्चों को अचल स्थिर रहना चाहिए। ऐसे नहीं कि माया घड़ी-घड़ी आकर डोलायमान करे। शर्मबूटी (छुईमुई) नहीं बनना चाहिए। बाप को याद नहीं करने से मुरझा जाते हैं। बाप को याद करने का पुरुषार्थ तुम कर रहे हो। समय नजदीक आयेगा, फिर तुम देखेंगे हमारा पुरुषार्थ अब पूरा हुआ। अन्त आ गई। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) रूहानी पढ़ाई पढ़कर सच्ची कमाई करनी और करानी है। घर चलने का मैसेज सबको देना है। अब कोई भी विकर्म नहीं करना है।

2) सवेरे उठकर प्यार से बाप को याद करना है। छोटी-मोटी बातों में छुईमुई नहीं बनना है। अवस्था को अचल-अडोल बनाना है।

वरदान:- नॉलेज की लाइट-माइट द्वारा अपने लक को जगाने वाले सदा सफलतामूर्त भव
जो बच्चे नॉलेज की लाइट और माइट से आदि-मध्य-अन्त को जानकर पुरुषार्थ करते हैं, उन्हें सफलता अवश्य प्राप्त होती है। सफलता प्राप्त होना भी लक की निशानी है। नॉलेजफुल बनना ही लक को जगाने का साधन है। नॉलेज सिर्फ रचयिता और रचना की नहीं लेकिन नॉलेजफुल अर्थात् हर संकल्प, हर शब्द और हर कर्म में ज्ञान स्वरूप हो तब सफलतामूर्त बनेंगे। अगर पुरुषार्थ सही होते भी सफलता नहीं दिखाई देती है तो यही समझना चाहिए कि यह असफलता नहीं, परिपक्वता का साधन है।
स्लोगन:- न्यारे बनकर कर्मेन्द्रियों से कर्म कराओ तो कर्मातीत स्थिति का अनुभव सहज कर सकेंगे।

 

ये अव्यक्त इशारे – ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

जब योग में बैठते हो तो समाने की शक्ति सेकण्ड में यूज़ करो। सेवा के संकल्प भी समा जाएं इतनी शक्ति हो जो स्टॉप कहा और स्टॉप हो जाए। फुल ब्रेक लगे, ढीली ब्रेक नहीं। अगर एक सेकण्ड के बजाए ज्यादा समय लग जाता है तो समाने की शक्ति कमजोर कहंगे।

प्रश्न 1: आज की मुरली में बाप बच्चों को क्या विशेष शिक्षा देते हैं?

उत्तर: अब सुनी-सुनाई बातों पर नहीं, बल्कि शिवबाबा से डायरेक्ट ज्ञान लेकर स्वयं नॉलेजफुल बनना है।


प्रश्न 2: अच्छे पुरुषार्थी बच्चों की मुख्य निशानी क्या है?

उत्तर: वे मदर-फादर को पूरा-पूरा फॉलो करते हैं, अपनी जीवन पर तरस खाते हैं, बाबा की याद में बैठते हैं तथा अचल, अडोल और स्थिर अवस्था में रहते हैं।


प्रश्न 3: अच्छे पुरुषार्थी बच्चों की अवस्था का गायन किस रूप में किया गया है?

उत्तर: अचल, अडोल और स्थिर। ऐसे बच्चों को ही महावीर कहा जाता है।


प्रश्न 4: शिवबाबा को याद करने से क्या लाभ होता है?

उत्तर: आत्मा सतोप्रधान बनती है, विकर्म नष्ट होते हैं और स्वर्ग का अधिकारी बनने का मार्ग खुलता है।


प्रश्न 5: बाप बच्चों को कौन-सा सहज पुरुषार्थ बताते हैं?

उत्तर: “मुझे याद करो”—याद की यात्रा द्वारा आत्मा पावन बन जाती है।


प्रश्न 6: भगवान इस समय कौन-सी पढ़ाई पढ़ा रहे हैं?

उत्तर: ऐसी रूहानी पढ़ाई जिससे 21 जन्मों के लिए स्वर्ग का वर्सा प्राप्त होता है।


प्रश्न 7: बच्चों को किसका फॉलो करना है?

उत्तर: शिवबाबा द्वारा बताए गए मदर और फादर (ब्रह्मा बाबा) का पूरा-पूरा फॉलो करना है।


प्रश्न 8: बाप सब आत्माओं को कौन-सा संदेश देते हैं?

उत्तर: अब घर वापस चलना है, इसलिए शिवबाबा को याद कर पावन बनो।


प्रश्न 9: देही-अभिमानी बनने का क्या अर्थ है?

उत्तर: स्वयं को शरीर नहीं, आत्मा समझकर शिवबाबा को याद करना।


प्रश्न 10: महावीर कौन कहलाते हैं?

उत्तर: जो माया पर विजय प्राप्त कर अचल-अडोल रहकर निरंतर बाबा की याद में रहते हैं।


प्रश्न 11: सच्ची कमाई क्या है?

उत्तर: रूहानी पढ़ाई पढ़कर स्वयं भी कमाई करना और दूसरों को भी ईश्वरीय ज्ञान देकर सच्ची कमाई कराना।


प्रश्न 12: सुबह उठकर क्या अभ्यास करना चाहिए?

उत्तर: प्रेम से शिवबाबा को याद करना और दिन की शुरुआत योग से करनी चाहिए।


प्रश्न 13: माया से बचने का सबसे श्रेष्ठ उपाय क्या है?

उत्तर: निरंतर शिवबाबा की याद और श्रीमत पर चलना।


प्रश्न 14: सफलता का आधार क्या है?

उत्तर: नॉलेज की लाइट और माइट के आधार पर सही पुरुषार्थ करना।


प्रश्न 15: यदि सफलता दिखाई न दे तो क्या समझना चाहिए?

उत्तर: वह असफलता नहीं, बल्कि परिपक्वता का साधन है।


प्रश्न 16: कर्मातीत स्थिति का अनुभव कैसे होगा?

उत्तर: न्यारे बनकर कर्मेन्द्रियों से कर्म कराने पर।


प्रश्न 17: योग में बैठते समय कौन-सी शक्ति का अभ्यास करना है?

उत्तर: समाने की शक्ति और “फुल ब्रेक” का अभ्यास, जिससे एक सेकण्ड में मन स्थिर हो जाए।


प्रश्न 18: बाप को याद करने का अंतिम फल क्या है?

उत्तर: आत्मा सतोप्रधान बनकर 21 जन्मों के लिए सुख, शांति और सम्पत्ति से भरपूर स्वर्ग का अधिकारी बनती है।


 मुख्य रिवीजन (One-Line Points)

  • डायरेक्ट शिवबाबा से ज्ञान लेकर नॉलेजफुल बनो।
  • मदर-फादर को पूरा फॉलो करो।
  • अचल, अडोल और स्थिर अवस्था ही महावीर की पहचान है।
  • याद की यात्रा से आत्मा पावन बनती है।
  • सुबह प्रेम से बाबा को याद करो।
  • सच्ची कमाई स्वयं भी करो और दूसरों को भी कराओ।
  • नॉलेज की लाइट और माइट सफलता की कुंजी है।
  • न्यारे बनकर कर्म करो, कर्मातीत स्थिति का अनुभव करो।
  • 21-07-2026 मुरली, प्रातः मुरली, बापदादा, शिवबाबा, ब्रह्माकुमारी, बीके, बीके मुरली, डेली मुरली, ओम शांति, राजयोग, मधुबन, मुरली क्लास, ईश्वरीय ज्ञान, आध्यात्मिक ज्ञान, आत्म चेतना, देही अभिमानी, पुरुषार्थ, अचल अडोल, महावीर, बाबा की याद, योग, ज्ञान, स्वर्ग का वर्ष, ज्ञान, ध्यान, शांति, खुशी, दिव्य जीवन, बीके हिंदी, ब्रह्मा कुमारीज, मुरली पॉइंट्स, राजयोग ध्यान, आत्म परिवर्तन, ईश्वरीय अध्ययन, आध्यात्मिक जीवन, डेली ज्ञान, आज की मुरली, शिव बाबा, ओम शांति मुरली,21-07-2026 Murli, प्रातः मुरली, बापदादा, शिवबाबा, ब्रह्माकुमारी, BK, BK Murli, Daily Murli, Om Shanti, Rajyoga, Madhuban, Murli Class, Godly Knowledge, Spiritual Knowledge, Soul Consciousness, Dehi Abhimani, Purusharth, Achal Adol, Mahavir, Baba Ki Yaad, Yoga, Gyan, Swarg Ka Varsa, Knowledge, Meditation, Peace, Happiness, Divine Life, BK Hindi, Brahma Kumaris, Murli Points, Rajyog Meditation, Self Transformation, Godly Study, Spiritual Life, Daily Gyan, Murli Today, Shiva Baba, Om Shanti Murli,